श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विहिप-केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक हरिद्वार (उत्तराखंड)

विहिप-केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक

ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया व चतुर्थी 11, 12 जून, 2013 – कच्छी आश्रम, भारत माता मंदिर के पास, सप्त सरोवर मार्ग, हरिद्वार (उत्तराखंड)

KMM Baithak Haridwar-1विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की दो दिवसीय बैठक आज प्रातः कच्छी आश्रम, सप्त सरोवर में आरंभ हुई। बैठक का उदघाटन निवर्तमान शंकराचार्य पूज्य म.म. सत्यमित्रानंद जी महाराज एवं विहिप के कार्याध्यक्ष डा. प्रवीणभाई तोगडि़या, अशोकराव चैगुले के द्वारा हुआ। सत्र की अध्यक्षता ज्योतिष्पीठाधीश्वर ज.गु. शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने की। द्वितीय सत्र दोपहर 3 बजे से प्रारंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता जगद्गुरू रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य जी ने की। बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए विहिप के संरक्षक श्री अशोक जी सिंहल ने विस्तार से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के इतिहास एवं वर्तमान परिस्थिति का वर्णन करते हुए पू. संतों से अनुरोध किया कि अब समय आ गया है जब हमें निर्णायक संघर्ष करते हुए श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प पूर्ण करना होगा। यदि आवश्यकता पडी तो इसके लिए ऐसी संसद का ही निर्माण क्यों न करना पडे जो राम मंदिर के लिए कानून पारित करने में जरा भी संकोच न करे। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए परमार्थ आश्रम के परामाध्यक्ष भूतपूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज ने कहा कि जब न्यायालय से यह सिद्ध हो चुका है कि विवादित स्थल ही भगवान श्रीराम का जन्मभूमि है, जन्मभूमि स्वयं में देवता है, विवादित ढांचा हिन्दू धार्मिक स्थल पर इस्लाम के नियमों के विरूद्ध बनाया गया था, मुस्लिम समाज की याचिका को खारिज कर दिया गया और यह सिद्ध पाया गया कि एकमात्र रामलला ही संपूर्ण 70 एकड भूमि के मालिक हैं।DSC08176 सरकार भी उच्चतम न्यायालय को दिए गए शपथ पत्र से प्रतिपद्ध है कि यदि यह सिद्ध हो जाता है कि विवादित स्थल पर कभी कोई मंदिर/हिन्दू उपासना स्थल था तो सरकार की कार्रवाई हिन्दू भावनाओं के अनुरूप होगी। अतः कोई कारण नहीं है कि मंदिर निर्माण में कोई विलम्ब हो। इस हेतु पूरी 70 एकड़ भूमि कानून बनाकर हिन्दू समाज को सौंपी जाए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मार्गदर्शक मण्डल की यह घोषणा है कि 84 कोस परिक्रमा की भूमि हिन्दू समाज के लिए पुण्य क्षेत्र है, हिन्दू समाज उसकी परिक्रमा करता है। संपूर्ण 84 कोस परिक्रमा के अंदर कोई भी इस्लामिक प्रतीक स्वीकार नहीं होगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि न्यायालय की लंबी प्रक्रिया के कारण शीघ्र निर्णय नहीं आ सकेगा, हिन्दू समाज शीघ्रातिशीघ्र मंदिर निर्माण चाहता है अतः सरकर से आग्रह है कि संसद के मानसून सत्र में ही कानून बनाकर अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की सभी बाधाएं दूर की जाएं। यदि यह मांग नहीं मानी गई तो हिन्दू समाज उग्र आन्दोलन करने को बाध्य होगा।

DSC08215प्रस्ताव के प्रस्तुत होने के पश्चात देश के कोने-कोने से आए संत महानुभावों ने इस पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए अपना यह स्पष्ट मत व्यक्त किया कि यदि सरकार मार्गदर्शक मण्डल द्वारा किए गए आग्रह को स्वीकार करके ठोस कदम नहीं उठाती है और मानसून सत्र तक कोई परिणाम सामने नहीं दिखाई देता तो हम सभी संतजन श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए सब प्रकार का बलिदान देने के लिए तैयार हैं। इस हेतु पूरे देश में व्यापक जन जागरण अभियान चलाया जाए। अयोध्या के चारों ओर 84 कोस परिक्रमा क्षेत्र में और साथ ही साथ देश के गांव गांव तक व्यापक जन जागरण का अभियान चलाकर सरकार को बाध्य करनेवाला कदम उठाया जाए।

द्वितीय सत्र में विशेष रूप से उपस्थित हुए योगऋषि बाबा रामदेव जी ने अपने संबोधन में कहा कि ये सत्ताएं बडी धोखेबाज और क्रूर होती हैं। हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि सत्ता अनुकूल हो जायेगी तो राम मंदिर का निर्माण हो जायेगा। सत्ता अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें KMM Baithak Haridwar-0राम मंदिर बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए। आंदोलन में सब प्रकार की हानियां होती ही हैं उनकी परवाह किए बगैर आगे बढना चाहिए और आंदोलन तब तक नहीं रूकना चाहिए जब तक कि राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता। एकमत से सभी पूज्य संतों ने यह कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जोभी कार्यक्रम और निर्णायक आंदोलन निश्चित किया जायेगा चाहे वह यात्रा के रूप में हो चाहे कूच के रूप में हो हर कीमत पर संत अपनी सभी प्राथमिकताएं छोडकर इस अभियान को सफल करेंगे।

