श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

राजा भोज की भोजशाला –
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी धार में स्थित भोजशाला की प्राचीन सरस्वती प्रतिमा अंग्रेजी काल में ही लन्दन पहुँचा दी गई थी। कालान्तर में मुसलमानों द्वारा भोजशाला में नमाज पढ़ी जाने लगी तथा मांस बिक्री का केन्द्र बनाकर पवित्र मन्दिर के चिन्हों को नष्ट करने के षड्यंत्र रचे जाने लगे। 6 दिसम्बर, 1996 को बजरंग दल ने भोजशाला को मुसलमानों के चंगुल से मुक्त कराकर उसके शुद्धिकरण की घोषणा कर दी। भोजशाला के चारों ओर सरकार ने बैरीकेड लगाकर व्यापक प्रबन्ध किए परन्तु 450 बजरंग दल के कार्यकर्ता भोजशाला में पहुँच गए और गिरफ्तारी दी।
हिन्दू देवी-देवताओं के चित्रों का व्यावसायिक दुरुपयोग –
व्यावसायिक स्तर पर विभिन्न उत्पादों पर हिन्दू देवी-देवताओं के चित्रों का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग होता है। बजरंग दल ने निर्णय किया कि बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, पान-मसाला, लाटरी व बम पटाखों पर हिन्दू देवी-देवताओं के चित्रों का प्रयोग बन्द कराएंगे। केवल जागरण व प्रेरणा जगाकर ही बहुत से उत्पादकों ने इन चित्रों का प्रयोग बन्द कर दिया।
देवी-देवताओं की अश्लील सी.डी. –
अप्रैल, 2006 में पानीपत में हिन्दू देवी-देवताओं पर अश्लील सी. डी./कैसेट बनाने के विरुद्ध स्थानीय सी.जी.एम. की अदालत में कैसेट कम्पनियों के विरुद्ध एक याचिका दायर की गई। नामजद कैसेट कम्पनियों के मालिकों ने 10 हजार कैसेटों को संगठन के सामने रखकर उसकी होली जलाई और शपथ ली कि भविष्य में ऐसी कैसेटों का निर्माण नहीं करेंगे, जिनसे देवी देवताओं का अपमान हो।
सौंदर्य प्रतियोगिताओं का विरोध –
नारी शरीर के भौंड़े प्रदर्शन व उसके व्यवसायीकरण के लिए सौंदर्य प्रतियोगिताओं के आयोजन की होड़ लग गई थी। बजरंग दल के सशक्त विरोध के कारण देश में छोटी-बड़ी ऐसी 18 प्रतियोगिताएं रद्द हुईं, कइयों के स्वरूप बदलने पड़े।
शबरी मलाई के यात्रियों पर बढ़ाया गया टैक्स –
केरल में सबरीमलाई तीर्थयात्रा पर आनेवाले यात्रियों पर सरकार ने टैक्स बढ़ाया, इसके विरुद्ध आन्दोलन किया। तिरुवन्नतपुरम् में दस हजार लोग धरने पर बैठे, सरकार ने टैक्स हटाया।
बंगाल में तीर्थयात्रियों पर लगाया गया टैक्स –
कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर में देवी के दर्शन के लिए आनेवाले तीर्थयात्रियों पर पश्चिम बंगाल सरकार ने कर लगाया था, इसके विरुद्ध हुए आन्दोलन के कारण सरकार ने कर वापस लिया।
ब्रह्मवरदा (उड़ीसा) का मुस्लिम सम्मेलन और विश्व हिन्दू परिषद –
उड़ीसा के एक अति साधारण गाँव ब्रह्मवरदा में मुस्लिम संगठनों ने 7, 8 व 9 दिसम्बर, 1996 को विश्व मुस्लिम सम्मेलन करने की घोषणा की। यह कार्यक्रम हिन्दुओं का धर्मान्तरण करने, भोजन के लिए गोहत्या करने एवं हिन्दू विरोधी वातावरण तैयार करने के लिए आयोजित किया गया था। इसके विरुद्ध चेतावनी दी गई, जन जागरण किया। सरकार ने मुसलमानों को उनके सम्मेलन की पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन देना चाहा परन्तु मुसलमानों ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा न करके सीधे विश्व हिन्दू परिषद के पास बातचीत का प्रस्ताव भेजा। विश्व हिन्दू परिषद एवं मुस्लिम नेताओं के बीच प्रशासन की उपस्थिति में हुई वार्ता में सम्मेलन आयोजित करने के लिए निम्नलिखित शर्तें स्वीकार कीं:-
