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विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक-ज्वालाजी, (हिमाचल प्रदेश)

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक 24-25 जून 2014 अग्रवाल ट्रस्ट धर्मशाला-ज्वालाजी, (हिमाचल प्रदेश)

 प्रस्ताव क्र. 02

 देवभूमि हिमाचल में आसुरी षडयंत्र

हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। यहां हिन्दू संस्कृति पल्लवित और पुष्पित हुई है लेकिन दुर्भाग्य से मतान्तरण तथा अन्य षड़यंत्रों के द्वारा इस पावन देवभूमि के उज्ज्वल चरित्र को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। विदेशी चर्च व मिशनरियों द्वारा चलाई गई मतान्तरण की आंधी को रोकने के लिये यहां अधिनियम भी बनाया गया है। इसके बावजूद मतान्तरण की गति रुकी नहीं हैं। कुछ जिलों जैसे-शिमला, सिरमौर, कुल्लू, लाहौल, किन्न्ाौर, चम्बा, कांगड़ा आदि में इनकी अवान्छित गतिविधियों के कारण यहां के शांत जीवन में एक उबाल आता हुआ दिखाई दे रहा है। इनमें से कुछ जगह तो नन्स और पादरियों के प्रशिक्षण केन्द्र भी चल रहे हैं। दुर्भाग्य से यहां जेहादी तत्व भी तीव्रता से अपना जाल बिछा रहे हैं। देवियों की इस धरती पर लव जेहाद के नाम पर भोली-भाली हिन्दू कन्याओं पर कुदृष्टि डाली जा रही है। एक अनुमान के अनुसार गत वर्ष में अनेकों हिन्दू लड़कियों को इन जेहादियों द्वारा भगाया जा चुका है। इस पवित्र प्रदेश में अब गौवंश की हत्याओं की कई घटनायें होने लगी हैं। नूरपुर, पौंटा साहब और नालागढ़ जैसे स्थानों पर गौवंश की हत्या पर कई बार संघर्ष भी हो चुके हैं। विश्व हिन्दू परिषद का यह स्पष्ट अभिमत हैं कि यदि मिशनरियों और जेहादियों पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई तो हिन्दू समाज का आक्रोश एक दावानल का रूप धारण कर सकता है जिस पर नियंत्रण करना आसान नहीं होगा ।

हिमाचल प्रदेश में एक ऐसी विशिष्ट परम्परा है जो यहां के हिन्दू समाज को उसके परिवार, कुटुम्ब, ग्राम, प्रदेश और धर्म के साथ मजबूती से जोड़े रखती है। यहां पर जीवन्त ग्राम देवता, स्थान देवता और गृह देवता की अनूठी परम्परा है। अब दुर्भाग्य से यह परम्परा क्षीण होने के कगार पर है। इनको बहुत कम अवसरों पर नजराने की मामूली सी राशि मिलती है जिससे इनका भरण-पोषण सम्भव नहीं है। समाज को जोड़ने वाली इस परम्परा की यहां की सरकार निरंतर उपेक्षा कर रही है। जबकि यहां की ’’सैक्युलर‘‘ सरकार मौलवियों को भारी वेतन देती है जिसमें अभी 500 रू. की वृद्धि भी की गयी है। ’’सैक्युलरिज्म‘‘ के नाम पर किया जा रहा यह अनाचार न केवल जेहादी तत्वों को प्रोत्साहन देता है अपितु यहां के हिन्दू समाज की जड़ों पर आघात भी कर रहा है। यह स्थिति किसी भी प्रकार से हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है। हिमाचल का अस्तित्व हिन्दू समाज और हिन्दू तीर्थों के कारण ही है।

माता ज्वालामुखी के पावन चरणों में हो रही विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति की यह बैठक इस पवित्र देवभूमि की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करती है तथा यहां चल रही हिन्दू विरोधी एवं देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिये संकल्प करती है। विश्व हिन्दू परिषद 3 हजार एकल विद्यालयों, एक अनाथालय, एक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र के अतिरिक्त एक आरोग्य मंदिर, जिसमें 2500 से अधिक नेत्र रोगियों की चिकित्सा की गई, के माध्यम से हिमाचल के शिक्षा, आरोग्य, समरसता व सेवा आदि के क्षेत्रों में भी विशेष योगदान देती है। विश्व हिन्दू परिषद हिमाचल प्रदेश के समाज को आह्वान करती है कि वे अपने सामथ्र्य का प्रयोग कर इन षड़यंत्रों पर पूर्णविराम लगाये। विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति हिमाचल सरकार से मांग करती है:

