सामाजिक बहिष्कार किस का करें?
- डॉ प्रवीण तोगड़िया
‘भारत से काश्मीर तोड़ो’ यह माँग लेकर केवल काश्मीर और पाकिस्तान के जेहादी ही नहीं, भारतमाता के रुपयों पर पलें, भारत के संविधान ने दिए हुए अधिकारों से कुछ भी बकनेवाले कुछ ऐसे भी लोग निकले हैं, जिन्हें भारत की उच्चतम शिक्षा प्रणाली से उच्च शिक्षा का लाभ मिला, कुछ वकील हैं, कुछ गिने चुने टीवी चेनलों के वामवादी पत्रकार, कुछ भारत की सेवा प्रणाली में प्रशिक्षण पाए पूर्व अधिकारी तो कुछ ऐसे ही! ये लोग खुद को उच्चशिक्षा विभूषित, देशप्रेमी, भारत के संविधान के प्रति निष्ठां रखनेवाले कहलाते हैं और एक आवाज में भारत से काश्मीर तोडना यह अजेंडा लेकर निकले हैं! भारत के संविधान ने काश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग माना है यह सत्य ये लोग इस चतुराई से भूल जाते हैं जिस चतुराई से बिल्ली भी जो उस का नहीं वह दूध चुराकर पिए! प्राणी को भी एक समझ होती है और जिस का खाएं उन के साथ द्रोह नहीं करते हैं! लेकिन जेहादियों के साथ, नक्षलियों के साथ बैठ कर सीखों को, सनातनियों को, काश्मीरी पंडितों को, जैनों को और अन्य सब को जो इन के विचारों से सहमत नहीं, बुरा भला कहने में ये लगे रहते हैं! भारत पर गत कई वर्षों में अनेक जेहादी हमले हुए, दिल्ली दहली, जिस संसद में ये कुछ देश के लिए उपयुक्त क़ानून पारित कराने की बातें करते हैं उस संसद पर भी जेहादी हमला हुआ, मुंबई, बेंगलुरू, काशी और अन्य कई स्थानों पर जेहादी हमले हुए, हजारों निर्दोष भारतीयों के प्राण गएँ, कई जन्म भर के लिए अपाहिज हुए, कई परिवार अब भी सदमे से नहीं उभरें लेकिन इन जेहादी-मित्रोने कभी इन हमलों का धिक्कार नहीं किया! तब इनकी पटर पटर करने वाली वाणी मौन होती है जब देश पर जिहादी या नक्षाली हमले होते हैं, हमारे पोलिस, शूर जवान आये गए दिन काश्मीर, आसाम और अन्य स्थानों पर मर रहे हैं. लेकिन काश्मीर के एक ही मजहब के लोगों का देश से टूटना इन को दिखता है! १९४७ में पाकिस्तान से, संपूर्ण अखंड काश्मीर से और १९९० में काश्मीर से खदेड़े गए हिंदुओं के, सीखों के आँसू; उन की बहु बेटियों की चीखें इन के लिए कोई मायने नहीं रखती और ये खुद की देशभक्ति की दुहाई देते हैं? कौनसे देशभक्ति? जी देश का अविभाज्य अंग देश से तोड़कर फेंक देना सिखा रही है? उपर से इन की मगरुरी यह की गत कई वर्षों से जो काश्मीर भारत से अलग करने का षड्यंत्र चला रहे हैं, उन के प्रति भारत के युवाओं का आक्रोश एक थप्पड़ से व्यक्त होता है तो ये लोग उन्हें देशद्रोही करार देकर देश बाहर करने की, उन का सामाजिक बहिष्कार करने की बातें करने लगें? हिंसा का समर्थन कोई सज्जन व्यक्ति नहीं करेगा – ये देश तोड़ने निकले लोग हमें भले ही सज्जन ना माने, लेकिन आज भारत की बहुसंख्य जनता भारत से काश्मीर तोड़ने की बात करने वाले को दुर्जन और देशद्रोही ही मानती है! इन्हें काश्मीर के जेहादियों का दुःख दिखता है – कौनसा दुःख? १९९० में काश्मिरी पंडितों को और सीखों को मारा, खदेड़ा, उन की जमीनें , घर, बहु बेटियाँ छीनी, बेटियों की छाती पर लिखा ‘हिन्दुओ, सीखों – काश्मीर छोडो’ ये सारी बातें इन्हें नहीं दिखी? दिखती है, लेकिन काश्मीर तोड़कर भारत का अंग अलग करने का महा-षड्यंत्र इन्हें अधिक भाता है! उपर से उस का ये समर्थन भी करते हैं की ऐसा नहीं करेंगे, काश्मीर से सेना नहीं हटायेंगे तो काश्मीर का अफघानिस्तान हो जाएगा! इतनी बड़ी धमकी समूचे भारत को ये देते हैं, क्या यह भारत के समाजमन और भारत का संविधान इन के प्रति की गयी मानसिक और राजनीतिक हिंसा नहीं? हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती! अब ये जरुर कहेंगे कि तोगड़िया हमें अहिंसा ना सिखाये – सिखाऊंगा! अगर अहिंसा और देशप्रेम का ढकोसला देकर, सज्जन और देश की सीमा पर लड़े शूर वृद्ध सत्याग्रही के पीछे छुप कर (शायद उन की भी इसे