01. सम्मेलन में गोहत्या की बात तो दूर किसी भी प्रकार का मांसाहार नहीं होना चाहिए।
02. मुस्लिम सम्मेलन में किसी प्रकार का हिन्दू विरोधी वक्तव्य नहीं होना चाहिए।
03. सम्मेलन के माध्यम से किसी प्रकार का धर्मान्तरण नहीं होना चाहिए।
उपरोक्त शर्तों के अनुसार सम्मेलन सम्पन्न हुआ। मुसलमान यह मानने को बाध्य हुए कि उनकी सुरक्षा की गारन्टी हिन्दू समाज के साथ सद्भावनापूर्ण सम्बन्धों में ही निहित है।
‘हकीकत‘ पुस्तक पर प्रतिबन्ध –
ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित संस्था द्वारा हिन्दू धर्म के विरुद्ध प्रकाशित पुस्तक ‘हकीकत‘ का विरोध किया गया। विरोध को देखते हुए पुलिस द्वारा संस्था के दो पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। राजस्थान सरकार ने अधिसूचना जारी कर इस पुस्तक पर प्रतिबन्ध लगाया। पंजाब में भी इस पुस्तक के विरुद्ध प्रदर्शन किए गए।
दत्तपीठ का प्रान्तीय सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड को दिया जाना –
दत्तपीठ (चिकमंगलूर-कर्नाटक) एक हिन्दू स्थान है जो कालान्तर में किन्हीं कारणों से मुस्लिमों के हाथ में चला गया किन्तु वहाँ दत्तात्रेय भगवान की पूजा-अर्चना निरन्तर की जाती रही। 1960 में कर्नाटक सरकार ने इस स्थान का वक्फ बोर्ड द्वारा अधिग्रहण कर लेने का आदेश दिया था किन्तु उस समय हिन्दू विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया। 1975 में सरकार ने पुनः प्रयास किया। स्थानीय हिन्दुओं ने इसके विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा दायर किया, न्यायालय ने सरकार के आदेश को अनुचित और असंवैधानिक घोषित कर दिया, सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की पर हाईकोर्ट द्वारा निचली अदालत के निर्णय को ही मान्य किया गया। उस स्थान की व्यवस्था सैय्यद पीर मोहम्मद शकादरी सज्जादे नशीन द्वारा की जाती रही है किन्तु 1975 के बाद व्यवस्था की आड़ में शकादरी द्वारा उस स्थान का इस्लामीकरण करने का प्रयास होता रहा। उस स्थान से दत्तात्रेय भगवान की मूर्ति, त्रिशूल और कमण्डल भी गायब कर दिया गया। साथ ही साथ हिन्दुओं को पूजा करने की सुविधा जो कि न्यायालय द्वारा प्रदत्त थी, वह भी बन्द कर दिया। पीठ से होने वाली आय का व्यक्तिगत उपयोग होने लगा। गुफा के बाहर स्थित आवासीय स्थान पर होटल खोल दिया गया जिसमें गोमांस परोसा जाने लगा। 1996 से बजरंग दल ने इस विषय को अपने हाथ में ले लिया। 1997 में सम्पूर्ण चिकमंगलूर जिले में जन-जागरण किया गया। 1998 में सम्पूर्ण प्रान्त में पांच यात्राएं निकाली गई जिसके फलस्वरूप उस वर्ष दत्त जयन्ती के दिन 25,000 से अधिक नवयुवक दत्त गुफा पर एकत्रित हो गए। यात्राओं में लगभग 6000 कि0मी0 की दूरी तय की गई, 700 से अधिक सभाएं हुईं जिनमें 3,50,000 लोगों ने सहभागिता रही। यात्राओं के दौरान एक भी स्थान पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई इससे सेक्युलर नेताओं की वे आशंकाएं निर्मूल हो गईं जिनमें वे यात्राओं के निकलने पर साम्प्रदायिक तनाव होने का आरोप लगा रहे थे।
