चुनाव आयोग का आदेश-मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति पर जोरदार आघात
हिन्दी January 12th, 2012११ जनवरी,२०१२ की देर रात्री चुनाव आयोग नें चुनाव करवा रहे पांच राज्यों में मुस्लिम आरक्षण पर रोक लगाने का आदेश पारित कर देश में लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया है। चुनाव घोषित होने की पूर्व संध्या पर कान्ग्रेस ने पिछडे वर्ग के २७% कोटे में से मुस्लिम समाज के लिये ४.५% के आरक्षण की असंवैधानिक एवं देश विरोधी घोषणा की थी। उन्होंनें यह घोषणा ऐसे समय की थी
जब वे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप से बच सकें। उनकी इस चाल को समझते हुए विश्व हिन्दू परिषद का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधीमंडल २९ दिस. को चुनाव आयोग से मिला और कान्ग्रेस की इस दुष्टतापूर्ण शरारत का विरोध करते हुए उनके दायित्व और अधिकार की संवैधानिक स्थिती से उनको अवगत कराया। विहिप चुनाव आयोग की आभारी है कि उन्होंनें अपने अधिकारों को पहचाना और कान्ग्रेस की इस देश विरोधी कुटिल चाल पर रोक लगा दी। चुनाव आयोग के इस आदेश ने न केवल देश को एक अभूतपूर्व संकट से बचाया है अपितु इस आरक्षण को बढाने के आश्वासनों की बाढ पर भी रोक लगाई है। चुनाव आयोग ने वोटों को प्राप्त करने के लिये देश को साम्प्रदायिक विद्वेष की आग में झोंकने जा रहे सैक्युलर दलों की इस होड पर भी रोक लगाई है। इस महत्वपूर्ण कदम के लिये चुनाव आयोग को इतिहास में अविस्मरणीय स्थान प्राप्त होगा जिसके लिये वे अभिनन्दन के पात्र हैं। यह आदेश उन सभी सैक्युलर दलों के मुंह पर एक तमाचा है जो मुस्लिम समाज को केवल एक वोट बैंक समझते हैं। यह उन दलों के लिये एक स्वर्णिम अवसर है कि वे अपनी तुष्टीकरण की नीति पर पुनर्विचार करें। यह नीति संविधान और देश विरोधी है जिस का संकेत बार- बार इस देश की न्यायपालिका एवं अन्य संवैधानिक संस्थाएं दे रहीं हैं। संविधान एवं न्यायपालिका को धोखा देकर चोर रास्ते निकालने का विचार त्यागकर उन्हें देश के हित में विचार करना होगा क्योंकि अगर देश बचेगा तो वे भी बचेंगे। अन्यथा वे देश को पाकिस्तान या बंग्लादेश जैसी स्थिति में ला देंगे जो उनके भी हित में नहीं होगा।


February 10th, 2012 at 9:34 am
Corruption Ko Dur Bhagaaie Or Desh ko Chalane Ka Dawa Karne Wale Desh K Liye Kuch Kariye…. Hum nai Jante k kis tarah se Chalate He Desh … Paar Kum se Kum Apna apna Kam Imandari se To kaaar Sakte he na.. Akhir Uparjake Uparwale ko Apna Thibda Jo Dikhana he… “Insaan Kum se kum Insaan Ban ke rahe to achha he na”