श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

सन्त धर्माचार्यों द्वारा 25 अगस्त, 2013 से प्रारम्भ हुई 84 कोसी पद यात्रा कारसेवकपुरम में यज्ञ-हवन से सम्पन्न हुई।

विश्व हिन्दू परिषद के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री मा. श्री चम्पतराय जी द्वारा श्रीअयोध्या जी से जारी प्रेसवार्ता

श्रीअयोध्याजी, 29 अगस्त। सन्त धर्माचार्यों द्वारा अयोध्या की चौरासी कोसी में पद यात्रा आज भी जारी रही। अयोध्या क्षेत्र में रात्रि विश्राम करने के उपरान्त पद यात्री अचानक सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुये दर्शन नगर होते हुये श्रृंगी ऋषि क्षेत्र में रात्रि विश्राम करते हुये गोसाईगंज भिटौरा पहुचे, इस दौरान गुप्त रहकर उन्होंने कीर्तन भजन भी किया। विश्व हिन्दू परिषद के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री चम्पतराय ने प्रेस को जारी बयान में कहा पद यात्रा अभी भी इस कठिन परिस्थिति में चल रही है। सन्त धर्माचार्य धार्मिक और सांस्कृतिक मान बिन्दुओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है और रहेंगे। विहिप सन्तों के इस संकल्प को हर सम्भव पूर्ण कराने में सहयोगी बनी रहेगी। उन्होंने कहा सरकारी दमन से समाज विचलित होने वाला नहीं है।

लखनऊ कारागार से छूटकर अयोध्या पहुंचे मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास तथा निर्वाणीअनी के श्री महंत धर्मदास ने सयुक्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा सन्त समाज को कारागार में डालना और भोजन प्रसाद तक की व्यवस्था न करना संविधान पदत अधिकारों का हनन है। उन्हांेने कहा सन्तों की धार्मिक पद यात्रा पर प्रतिबन्ध राज्य सरकार की तालिबानी हरकत ही है, अयोध्या को मुगलिस्तान नहीं बनने दिया जायेगा। तीखे स्वर में सन्तों ने कहा अयोध्या के व्यापार और मंदिर में आने वाले तीर्थ यात्रियों को भयक्रान्त कर समाज में कौन सा संदेश देना चाहती है यह सरकार। उन्होंने कहा समाज में सन्तों और इस कार्यक्रम के प्रति आक्रोश पैदा कराने के लिए इतने बड़े मात्रा में जगह-जगह पर सुरक्षाकर्मियों को खड़ा किया गया है ताकि समाज में इस कार्यक्रम के प्रति विरोध उत्पन्न हो जाये। जबकि सरकार एक वर्ग विशेष को प्रसन्न कर हिन्दुओं का दमन कर रही है। चल रही पद यात्रा उसी 25 अगस्त को ही प्रारम्भ हो चुकी है। जब सन्त धर्माचार्यों ने सांकेतिक सरयू पूजन कर गिरफ्तारी दी।

दूसरी तरफ अमेठी स्थित सगरा पीठाधिश्वर अभिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने 52 लोगों के साथ अयोध्या रामलला के दर्शन तथा पद यात्रा करने की मांग को लेकर अनशन शुरू कर दिया है। उनके इस अनशन में नर, नारी तथा छोटे बच्चे भी बैठे हैं। दूरभाष पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा मंगलवार से प्रारम्भ हुआ यह अनशन तब तक नहीं रूकेगा जब तक अयोध्या में सन्तों को रामलला का दर्शन तथा पद यात्रा नहीं करने दिया जायेगा। अयोध्या सन्त समाज की धार्मिक आधार भूमि है। उनको परिक्रमा उपासना से वंचित तथा उनके मंदिरों में ही नजरबंद किया जाना धार्मिक अपराध है। लगता है देश आज भी औरंगजेब और बाबर के हाथों में कैद हो गया है। उन्होंने कहा जिस प्रकार से केन्द्र सरकार ने मनमोहन सिंह कठपुतली बन गये है ठीक उसी प्रकार से उत्तर प्रदेश में बाबू अखिलेश अपने चचाजान के हाथों में कैद है। सरकार अविलम्ब अयोध्या को बंधनों से मुक्त करें अन्यथा सम्पूर्ण देश सहित विशेषकर उत्तर प्रदेश में मठ-मंदिरों से निकलकर इसका व्यवापक विरोध करेंगे।

जारीकर्ता – विहिप मीडिया सेन्टर

अयोध्या, 13 सितम्बर।

25 अगस्त, 2013 से प्रारम्भ हुई 84 कोसी पद यात्रा आज विविधत कारसेवकपुरम में यज्ञ-हवन से सम्पन्न हुई। इससे पूर्व यात्रा समापन स्थल मखौड़ा में केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के सदस्य महामण्डलेश्वर डॉ. रामेश्वर दास जी के नेतृत्व में पूजन-अर्चन हुआ और लगभग 70 कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी।

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कारसेवकपुरम में सम्पन्न हुये कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के सदस्य दिगम्बर अखाड़ा महंत सुरेशदास जी, विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय विशेष सम्पर्क प्रमुख केन्द्रीय पुरुषोत्तम नारायण सिंह तथा केन्द्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज ने आचार्य नारद के मार्गदर्शन में यज्ञ वेदी पर पूजन और हवन कर 20 दिन से लगातार चल रही पद यात्रा को सम्पन्न कराया।