ईसाई मिशनरियों द्वारा हो रहा धर्मान्तरण –
चंगाई सभाओं के माध्यम से ईसाई लोग हिन्दुओं का सामूहिक धर्मान्तरण करते रहे हैं। बजरंग दल द्वारा इसका विरोध किया गया। उसने पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हिमाचल आदि प्रान्तों के कई स्थानों पर चंगाई सभा का विरोध करके ऐसे आयोजन होने नहीं दिए। इसके अतिरिक्त मिशनरी स्कूलों के द्वारा हिन्दू चिन्हों पर रोक लगाने, मातृभाषा का प्रयोग करने, ईसाई साहित्य बांटने आदि के माध्यम से हिन्दुत्व की भावना को कमजोर करने का जो प्रयास किया जाता रहा है उसको कई स्थानों पर बजरंग दल द्वारा रोका गया।
1999 का ईसाई मिशनरी पोल खोलो अभियान –
हिन्दुत्व के बढ़ते प्रभाव एवं ईसाई मिशनरियों की खुलती पोल से भयभीत ईसाई मिशनरी और चर्च द्वारा परिषद के विरुद्ध एक प्रचार युद्ध चला दिया गया। कोई भी छोटी-बड़ी घटना जिसका सम्बन्ध ईसाई समुदाय से होता था उसमें अकारण परिषद और बजरंग दल को बदनाम करने का कुचक्र चलाया गया। झाबुआ (म0प्र0), झज्जर (हरियाणा) और डांग (गुजरात) की घटना में परिषद और बजरंग दल का नाम जबरदस्ती घसीटा गया। बजरंग दल ने इस चुनौती को स्वीकार कर वास्तविकता की जानकारी समाज को देने व ईसाई मिशनरियों के षड्यंत्र की वास्तविकता से परिचित कराने हेतु सम्पूर्ण देश में पत्रक वितरण किए और सभाएं तथा गोष्ठियाँ आयोजित कीं। आजादी के बाद से अब तक का मिशनरी चेहरा जनता के सामने उजागर किया।
आई. एस. आई. के विरोध में चेतावनी सप्ताह –
पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था ‘आई. एस. आई.‘ ने इस देश के आधे से अधिक जिले अपनी पकड़ में ले लिए हैं। इनकी व्यापकता व मजबूती का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में कहीं भी विस्फोट या हत्या करने के बाद भी इनके एजेन्ट पकड़े नहीं जाते। इस संस्था व उसके सहयोगियों के कारण देश की आन्तरिक व बाह्य सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। पाकिस्तान को चेतावनी देने व सरकार को चेताने के लिए बजरंग दल ने चेतावनी सप्ताह का आयोजन किया। सरकार को ज्ञापन देने, रैलियाँ निकालने, प्रदर्शन करने जैसे आयोजन किए गए। दिल्ली में 13 अगस्त को पाकिस्तान दूतावास पर प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। दिल्ली, हरियाणा के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश व राजस्थान के निकटवर्ती जिलों के 8000 कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया। महामहिम उपराष्ट्रपति को ज्ञापन व पाक दूतावास के अधिकारियों को चेतावनी पत्र दिया गया। चेतावनी सप्ताह में देश में छोटे-बड़े 140 कार्यक्रम किए गए, जिसमें 75,000 लोगों ने सहभागिता की।
पूज्य शंकराचार्य जी की गिरफ्तारी का विरोध
11 नवम्बर, 2004 की रात को दीपावली के अवसर पर कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु की पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर सम्पूर्ण देश का धर्मप्रेमी समाज स्तब्ध रह गया।