1. मतान्तरण विरोधी अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर इसे मजबूत बनायें जिससे मतान्तरण की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

2. लव जेहाद धर्मान्तरण का एक घिनौना प्रकार है। देश के कुछ उच्चन्यायालय इसके विरोध में आदेश पारित कर चुके हैं। सरकार को इन षड़यंत्रों को सख्ती से कुचलना चाहिये।

3. गौवंश हत्या की घटनायें देवभूमि हिमाचल पर भारी कलंक हैं। गौहत्या विरोधी कानून होने के बावजूद निरंतर बढ़ रही गौवंश की हत्यायें सरकार की अकर्मण्यता और संवेदनशून्यता की ओर संकेत करती हैं। सरकार को गौ हत्या विरोधी कानून का सख्ती से पालन करना चाहिये और मां भगवती की धरती से इस कलंक को मिटाना चाहिये।

4. ग्राम देवता, स्थान देवता, गृह देवता के आशीर्वाद लेने के लिये सभी राजनेता लालायित रहते हैं। इस गौरवशाली परम्परा को परिपुष्ट करने से न केवल प्रदेश मजबूत बनेगा अपितु समाज कई प्रकार के व्यसनों और कुसंस्कारों से दूर रहेगा । इस परंपरा को पुष्ट करने के लिये सरकार को भरसक प्रयास करने चाहियें। मौलवियों को मिलने वाला वेतन हिन्दू समाज की खून पसीने की कमाई से इकट्ठे किये गये राशि से दिया जाता है। जिसका दुरुपयोग हिन्दू समाज के विरुद्ध ही किया जाता है। इस पर अबिलंब रोक लगानी चाहिये।

5. इस पवित्र भूमि के कई पावन मंदिरों का सरकार ने अधिगृहण किया हुआ है। इन अधिगृहित मंदिरों से प्राप्त की गई राशि का कई हिन्दू विरोधी कार्यों के लिये उपयोग भी किया जाता है। यहां का समाज इन मंदिरों के संचालन में समर्थ है। सेवा निवृत्त न्यायमूर्ति कैंथला के नेतृत्व में गठित न्यास, जिसमें हिमाचल के सभी प्रमुख धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, इन मंदिरों के संचालन के लिये हर दृष्टि से सक्षम है। इन मंदिरों के संचालन का दायित्व इस न्यास को अविलम्ब सौंपना चाहिये। सरकार को केवल राजकीय कार्यों में ही ध्यान देना चाहिये।

प्रदेश सरकार से अपील है कि इन मांगों पर तत्काल कार्यवाही करें अन्यथा प्रदेश का हिन्दू समाज इन विषयों पर एक प्रबल आंदोलन करने के लिये बाध्य होगा।

 

प्रस्तावक: डॉ सुरेन्द्र कुमार जैन, केन्द्रीय मंत्री

अनुमोदक: विष्णुदत्त शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष, हिमाचल

 

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक 24-25 जून 2014 अग्रवाल ट्रस्ट धर्मशाला-ज्वालामुखी (हिमाचल प्रदेश)

 प्रस्ताव क्रमांक – 3

अनेक वर्षों के पश्चात हिन्दू समाज जाति, सम्प्रदाय, भाषा से ऊपर उठकर अभी सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के समय एक संघ व एकमत बनकर सत्ता परिवर्तन का पुरोधा बना। विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति समाज की इस एकता से प्रसन्न है और हिन्दू समाज की जय बोलते हुए हृदय से समाज का साधुवाद करती हैं और आशा करती है कि वह अपनी इस एकता को निरंतर बनाए रखेंगे। वर्तमान शासकों से भी हम अपेक्षा करते हैं कि वे हिन्दू समाज की हृदयगत अपेक्षाओं को पूरा करेंगे।

प्रस्तावक: श्री धर्मनारायण शर्मा, दिल्ली

अनुमोदक: श्री अशोकराव चैगुले, मुम्बई