प्रथम सत्र के अध्यक्ष ज.गु. शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज तथा द्वितीय सत्र के अध्यक्ष पूज्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने सभी संतों से आग्रह किया कि वह इस अभियान के साथ पूरी तरह से जुटकर आवश्यकता पडती है तो देश के कोने-कोने में जाकर जन जागरण और जरूरत पडने पर सत्ता से टकराने के लिए भी तैयार रहें। बैठक में पू.राघवाचार्य जी महाराज, श्री रामविलासदास जी वेदान्ती, म.म. विशोकानंद जी, म.म. सुरेशदास जी, भूमापीठाधीश्वर अच्युतानंद जी महाराज, म.म. अखिलेश्वरानंद जी, म.म. उमाकांतानाथ जी, डाॅ. रामेश्वरदास श्रीवैष्णव, पू. गोविन्द देव जी महाराज, महतं रमेशदास जी महाराज, बिहारीदास जी महाराज वृन्दावन, राम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष मणिराम दास DSC08170छावनी के श्री कमलनयन दास जी महाराज, म.म. हरिचेतनानंद जी महाराज, जोधपुर से अमृतराम जी महाराज, आन्ध्रप्रदेश से संघराम जी महाराज, सच्चा आश्रम के पूज्य गोपाल बाबा जी महाराज, जूना अखाडा के स्वामी परशुराम जी महाराज, म.म. विद्यानंद जी, असम के पूज्य जनानंद जी महाराज, छत्तीसगढ से साध्वी छत्रकला, आन्ध्रप्रदेश से शिवस्वामी महाराज, जम्मू से पधारे दिव्यानंद जी महाराज, म.म. साध्वी वैदेही जी एवं गीतामनीषी म.म. ज्ञानानंद जी महराज ने अपने विचार आज की बैठक में प्रस्तुत किए। बैठक का संचालन केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के संयोजक एवं विहिप केन्द्रीय मंत्री श्री जीवेश्वर मिश्र ने किया।

बैठक में देश के कोने-कोने से आए हुए प्रमुख संतों के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री श्री चम्पतराय, संगठन महामंत्री श्री दिनेशचन्द्र, संयुक्त महामंत्री विनायकराव देशपाण्डे, वाई. राघवुलू, केन्द्रीय उपाध्यक्ष बालकृष्ण नाईक, ओमप्रकाश सिंहल, केन्द्रीय मंत्री सर्वश्री जीवेश्वर मिश्र, धर्मनारायण शर्मा, कोटेश्वर शर्मा, जुगलकिशोर, ओमप्रकाश गर्ग, उमाशंकर शर्मा, राजेन्द्र सिंह पंकज, रविदेव आनंद, केन्द्रीय सहमंत्री सर्वश्री अशोक तिवारी, आनंद हरबोला, सपन मुखर्जी, राधाकृष्ण मनोडी, साध्वी कमलेश भारती सहित देशभर से आए धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख भी उपस्थित रहे।

कल की बैठक में कार्यक्रम को अंतिम स्वरूप एवं योजना घोषित की जायेगी।

मार्गदर्शक मण्डल बैठक में संतों के विचारों का सारांश

भारत माता मन्दिर के संस्थापक पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता ज0गु0 शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज, ज्योतिष्पीठ-हिमालय ने की। विहिप केन्द्रीय पदाधिकारियों ने संतों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ0 प्रवीणभाई तोगडिया ने कार्यक्रम का शुभारंभ अपने उदबोधन से किया। जिसमें उन्होंने कहा कि हमें श्रीलंका, अमेरिका नहीं सांस्कृतिक मूल्यों वाला ही भारत चाहिए।

पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज ने श्री अशोक सिंहल जी को श्रीहनुमान जी महाराज की पीतल की मूर्ति भेंट दी जिससे हनुमत् शक्ति का उदभव शीघ्र ही सारे राष्ट्र में हो।

पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज ने भारत में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से हुई वार्तालाप का सार बताया तथा कहा कि मक्का के 25 कि0मी0 के क्षेत्र में गैरमुस्लिम अगर प्रवेश कर दे तो उसका सिर काट दिया जाता है लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं। बस हम यही चाहते हैं कि 84 कोस के अंदर कोई इस्लामिक सेण्टर न बने। अयोध्या में एक दर्जन मस्जिदें हैं जिनमें कोई मुस्लिम नमाज तक पढने नहीं जाता फिर राम मंदिर को मुद्दा बनाना ठीक नहीं।

दिल्ली के रामलीला मैदान में जनसमर्थित संतों द्वारा क्रम-क्रम में अनशन किया जायेगा जिससे सारे देश एवं विश्व की मीडिया द्वारा जन-जन को अपना मंदिर का संदेश पहंुचे।

विहिप के संरक्षक श्री अशोक जी सिंहल ने कहा कि जब न्यायालय के न्यायाधीशों ने एकमत से कह दिया कि यह जगह श्रीराम जन्मभूमि का स्थान ही है तब भी रामलला आज कपड़े के टेण्ट में विराजमान हैं। इससे बड़ा हिन्दू समाज का कया दुर्भाग्य हो सकता है ? अब समय आ गया है कि देश के अंदर एक ऐसा ज्वार पैदा हो कि कोई भी सरकार श्रीराम मंदिर को रोकने का साहस न कर सके। सन् 1528 (पौने पांच सौ वर्षों) से संघर्ष रामलला मंदिर के अस्तित्व को लेकर चलता रहा, लेकिन अब संत समाज मार्गदर्शन करने में कुछ कदम उठाने हेतु रास्ता बतायें।

