बेशर्मी की हद!

Thursday, July 14th, 2011

धर्म पथ :

बेशर्मी की हद!

मुंबई में फिर से जेहादी हमले हुए; २८ से अधिक भारतीयोने अपनी जान गवाँ दी – २० से ५० उम्र के ये लोग घर के कमाने वाले हाथ थे – बूढ़े माँ-पिता के, छोटे छोटे बच्चों के पालनकर्ता थे – ; ३० से अधिक लोग गंभीर घायल है – कोई हाथ, कोई पैर, कोई रीड की हड्डी कायम रूप में गवांकर कमाने में असमर्थ हो गए हैं – ऐसे में जिम्मेदार, संवेदनशील सरकारने क्या करना चाहिए? परिवारों को मिलकर माफ़ी मांगनी चाहिए कि उनकी रक्षा करनेमें असमर्थ रहें, उन्हें सांत्वना देना चाहिए. लेकिन इतनी बेशर्मी कि अपनी निकम्मेगिरी का ही समर्थन करने लगे हमारे विद्वान गृह मंत्री! इतना काफी नहीं था! हमले मुंबई में हुए और ओडिशा में जाकर राजपुत्र राहुलजी आकाशवाणी कर रहे है ऐसे आविर्भाव में चिकने चोपड़े चेहरे पर सिनेमा स्टाईल स्मित लाकर कह बैठे: अमेरिका पर भी हमले होते हैं! उन के सैनिकों पर अफघानिस्तान और ईराक में हमले होते ही है ना? फिर भारत में भी १-२ ऐसे हमले होते ही रहेंगे. हम ९९% उन्हें रोकेंगे, १ % हमले होंगे ही. ” भारत को अफघानिस्तान और ईराक के स्तर पर ला खड़ा कर दिया और भारत के यह भविष्य के प्रधान मंत्री? मरे हुए लोग जीते जागते जीव थे, उन के पीछे रोते माँ-पिता, पत्नी- बच्चे भी जीते जागते जीव हैं, कोई मशीन नहीं जो उन के मुँह पर ऐसे परसेंटेज के आंकड़े फेंके! भारत को ईराक, अफघानिस्तान ही बनाना था इन को? यही तो एजेंडा है जेहादियों का कि भारत को दारुल इस्लाम बनाए और राजपुत्र भी उन के एजेंडे को भारत पर थोंप रहे हैं? शर्म नहीं आती भारत कि तुलना ऐसे देशों से करने में जहाँ से हिंदुओं को, बौद्धों को मार कर खदेड़ा गया और इस्लाम का क़ानून कायम किया गया? अफघानिस्तान के जेहादी थपेड़े में घर बार छोड़कर आये कई लोग आज भारत में हैं, उन्हें पूछे राहुल बाबा कि तब क्या था, अब क्या है! और अब भारत को भी जेहादियों के हाथ दे रहे? मुंबई को ९/११ के बाद का सुरक्षित न्यूयोर्क बनाने का सपना नहीं, उस के लिए मेहनत नहीं; मुंबई को काबुल – कंधार बनाने निकले यह कहकर कि ऐसे १-२ हमले होते ही रहेंगे? क्या यही इन के पक्ष का चुनावी घोषणा पत्र है? होगा ही! क्यों कि आज कल बच्चा बोले, दल हाले! बच्चा के भोंकने वाले, जो भारत के मध्य वर्ती राज्य में चुनाव हारकर लम्बा शासन खो चुके हैं, वे दिग- पराजय सिंग तो बस इसी में लगे रहते हैं कि किसी तरह भारत में होने वाली हर आपदा और हर हमले के लिए हिंदुओं को, साधू-संतों को और हिंदू संघटनों को ही जिम्मेदार बनाया जाय और जेल भेजा जाय! आझम गड़ जायेंगे, जेहादियों के परिवारों के आंसू पोंचेंगे, पोलिस ने उन के जेहादी बेटे का ‘फेक एन्काउन्टर’ किया कहेंगे, यह भी बार बार कहेंगे कि हिंदुओं को जेल भेजने के बाद ६ महीने में भारत में आतंकी हमले नहीं हुए! राहुल बाबा के यह सिपाह-सलार मानते ही नहीं कि वाराणसी भारत में है – वाराणसी का धमाका, उसमे मारी गयी काशी विश्वनाथ के पुजारी कि मासूम २ वर्ष के बेटी और २० घायल उन्हें नहीं दिखते? उन के लिए तो अब मुंबई भी भारत में नहीं आता होगा! शायद ईराक में या अफघानिस्तान में आता होगा! दिल्ली, बेगालुरु, जयपुर, पुणे, ऐसी अनेक जगहे भी दे दी अफघानिस्तान को? बेशर्मी की हद देखिये- विद्वान गृहमंत्री रात को मुंबई गए और सुबह मीडिया से बात करने में डेढ़ घंटा बिताया. साथ में राज्य के मुख्य मंत्री, गृहमंत्री, उप मुख्य मंत्री, पोलिस के प्रमुख सब को लेकर बैठे मीडिया से बात करने. कहा तो क्या कहा? ‘हमारे पास कोई खुफिया जानकारी नहीं थी कि यह हमला होगा.’ अपने निकम्मेगिरी का मीडिया में विज्ञापन दे रहे थे या समर्थन? उन्होंने भी देश के मुह पर केवल आंकड़े फेंके – २३ मरे, २३ गंभीर घायल, २०० घायल, ३१ महीने के बाद मुंबई पर फिर से हमला हुआ. मीडिया ने कुछ अधिक पूछना चाहा तो मीडिया को डांटा! गए तो गए, साथ में एन.आय. ए. कि टीम को लेकर गए जिन्होंने जब से गठन हुआ, केवल हिंदुओं को, संतों को और हिंदू संघटनों के लोगों को ही जेल भेजने का काम किया है. कहाँ थे एन.आय.ए. के लोग जब मुंबई की सच में समर्थ पोलिस राष्ट्रीय खुफिया जानकारी चाहती थी? हिंदुओं को झूठी ‘केसों’ में ‘फिट’ कराने में एन.आय. ए. लगी थी और है. इसी एजेंडा के तहत ‘पोटा’ हटाकर एन. आय. ए. का गठन हुआ. कौन हैं उसमे? काश्मीर के कट्टर हिंदू विरोधी ऑफिसर, दुसरे अल्पसंख्य हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश की उस महिला पोलिस ऑफिसर से विवाह किया जिन्होंने राम मंदिर – बाबरी केस में हिंदुओं के विरुद्ध जान बूझकर कोर्ट में स्टेटमेंट दिया था. ऐसे लोग भारत के बहुसंख्यों को क्या न्याय देंगे? संतों पर, हिंदू संघटनों के लोगों पर मार पीट कर दबाव में अनेक लोगों को फंसाने में ये लगे हैं, उन्हें मुंबई ले ही क्यों गए भारत के गृहमंत्री? मुंबई के, महाराष्ट्र के पोलिस पर भरोसा नहीं या उनके अपने ही पक्ष / साथियों के सरकार पर भरोसा नहीं? ये एन.आय. ए. वाले और कुछ ए.टी.एस. वाले कुल १०-१२ लोग २ सप्ताह पहले नागपूर जाकर हिंदू संघटनों के वृद्ध लोगों को – जो बेचारे ऑफिस में बैठे थे – धमकाकर आये हैं! इतना संख्याबल और इतना समय अगर मुंबई को और देश को जेहादियों से कैसे बचाया जाय इसपर लगाते, तो कई हमले रुक भी सकते थे! लेकिन उन्हें तो केवल हिंदुओं को द्वेष से जेल भेजना है! हिंदुओं को जेल भेजने के लिए अब नया क़ानून भी बना रहे हैं यही लोग जिस विषय में फिर विस्तार से लिखूंगा.

