श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

हिंदुत्व के वैश्विक प्रसार के संकल्प के साथ विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित ‘विश्व हिन्दू कांग्रेस’ शुरू

हिंदुत्व के वैश्विक प्रसार के संकल्प के साथ विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित ‘विश्व हिन्दू कांग्रेस’ शुरू

नई दिल्ली Nov 21, 2014. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डा. मोहन राव भागवत ने वर्ल्ड हिन्दू फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रथम वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में वैश्विक हिन्दू पुनर्अभ्युदय के लिये उपयुक्त समय और हिन्दू समाज के सामूहिक प्रयास विषय पर अपने सारगर्भित मार्गदर्शन में कहा, “समस्त संसार को मानवता का पाठ पढ़ाने का परंपरा से भारत का दायित्व है, जिसकी आवश्यकता संसार को सदा रहेगी.” पूज्य दलाई लामा जी ने जिन सरल शब्दों में कहा फेथ, ह्यूमैनिटी, उसकी आवश्यकता तो संसार को सदा थी, सदा है, सदा रहेगी और उसको देने का काम हमको करना है” उन्होंने कहा कि एक समाज, एक राष्ट्र और एक देश के नाते भारत के अस्तित्व का यही प्रयोजन है. इसीलिये पचास से अधिक देशों से हिन्दू के नाते, हिन्दू समाज का विचार करते हुए सम्पूर्ण विश्व को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान कर सकें- ऐसा रूप हिन्दू समाज को देने के लिये क्या किया जाये, इसका विचार करने के लिये यहां आये हैं.

परम पूज्य ने कहा कि जहां तक उपयुक्त समय की बात है तो समय को तो पकड़ना पड़ता है. उन्होंने इसके लिये एक सटीक दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए कहा, गंगा किनारे के एक गांव में रहने वाला एक नवयुवक बहुत अच्छा तैराक था. दिन में दो-तीन बार गंगा का आलोड़न करता था. उसकी इच्छा सागर में तैरने की हुई. समुद्र तट पर पहुंचकर वह पूरे दिन बैठा रहा, लेकिन वह समुद्र में नहीं उतरा. अंत में सूर्यास्त के पश्चात वापस आने वाले लोगों में से एक ने पूछा कि आप स्नान करने के लिये आये थे, इतनी देर बैठे रहे तो अभी तक स्नान क्यों नहीं किया? युवक का उत्तर था कि सागर में बहुत टर्बुलेंस (ऊंची और तेज लहरों का उठना व गिरना) है, शांत हो जाये तो मैं स्नान करूंगा. उन्होंने कहा कि दुनिया के जीवन में भी समस्यारूपी लहरें तो आती ही रहेंगी, अच्छी-बुरी स्थिति का धूप-छांव का खेल तो चलता रहेगा. उपयुक्त समय वही है जब हम काम शुरू कर दें.

डॉ. भागवत ने इच्छाओं की पूर्णता में संतुलन को परम आवश्यक बताया जो विविधता में एकता का दर्शन करके प्राप्त हो सकता है. उन्होंने कहा कि विकास करने जाते हैं तो पर्यावरण का सफाया करते हैं. पर्यावरण को ठीक करना है तो विकास को रोक देते हैं. व्यक्ति को स्वतन्त्रता देनी है तो परिवार का या समाज का विचार छोड़ देते हैं. समाज का विचार करना है तो व्यक्ति को दबाते हैं.

परम पूज्य ने कहा कि यह संतुलन चूंकि न जड़वादी और कोरे पंथिक विचार से मिला और न ही पूर्ण समाजवादी या पूर्ण व्यक्तिवादी विचार से मिला इसलिये सारी दुनिया के चिंतक 2000 वर्ष तक प्रयोग करते-करते थकने के बाद किसी तीसरे पक्ष की प्रतीक्षा कर रहे हैं. वे अब सोच रहे हैं कि समाधान हिन्दू ज्ञान एवं परम्परा में ही मिलेगा.

हिन्दू और बौद्ध मतों के बंधुत्व पर अपने ओजस्वी उद्बोधन में 14वें परम पावन दलाई लामा ने स्वयं को अच्छा हिन्दू बताते हुए कहा कि दोनों मत आध्यात्मिक भाई हैं. साथ ही, हिन्दू तंत्र और बुद्ध तंत्र में काफी समानतायें हैं. दलाई लामा ने आत्मा और अनात्मा के विषय को नितांत निजी आस्था का मामला बताया. उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान एवं पूर्ण विकसित दर्शन को आधुनिक विश्व के लिये अति प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह विश्व को एकसमान मानव होने का बोध कराते हुए धार्मिक विश्वासों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान करने में पूर्ण समर्थ है. उन्होंने इसके अहिंसा और धार्मिक समरसता के तत्वों को बहुत आवश्यक बताया.

विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक श्री अशोक सिंघल ने अजेय हिन्दू निर्माण के परिषद के संकल्प पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारत को 15 अगस्त को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी जो महर्षि अरविंद का जन्म दिन था. महर्षि अरविंद ने कहा था कि केवल राजनीतिक स्वातंत्र्य मिला है. अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक स्वाधीनता के लिये स्वातंत्र्य समर से भी बड़ा संघर्ष करना पड़ेगा. परिषद उसी दिशा में गोरक्षा, गंगा, एकल विद्यालय और श्री राम जन्म भूमि आंदोलन के माध्यम से अजेय हिन्दू शक्ति के निर्माण में जुटी है. श्री सिंघल ने जब सगर्व यह कहा कि 800 वर्ष बाद पृथ्वीराज सिंह चौहान के बाद हिन्दू स्वाभिमानियों के पास सत्ता आई है तो सारा सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा. उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि हिन्दू शक्ति ने संसार में कभी हिंसक रूप नहीं लिया और न कभी लेगी.

