श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक ,गुवाहाटी (असम)

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक ,गुवाहाटी (असम)

गुवाहाटी, दिनांक- 26 जुलाई, 2013

विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय प्रबंध समिति की बैठक आज हरियाणा भवन, नारायण नगर, कुमारपाडा गुवाहाटी में आरम्भ हुई। बैठक के प्रारम्भ में विहिप असम की मातृशक्ति की कार्यकर्ता बहिनों ने देश भर से आए हुए प्रतिनिधियों को तिलक लगाकर, पुष्पहार एवं असमीयां एवं बोडो गामुक्षा (उत्तरीय) पहनाकर स्वागत किया।

बैठक का उद्घाटन विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक एवं मार्गदर्शक माननीय श्री अशोक सिंहल द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। बैठक में देश के कोने-कोने से आये हुए पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए श्री सिंहल ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद का संगठन सम्पूर्ण ईकाई के रूप में संगठित होकर अपने उद्देश्यों के प्रति समर्पित भाव से काम करेगा, जिन उद्देश्यों के लिए विहिप की स्थापना हुई है उन्हें प्राप्त करने में हम सफल हो, परमात्मा हमें वह शक्ति दे, जिससे कि हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

बैठक में आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए स्वागत समिति के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक श्री तरणिकान्त शर्मा ने कहा कि जगत् जननी माँ कामख्या की धरती पर आप सभी का स्वागत है। असम की रचना स्वयं ब्रह्मा ने की, कुमार भास्कर भगवान ने इसको बसाया। मुगल शासकों द्वारा कई बार प्रयास करने के बाद भी असम जीता नहीं जा सका। हम युगों-युगों से हिन्दुस्तान से जुड़े हैं, हम उस देश के वासी है जिस देश में गंगा बहती है। जिस राजनीतिक व्यवस्था ने हमें सब प्रकार की समस्याओं में ढकेल दिया है उस गंदी राजनीतिक व्यवस्था को हमें समाप्त करना ही होगा। श्री शर्मा ने कार्यकर्ताओं को नारा देते हुए कहा – ‘‘कश्मीर हो या कन्या कुमारी, नागभूमि हो कच्छ एक खून एक माटी’’

असम क्षेत्र के कार्यकर्ताओं द्वारा बैठक के आयोजन हेतु साधुवाद देते हुए विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष डॉ0 प्रवीणभाई तोगड़िया ने कहा कि ‘‘विश्व हिन्दू परिषद का यह सौभाग्य है कि हमारी यह बैठक भगवान परशुराम की तपस्थली एवं शक्तिपीठ माँ कामाख्या के साथ-साथ विराजमान दस महाविद्यायों के क्षेत्र में हो रही है। असम देश का एकमात्र राज्य है जहां कभी मुगल शासन नहीं रहा। इसका श्रेय लाचित बरफूकन जैसे वीरों को जाता है। श्रीमद्शंकरदेव की परम्परा ने समाज में बड़ा जागरण किया है। विश्व हिन्दू परिषद उसी परम्परा का वाहक है। 2014 स्वर्ण जयन्ती वर्ष में हम संगठन को और अधिक मजबूत करें, श्रीराम मंदिर का निर्माण तो हो ही, रामराज्य का स्वप्न भी पूरा हो।’’

असम के सत्राधिकार पू0श्री भद्रकृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने अपना आशीर्वाद देते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि भारत का इतिहास दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, यह इतिहास हमें ताकत देता है, असम भारत का अभिन्न अंग है जिसे कई ताकतें अलग करना चाहती है, विश्व हिन्दू परिषद के कारण वह सफल नहीं हो सके हैं। आगे भी हिन्दू संगठन की शक्ति को हमें और बढ़ाना है जिससे कि धर्मान्तरण को पूरी तरह से रोका जा सके। हमंे शीघ्र ही श्रीराम मंदिर का निर्माण करना होगा। हिन्दू हिन्दू में सभी प्रकार का भेद-भाव समाप्त करके हम आगे बढ़े। ऐसी कामना प्रभु श्रीरामजी से करता हूं।

द्वितीय सत्र में श्रीराम जन्मभूमि के संदर्भ में प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव के संबंध में बोलते हुए परिषद के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री श्री चम्पतराय ने प्रयाग महाकुम्भ के अवसर पर पूज्य संतों के द्वारा लिए गए निर्णय एवं जून मास में हरिद्वार में हुई मार्गदर्शक मण्डल की बैठक में निश्चित की गयी योजना के संबंध में विस्तार से बताया। श्री चम्पतराय ने कहा कि संतों का यह निर्णय अयोध्या में आज रामलला विराजमान है वहीं श्रीराम जन्मभूमि का भव्य मंदिर का निर्माण होगा, अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में किसी भी प्रकार कोई इस्लामिक स्मारक या मस्जिद स्वीकार नहीं होगा और बाबर के नाम पर कोई मस्जिद या स्मारक पूरे देश में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संतों ने केन्द्र सरकार को यह चेतावनी दी है कि यदि आगामी मानसुन सत्र में संसद में कानून बनाकर श्रीराम जन्मभूमि निर्माण का रास्ता सुगम नहीं किया जाता तो देश में प्रचण्ड जन आन्दोलन चलाया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि के संदर्भ में आगामी कार्यक्रमों की घोषणा भी की गई। अयोध्या में 20 दिवसीय 84 कोसी संत परिक्रमा पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा 25 अगस्त से प्रारम्भ होकर 13 सितम्बर तक चलेगी जिसमें देश के प्रमुख संत एवं सभी प्रान्तों से संत एवं भक्त भाग लेगें। दक्षिण भारत के संत एवं रामभक्त 22 सितम्बर से 13 अक्टूबर, 2013 तक अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा पदयात्रा में प्रतिदिन अधिकाधिक संख्या में भाग लेंगे। 18 अक्टूबर को सम्पूर्ण देश में श्रीराम मंदिर निर्माण संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाएगा। जिसके अन्तर्गत अयोध्या में सरयू के तट पर संकल्प सभा का आयोजन होगा। साथ ही साथ देश के प्रत्येक जिले में संकल्प सभा का आयोजन किया जाएगा।