परमार्थ आश्रम हरिद्वार के पूज्य स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पूज्य संतांे ने ही पहले श्रीराम मंदिर का मुद्दा हाथ में लिया था, अब फिर उन्हंे ही यह मुद्दा अपने हाथ में लेना होगा। सन् 1885 में पहला मुकदमा गया था कोर्ट में जिसके 128 वर्ष व्यतीत हो गए। अब कब तक धैर्य हम रखेंगे। श्रीराम मंदिर का मुद्दा कोई सामान्य मुद्दा नहीं बल्कि आस्था का मुद्दा है। आस्थाएं बनती हैं, टूटती नहीं हैं। श्रीराम मंदिर का मुद्दा हमारे लिए आस्था का मुद्दा है जो कि कभी टूट नहीं सकता।

अयोध्या को ही केन्द्र बनाया जाए जिसमें सारे संत एकत्रित होकर श्रीराम मंदिर हेतु एकजुट हों। इसी मानसून सत्र में विधेयक लाया जाए, अगर नहीं लाते तो हम संघर्ष करें। नई सरकार बनाने का प्रयास करें जो श्रीराम मंदिर हेतु संसद में विधेयक पास कराये। अगर कोई सरकार श्रीराम मंदिर बनाने में सहयोग नहीं करती तो हमें पुनः आन्दोलन का सहारा लेना पड़ेगा।

राजस्थान से पधारे पूज्य स्वामी राघवाचार्य जी ने कहा-देश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र मंे यह संदेश जाये कि जो श्रीराम मंदिर बनाने का सहयोग करे ऐसे ही प्रतिनिधियों को नेतृत्व प्रदान किया जाए। श्रीराम मंदिर के बनने में किसी तरह का विलंब न किया जाए। इस आंदोलन से जन-जन को जोड़ा जाए।

अयोध्या से पधारे पूज्य स्वामी डॉ0 रामविलासदास वेदान्ती जी महाराज ने कहा कि तथाकथित नेता तथा तथाकथित धर्माचार्य अयोध्या की पवित्र भूमि पर मस्जिद बनाने हेतु मुस्लिम तुष्टिीकरण की नीति को पूरा करने हेतु कांग्रेस नेता सोनिया गांधी तथा उ0प्र0 के नेता मुलायम सिंह यादव के साथ लगे हुए हैं जिसे किसी भी स्तर पर सफल न होने दिया जाए। इसके लिए 84 कोस में जो गांव आते हैं उनमें धर्माचार्य तथा पूज्य संतांे द्वारा जन-जागरण किया जाए। ग्रामवासियों को बताया जाए कि 84 कोस के क्षेत्र में बाबरी मस्जिद नहीं बनानी देनी चाहिए। उ0प्र0 सरकार द्वारा ऐसा भय पैदा किया जा रहा है हिन्दुओं के अंदर कि वे मुस्लिमों के विपरीत जाने से कतराते हैं।

बीकानेर के महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद जी महाराज ने कहा कि समस्या बहुत पुरानी है। पहले भी मां सीता के अपहरण का मुद्दा था। अब श्रीराम जी के मंदिर का मुद्दा है। इसके लिए रास्ता वही अपनाना पडेगा, जन-जन को संगठित करके श्रीराम मंदिर हेतु खड़ा करना होगा। भाईचारे के भ्रम से निकला जाये क्योंकि एक बार नहीं अपितु असंख्य बार मुस्लिमों ने भाईचारे की भावना पर बड़ा भारी कुठाराघात किया है।

अनंतश्री विभूषित भूमापीठाधीश्वर पूज्य स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि हमें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए कि आसुरी प्रवृत्ति वाले हमारे ऊपर हावी न हो पायें। हमें अपनी शक्ति बढाने का भरपूर प्रयत्न करना चाहिए।

जबलपुर से पधारे म0म0 पूज्य स्वामी अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि युवाओं के पास में आज तकनीकि सुविधाएं ज्यादा हैं। वे हर पल लैपटाप, टेबलेट, संचार के अन्य माध्यम से देश की हर घटना को देखते हैं। हमें जरूरत है कि हम युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से अवगत करायें। युवा संतों का प्रतिनिधित्व अब युवाओं को मार्गदर्शन हेत उभरकर आये। सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि जब यह सिद्ध हो गया कि यह स्थान श्रीरामलला का है तो किस आधार पर जमीन का बंटवारा तीन हिस्सों पर होने की बात कही जा रही है ? अयोध्या के गांव के आसपास जन जागरण हो लेकिन सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में भी आंदोलन हो। पूर्व में जैसे संतों द्वारा जन-जागरण हुआ था वैसे पुनः होना चाहिए।

महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी उमाकांतानंद जी महाराज ने कहा कि आज जरूरत है कि हिन्दुओं को नकारात्मक तत्वों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करके समाज को बताया जाए। मुस्लिमों द्वारा बताया जा रहा कि हमारे मोहम्मद साहब कल्कि अवतार है तथा मक्का अवतार भूमि है। जिससे भोले-भाले हिन्दू भटक रहे हैं। हमें जरूरत है कि हम हिन्दुओं को जाग्रत करें तथा विजातीय (आसुरी) तत्वों से सावधान करे।

