श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

तीर्थ पुरोहित महासंघ, धर्मयात्रा महासंघ का प्रथम सम्मेलन – उज्जैन

तीर्थ पुरोहित महासंघ (रजि.), धर्मयात्रा महासंघ (रजि.) का प्रथम सम्मेलन – उज्जैन

तीर्थ पुरोहित महासंघ (रजि.), धर्मयात्रा महासंघ (रजि.) के प्रथम सम्मेलन – उज्जैन के प्रवचन सभागार में 24,25 अप्रैल 2011 को किया गया । सम्मेलन में सम्पूर्ण भारत के प्रमुख 9 राज्यों से 122 तीर्थ पुरोहितों की सहभागिता रही । दो द्विवसीय इस सम्मेलन में वक्ताओं ने विभिन्न विषयों में बोलते हुये अपने उद्बोधन में तीर्थ पुरोहित के संबन्ध विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला, वहीं पर विभिन्न प्रस्ताओं पर भी विचार किया गया ।

1. प्रथम तीर्थाटन मंत्रालय का गठन के विषय पर बोलते हुये कहा कि आज सरकार/सरकारें पर्यटन मंत्रालय पर भारी-भरकम वजट पास करती है, वहीं पर तीर्थयात्री के विषय पर तनिक भी चिन्ता नहीं करती । यह अधिवेशन सरकार/सरकारों से मांग करता है कि तीर्थयात्री की चिन्ता करें और इसके लिये एक स्वतंत्र मंत्रालय का गठन करें तथा इसके लिये अलग स्वतंत्र बजट पारित करें । प्रथम तीर्थाटन मंत्रालय का प्रस्ताव आचार्य शेखर जी ने रखा । अनुमोदक: श्री जीवनलाल रिसावल

2. तीर्थ पवित्र नदियां/सरोवर प्रदूषण मुक्त का प्रस्ताव भी महासंघ के महामंत्री श्री प्रयाग नाथ चतुर्वेदी जी ने रखा और कहा कि हमारे पवित्र तीर्थ, नदियां, सरोवर जहां हमारी जीवन रेखा हुआ करती थी वह आज इतने प्रदूषण युक्त हो गये हैं कि उनका जल आज आजमन योग्य भी नहीं रहा है । अनुमोदक: श्री नारायण उपाध्याय

उद्घाटन के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के अ. संगठन महामंत्री जी ने संगठन के विषय पर प्रकाश डालते हुये कहा कि आज समय आ गया है कि तीर्थ पुरोहितों के संगठन को और सशक्त करने की आवश्यकता बहुत अधिक है । तीर्थों पर मजबूत सशक्त समितियों का गठन हो । हम सभी ने इस बात को स्वीकार किया और कहा कि हम सभी मिलकर सन् 2014 तक देश के 100 तीर्थों पर सशक्त समितियों का गठन करेंगे । 25 अप्रैल 2011 को विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री जी ने सम्मेलन के समापन के अवसर पर बोलते हुये कहा कि ’तीर्थ हमारे देश की आत्मा हैं‘ पर बल देते हुये कहा कि हमारे तीर्थ पर वास करने वाले तीर्थ पुरोहित संगठित हो जायेंगे तो देश फिर से विश्व गुरू हो जायेगा । उन्होंने हिन्दू हेल्प लाइन का जिक्र करते हुये कहा कि हिन्दू हेल्प लाइन के माध्यम से सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है । अतः हिन्दू हेल्प लाइन का महत्व बहुत अधिक है । पोथी परम्परा पर बोलते हुये कहा कि हम पोथी के बारे में विचार करें तो हम पायेंगे कि पोथी हमारे इतिहास का द्योतक है । आज पोथी को कोर्ट भी स्वीकार करता है, ये परम्परा जहां समाप्त हो गयी है, वहां पर इस परम्परा को पुनः शुरू किया जाए । अधिवेशन के समापन का उद्घोष करने हुये पूज्य आचार्य शेखर जी ने सभी को आवाहन करते हुये एकजुट होने का संकल्प कराया और कहा कि हम संगठित होंगे तो सम्पूर्ण देश एकजुट होगा ।