श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

१५ जून, २०११ अमरनाथ यात्रा प्रारंभ होना ही चाहिए; शिवजी मुहूर्त के देवाधिदेव महादेव हैं!

डॉ पंडित श्री कामेश्वर जी उपाध्याय, संयोजक, अखिल भारतीय विद्वत परिषद्, काशी, ज्योतिषाचार्य: 094158 10802

१५ जून, २०११ अमरनाथ यात्रा प्रारंभ होना ही चाहिए; शिवजी मुहूर्त के देवाधिदेव महादेव हैं!

१. यामल ग्रंथ और बृहददैवतरंजन आदि ग्रंथों के अनुसार: किसी विशिष्ट अत्यंत शुभ एवं सुप्रसिद्ध तीर्थोंमें यदि कोई परंपरा चली आ रही है, तो मुहूर्तों के कारण परंपरा को रोका नहीं जाता है – उदाहरण के नाते: अक्षय्य तृतीया के दिन देशभरमें सामूहिक यज्ञोपवीत उपनयन संस्कार की परंपरा है. मुहूर्त के कारण यह परंपरा रूकती नहीं है!

२. कोई भी यात्रा को मुहूर्त का हवाला देकर रोकना यह धार्मिक परंपरा की अवहेलना है! मुहूर्त के कारण परंपरा को रोका नहीं जाता.

३. देवाधिदेव महादेव मुहूर्त के देवता है और उन की पूजा यात्रा के लिए सर्व मुहूर्त नतमस्तक होकर शुभ हो जाते हैं! फिर शिवजी की प्रिय पौर्णिमा अशुभ हो ही नहीं सकती, भद्रा भी अभद्र नहीं रहते तथा शिवजी के माथे पर विराजमान चन्द्र भी ग्रसित हो तो भी शिवभक्तों को यात्रा के शुभ फल ही देते हैं!

४. काशी में निर्जला एकादशी के दिन सभी नदियों से तीर्थ लाकर, माँ गंगा जी के तट पर उन की पूजा कर, तदनंतर उन कलशों की कलश यात्रा निकलती है और उन पवित्र जलोंसे काशी विश्वनाथ का अभिषेक किया जाता है. काशी खंड में दी गयी यह यात्रा निर्जला एकादशी को ही होती है और तब बाकी अन्य मुहूर्त निरर्थ हो जाते है!