ऋषिकेश से पधारे पूज्य स्वामी डॉ0 रामेश्वरदास जी महाराज ने कहा-जिस प्रकार चाणक्य ने चन्द्रगुप्त तैयार करके समूची व्यवस्था परिवर्तित कर दी थी। उसी प्रकार संतजन नई पीढी को तैयार करके आगे लायें। संत स्वयं में राजनीति न करें बल्कि चाणक्य की भूमिका में रहकर चन्द्रगुप्त पैदा करें, इसलिए राजनीति पर संतों का नियंत्रण हो। तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी हमारा साथ नहीं देंगे। संसद भवन एवं विधानसभा भवन में इसके लिए हमें हिन्दूवादी भक्त प्रकृति के व्यक्तियों को आगे किया जाए। हमें आंदोलन करना ही पड़ेगा। लोकसभा में एनडीए और यूपीए दोनों ही दल मुस्लिम वोटों को महत्व देते हैं।

महाराष्ट्र के प्रख्यात संत पूज्य स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज ने कहा कि हम संसद में बहुमत नहीं बनाते तो हमारे सारे मंसूबों पर पानी फिर जायेगा, वर्तमान में राजनीति का हमारे देश में सबसे बड़ा प्रभाव है। राजनीति आज हमारे देश में शिक्षा, परिवार नियंत्रण, धर्म की परिभाषा सबको अपने अनुसार बना रही है। हम लोगों को संसद में जाने वाले लोग हिन्दू हितों का ध्यान रखने वाले हों इस बात का ध्यान रखें। हिन्दू नीति को मानने वाली सरकार को ही संसद में पहंुचायें यही एकमात्र विकल्प हमारे पास है। हमने (संतों ने) जिस समाज का अन्न खाया अब वक्त है कि हम मंदिर, मठों से निकलकर जनता को जाग्रत करें।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता करने वाले ज0गु0 शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने सत्र का समापन करते हुए कहा कि चुनाव में पहले लोकतंत्र रहता है, चुनाव के बाद पार्टीतंत्र रह जाता है। चातुर्मास के कारण संत बाहर न जा पायें तो संचार तकनीकि के माध्यम से जनता को जाग्रत करें। जहां तक हो सके संत क्षेत्रों में जाकर 84 कोस परिक्रमा के अन्तर्गत जनता को जाग्रत करें। दिल्ली में अनशन किया जाए, अनशन से शक्ति मिलती है। आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन भी किया जाए। प्रथम सत्र समाप्त हुआ।

दूसरे सत्र की अध्यक्षता पूज्य स्वामी ज0गु0 रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य जी महाराज, तुलसीपीठाधीश्वर, चित्रकूट ने की।

पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि राम मंदिर तब बनेगा जब संसद भवन में पहंुचने वालों के हृदय में राम मंदिर होगा। राजा ही सर्वोपरि होता है। इसलिए राजा हिन्दू संस्कृति को धारण करने वाला ही होना चाहिए।

श्री अशोक जी सिंहल ने कहा कि भाजपा एनडीए के बल पर कभी सरकार नहीं बना सकी। रामभक्तों के बल पर संसद में 180 लोगों को जिताकर भेजा था फिर संत जन जागरण करें तो 300 सदस्य संसद में आ सकते हैं।

अयोध्या से पधारे बड़े भक्तमाल के महंत कौशलकिशोर दास जी ने कहा कि विचारों का तालमेल हिन्दू समाज में नहीं है। इसलिए पहले हिन्दू समाज को आपसी सामंजस्य बैठाना चाहिए। अयोध्या कोई जीत नहीं सकता, अयोध्या से ही आन्दोलन आरंभ हो।

पूज्य स्वामी महंत रमेशदास जी महाराज ने कहा कि हमें एक ऐसा नेता, मार्गदर्शक मिले जो हमसे कहे कि ‘तुम हमे वोट दो, हम तुम्हें राम मंदिर देंगे।’

अयोध्या मणिरामदास छावनी के महंत पूज्य स्वामी कमलनयनदास जी महाराज ने कहा कि बड़ा दुःखद है कि नित्य-निरंतर हिन्दुओं की संख्या घटती जा रही है। इसी तरह चलता रहा तो हम अल्पसंख्यक हो जायेंगे। फिर पाकिस्तान, बांग्लादेश में जैसी दुर्दशा हिन्दुओं की हो रही है वही हमारी, इसी देश में होने लगेगी।

वृन्दावन के महतं पूज्य फूलडोल बिहारीदास जी महाराज ने कहा कि देश में हिन्दुवादी नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाये एवं हिन्दुत्व को धारण करने वालों को आगे राजनीति में लाया जाये।

उदासीन अखाड़े के महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद जी ने कहा कि प्रजा का सम्मान सुरक्षित नहीं है, संतों का सम्मान सुरक्षित नहीं है। पान गलने लगे तो उसे पलट देना चाहिए, रोटी जल जाये तो उसे पलट देना चाहिए इसी प्रकार सत्ता में बैठे लोग यदि बिगड़ जायें तो उन्हें भी पलट देना चाहिए। अब इस देश में जन जागरण करना होगा। ऐसे संतों को संसद में भेजा जाए जिन्हें राम मंदिर न बनने की पीड़ा हो। जो राम मंदिर बनाने में प्राण लगाने की भी बाजी लगाने में हिचकिचाएं नहीं। अभी शीघ्र ही ऐसी रूपरेखा बनाई जाये कि 2014 हमारा हो।

रामसनेही सम्प्रदाय जोधपुर से पधारे पूज्य स्वामी अमृतराम जी महाराज ने कहा कि सभी प्रांतांे में एक-दूसरे प्रांत से धर्माचार्यों का आना-जाना होता रहे जिससे प्रचार-प्रसार में अच्छा प्रभाव दिखेगा।

आन्ध्रप्रदेश के पूज्य स्वामी संग्राम जी महाराज ने कहा कि हमें हिन्दू जाति के अस्तित्व को लेकर सचेत रहना होगा। बेसुधी हटाई जाए।