विहिप नेताओं ने कहा सन्तों की पद यात्रा सकुशल सम्पन्न हुई, शासन और प्रशासन द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध के बावजूद भारी संख्या में सन्तों ने पद यात्रा किया और गिरफ्तारी भी दी। अनेक प्रान्तों से पहुँचे सन्तों ने इस धार्मिक अनुष्ठान पर रोक लगाये जाने सम्बन्धी कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा अयोध्या में 14 कोसी, पंच कोसी कार्तिक माह लोग करते है लेकिन अयोध्या के सन्त हर एकादशी को भी इसी परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा करते है। ठीक उसी प्रकार 84 कोसी की परिक्रमा चैत्र में होती है लेकिन श्रद्धालु और भक्त उसे कभी भी कर सकते है, इसमें कोई नई परम्परा नहीं है।

उन्होंने कहा आज 13 सितम्बर को जिस प्रकार प्रशासन ने सम्पूर्ण अयोध्या में नाकेबंदी कर सन्तों को सरयू जल व सरयू स्नान तक नहीं करने दिया इसकी हम घोर भत्र्सना करते है। लगता है शासन के इशारे पर प्रशासन भी अपने मस्तिष्क से शून्य है और तालिबानीकरण में शासन का सहयोग कर रहा है। इस अवसर महंत संदीप दास, उड़ीसा के सन्त अभी चैतन्य महाराज, चन्द्रमणि दास, महेशदास, वामदेव दास, प्रभुनाथदास, निलकंण्ठ दास, दयालदास, जितेन्द्रमण्डल दास, स्वामी रामदेवानन्द सरस्वती, महंत मनमोहन दास, विहिप के केन्द्रीय सहमंत्री हरिशंकर, कारसेवकपुरम प्रभारी प्रकाश अवस्थी, जितेन्द्र त्रिपाठी, विरेन्द्र कुमार, अशोक पाठक, रामशंकर यादव, हजारी लाल, कहैन्यालाल तिवारी, देवेन्द्र सिंह, राधेश्याम गुप्ता, बालचन्द वर्मा आदि उपस्थित रहे।

रेहली, नवाबगंज (गोण्डा), 12 सितम्बर।

मखौड़ा से सटे थाना अन्तर्गत नवाबगंज के रेहली गाँव पहुँची 84 कोसी पद यात्रा में सम्मिलित अयोध्या के 4 सन्तों को पुलिस बल गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वालों में महन्त रामदास, स्वामी रामजीदास, स्वामी माधव आचार्य, महंत अरूण कुमार दास तथा 5 कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

नवाबगंज से आज पद यात्रा के लिए चले सन्तों की टोली सिकन्दरपुर (बस्ती) पहुँचने वाली थी जिसमें कुछ सन्तों को रेहली गाँव में सुरक्षाकर्मियों ने परिक्रमा करने से रोका। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने सन्तों से कहा परिक्रमा प्रतिबन्धित है इसके बावजूद भी आप कहाँ से आये। सन्तों का सीधा जवाब था कि पद यात्रा करते हुये यहाँ तक पहुँचे और अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए निकले हैं।

गिरफ्तार सन्तों ने कहा परिक्रमा तो हम नित्य करते आये हैं, 84 कोसी की इस पद यात्रा में भी भगवत् प्राप्ति और मानव कल्याण का उद्देश्य है। परिक्रमा कर रहे सन्तों को रोकना सीधे-सीधे धर्म पर हमला है। सन्तों ने कहाँ अयोध्या सहित मखौड़ा से सटे हुए निर्जन स्थानों पर इतनी भारी मात्रा में सुरक्षा व्यवस्था सामाजिक, आर्थिक क्षति है। हम गाँव-गाँव में निकलकर समाज को जागृत करेंगे ताकि आने वाले समय में सरकार इसका हिसाब दें। पद यात्रा का समापन शुक्रवार को मखौड़ा में हवन-पूजन के साथ सम्पन्न होगा।

नवाबगंज (गोण्डा), 11 सितम्बर।

84 कोसी पद यात्रा के दौरान सन्त-धर्माचार्यों ने कहा कि हिन्दू धर्म संस्कृति की रक्षा तभी सम्भव है जब सम्पूर्ण समाज एकसूत्र में बंधे। धार्मिक आयोजनों के द्वारा जहाँ ऊँच-नीच, जाति, पंथ, सम्प्रदाय, भाषा का भेद समाप्त होता है। ऐसे आयोजनों पर प्रतिबन्ध लगाना कहीं से भी न्यायोचित नहीं कहाँ जा सकता। 84 कोसी पद यात्रा भी इसी परिपेक्ष में की जा रही है कि समाज जागृत हो और अपने मानबिन्दुओं की रक्षा के लिए तत्पर हो। गोण्डा जनपद के तरबगंज से आज (बुद्धवार) को प्रातः प्रारम्भ हुई सन्तों की पद यात्रा गोण्डा के ही नवाबगंज में पहुँची, जिसमें सौकड़ों की संख्या में उड़ीसा तथा दक्षिण बिहार के सन्त सम्मिलित हुए और जिन्हें बाद में सुरक्षाकर्मियों ने तीन स्थानों से गिरफ्तार कर अस्थाई जेल में भेजा।

मंगलवार को सायंकाल तरबगंज पहुँची 84 कोसी पद यात्रा अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए बुद्धवार को प्रातः चल पड़ी। उड़ीसा के सन्तों के नेतृत्व में निकले एक जत्थे के सन्त भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे, परिक्रमा सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मियों ने दुर्जनपुर के गोपतपुर बाजार में सन्तों को गिरफ्तार किया। जिसमें उड़ीसा के 38 सन्त थे। दक्षिण बिहार के जत्थे को नवाबगंज थाने के पास महंगूपुर तिराहे पर सुरक्षाकर्मियों ने रोका जिसमें 15 सन्तों के साथ भारी संख्या में महिलाएँ व पुरुष सम्मिलित हुए। जिसमें महिलाओं को पुलिस ने वहीं पर छोड़ दिया। तीसरा जत्था नवाबगंज के ही कटी चैराहे के पास गिरफ्तार हुआ। जिसमें उड़ीसा के 32 सन्त तथा स्थानीय नागरिक सम्मिलित थे। इस दौरान सन्तों ने पुलिस की कार्रवाई को निन्दनीय बताया और कहाँ भारत में सभी को अधिकार है कि वह अपने मत के अनुसार पूजन पद्धति कर सकता है। हिन्दू सन्तों के द्वारा पद यात्रा का आयोजन पूर्ण रूप से धार्मिक है। इस आयोजन पर सरकारी प्रतिबन्ध समझ से परे है। समाज को अब स्वयं अपने सन्त-धर्माचार्यों और मठ-मंदिरों तथा धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आगे बढ़ना होगा। वृहस्पतिवार को यात्रा नवाबगंज से मखौड़ा की ओर बढ़ेगी।

