जेहादी टीपू की जयंती नहीं होने देगे– बजरंग दल, कर्नाटक

Tuesday, October 25th, 2016

इस वर्ष पूरे देश में बजरंग दल के प्रांतीय अधिवेशन संपन्न हो रहे हैं| कुछ अधिवेशनों में मेरा भी जाना हुआ | दक्षिण कर्नाटक प्रान्त के अधिवेशन का समापन कार्यक्रम , त्रिशूल धारण कार्यक्रम और अधिवेशन की समाप्ति पर एक हिन्दू सम्मलेन को संबोधित करने का सौभाग्य मिला | मंगलुरु की पावन धरती पर आयोजित यह अधिवेशन बाकी अधिवेशनों से कई अर्थों में विशिष्ट रहा | कार्यकर्ताओं की निरंतर साधना ,समर्पण व् संघर्षशीलता के कारण आज मंगलुरु दक्षिण में हिन्दू नवोत्थान का केंद्र बन गया है | केरल की सीमा से लगे होने के कारण वहां के जेहादी यहाँ पर आते रहते हैं, यहाँ के मुस्लिम समाज को भड़काते हैं और उनकी सहायता से हिन्दू कार्यकर्ताओं पर प्राणघातक हमले करते हैं| इसीलिए केरल और तमिलनाडू के साथ कर्नाटक भी आतंकवादियो की नर्सरी बन चुका है | कर्नाटक से कई बार आतंकी और उनके सहायक पकडे जा चुके हैं| परन्तु भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों के कारण मंगलुरु विभाग जेहादियों का सशक्त केंद्र बन गया है | सेक्युलर माफिया के कारण इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को संरक्षण मिलता है | एक तथ्य आश्चर्यजनक है | कर्नाटक में मुस्लिम केवल १३% हैं| फिर भी वे हिन्दुओं पर हमला करने का साहस करते हैं| मंगलुरु में लगभग २५% हैं, इसलिए वहां हिम्मत ज्यादा हो जाती है | पिछले थोड़े समय में ही मंगलुरु विभाग में १५ हिन्दुओ की निर्मम हत्या की गयी है परन्तु दुर्भाग्य से सेक्युलर सरकारों के संरक्षण के कारण हत्यारे पकडे नहीं गए है | परन्तु यह तथ्य सबके लिये आश्चर्य और विश्लेषण का विषय है कि जहाँ हिन्दू अल्पसंख्या में है वहां तो वह पिटता ही है परन्तु जहाँ वह बहुसंख्या में है वहां क्यों पिटता है ? इस मानसिकता को समझना और इससे बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक है | मंगलुरु के हिन्दू इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और इससे निबटने की कार्ययोजना भी बना रहे हैं |

मंगलुरु में बजरंग दल का अधिवेशन इस दिशा में बहुत फलदायक रहा |” पलायन नहीं पराक्रम ” इस अधिवेशन का मूल बिन्दू रहा | युवाओं में पराक्रम का भाव निर्माण करने के लिए त्रिशूल धारण का कार्यक्रम भी रखा गया और देश,धर्म तथा समाज की रक्षा का संकल्प लिया गया | जिलों व् प्रखंडो की उपस्थिति उत्साहवर्धक रही | सभी प्रखंडो तक सशक्त इकाई बनाने की कार्ययोजना भी बनी |
अधिवेशन के अंत में जनसभा अनूठी रही | हजारों हिन्दुओ के हत्यारे , सैकड़ो मंदिरों को तोड़ने वाले और ५० हजार हिन्दुओ का जबरन धर्मान्तरण करने वाले टीपू की जयंती को मनाने का नशा वर्त्तमान सरकार को हो गया है | उस बर्बर जेहादी को मुस्लिम समाज के आदर्श के रूप में स्थापित किया जा रहा है | यह स्वाभाविक है कि मुस्लिम समाज उसी के मार्ग का अनुसरण करेगा | इस सभा में सभी वक्ताओं ने इस विषय पर प्रमुखता से बोला और टीपू की जयंती न मनाने देने का निर्णय किया गया | गत वर्ष भी संघर्ष हुआ था और एक कार्यकर्ता की जेहादियों ने हत्या भी कर दी थी | उस कार्यकर्ता का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देगे , यही संकल्प इस सभा का था | जिन १५ कार्यकर्ताओ की निर्मम हत्या जेहादियों ने की थी, उन सबके चित्र सभास्थल पर लगे थे | भाषण के लिए मेरा नाम पुकारने पर , मैं  पहले उन बलिदानियों के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने गया | सभा में उपस्थित हजारों श्रोता खड़े हो गए और अपनी नम आँखों से श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे | जयकारो के द्वारा इन हत्यारों को सबक सिखाने का संकल्प लिया गया | ” बलिदान हिन्दू को कमजोर नहीं करते अपितु उसके संकल्प की उर्जा को बढ़ाते हैं ” वहां साकार हो रहा था | वहां के समाचार पत्रों ने भी इन्ही दो विषयो को प्रमुखता से लिया | सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एक अनूठा मार्गदर्शन देने का सामर्थ्य इस कार्यक्रम में था |

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