जारीकर्ता प्रकाश शर्मा, अधिवक्ता, राष्ट्रीय प्रवक्ता- विश्व हिन्दू परिषद.

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विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबन्ध समिति बैठक

26-27 जून, 2013

हरियाणा भवन, नारायण नगर, कुमारपाडा, गुवाहाटी (असम)

प्रस्ताव – 2

विषय – अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण

प्रयाग महाकुंभ 2013 के शुभ अवसर पर आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मण्डल के पूजनीय संत-महात्माओं की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया था कि पुण्य नगरी अयोध्या में विराजित भगवान श्रीरामलला का कपडों द्वारा निर्मित मंदिर संतों के साथ-साथ संपूर्ण हिन्दू समाज को शर्मसार कर रहा है। जनसमाज यथाशीघ्र भगवान के दर्शन भव्य मंदिर में करना चाहता है। प्रयाग महाकुंभ में संतों के विशाल सम्मेलन के अवसर पर जनसमाज के सामने मार्गदर्शक मण्डल के संतों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के तीनों न्यायाधीशों ने एकमत से निर्णय दिया है कि–

1. विवादित स्थल ही भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है। जन्मभूमि स्वयं में देवता है और विधिक प्राणी है।

2. विवादित ढांचा किसी हिन्दू धार्मिक स्थल पर बनाया गया था।

3. विवादित ढांचा इस्लाम के नियमों के विरूद्ध बना था, इसलिए वह मस्जिद का रूप नहीं ले सकता।

ऽ विद्वान न्यायाधीशों ने मुस्लिमों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था। इस प्रकार यह सिद्ध कर दिया था कि एकमात्र रामलला ही 70 एकड़ भूमिखण्ड के मालिक हैं।

ऽ मार्गदर्शक मण्डल के निर्णय के अनुसार संत-महात्माओं का एक शिष्ट मण्डल महामहिम राष्ट्रपति से भेंट करने गया था। संतों ने राष्ट्रपति जी को एक ज्ञापन देते हुए कहा था कि भारत सरकार के अटार्नी जनरल ने 14 सितम्बर, 1994 को सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथ पत्र देकर कहा था कि–‘यदि यह सिद्ध होता है कि विवादित स्थल पर पहले कभी कोई मन्दिर/हिन्दू उपासना स्थल था तो सरकार की कार्रवाई हिन्दू भावना के अनुसार होगी।’ अतः उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद भारत सरकार की यह बाध्यता है कि वह अपने वचन का पालन करे और भारत सरकार 70 एकड़ भूमि मंदिर निर्माण हेतु हिन्दू समाज को शीघ्र कानून बनाकर सौंप दे।

ऽ मार्गदर्शक मण्डल स्पष्ट रूप से घोषित करता है कि अयोध्या की 84 कोस परिक्रमा की भूमि हिन्दू समाज के लिए पुण्य क्षेत्र है। हिन्दू समाज पुण्य क्षेत्र की ही परिक्रमा करता है, इसलिए इस पुण्य क्षेत्र में हिन्दू समाज किसी भी प्रकार के इस्लामिक प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। यदि वहां कोई इस्लामिक प्रतीक बनाया गया तो वह बाबर के रूप में जाना जायेगा जिसके कारण हिन्दू-मुस्लिम विवाद हमेशा के लिए बना रहेगा।

ऽ मार्गदर्शक मण्डल का यह सुविचारित मत है कि न्यायालयों की लम्बी प्रक्रिया से शीघ्र निर्णय नहीं आ सकेगा। इधर हिन्दू समाज रामलला को शीघ्रातिशीघ्र भव्य मंदिर में विराजित देखना चाहता है, इसलिए भारत सरकार से मार्गदर्शक मण्डल का आग्रह है कि संसद के मानसून सत्र में ही कानून बनाकर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के भव्य मंदिर निर्माण की सभी कानूनी बाधाएं दूर करें। यदि मार्गदर्शक मण्डल की यह मांग नहीं मानी गई तो हिन्दू समाज उग्र आन्दोलन करने को बाध्य होगा।

प्रस्तोता: पूज्य स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी महाराज, हरिद्वार

गत 11-12 जून, 2013 को हरिद्वार में सम्पन्न केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक के अवसर पर संतों द्वारा श्रीराम जन्मभूमि के संदर्भ में पारित प्रस्ताव को विश्व हिन्दू केन्द्रीय प्रबन्ध समिति उपवेशन ने यथावत शिरोधार्य किया।

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक ,गुवाहाटी (असम) में पारित प्रस्ताव