बेलसर/तरबगंज (गोण्डा), 10 सितम्बर।

साधु-सन्तों का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्थान। रामलला हम आयेंगे, मंदिर भव्य बनायेंगे। जैसे गगन भेदी जयकारों के बीच मंगलवार को पश्चिम बंगाल व उत्तराखण्ड के सन्तों ने 84 कोसी पद यात्रा करते हुये गिरफ्तारी दी। बेलसर के रगड़गंज बाजार में स्थानीय नागरिकों ने भी साधु-सन्तों के पद यात्रा में सम्मिलित होकर प्रतिबन्ध का पुरजोर विरोध किया और मुख्य बाजार में साधु-सन्तों को सकुशल यात्रा कराने के लिए धरने पर बैठ गये। तरबगंज में पश्चिम बंगाल के ही 40 सन्तों तथा लगभग एक दर्जन नागरिकों ने अपनी गिरफ्तारी दी और बेलसर में 15 सन्तों तथा 50 से उपर नागरिकों ने गिरफ्तारी दी।

बीते सोमवार को गोण्डा जनपद के उमरी बाजार से प्रातः चली सन्तों की यात्रा दोपहर को बेलसर व तरबगंज पहुँची। यात्रा में मुख्य रूप से स्वामी कृष्णानन्द दमाल, स्वामी लोकेश शरणानन्द, स्वामी सुखानन्द, स्वामी पुनवाकेन्द्र दत्तपुरी, स्वामी शिवदातानन्द, स्वामी नित्यनन्दगिरि, स्वामी ओंकारानन्द, स्वामी आत्मकुमार, सन्त प्रमुख नरेन्द्र ब्रह्मचारी, स्वामी कैलाशास्वरूप नन्द, स्वामी लखीमण्डल, स्वामी धीरनमण्डल, स्वामी दिनेश मण्डल, स्वामी बृजेशानन्दगिरि, स्वामी परमानन्द महाराज, स्वामी विनतेनाथ (उत्तराखण्ड), स्वामी स्वरूपनाथ (उत्तराखण्ड), स्वामी बाबूनाथ (उत्तराखण्ड) आदि सम्मिलित थे। गिरफ्तारी से पूर्व पश्चिम बंगाल के सन्तों ने कहा, भगवान रामलला के जन्मस्थान पर मंदिर ही बनना चाहिए। श्रीराम सम्पूर्ण मानव जगत के उद्धारक है जिस प्रकार उन्होंने मर्यादित जीवन का निर्वहन किया ठीक उसी प्रकार सराकारों को भी इसका पालन कर रामराज्य की स्थापना करनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य है कि आज की सरकारें एक सम्प्रदाय विशेष की भक्त बनकर बहुसंख्यक समाज के हृदय को चोट पहुँचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल सदैव राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए जागरूक रहा है। सन्तों का आह्वान मंदिर निर्माण के निमित्त अगर होगा तो भारी संख्या में समाज एक बार पुनः अयोध्या पहुँचेगा।

सन्तों ने कहा, पद यात्रा और परिक्रमा जैसी धार्मिक पूजन-पाठ पर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा रोक लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को साधु-सन्तों और समाज की भावनाओं का आदर करना ही चाहिए। पद यात्रा बुद्धवार को तरबगंज से चलकर नवाबगंज पहुँचेगी। यात्रा में दक्षिण बिहार, उड़ीसा के पूज्य सन्त सम्मिलित होंगे।

बराही देवी (गोण्डा), 9 सितम्बर।

84 कोसी पदयात्रा के 16वें दिन अयोध्या के सन्त धर्माचार्यों ने हिस्सा लिया। दो जत्थों में चल रहे सन्तों ने ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचककर लोगों के बीच श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर तथा 84 कोसी क्षेत्र में कोई बाबरी मस्जिद न बनने देने का आह्वान किया। सन्तों का जत्था प्रातः ही पसका से चलकर बराही देव तथा उमरी पहुंचा। जत्थे को जिसमें अयोध्या के महंत निर्मलशरण, महंत मैथिलीशरण, महंत रामजनशरण, स्वामी रामचन्द्र शरण, स्वामी रामरतन शरण, तीन अन्य सन्त तथा लगभग 10 ग्रामीणों को सुरक्षाकर्मियों ने रामपाल सिंह हाटा, भवानीपुर में पकड़ा। इसके अलावा महंत सुशीलदास, महंत रामप्रकाशदास, बजरंगदास, महंत रामशरण, राधेराम दास को परिक्रमा प्रतिबन्धित होने का हवाला देकर उमरी (गोण्डा) में गिरफ्तार कर लिया। अगला जत्था अपने पड़ाव की ओर बढ़ गया।