सम्मति नहीं होगी कि काश्मीर भारत से तोडा जाय!) ये देश की अखंडता पर शाब्दिक, कार्यिक, मानसिक, राजनीतिक वार करेंगे तो तोगड़िया ही नहीं संपूर्ण भारत इन्हें सच्ची अहिंसा सिखाएगा और समूचे भारत को आवाहन करेगा कि जो भी काश्मीर को भारत से तोड़ने की बात करेंगे, इस बात पर असहमति जतानेवालों को ‘देश बाहर करो, उन का सामाजिक बहिष्कार करो’ ऐसी देशद्रोही, भड़काऊ बयानबाजी करेंगे, उन का ही सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अन्य सभी प्रकार का बहिष्कार भारत का हर व्यक्ति करे जो यह मानता है कि काश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है और किसी भी हालत में उसे तोडना नहीं चाहिए! मेरे इस आवाहन को तोड़ मरोड़कर पेश करने की होड़ अब लगेगी, कुछ अति ‘सेकुलर’ यह भी कहेंगे कि उन ३ युवाओं ने उच्चतम न्यायालय में घुसकर जो किए उस हिंसा का तोगड़िया समर्थन कर्ता है – मैंने पहले भी कहा कि किसी भी हिंसा का – फिर वह शारीर हिंसा हो या सामाजिक, मानसिक हिंसा हो – मैं या भारत का कोई भी सज्जन सुसंस्कृत व्यक्ति समर्थन नहीं करता; लेकिन ये काश्मीर तोड़ने पर तुलें लोग हमारे ही देश के संविधान का दुरुपयोग हमारे ही विरुद्ध करने लगे, तो भारत इन का अवश्य सामाजिक, राजनीतिक बहिष्कार करेगा! ना इनसे रोटी-बेटी सम्बन्ध रखेगा ना इन्हें अपना मानेगा!भारत के सुविद्य और धार्मिक नागरिक इन पर हाथ ना उठायें, क्यों कि यह हमारी संस्कृति नहीं. मनुष्य को भगवान् ने बनाया है और मनुष्य के पापों के लिए उसे दंड देना केवल भगवान् ही कर सकते हैं, खुद को भगवान् समझकर – कितना भी आक्रोश हो, क्रोध हो, दुःख हो – किसी को दंड देने का काम मनुष्य ना करें! इन्हें भगवान् अवश्य सबक सिखायेंगे जो काश्मीरी पंडितों, सीखों के दुःख का मजाक उड़ाते हैं और उन को ही देश बाहर करने कि बातें करते हैं! हमें लगा था कि देश से भ्रष्टाचार का निर्मूलन करने निकले हैं तो देशभक्त होंगें, लेकिन उनमें ऐसे कुछ देश तोड़ने निकले हुए भी दिखें! सभी नहीं, लेकिन कुछ तो हैं! सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक बहिष्कार क्या होता है यह अब भारत उन्हें संपूर्ण लोकतांत्रिक, अहिंसात्मक रीति से दिखायेगा ! भारत का युवा साथ देता है देशप्रेम के लिए, वही देशप्रेम त्याग कर देश तोड़ने निकले तो यही युवा शांतिपूर्ण बहिष्कार करना भी जानता है! सरकार हो या ऐसे कई भारतीय ‘डॉ फाई’ हो या यासीन मलिक के अलग अवतार हो, कोई भी काश्मीर भारत से तोड़ने की बात भी ना करे या भारत का अफघानिस्तान हो जाएगा यह देशद्रोही धमकियाँ भी ना दें! सीमाओं पर तैनात हमारी सेना जानती है कि वे किन हालातों का सामना करते हैं, वे देश की रक्षा करना भी जानते हैं – उन का मनोबल ऐसी उटपटांग बातों से गिराने का प्रयास भी कोई ना करें! अब आखरी प्रश्न यह कि थप्पड़ मारी तो हिंसक हिंसक कहकर ३ युवाओं को कुछ मीडिया ने लताड़, उन ३ पर तो कानूनी कारवाही हुई – ठीक भी है – लेकिन क़ानून कारवाही या रिपोर्टिंग या चर्चाएँ एकांगी क्यों? भारत से तोड़कर काश्मीर अलग किया जाय, भारत का अफघानिस्तान होगा, काश्मीरी पंडितों को देश बाहर किया जाय ऐसी भड़काऊ देशद्रोही धमकियाँ देने के लिए इन जेहादी-मित्रों पर सरकार ने क्या कानूनी कारवाही की? नहीं की तो भारत यह भी जानता है कि ऐसी सरकार में बैठी पार्टियों का भी राजनीतिक बहिष्कार कैसे किया जाता है! काश्मीर भारत से तोड़ने का समर्थन करने वाले ये लोग जिन संघटनों और आंदोलनों से जुड़े हैं – वे और उन के मंच पर भाषण देकर मीडिया में हीरो बनें सभी लोग भारत को स्पष्ट करें कि काश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है यह संवैधानिक, सांस्कृतिक सत्य वे मानते हैं या उनके सहयोगी का कहा मानते हैं जो काश्मीर भारत से तोड़ने की बात करते हैं!
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