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महिलाएं समाज के संस्कारों का आधार हैं : दुर्गावाहिनी

  • जयपुर

 
 

  • महिलाएं समाज के संस्कारों का आधार हैं : दुर्गावाहिनी

नई दिल्ली, मई 29, 2011। महिलाएं समाज में संस्कारों का आधार स्तम्भ होती हैं। यदि भारत को शक्तिशाली बनाना है तो महिलाओं का चहुमुखी विकास अति आवश्यक है। बालिकाओं में संस्कार, सुरक्षा व सेवा की भावनाओं के संचार से ही उनमें आत्मविश्वास की भावना जागेगी और राष्ट्र मजबूत होगा। दुर्गावाहिनी देशभर में बालिकाओं में माँ दुर्गा की शक्ति का संचार कर राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है। दिल्ली में बढ़ रही महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं के संदर्भ में दुर्गावाहिनी का प्रशिक्षण शिविर और अधिक प्रासंगिक बन गया है।

उपरोक्त बातें विश्व हिन्दू परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा श्रीमती मीना ताई भट्ट ने आज पश्चिमी दिल्ली जनक पुरी क्षेत्र में आयोजित दुर्गावाहिनी प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहीं। शिविर की वर्गाधिकारी श्रीमती मंजू सेठ ने कहा कि महिलाओं के स्वावलम्बन, आत्मरक्षा तथा व्यक्तित्व विकास  के लिए आज लोग हजारों रूपये खर्च करके कोर्स करते हैं फिर भी जो प्रशिक्षण और आत्मविश्वास दुर्गावाहिनी के सात दिन के शिविर में हम देते हैं उनको कहीं नही मिल सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफ़ेसर मीनू कटारिया ने कहा कि हमारा मानना है कि एक लड़की को यदि संस्कारित किया जाये तो उसका प्रभाव दो परिवारों और उसके आसपास के बड़े वातावरण पर सकारात्मक पड़ता है। यदि मां संस्कारित नहीं होगी तो बच्चों में संस्कार की परिकल्पना निरर्थक है।

इस अवसर पर दुर्गा वाहिनी की क्षेत्रीय संयोजिका श्रीमती मालती शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर देश भर में लगभग 40 स्थानों पर हमने लगाये हैं जिनमें बालिकाओं और बड़ी महिलाओं के लिए योग, प्राणायाम, ध्यान, शारीरिक शिक्षा, नियुध्द (जूडो, कराटे), लक्ष्य भेद, बाहरी आक्रमणों से बचाव, प्राथमिक चिकित्सा इत्यादि का प्रशिक्षण देकर खेल ही खेल में उनको जीवन जीने की कला सिखायी जाती है।

बी-1 जनकपुरी स्थित माता हीरा देवी चौधरी सरस्वती बाल मन्दिर विद्यालय में गत गतवय मई से सप्ताह भर तक चले दुर्गावाहिनी प्रशिक्षण शिविर में 15 से 35 वर्ष की लडकियों को दुर्गावाहिनी व 35 से ऊपर की आयु वर्ग की महिलाओं को मातृशक्ति का प्रशिक्षण् दिया गया। शिविर में महिला सशक्ति करण, आदर्श हिन्दू परिवार, सत्संग, गउ रक्षा, जेहादी आतंकवाद, सामाजिक कुरीतियां व उनका उन्मूलन, आदर्श नारी, किशोरावस्था, स्वदेशी व्यक्तित्व विकास के अलावा अनेक समसामयिक विषयों पर संतों, महात्माओं विषय के विशेषज्ञों और प्रबुध्द वर्ग के लोगों का मार्ग दर्शन मिला। सत्संग, शक्तिसाधना व संस्कार केन्दों के माध्यमों से कैसे दुर्गावाहिनी अपने कार्यों का नियमित विस्तार करे यह बात प्रशिक्षणाथिर्यों को बताई गयी।

वर्ग की मुख्य शिक्षिका दुर्गावाहिनी दिल्ली की संयोजिका कुमारी अंजली के निर्देशन में बालिकाओं ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी हुई कलाओं का प्रदर्शन जब उपस्थित जनसमूह के समक्ष किया तो सभी मंत्रमुग्ध थे। इस अवसर पर सुदर्शन न्यूज चैनल के चेयरमैन श्री सुरेश चौहान, विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद, महामंत्री श्री सत्येन्द्र मोहन, संगठन मंत्री श्री करूणा प्रकाश, मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल, सह मीडिया प्रमुख श्री मनीष राय, प्रांत मंत्री व मातृशक्ति प्रभारी श्री अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष सेठ राम निवास गुप्ता, जिला मंत्री श्री कमलेश शुक्ल, मातृशक्ति प्रांत सहसंयोजिका श्रीमती श्रीवास्तव, दुर्गावाहिनी सह संयोजिक श्रीमती संजना चौधरी, योग व शारीरिक शिक्षक श्री शिवदत्त आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

  • दुर्गावाहिनी शौर्य प्रशिक्षण वर्ग – खामगाव, विदर्भ.

डॉ. आंबेडकरजी ने कहा था “वाचाल तर वाचाल” लेकिन आज किसी के पास पढने के लिए समय नहीं है. इस परिस्थिती में दुर्गा वाहिनी के वर्ग में आकर संस्कार ग्रहण करके स्वयं और समाज का संरक्षण करनेके लिए शौर्य, धैर्य, पराक्रम आत्मसात करनाहै. इसीलिए यह शौर्य प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाता है.सौ अंजलि ताई देशकरने अपने भाषण में कहा. यह वर्ग २९ मई से सरस्वती विद्या मंदिर खामगांव जिला बुलढाना विदर्भ में शुरू हुआ. उदघाटन कार्यक्रम में महेश्वरी महिला मंडल के सहसचिव सौ रजनिताई मोहता, श्री संतोष भाई दिद्वानिया, सौ अंजलिताई देशकर प्रांत महिला प्रमुख, सरस्वती विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य सौ साधनाताई काळे, प्रमुख महिला मार्गदर्शक श्री बाबुरावजी राजे, उपस्थित थे. श्री बाबुरावजी राजे ने कहा आज देव धर्म, देश के लिऐ श्रध्दा, प्रेम, निष्ठां जागृत करने की अवश्यकता है. यही काम दुर्गा वाहिनी प्रशिक्षण वर्ग से होनेवाला है.वर्ग संचालन समिती वर्गाधिकारी सौ अरुणाताई चारी, वर्ग की मुख्यशिक्षिका कु. स्वराली कुलकर्णी, वर्ग कार्यवाहिका सौ. फुलवंती कोरडे, बौध्दिक प्रमुख कु.श्रध्दा भदोरीया व्यवस्थापिका कु. दुर्गा बयास.

शिविर में विदर्भ प्रान्त के १५ जिले से ४२ प्रखंड से ५६ स्थानों से १३६ दुर्गा और २२ शिक्षिका वर्ग में सहभागी हुईं. वर्ग में श्री प्रशांत जी हरतालकर क्षेत्रीय संघटन मंत्री, श्री बापूजी खराटे जिला मंत्री, श्री बापू करंदिकर और श्री अमोल अंधरे विभाग संयोजक बजरंगदल उपस्थित रहें.