बिगत 25 अगस्त से लगातार सन्त धर्माचार्य विभिन्न प्रान्तों से आकर भिन्न-भिन्न तिथियों में पद यात्रा कर रहे है। आज पद यात्रा का 16वाँ दिन था जिसमें अयोध्या के एक दर्जन सन्त शामिल हुये। प्रातः पसका क्षेत्र से प्रारम्भ हुई यात्रा अपने निश्चित पड़ाव की ओर बढ़ी रास्तें में पड़ने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सन्तों का नागरिकों ने स्वागत किया। भखरियाँ ग्राम के सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने साधु-सन्तों के पीछे चलकर पद यात्रा को अपना समर्थन दिया। नागरिकों का कहना था कि पद यात्रा नई हो सकती है लेकिन यह परिक्रमा मार्ग पुरातन है। पद यात्रा कर रहे साधु-सन्त भी परिक्रमा ही कर रहे है यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। इस पर रोक लगाना ठीक नहीं। महंत निर्मलशरण ने कहा, साधु-सन्तों से कानून व्यवस्था बिगड़ने वाली नहीं है बल्कि जिस पक्ष को तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी अब तक तुष्ट करते आये है उनके कारण ही प्रदेश और देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है। यात्रा धार्मिक है लेकिन इसको प्रतिबन्धित करके सरकार ने राजनैतिक खेल खेला जरूर लेकिन उसके मंसुबे सफल नहीं हो सकते।

मंगलवार को यात्रा उमरी से चलकर बेलसर तरबगंज गोण्डा पहुंचेगी। यात्रा में बंगाल और जम्मू-कश्मीर के सन्त सम्मिलित होंगे।

पसका (गोण्डा), 8 सितम्बर।

कोटि-कोटि हम हिन्दू जन का ज्वार उठाकर मानेंगे, सौगंध राम की खाते है हम मंदिर भव्य बनायेंगे। जो नीति अपावन शासन की, वह नीति तोड़कर मानेंगे। ओजस्वी काव्य करते हुये हिमाचल प्रदेश से 84 कोसी पद यात्रा में सम्मिलित सन्तों ने उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। शनिवार को परसपुर से चली पद यात्रा आज रविवार को गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थली सुखरखेत पसका पहुँची। लगभग एक दर्जन सन्तों ने पैदल चलकर नदी पार करते हुये 8 से 10 किलोमीटर तक पद यात्रा के संकल्प को पूर्ण किया।

प्रातः ही सन्तों का जत्था परसपुर से पसका की ओर रवाना हुआ। पगडण्डियों और टूटी-फूटी सड़कों से चलते हुये नदी पार कर नहरपुरवाँ गाँव तक पहुँचे। पसका पहुंचने से पूर्व सन्तों के जत्थे को सुरक्षाकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया। लेकिन सन्त आगे बढ़ते गये। पसका में बराही देवी मंदिर पर पहुंचकर सन्तों ने ओजस्वी काव्य पाठ तथा उद्बोधन भी किया। इस दौरान बाजार के सौकड़ों नागरिक उनका दर्शन और उनके विचारों को सुनने के लिए एकत्रित हो गये। सन्तों ने कहाँ केन्द्र और राज्य सरकार की नीतियाँ एक समाज को तुष्ट करने वाली है। तम्बू में बैठे रामलला समाज का आह्वान करने के लिए सन्तों को दुर्गम क्षेत्रों में भेजा है। इस जन-जागरण अभियान में आप सभी का योगदान प्राप्त होते ही आयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

बराही देवी पर भारी सुरक्षाबल के पहुंचने पर सन्तों ने नाराजगी व्यक्त की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पुलिस जीप में बैठने के लिए निवेदन किया, काफी देर तक तकरार होने के बाद सन्त गाडि़यों में बैठे जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर परसपुर थाने भेज दिया। गिरफ्तार होने वाले सन्तों में महामण्डलेश्वर रामशरण दास, महंत राममनोहर दास, महंत केवलगिरि, महंत भागवत दास, महंत रमेशगिरि, महंत कृष्णदेवदास ब्रह्मचारी, स्वामी चैतन्यगिरि, स्वामी आनन्दगिरि, हजारी लाल और होशियार सिंह तथा तीन अन्य शामिल हैं। बजरंगदल के प्रान्त संयोजक राकेश वर्मा ने बताया राजापुर में भी लगभग सौ कार्यकर्ताओं ने परिक्रमा प्रारम्भ की जिन्हें स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

परसपुर (गोण्डा)/रामनगर (बारांबकी), 7 सितम्बर।

बाधाओं पर विजय प्राप्त करते हुये अयोध्या से दूरस्थ हरियाणा प्रान्त के सन्त धर्माचार्यों ने 84 कोसी पद यात्रा में सम्मिलित होकर मंदिर निर्माण के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। जत्थों में चल रहे सन्तों में अनेक शारीरिक रूप से विकलांग थे फिर भी बाधाएं उन्हें रोक नहीं पायी। संकल्प के साथ दो जत्थों में चल रहे इन सन्तों को बाद में परसपुर तथा भौरीगंज के निकट सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया। सन्तों ने एक स्वर से कहा परिक्रमा पद यात्रा हमारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकार है। प्रतिबन्ध लगाकर सरकार ने स्वयं दण्डनीय अपराध किया है। जिन्हें दण्डित करने का कार्य समाज करेगा।