प्रयाग से पधारे सच्चा आश्रम के पूज्य स्वामी गोपाल बाबा जी ने कहा कि जो इच्छा करो मन माहीं, राम कृपा कछु दुर्लभ नाहीं। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई द्वारा बताया कि भगवान राम के प्रति हिन्दू समाज में आस्था दृढ़ रहे। इस हेतु नयी पीढ़ी को संस्कारों की आवश्यकता है।

जूना अखाड़े के सचिव पूज्य स्वामी परशुराम जी महाराज ने कहा कि वर्तमान में आवश्यकता है जन-जाग्रति की, हिन्दू समाज को उसकी आस्था के विषय में श्रीराम मंदिर के प्रति जाग्रत किया जाए।

अयोध्या के दिगम्बर अखाड़े के महंत पूज्य स्वामी सुरेशदास जी महाराज ने कहा कि हम अब श्रीराम मंदिर हेतु मुस्लिमों से याचना नहीं करेंगे। मस्जिद तोड़ी युद्ध से मंदिर भी आन्दोलन से ही बनाया जाए।

महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी विज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि हिन्दू में सबके कल्याण की भावना है। इसलिए विजय हिन्दू की ही होगी। हिन्दू को राजनीति पर प्रभाव रखना होगा।

असम से पधारे सत्राधिकारी पूज्य स्वामी जनार्दन देव गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि राम मंदिर हेतु संगठित होकर सभी संतगण हिन्दू समाज का प्रतिनिधित्व करें तो जरूर सफलता मिलेगी।

छत्तीसगढ़ से पधारी कबीर पंथ की पूज्य साध्वी चन्द्रकला जी ने कहा कि पूरा छत्तीसगढ़ राम मंदिर हेतु तैयार है क्योंकि कौशल क्षेत्र के अन्तर्गत ही छत्तीसगढ़ आता है।

आन्ध्र से पधारे पूज्य शिव स्वामी जी ने कहा कि राम मंदिर बने यह समूचा हिन्दू चाहता है लेकिन नेतृत्व की पहंुच समाज तक नहीं जिससे हिन्दू समाज बेलगाम चल रहा।

जम्मू से पधारे पूज्य स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने कहा कि राजसत्ता ही एकमात्र विकल्प है। श्रीराम मंदिर बनने हेतु इसलिए संसद में हिन्दू हितों वाले नेता पहंुचे।

महामण्डलेश्वर पूज्य साध्वी मैत्रेयी यति जी ने कहा कि हमें चिंतन करना है कि जिन भगवान का हम कीर्तन कर रहे हैं वे भगवान आज टेण्ट में बैठे हैं। इसलिए भगवान को भव्य मंदिर में बैठाने हेतु प्राण-पण लगा दें।

ज0गु0 रामानुचार्य पूज्य स्वामी वृन्दावनदासाचार्य जी ने कहा कि ब्रह्मलीन पूज्य देवराहा बाबा का आशीर्वाद मा0 अशोक जी सिंहल को प्राप्त है, उन्होंने कहा था बच्चा ! आंधी चलाओ, कानून से राम मन्दिर का निर्माण होगा।

पातंजलियोगपीठाधीश्वर पूज्य बाबा रामदेव जी महाराज ने कहा कि बिना सत्ता के ही राम मंदिर बनेगा। राम मंदिर आंदोलन से ही बनेगा। सत्ता अनुकूल आए या प्रतिकूल राम मंदिर बनाने की दृढ़ता रखें। आन्दोलन में नुकसान नहीं देखा जाता, धन जन जो भी हो। प्रत्येक देश में वहां के धर्म तथा धर्माचार्यों का सम्मान है लेकिन भारत के संविधान में ऐसा नहीं है।

महामण्डलेश्वर गीतामनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण हमारी गरिमा का निर्माण है। जिसे दृढ निश्चय, प्रायोजित तरीके से पूर्ण किया जाए।

तुलसीपीठाधीश्वर पूज्य स्वामी रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि पश्चिम से आई हुई महिला हमारी शीर्ष सत्ता पर काबिज होकर देश चला रही है। इसलिए हमें तब तक विश्राम नहीं करना चाहिए जब तक राम मंदिर बना न लें। राम – ‘रा’ से राष्ट्र ‘म’ से मंगल अर्थात् राम से ही राष्ट्र का मंगल होगा। मैं स्वयं चातुर्मास से पदयात्रा के उद्घाटन के लिए अयोध्या जाने को तैयार हूँ।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता मेरठ से पधारे पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज, परमाध्यक्ष-गुरुकुल प्रभात आश्रम, मेरठ ने की।

अयोध्या के महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी प्रेमशंकर दास जी महाराज ने कहा भारत मां का आंचल नीलाम नहीं होने देंगे चाहे हमें अपनी जान ही क्यों न देनी पडे।

हरियाणा के पूज्य स्वामी रामस्वरूप दास जी महाराज ने कहा कि राम ने अयोध्या में जन्म लिया वह उनकी जन्मभूमि है। इसलिए वहां उनका मंदिर बनना ही चाहिए।

आन्ध्रा के पूज्य स्वामी सत्यानंद भारती जी ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए विहिप जो भी पद्धति बनायेगी उसे आन्ध्र के सारे संत कार्यान्वित करने को तत्पर रहेंगे।

राजस्थान के पूज्य स्वामी निरंजन नाथ जी महाराज ने कहा कि राम जन्मभूमि का शीघ्र कार्य हो जिसके लिए हम कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं।