इस गिरफ्तारी का कारण कांचीपुरम के वरदराज मन्दिर के एक कर्मचारी की हत्या में शंकराचार्य जी की संलिप्तता को बताया गया। शंकराचार्य जी की गिरफ्तारी को भारत का सन्त समाज तथा उनके भक्तों और हिन्दू संस्थाओं ने इसे देश के राष्ट्रीय समाज के मानबिन्दुओं पर मर्मान्तक प्रहार माना। इस तथाकथित आरोप में कितनी सच्चाई रही यह तो निष्पक्ष जाँच से ही पता चल सकेगा परन्तु शंकराचार्य जी की गिरफ्तारी के समय के चयन, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और न्यायिक हिरासत में जेल भेजने, पुलिस कस्टडी में देने तथा जमानत याचिका बार-बार खारिज किए जाने से हिन्दू समाज आक्रोशित हो उठा। सम्पूर्ण देश में विरोध प्रदर्शन किए गए।
विश्व हिन्दू परिषद, की अगुवाई में भारत व भारत के बाहर के विविध हिन्दू संगठन, अखाड़ा परिषद जैसे प्रतिनिधि साधु संगठन तथा सभी पीठों के शंकराचार्य, सभी परम्पराओं के जगद्गुरु आचार्यों सहित ख्यातनाम कथाकार आशाराम बापू, सुधांशु महाराज, श्री रविशंकर जी (आर्ट आफ लिविंग) तथा पूर्व राष्ट्रपति श्री वेंकटरमन व पूर्व प्रधानमंत्रीद्वय श्री अटलबिहारी वाजपेयी एवं श्री चन्द्रशेखर को भी सड़क पर उतरने को विवश होना पड़ा। देशव्यापी धरना-उपवास के अलावा, भारत बन्द का भी आयोजन करना पड़ा।
विरोध की कुछ उल्लेखनीय घटनाएं इस प्रकार रहीं
* विश्व हिन्दू परिषद ने सरकार से मांग की कि पूज्य शंकराचार्य जी के विरुद्ध दायर सारे मुकदमें बिना शर्त वापस लिए जाएं तथा शासन द्वारा उनसे क्षमायाचना भी की जाए।
* पंजाब के अमृतसर, जालन्धर, लुधियाना, कपूरथला, मोगा, होशियारपुर, पठानकोट, बटाला, गुरुदासपुर, पटियाला, भठिंडा सहित सभी जिलों एवं चण्डीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया गया।
* जोधपुर में वाहन रैली निकाल कर आक्रोश व्यक्त किया गया। 26 स्थानों पर 4600 व्यक्तियों ने गिरफ्तारी दी, जिनमें 290 सन्त भी थे।
* चेन्नई की विरोध सभा में तमिलनाडु के साथ-साथ हैदराबाद, केरल, कन्याकुमारी तक के 25,000 से अधिक हिन्दू पहुँच गए।
* दिल्ली में जन्तर-मन्तर पर धरना दिया गया। 20 नवम्बर को 3 स्थानों पर सभाएं की गईं जिनमें हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, वृन्दावन, उज्जैन, इन्द्रप्रस्थ के 500 सन्तों ने भाग लिया। 21 नवम्बर को सभी सन्त रामलीला मैदान से एकत्रित रूप में पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों से पैदल चलते हुए गौरीशंकर मन्दिर पहुँचे। जहाँ उन्होंने गिरफ्तारी के विरोध में अपना रोष प्रकट किया।
* 15 नवम्बर, 2004 को चेन्नई में विरोध प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में 5000 महिला-पुरुष उपस्थित थे। 26 नवम्बर, 2004 को 10 स्थानों पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। 19 दिसम्बर, 2004 को एक दिवसीय उपवास का कार्यक्रम रखा गया। इसमें 1000 माताएं उपवास पर बैठीं। 01 दिसम्बर, 2004 को चेन्नई में एक विशाल विरोध सभा हुई। प्रान्त के सभी जिला केन्द्रों पर गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किए गए। 13 दिसम्बर, 2004 को चेन्नई की सार्वजनिक विरोध सभा में 5000 की उपस्थिति थी।

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