हरियाणा प्रान्त के चार दर्जन सन्तों के तीन जत्थे जनपद गोण्डा तथा जनपद बाराबंकी में प्रातः ही प्रवेश कर गये। सन्त ‘‘श्रीराम जय राम जय जय राम’’ का जयघोष करते आगे बढ़ते रहे। गोण्डा में पड़ाव पर पहुँचने से पूर्व ही दोनों जत्थांे को सुरक्षाकर्मियों ने रोककर पूछताछ की और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तार सन्तों में स्वामी कमलानन्द, सन्त केशरनाथ महाराज, आचार्य शेषदत्त, महंत विष्णुदास, सन्त स्वामी बृजेशदास, स्वामी कैलाश स्वरूपानन्द, साध्वी विष्णुदासी, देवी प्रसाद पाण्डेय, स्वामी दिव्यानन्द, स्वामी नारायणदास प्रपन्नाचार्य, स्वामी रामभद्राचार्य, स्वामी रामदास, स्वामी महेन्द्रानन्द, स्वामी जगदीश्वर दास, महात्मा गोपालदास, स्वामी अशोकदास, स्वामी शक्तिपुरी, स्वामी बृजभूषण, स्वामी ब्रह्मचैतन्य, स्वामी देवनारायण दास जैसे प्रमुख शामिल है। जबकि कुछ सन्त अपने अगले पड़ाव की ओर सुरक्षित निकल गये।

दूसरी तरफ बारांबकी जनपद के रामनगर में भी सन्तों का एक जत्था बीते शुक्रवार को चला, सुरक्षाकर्मियों से बचता हुआ रामनगर पहुँचा। अपने संकल्प पर अडिग इन सन्तों में स्वामी लक्ष्मणदास, स्वामी सहलदास, स्वामी कमलदास, स्वामी प्रभातदास, स्वामी रघुवरदास, स्वामी महेशदास, स्वामी शेरगिरि जी महाराज, स्वामी दीपक महाराज आदि शामिल रहे। जिन्हें रामनगर में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रोककर गिरफ्तार किया गया।

जरवल रोड से शनिवार को प्रातः चली पद यात्रा शाहपुर, धनावा, भौरीगंज होते हुये परसपुर पहुँची। परसपुर में रात्रि विश्राम के उपरान्त रविवार को पद यात्रा रामपुर होते हुये पसका पहुँचेगी।

बदोसराय (बाराबंकी), 6 सितम्बर।

जय श्रीराम और मंदिर वहीं बनायेंगे गगन भेदी जयकारा लगाते हुये 84 कोसी सन्तों की पद यात्रा बाराबंकी के टिकैतनगर से चलकर बदोसराय पहुँची। लगभग दो किलोमीटर तक सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति में सन्तों ने यात्रा को जारी रखा। बदोसराय चैराहे से आगे बढ़ रही यात्रा को प्रशासनिक अधिकारियों व सुरक्षाकर्मियों ने भारी पुलिसबल के साथ रोका और सन्तों को गिरफ्तार कर लिया।

84 कोसी पद यात्रा में अयोध्या और राजस्थान के सन्त सम्मिलित हुये। गिरफ्तार सन्तों में महंत राममिलनदास, महंत रामदास, संत चैनराम, स्वामी अमृतराम, सन्त जेठाराम, महंत महावीर दास, स्वामी रंजनप्रकाश, स्वामी देवेन्द्र दास, राजेश दावलकर, छोटू सिंह आदि लगभग 50 कार्यकर्ता हैं। बारांबकी के टिकैतनगर से भोर होते ही सन्तों का जत्था बदोसराय, कोटवाधाम, रामनगर के लिए निकल पड़ा। सुरक्षाकर्मियों से बचते हुये सन्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। गाँव-गाँव में सन्तों का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत-सत्कार भी किया।

गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये राउत मंदिर के महंत राममिलन दास ने कहा, एक तरफ सरकारें मुस्लिम वोट प्राप्त करने के लिए हज यात्रियों को सब्सिडी देती है तो दूसरी तरफ हिन्दू धर्माचार्य को पद यात्रा करने से रोककर कारागार में डाल देती है। इस देश में दोहरा मापदण्ड कब तक चलेगा। उन्होंने कहा टाट की कुटिया में बैठे भगवान को उनके भव्य मंदिर में आसीन करने के लिए चल रहा यह जन-जागरण अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। देश के राजनीतिज्ञ अब भी अगर नहीं समझे तो उन्हें करोड़ों रामभक्तों के कोप का भाजन आने वाले दिनों में बनना पड़ेगा।

राजस्थान के सन्त श्रीमन चैनराम महाराज ने कहा, राजस्थान में सदैव बलिदान की अमर कहानी लिखी है। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हम सन्त अपने प्राणों की आहुति देने में भी पीछे नहीं हटेंगे। संकल्प को पूर्ण करने में साक्षात् हनुमान जी का आशीर्वाद पद यात्रियों को प्राप्त है। मार्ग कठिन हो सकता है लेकिन संकल्प हर हाल में पूर्ण होगा।

टिकैतनगर (बाराबंकी), 5 सितम्बर।

पुलिस सुरक्षा बन्धनों के बाद भी 84 कोसी सन्तों की पद यात्रा 12वें दिन भी जारी रही। खेतों और पगडण्डियों से चलकर सन्त परिक्रमा मार्ग पर अपने संकल्प के साथ पहुंच रहे है। यात्रा आज फैजाबाद के पटरंगा से चलकर टिकैतनगर पहुँची। इस दौरान सन्तों के पहले जत्थे को सुरक्षाकर्मियों ने नियामतगंज में पकड़ा और गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गये महाराष्ट्र प्रदेश के प्रमुख सन्तों में स्वामी जनार्दन भेटे महाराज, स्वामी विश्वद्धानन्द महाराज, स्वामी बालासाहेब नागरे, स्वामी रंगनाथ गहना, स्वामी माधव महाराज, स्वामी बाड़ासाहेब, स्वामी उत्तम गणपति दघाटे, स्वामी उत्तमभंगा लालचंद महाराज, स्वामी रंगनाथ महाना, धनेष राठौर तथा दूसरे जत्थे में चल रहे 6 सन्तों व लगभग 23 कार्यकर्ता को टिकैतनगर बाजार के पास गिरफ्तार किया गया।