उड़ीसा के पूज्य स्वामी परमानंद जी महाराज ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए हम साधु बहुत संख्या में आकर बड़ा से बड़ा बलिदान देने को तैयार हैं।

पश्चिम उड़ीसा के पूज्य स्वामी जीवन मुक्तानंद जी महाराज ने कहा कि उडीसा के नागरिक राम जन्मभूमि मन्दिर बनाने को तत्पर हैं।

गुजरात के पूज्य स्वामी शान्तिगिरि जी महाराज ने कहा कि तन-मन-धन से गुजरात के संत एवं नागरिक राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की सेवा करने को तैयार हैं।

हरियाणा के योगिराज पूज्य स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने कहा कि हरियाणा अपने संतों के साथ आने को तैयार हैं।

हिमाचल के पूज्य स्वामी गोविन्द दास जी महाराज ने कहा कि 100 संतों के साथ हम आने को तैयार हैं।

जम्मू के पूज्य स्वामी रामशरण दास जी महाराज ने कहा कि पद यात्रा में ज्यादा से ज्यादा संत आने को तैयार हैं।

वडोदरा-गुजरात दिगम्बर अखाड़े के पूज्य स्वामी गंगादास जी महाराज ने कहा कि मैं स्वयं जब आप कहें आने को तैयार रहूंगा।

उ0बिहार के पूज्य स्वामी विमलशरण जी महाराज ने कहा कि किशोरी जी की जन्मभूमि में अधिक से अधिक साधु आयेंगे।

दक्षिण बिहार से पधारे सासाराम के संत ने कहा कि दक्षिण बिहार से दो सौ संतों को लेकर अयोध्या परिक्रमा करने हेतु आऊँगा।

झारखण्ड के पूज्य स्वामी लक्ष्मीपुरी जी महाराज ने कहा कि धिक से अधिक साधु लाने का प्रयास रहेगा।

अयोध्या के पूज्य स्वामी रामशंकर दास जी महाराज ने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से नवयुवकों को भी जोड़ने का प्रयास करें।

अयोध्या के पूज्य स्वामी करुणानिधान शरण जी महाराज ने कहा कि राम जन्मभूमि पर मंदिर शीघ्र बने और उसके लिए सभी संतों में सुमति होनी चाहिए।

भारत माता मंदिर के संस्थापक पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि सुग्रीव ने जैसे वानरांे से कहा था कि सीताजी की खोज में चारों ओर जाओ उसी प्रकार साधु-संतों को अपने अनुयायियों को चारों ओर जाने का आदेश देना होगा। जन-जागरण करेंगे तभी श्रीराम मंदिर का कार्य शीघ्र पूर्ण होगा। 84 कोस की यात्रा परिवर्तन की यात्रा बने, मंदिर तो बने ही भगवान राम के चरित्र से लाखों का जीवन भी बने।

कैलाश पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने कहा कि केवल भाषण से श्रीराम मंदिर नहीं बनेगा बल्कि हमें कटिबद्ध होकर उस दिशा में कार्य करना पडेगा जो संतों के मंथन से निकली है।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य पूज्य स्वामी रामाधाराचार्य जी महाराज ने कहा कि जन जागरण के बिना कल्याण नहीं हो सकता। प्राचीन भारत में साधु-संत हमेशा जन जागरण करते थे जिससे भारत में धर्म जिन्दा था। अब भी हमें जन जागरण करने हेतु साधु संतों को भ्रमण करना पडेगा।

महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज ने कहा कि हमें केवल निमित्त बनना है मंदिर भगवान राम ही बनायेंगे।

महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव पूज्य स्वामी रविन्द्रपुरी जी महाराज ने कहा कि सारे ंसंत एकजुट होकर कार्य करेंगे तो हमें विश्वास है कि हम केन्द्र एवं राज्य सरकार के षडयन्त्र को सफल नहीं होने देंगे।

उदासीन अखाडे के कोठारी पूज्य महंत मोहनदास जी महाराज ने कहा कि विहिप के साथ हम राम मंदिर की सेवा के लिए तैयार हैं।

हरियाणा घीसा पंथ के पूज्य स्वामी राघवानंद जी महाराज ने कहा कि हम ज्यादा से ज्यादा संत लाने को तैयार हैं।

महाराष्ट्र के पूज्य स्वामी अनंत जी महाराज ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को विहिप जो भी नीति बनायेगी उसे पूर्ण तक पहंुचाने में एकजुट रहेंगे।

परमार्थ आश्रम, हरिद्वार के पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज ने कहा कि हिन्दू ताकत एकरूप में दिखे भले ही न लेकिन विरोधी भी महसूस करते हैं हिन्दुओं की ताकत को इसलिए हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है।

इंदौर के पूज्य स्वामी मनमोहन दास जी महाराज (राधे-राधे बाबा) ने कहा कि अधिक से अधिक साधु पदयात्रा में जाने का प्रयास करेंगे।

षड़दर्शन साधु समाज के अध्यक्ष पूज्य स्वामी दर्शन सिंह जी महाराज ने कहा कि हम तन-मन-धन से विहिप के साथ हैं।

जबलपुर के पूज्य स्वामी कालिदास जी महाराज ने कहा कि शीघ्र ही श्रीराम मंदिर निर्माण हो इसके लिए हम तत्पर तैयार हैं।

रीवा के पूज्य स्वामी रमेशमणि जी महाराज ने कहा कि हम विश्वास दिलाते हैं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में हमारे क्षेत्र से साधु संत अयोध्या आयेंगे।