मुंबई में जहाँ धमाके हुए वे तीनो स्थान मुंबई के आर्थिक स्थान हैं – झवेरी बझार में हीरे – जवाहरात और सोने-चांदी की करोड़ों की उलाढाल रोज होती हैं; ओपेरा हाउस क्षेत्र में सोना-चांदी, हीरे के अलावा कपडा व अन्य व्यवसायों की लेन -देन करोड़ों में होती हैं; दादर के कबूतरखाना परिसर में छोटे दुकानदार, सब्झियाँ आदि का व्यवसाय चलता है और वहाँ आम आदमी ट्रेन से उतरकर बसें लेने रुकता है. इन सभी व्यवसायों से सरकार को करोड़ों की आमदनी करोंमें होती है; नोकरी-पेशा के लोग भी करोडो रुपये करों के रूप में दे रहे हैं. विदेशों में ख्यात हमारे देश के हीरे जैसे व्यवसायों से कर चाहिए; लेकिन उन को सुरक्षा नहीं देंगे? सरकारों का जिम्मा है – वह पूरा करने की बजाय गृहमंत्री कहते हैं की जहाँ ये लोग चाय-नाश्ता खाते हैं ऐसी खाऊ गली – जो मुंबई का लेण्डमार्क है – वह संकरी है, सामने मुंबई का प्राचीन मंदिर है, कैसी सुरक्षा देंगे! कहते हैं, दादर में भीड़ है, कैसी सुरक्षा देंगे! सी सी टी वी केमरे लगे हैं वे क्या धमाकों के बाद फिल्म या डोक्युमेंट्री बनाने के लिए? धमाके के पहले उनपर ध्यान देना, उन का विश्लेषण करना सरकार का काम नहीं? इस की जगह, गृहमंत्री राज्य सरकार की और मुख्य मंत्री केंद्र सरकार की स्तुति करते डेढ़ घंटा मीडिया के सामने बकबक कर रहे थे! पोलिस अपना काम ठीक करती हैं अगर उन के काम में इन बेशर्म राजनेताओं की दखलअंदाजी ना हो! फिर भी ये निकम्मे नेता उटपटांग बातें कहते रहते हैं और निष्पाप लोग मरते रहते हैं! इसे बेशर्मी की हद नहीं तो क्या कहें!