बीते बुद्धवार को पटरंगा में रात्रि विश्राम के उपरान्त सन्तों की टोली वृहस्पतिवार को टिकैतनगर पहुँची। सन्तों के दो जत्थों की गिरफ्तारी होने के बाद भी कुछ संत अपने अगले पड़ाव की ओर कूँच कर गये। इस दौरान स्वामी जनार्दन भेटे महाराज ने कहा, श्रीराम जय राम जय जय राम विजय महामंत्र है, इसका नाम उच्चारण करते हुये सन्त मण्डल प्रभु श्रीराम की नगरी की 84 कोसी पद यात्रा कर रहा है। श्रीराम अवश्य ही सारी समस्याओं का निवारण करेंगे। अयोध्या में मंदिर का निर्माण हो इसके लिए सन्तों की इस जागरण अभियान से समाज का मार्ग प्रशस्थ होगा। परिक्रमा पर प्रतिबन्ध उचित नही हैं, यह धर्मपरायण देश है अपनी पूजन पद्धति से ईश आराधना करने का अधिकार है। परन्तु दुर्भाग्य है कि हिन्दुओं पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाता है।

स्वामी विश्वद्धानन्द महाराज ने कहा, महाराष्ट्र के देवगिरि प्रान्त से चलकर अयोध्या पहुंचे सन्त राम काज के लिए तत्पर है। जिस प्रकार हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के समस्त कार्यों को सम्पन्न कराया ठीक उसी प्रकार साधु-सन्त समाज का जागरण कर प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए गाँव-गाँव में अवश्य निकलेंगे। बांधाएं सन्तों का मार्ग और समाज के अधिकारों का हनन नहीं कर सकती।

अयोध्या, 4 सितम्बर।

84 कोसी पद यात्रा बुद्धवार को रूदौली से चलकर पटरंगा के लिए निकली। जिसमें एक जत्थे को रूदौली के भेलसर में सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा। गिरफ्तार हुये सन्तों में महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के सन्त स्वामी गम्भरे जी महाराज, विट्ठल जी महाराज, तुनतुने जी महाराज, पेनोरो जी महाराज, सापोरे जी महाराज, स्वामी एकनाथ जी महाराज, घनश्याम जी महाराज तथा अयोध्या के महंत त्रिभुवनदास, महंत रामेश्वरदायाल व गोरखपुर के महंत रामउग्रदास शामिल है। दूसरा जत्था अपने निश्चित पड़ाव की ओर बढ़ गया जिसे सुरक्षाकर्मी नहीं पकड़ सके।

3 सितम्बर को अमरगंज से चली यात्रा अमानीगंज पहुँची थी, जिसमें गोरक्ष प्रान्त के सन्त सम्मिलित थे। इन सन्तों की गिरफ्तारी के बाद बुद्धवार को प्रान्तः अपने गंतव्य की ओर सन्त चल पड़े जिन्हें रूदौली नहर पर पकड़ा गया। इसके अलावा कुछ स्थानों पर लगभग 50 से अधिक कार्यकर्ताओं की भी गिरफ्तारी हुई।

गिरफ्तार किये गये सन्त स्वामी गम्भरे जी महाराज ने कहा राम की निष्ठा हमारे हृदय में है और रहेगी। श्रीराम की मुक्ति के लिए अब संघर्ष ही एक मार्ग है। देश चुनौती के दौर से गुजर रहा है। सुलह और समझौता से बात बनने वाली नहीं, संसद में कानून बनना चाहिए। उन्होंने कहा मौन रहने से बाधाएं बनी रहेगी, मौन तोड़कर बाधा तोड़ना ही होगा। पद यात्रा शान्त पड़े समाज को जागृत करने का माध्यम है।

अयोध्या के सन्त महंत त्रिभुवनदास ने कहा 70 एकड़ प्राप्त करने के लिए पद यात्रा निकली है। अयोध्या धार्मिक चेतना का केन्द्र है इस नगर में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र में बाबर के नाम मस्जिद का निर्माण कभी नहीं होने दिया जायेगा और लाखों लोगों के द्वारा दिये गये बलिदान तथा रामभक्तों को कैसे स्वीकार होगा। 84 कोसी पद यात्रा के बाद एक बार पुनः सम्पूर्ण भारत में सन्त निकले और संसद पर दबाव बनाये। यह धार्मिक आन्दोलन श्रीराम को भव्य मंदिर आसिन करने के साथ धार्मिक पुनर्रूद्धार के लिए है।

5 सितम्बर (वृहस्पतिवार) को सन्तों की पद यात्रा दक्षिण गुजरात, देवगिरि प्रान्त के सन्तों के साथ निकलेगी। यात्रा रूदौली के पटरंगा होते हुये, बाराबंकी के टिकैत नगर पहुँचेगी।

अयोध्या, 3 सितम्बर।

84 पद यात्रा कल फैजाबाद के जनमेजय कुण्ड से चलकर मंगलवार को अजरौली चैराहा होते हुये अमरगंज पहुँची। जहाँ पर गोरखपुर के सन्तों तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। जिसमें प्रमुख रूप से महंत मौनी बाबा, महंत भरतदास, महंत दिनेश दास, सन्त लल्लन जी महाराज, जिला पंचायत सदस्य कमलेश यादव, ब्लाक प्रमुख विनय, ग्राम प्रधान सीयाराम रावत, रामकुमार सहित 50 से अधिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। सन्तों का दूसरा जत्था अमानीगंज पहुँचा, इस जत्थे को अमानीगंज में रोककर पुलिस ने गिरफ्तार किया। जिसमें स्वामी श्रद्धानन्द, महंत रामअधार दास, लालजी गिरि, गहनागन के पुजारी राकेश तिवारी तथा प्रमुख कार्यकर्ताओं में काशीराम पाण्डेय, मानीकचन्द, संयज दूबे, रमेश तिवारी आदि शामिल है।