मेरठ के पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि हमें सरकार को पूर्ण राम मन्दिर वाली सरकार बनानी है। बैसाखी वाली सरकार नहीं बनानी है। इसके साथ ही हरिद्वार के पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज द्वारा प्रथम सत्र में श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी प्रस्ताव को केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल उपवेशन का संचालन कर रहे पं. जीवेश्वर मिश्र ने प्रणव ध्वनि के साथ पारित कराकर शान्ति पाठ के बाद बैठक समाप्ति की घोषणा की।

दिनांक 12 जून, 2013

संतों की चेतावनी

सरकार मानसून सत्र में कानून बनाकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे

25 अगस्त से 13 सितम्बर, 2013 तक 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर संतों की परिक्रमा यात्रा

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की दूसरे दिन की बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन करते हुए श्रृंग्रेरी से पधारे पूज्य सत्यानंद जी भारती, अयोध्या से पधारे डॉ0 रामविलासदास वेदान्ती एवं संगठन महामंत्री दिनेशचन्द्र जी ने किया। बैठक की अध्यक्षता मेरठ के पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने की। कल की दो सत्रों की बैठक में पूज्य संतों द्वारा प्रस्तुत किए गए विचारों के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के निर्णायक संघर्ष की ओर कदम बढाने के प्रथम चरण की घोषणा करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री चम्पतराय ने कहा कि अयोध्या की 84 कोस क्षेत्र में हम किसी भी प्रकार का कोई इस्लामिक केन्द्र अथवा मस्जिद नहीं बनने देंगे क्योंकि यही अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा है। हम इस क्षेत्र में रहनेवाले लोगों को जन जागरण द्वारा इस क्षेत्र की गरिमा के प्रति चैतन्य करेंगे। यह कार्यक्रम साधु संतों के द्वारा परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा पदयात्रा के द्वारा किया जायेगा। यह यात्रा 25 अगस्त से आरंभ होकर 13 सितम्बर, 2013 तक पूर्ण होगी। परिक्रमा यात्रा के दौरान 84 कोसी क्षेत्र के सभी ग्रामों को इस यात्रा के साथ जोड़ा जायेगा। यात्रा के पडाव पर सत्संग का आयोजन होगा जहां क्षेत्रीय लोग संकल्प करेंगे कि वह अपने इस पावन भूमि के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हर कीमत पर करेंगे।

उपरोक्त कार्यक्रम के स्वरूप को बैठक में उपस्थित सभी प्रमुख पूज्य संतों द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। देश के कोने-कोने से आए हुए प्रत्येक प्रांत के संत महानुभावों ने इस यात्रा में अपने प्रांत की सहभागिता के संबंध में जानकारी दी। बैठक को संबोधित करते हुए भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद जी ने कहा कि जैसे सुग्रीव ने माता सीता को खोजने हेतु वानर सेना को चारों ओर जाने का निर्देश दिया था उसी प्रकार देश के संतों को स्वयं अपने को व अपने अनुयायियों को चारों ओर जन-जागरण करने के लिए जाना होगा जिससे कि पूरे देश में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए शक्ति तैयार हो। भगवान राम का मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र ही पूरा होगा।

पूज्य संतों ने सरकार को चेतावनी देते हुए एकमत से यह कहा कि सरकार आगामी वर्षाकालीन सत्र में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए अन्यथा संत मंदिर निर्माण के लिए प्रचण्ड जनांदोलन चलाने के लिए बाध्य होंगे जिसके परिणामों की जिम्मेवारी सरकार की ही होगी।

बैठक के अध्यक्ष स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए हमें देश में ऐसी सरकार बनानी होगी जो मंदिर निर्माण के लिए अनुकूल हो और वह सरकार भी वैसाखी वाली सरकार नहीं होनी चाहिए। पूज्य संतों ने जन-जागरण का जो संकल्प लिया है हम सब मिलकर देश में व्यापक जन-जागरण करेंगे जिससे अभीष्ट पूर्ण होगा।

बैठक के अंत में विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक श्री अशोक जी सिंहल ने देश के कोने-कोने से पधारे पूज्य संतों के चरणों में कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि आज की यह बैठक ऐतिहासिक है। राम जन्मभूमि के संघर्ष के अंतिम दौर में हैं। रामलला के मंदिर निर्माण के लिए 76 बार संघर्ष हुए जो कार्य साढे चार सौ वर्षों से नहीं हुआ था वह 1992 में संतों के आहवान पर नौजवानों ने अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए 5 घण्टे में कर दिखाया। आप सबने आज जो संकल्प लिया है निश्चित रूप से आनेवाले समय में वह पूर्ण होगा। आप सब अत्यन्त कष्ट उठाकर बैठक में उपस्थित हुए हैं, संतों के चरण विश्व हिन्दू परिषद के लिए सदैव पूज्य हैं। मैं सभी पूज्य संतों के श्रीचरणों में अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप सबका आशीष हम पर इसी प्रकार बना रहेगा।

बैठक को स्वामी प्रेमशंकरदास जी महाराज, अवधूत निरंजनदास जी महाराज, उडीसा से परमानंद जी महाराज, गुजरात के शांतिगिरि जी महाराज, झारखण्ड के लक्ष्मीपुरी जी महाराज, बिहार के विमलशरण जी महाराज, कैलाशपीठाधीश्वर स्वामी दिव्यानंद जी महाराज, ज0गु0 रामानंदाचार्य स्वामी रामाधार जी महाराज, म0म0 प्रज्ञानंद जी महाराज, महानिर्वाणी अखाडे के रवीन्द्रपुरी जी महाराज, उदासनी अखाडे के मोहनदास जी महाराज, इंदौर के राधे राधे बाबा, म0म0 हरिचैतन्यानंद जी महाराज, पूज्य दर्शनसिंह जी महाराज ने सम्बोधित किया और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए अपने अपने संकल्प को प्रकट किया।