बेशर्मी इन सरकारों की इतनी की अब तक २६/११ मुंबई हमला या ५ वर्ष पहले हुआ मुंबई रेल धमाके या वाराणसी धमाका इन में या तो कोई तपास नहीं, या कसाब, अफजल जैसे बिरयानी खाकर मजे कर रहे है! किसी ने कहा मुंबई पर यह हमला हुआ वह कसाब का जन्म दिन था! २३ जीते जीवों को मार कर, २३ कायम रूप से अपाहिज बनाकर और बाकी सभी को सदमा देकर मनाया उस का जन्म दिन जेहादियोने और राहुल बाबा भारत को अफघानिस्तान, ईराक के स्तर पर ले जाता है, गृहमंत्री आंकड़े फेंकते है! कल भारत में भूक से और अधिक लोग मरेंगे तो यही राजपुत्र कहेगा, सोमालिया में तो रोज भूक से लोग मरते हैं! इन के आदर्श क्या है? भारत के प्रति सन्मान नहीं, भारत की सुरक्षा करना आता नहीं, तो छोड़ दे सत्ता ये सभी लोग और दे भारत सेना के और हिंदुओं के हाथ में. हिंदू निशस्त्र हैं; लेकिन कायर या मतों के भिखमंगे तो नहीं! हमारी माँए , बेटियाँ, बहने भी बेलन लेकर निकलेगी और पाक को मिटा देगी. आधी स्वयं का बलि देंगी लेकिन दुर्गा बनना उन्हें भी आता है! हमारा हर बच्चा सुदर्शन चक्र वाला कृष्ण बन सकता है. बेशर्मों की, निकम्मों की सुरक्षा – जो केवल जेहादियों के लिए ही उपलभ है – के भरोसे बैठे रहे तो सच में भारत का ईराक, अफघानिस्तान कर देंगे ये बेशर्म लोग! लोकतंत्र का तमाशा बनाकर भारत को विनाश की गर्त में डाल रहे है यही बेशर्म निकम्मे लोग. अभी भारत स्वयं को सम्हाले, वरना बहुत देर हो जायेगी!

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लेखक ख्यातसिद्ध केंसर सर्जन और विहिंप के आन्तरराष्ट्रीय महामंत्री हैं. संपर्क: drtogadia@gmail.com

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