विश्व हिन्दू परिषद भारत के संयुक्त महासचिव स्वामी विज्ञानानंद ने विश्व हिन्दू कांग्रेस की आयोजन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. नॉर्दर्न प्रॉविंस, श्रीलंका के मुख्यमंत्री श्री सीवी विग्नेश्वरन ने भी भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को विश्व भर में फैलाने पर जोर दिया.

कार्यक्रम में हिन्दू धर्म आचार्य सभा के संयोजक स्वामी दयानंद सरस्वती अस्वस्थता के कारण उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उनका संदेश पढ़कर सुनाया गया.

प्रबोधन पत्रिका के संपादक श्री शरदेन्दु की पुस्तक प्रबोधन का परम पूज्य सरसंघचालक और परम पावन दलाई लामा ने विमोचन किया. विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री राघव रेड्डी ने डॉ. भागवत और दलाई लामा जी को सम्मानित किया. कार्यक्रम में सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी, सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति उल्लेखनीय थी. कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अपर्णा वास्त्रेय और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन समिति के उपाध्यक्ष श्री नरेश कुमार ने किया.

भारत की सभ्यता व संस्कृति की सुरक्षा के संकल्प के साथ विश्व हिन्दू कांग्रेस सम्पन्न

नई दिल्ली 23 नवंबर – तीन दिवसीय विश्व हिन्दू कांग्रेस का समापन आज यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्याजी) जोशी के इस आह्वान के साथ हुआ कि भारत की सभ्यता और संस्कृति को विश्व भर में सुरक्षित रखते हुए सारे विश्व के समक्ष अपनी पहचान बनाये रखने की चुनौती का डटकर मुकाबला किया जाये. सरकार्यवाह ने विश्वास व्यक्त किया कि संसार के कोने – कोने से यहां आये प्रतिनिधियों के माध्यम से सारा विश्व हिन्दुत्व को समझेगा और वह हिन्दुत्व के साथ खड़ा होगा.

श्री भय्याजी जोशी ने कहा, “ हमारी आइडेंटिटी क्या है, यह दो शब्दों से व्यक्त होती है, सभ्यता एवं संस्कृति. इसलिये आज कोई चुनौती है, तो इस सभ्यता और संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए सारे विश्व के सामने हम अपनी पहचान बनाये रखें. हमने सारे विश्व को एक संदेश दिया है. जो दुर्बल हैं उन दुर्बलों की सुरक्षा करना, ऐसे दुर्बलों की रक्षा करने लिये हिन्दू समाज है. केवल दुर्बलों की ही रक्षा नहीं, प्रकृति की रक्षा भी सारे विश्व को भारत का संदेश है. टु प्रोटेक्ट अवर नेचर, दिस इज अवर कल्चर. इसी को बचाकर रखना है. पूरी दुनिया में अगर कोई चुनौती है, कोई प्रश्न है तो यही है कि शेष विश्व शांति के मार्ग पर कैसे चलेगा.”

सरकार्यवाह ने कहा कि अगर कुछ संकट है तो वह यही है कि दुनिया भर में अपनी पहचान को सुरक्षित कैसे रखा जाये. उन्होंने कांग्रेस में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को हिन्दू समाज के प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्हें पशुता की ओर बढ़ती विश्व-प्रवृति को मानवता का और संकीर्णता के बजाय उदार व व्यापक हिंन्दू विचार के संदेश पूरे विश्व को देने का आह्वान किया, क्योंकि यही विश्व की शांति और कल्याण का रास्ता है.

भय्या जी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी की एक कविता की यह पंक्ति उद्धृत की ‘कभी एक थे हम हुए आज इतने, नहीं तब डरे थे तो अब क्या डरेंगे. वंदन करते हैं भविष्य का, वर्तमान है अपना,’ और कहा इस देश की और हिन्दू समाज की स्थिति को बदलने के लिये ही यह काम शुरू हुआ है. उन्होंने कहा, “ हिन्दू सोसायटी इज ग्रोइंग, स्ट्रैंथनिंग, आई थिंक इट इज ओनली ए स्टेज ऑॅफ हिन्दू सोसायटी टु कम. यही इसकी नियति है, यही इसके भाग्य में है”.

समापन सत्र में विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि परिषद को शिक्षा, चिकित्सा और बिछुड़े बंधुओं को पुन: अपने साथ लाने के काम पर ध्यान केन्द्रित करना समय की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि न केवल भारत में बल्कि सारी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में हिंदुओं को भय, लालच और दबाव में ईसाई और इस्लाम धर्म में धर्मांतरित किया गया है. परिषद ऐसी कार्य योजना बना रही है जिससे हरप कस्बे और नगर में हिंदुओं को पूरी सुरक्षा हासिल हो.

समापन सत्र में विभिन्न प्रतिनिधियों ने हिन्दू समाज को मजबूत बनाने के लिये संक्षेप में अपने विचार और सुझाव भी प्रस्तुत किये.