बैठक का संचालन केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के संयोजक एवं विहिप केन्द्रीय मंत्री श्री जीवेश्वर मिश्र ने किया।

बैठक में देश के कोने-कोने से आए हुए प्रमुख संतों के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री श्री चम्पतराय, संगठन महामंत्री श्री दिनेशचन्द्र, संयुक्त महामंत्री विनायकराव देशपाण्डे, वाई0 राघवुलू, केन्द्रीय उपाध्यक्ष बालकृष्ण नाईक, ओमप्रकाश सिंहल, केन्द्रीय मंत्री सर्वश्री जीवेश्वर मिश्र, धर्मनारायण शर्मा, कोटेश्वर शर्मा, जुगलकिशोर, ओमप्रकाश गर्ग, उमाशंकर शर्मा, राजेन्द्र सिंह पंकज, रविदेव आनंद, केन्द्रीय सहमंत्री सर्वश्री अशोक तिवारी, आनंद हरबोला, सपन मुखर्जी, साध्वी कमलेश भारती सहित देशभर से आए धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख भी उपस्थित रहे।

जारीकर्ता

प्रकाश शर्मा (एडवोकेट) राष्ट्रीय प्रवक्ता-विश्व हिन्दू परिषद

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विहिप-केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक

ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया व चतुर्थी 11, 12 जून, 2013

कच्छी आश्रम, भारत माता मंदिर के पास, सप्त सरोवर मार्ग, हरिद्वार (उत्तराखंड)

प्रस्ताव क्र. – 1

विषय – अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण

प्रयाग महाकुंभ 2013 के शुभ अवसर पर आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मण्डल के पूजनीय संत-महात्माओं की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया था कि पुण्य नगरी अयोध्या में विराजित भगवान श्रीरामलला का कपडों द्वारा निर्मित मंदिर संतों के साथ-साथ संपूर्ण हिन्दू समाज को शर्मसार कर रहा है। जनसमाज यथाशीघ्र भगवान के दर्शन भव्य मंदिर में करना चाहता है। प्रयाग महाकुंभ में संतों के विशाल सम्मेलन के अवसर पर जनसमाज के सामने मार्गदर्शक मण्डल के संतों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के तीनों न्यायाधीशों ने एकमत से निर्णय दिया है कि–

1. विवादित स्थल ही भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है। जन्मभूमि स्वयं में देवता है और विधिक प्राणी है।

2. विवादित ढांचा किसी हिन्दू धार्मिक स्थल पर बनाया गया था।

3. विवादित ढांचा इस्लाम के नियमों के विरूद्ध बना था, इसलिए वह मस्जिद का रूप नहीं ले सकता।

* विद्वान न्यायाधीशों ने मुस्लिमों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था। इस प्रकार यह सिद्ध कर दिया था कि एकमात्र रामलला ही 70 एकड़ भूमिखण्ड के मालिक हैं।

* मार्गदर्शक मण्डल के निर्णय के अनुसार संत-महात्माओं का एक शिष्ट मण्डल महामहिम राष्ट्रपति से भेंट करने गया था। संतों ने राष्ट्रपति जी को एक ज्ञापन देते हुए कहा था कि भारत सरकार के अटार्नी जनरल ने 14 सितम्बर, 1994 को सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथ पत्र देकर कहा था कि–‘यदि यह सिद्ध होता है कि विवादित स्थल पर पहले कभी कोई मन्दिर/हिन्दू उपासना स्थल था तो सरकार की कार्रवाई हिन्दू भावना के अनुसार होगी।’ अतः उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद भारत सरकार की यह बाध्यता है कि वह अपने वचन का पालन करे और भारत सरकार 70 एकड़ भूमि मंदिर निर्माण हेतु हिन्दू समाज को शीघ्र कानून बनाकर सौंप दे।

* मार्गदर्शक मण्डल स्पष्ट रूप से घोषित करता है कि अयोध्या की 84 कोस परिक्रमा की भूमि हिन्दू समाज के लिए पुण्य क्षेत्र है। हिन्दू समाज पुण्य क्षेत्र की ही परिक्रमा करता है, इसलिए इस पुण्य क्षेत्र में हिन्दू समाज किसी भी प्रकार के इस्लामिक प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। यदि वहां कोई इस्लामिक प्रतीक बनाया गया तो वह बाबर के रूप में जाना जायेगा जिसके कारण हिन्दू-मुस्लिम विवाद हमेशा के लिए बना रहेगा।

* मार्गदर्शक मण्डल का यह सुविचारित मत है कि न्यायालयों की लम्बी प्रक्रिया से शीघ्र निर्णय नहीं आ सकेगा। इधर हिन्दू समाज रामलला को शीघ्रातिशीघ्र भव्य मंदिर में विराजित देखना चाहता है, इसलिए भारत सरकार से मार्गदर्शक मण्डल का आग्रह है कि संसद के मानसून सत्र में ही कानून बनाकर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के भव्य मंदिर निर्माण की सभी कानूनी बाधाएं दूर करें। यदि मार्गदर्शक मण्डल की यह मांग नहीं मानी गई तो हिन्दू समाज उग्र आन्दोलन करने को बाध्य होगा।