महंत श्रद्धानन्द ने गिरफ्तारी से पूर्व कहा कि देश की आजादी के लिए जहाँ अनेक महापुरुषों ने अपना बलिदान दिया वहीं श्रीराम जन्मभूमि की रक्षा के लिए लाखों ने भी अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। हम धर्म योद्धा है पीछे हटने वाले नहीं। श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण तक हिन्दू समाज का संघर्ष जारी रहेगा।

आज जनमेजय कुण्ड से सन्तों की पद यात्रा भारी संख्या में स्थानीय जनों के साथ अजरौली चैराहा होते हुये, अमरगंज, गोविन्दनगर, रूदौली की ओर बढ़ी। सन्तों को देखते ही सुरक्षाकर्मियों ने अपने घोरे में ले लिया। दो जत्थों में चल रहे सन्तों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन तीसरा जत्था रूदौली पहुँचने में कामयाब हो गया। जो बुद्धवार को पटरंगा पहुँचेगा।

इस बीच दूरभाष पर वृन्दावन से श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज ने प्रेस को जारी अपने वक्तव्य में कहा, सन्त-धर्माचार्य धैर्य रखे और इस धार्मिक यात्रा पर बढ़ते रहे। समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा देश में धार्मिक उत्थान से ही परिवर्तन होगा। सन्त धर्माचार्यों को कारगार में डालने से धार्मिक कार्यों पर प्रतिबन्ध नहीं लग सकता। देश और समाज अपने धार्मिक मान-बिन्दुओं की रक्षा के लिए हर सम्भव संकल्पबद्ध है। श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण करोड़ों-करोड़ों रामभक्तों की आस्था का प्रश्न है। उनकी आस्था को प्रतिबन्ध से दबाया नहीं जा सकता।

अयोध्या, 2 सितम्बर।

सन्तों की 84 कोसी परिक्रमा पद यात्रा फैजाबाद के आस्तीकन से चलकर जनमेजय कुण्ड पहुँची। इस दौरान बीच में ही थाना इनायतनगर अन्तर्गत आस्तीकन के पास एक जत्थे को जो लगभग 10 सन्तों व कुछ कार्यकर्ताओं के साथ सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ लिया। दूसरा जत्था अपने निश्चित पड़ाव जनमेजय कुण्ड पहुँच गया, जिसे बाद में भारी पुलिस बल ने पकड़ा। पकड़े गये जत्थों में बिहार के 16 सन्त सम्मिलित थे। शेष अगले पड़ाव की ओर बढ़े। जिसमें प्रमुख रूप से महंत महादेव दास, महंत रामशोभित सरस्वती, महंत जगदीश दास, महंत महावीर दास, अशरफी दास, सन्त जगदीश ठाकुर, राममिलन दास, शिवशंकर दास आदि अनेक सन्त शामिल है।

जनमेजय कुण्ड के पास स्थानीय जन को सम्बोधित करते हुये महंत महादेव दास ने कहा देश की दूषित राजनीति का शुद्धिकरण आवश्यक हो गया। बहुसंख्यक समाज की पीठ पर पैर रखकर शासन करने वालों को उनकी ही भाषा में उत्तर देना होगा। मंदिर निर्माण में आ रही बाधा में मुस्लिम ही बाधक है और इस बाधा को सदैव बनाये रखने में कांग्रेस सहित अनेक वह दल है जिनकी राजनीति मुस्लिम सरपरिस्थी में चल रही है। उन्होंने कहा मुलायम व कांग्रेस मुस्लिम वोटों के सौदागर जिनकी जितनी बोली उनके साथ उतने ही मुस्लिम।

श्रीराम जन्मभूमि का आन्दोलन ठण्डा नहीं पड़ा है, देश के दूरस्थ प्रान्तों ने आने वाले सन्त अपने मठ-मंदिरों को छोड़कर इन पगडण्डियों पर चलकर मंदिर निर्माण के संकल्प से बंधे है। इस संकल्प की पूर्ति समाज के सहयोग से ही सम्भव हैं। अयोध्या में 84 कोसी पद यात्रा भी होती है आज से पूर्व हम सबको मालुम भी नहीं था लेकिन उत्तर प्रदेश शासन की बंदिश ने और सन्तों के जागरण से अब यह जन-जन को मालुम हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिक्रमा पर प्रतिबन्ध लगाकर सन्तों और हिन्दुओं की भावनाओं पर हमला किया है।

महंत महावीर दास ने कहा राम की अयोध्या में बाबर का औचित्य कहाँ, मंदिर था, मंदिर ही बनेगा। देश में लिप्त करोड़ों की संख्या में गोहत्या, गंगा प्रदूषित, मठ-मंदिर असुरक्षित फिर भी राजनीतिक मौन अकण्ठ भष्टाचार में डूबे लोगों से, अब इनसे समाज को मुक्ति लेनी ही होगी। तुष्टिकरण का खेल बन्द करना ही होगा। जब-जब सन्त समाज के जागरण को निकले व्यापक परिवर्तन हुआ। एक बार पुनः सन्त धर्माचार्य अपनी कुटिया से निकलकर प्रभु श्रीराम के जन्मस्थली के चारों ओर परिक्रम कर रहे है। जिसका परिणाम आने वाले दिनों में साफ दिखेगा।

पद यात्रा जनमेजय कुण्ड से यह यात्रा मंगलवार को अंजरौली, अमरगंज, अमानीगंज होते हुये रूदौली पहुँचकर रात्रि विश्राम करेंगी।

अयोध्या, 1 सितम्बर।

84 कोसी पद यात्रा कर रहे मेरठ और अयोध्या के सन्तों का जत्था बीकापुर से आस्तीकन फैजाबाद पहुँचा। जहाँ पर लगभग 1 दर्जन सन्तों को सुरक्षाकर्मियों ने धारा 144 लगे होने की बात कहकर गिरफ्तार कर लिया। सन्तों में रामायणी रामशंकर दास अयोध्या, महंत हरिदास, महंत रामदास, स्वामी मंगलानन्द, स्वामी भंजनानन्द, स्वामी अरविन्द त्यागी, महंत सीताराम दास, महंत रामनरेश दास मेरठ और दिल्ली है।

31 अगस्त को बीकापुर में रात्रि विश्राम के उपरान्त पद यात्री भगौतीगंज, रूरूखास होते हुये दोपहर 3.00 बजे फैजाबाद के थाना इनायतनगर के अन्तर्गत आस्तीकन पहुँच गये। जहाँ उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोका और गिरफ्तार कर लिया। शेष सन्त यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ गये।

इस बीच स्वामी मंगलानन्द व रामायणी रामशंकरदास जी महाराज ने कहा समाजवाद का राग मुलायम सिंह का झूठा सिगुफा है असल में इस्लामवाद पर ही समाजवादी पार्टी की राजनीति चल रही है। साम्प्रदायिकता तो इनकी पार्टी के द्वारा फैलायी जा रही है। जबकि साम्प्रदायिक कहकर हिन्दू संगठनों और सन्तों को प्रतिबन्धित किया जा रहा है। उन्होंने कहा भगवान श्रीराम को टाट से निकालने में कांग्रेस सहित मुलायम सिंह जैसे तथाकथित धर्म निरपेक्षवादी बाधक है। अपने को हनुमान भक्त कहने वाले लोगों को पहले श्रीराम की मुक्ति टाट में से करानी चाहिए।

सन्तों को कारागार में डालना घोर पाप है। रावण, कंस, हिरणाकश्यप तथा मुगलों ने भी इस प्रकार का कार्य किया था। इतिहास साक्षी है इनका हस्र क्या हुआ। ऐसा न हो बहुसंख्यक समाज पर कुठाराघात कर सन्तों को समाज इतिहास के कूड़ेदान में डाल दे। सन्त-धर्माचार्यों की पद यात्रा अपने निर्धारित गंतव्य पर कल भी पहुँचेगी।

अयोध्या 31 अगस्त।

सन्तों की 84 कोसी पद यात्रा तारुन से चलकर आज बीकापुर पहुँची। सन्त अलग-अलग जत्थों में चलकर अपने पड़ाव पर पहुँचे, परन्तु कुछ जत्थों में चलकर सन्तों को बीकापुर कोतवाली के बैरियर पर सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। अमरकंटक से आये जत्थे का नेतृत्व महामण्डलेश्वर सुबधदास महाराज तथा दूसरे जत्थे का नेतृत्व अयोध्या के सन्त गोपालदास ने किया। उनके साथ चल रहे अन्य 10 सन्तों सहित पुलिस ने गिरफ्तार किया। तीसरे जत्थे का नेतृत्व करते हुये मध्य प्रदेश से पहुँचे स्वामी विश्वप्रपन्नाचार्य के साथ, स्वामी सद्रानन्द, स्वामी रमेशमणि, स्वामी गोकरण, स्वामी भोले महाराज, स्वामी रामदास महाराज तथा जूना अखाड़े के श्री महंत स्वामी जमुनागिरि मेढ़ी महाराज परिक्रमा पड़ाव पर पहुँच गये।

महामण्डलेश्वर सुबधदास तथा महंत गोपालदास ने कहा, इस देश में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है लेकिन एक वर्ग को प्रसन्न करने के लिए दूसरे पर लगातार प्रशासनिक और शासनिक हमले जारी है। यात्रा पर प्रतिबन्ध सामाजिक एवं धार्मिक वातावरण को दूषित करने वाला है। उन्होंने कहा सन्तों ने सदैव राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए ही अपना जीवन समर्पित किया है। श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति और उस पर भव्य मंदिर का निर्माण हर सम्भव होगा। उन्होंने कहा भगवान श्रीराम ने सम्पूर्ण मानव जगत को एकसूत्र में बांधकर जगत का कल्याण किया। आज सन्त-धर्माचार्य अलग-अलग प्रान्तों से यहाँ पहुँचकर समाज को जागृत कर रहे है कि वह उठे और अपने धार्मिक अधिकारों के प्रति संघर्ष करें।

स्वामी विश्वप्रपन्नाचार्य ने कहा, इस प्रदेश की राजनीति सन्त-धर्माचार्यों को जेलों में ठूसकर एक वर्ग को क्या संदेश देना चाहती है ? आतंकवादियों का समर्थन करने वाले नेताओं की जगह जेलों में होनी चाहिए। जबकि यह लोग स्वयं सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले है। सन्तों की पद यात्रा किसी धर्म, सम्प्रदाय के विरुद्ध नहीं है। यह सम्पूर्ण मानव जगत के कल्याण तथा हिन्दू समाज के आराध्य को कपड़े के टाट से निकालकर भव्य मंदिर में विराजमान कराने के लिए है। जूना अखाड़ा (सीतावन, म0प्र0) के महंत स्वामी जमुनागिरि ने कहा मठ-मंदिर हिन्दू समाज के अभिन्न अंग है। जब-जब धर्म पर आक्रमण हुआ तब-तब मठ-मंदिरों से निकलकर सन्तों ने अलख जगाया। आज भी हम इतनी दूर से आकर समाज को उठ खड़े होने का आह्वान करते है।

बीकापुर में रात्रि विश्राम करने के उपरान्त रविवार को पद यात्रा कर रहे सन्त भगौतीगंज, रूरूखास होते हुये आस्तीकन पहुँचेंगे।