श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

प्रदर्शनी
जन सम्पर्क के लिए सम्मेलन, यात्राएँ, बैठकें, चिन्तन वर्ग किए जाते हैं। समाज प्रबोधन के लिए प्रदर्शनी भी उपयोगी है। गम्भीर विषयों को भी चित्र, मानचित्र के माध्यम से सरलता से समझा जा सकता है, इसी कारण समय-समय पर विभिन्न विषयों पर प्रदर्शनियाँ तैयार की गईं, लगाई गईं। कुछ का विवरण प्रस्तुत है-
* जोरहाट प्रदर्शनी 1970 – असम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन की झांकी प्रदर्शित की गई।
* धर्म प्रदर्शनी, 1970 – हाड़ौती सम्मेलन, कोटा के अवसर पर हिन्दू धर्म और हिन्दू संस्कृति की विशिष्टता दर्शाने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई।
* हिन्दू विश्व प्रदर्शनी, 1971 – प्रयाग में प्रान्त सम्मेलन के अवसर पर प्रदर्शनी लगाई गई।
* धर्म गंगा प्रदर्शनी, 1979 – जनवरी, 1979 में द्वितीय विश्व हिन्दू सम्मेलन के अवसर पर  लगाई गई यह प्रदर्शनी सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण बनी। 20 वर्गफूट क्षेत्रफल में लगी, देश के 40 कलाकारों ने दो मास तक प्रयाग में रहकर अहर्निश परिश्रम करके इसे बनाया।
* भारत गौरव प्रदर्शनी 1982 – किशनगंज, बिहार में अप्रैल, 1982 में हिन्दू सम्मेलन के अवसर पर इसे लगाया गया।
* हिन्दू-इन्दु-मुन्दु प्रदर्शनी, 1983 – धर्मस्थल, कर्नाटक में 1983 में आयोजित प्रान्त सम्मेलन में लगाई गई प्रदर्शनी में प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान काल तक की भारत की उत्थान-पतन की परिस्थितियों का आकर्षक दर्शन इसमें था।
* प्रथम एकात्मता यात्रा के अवसर पर महापुरुषों के चित्रों की एक प्रदर्शनी सम्पूर्ण भारत में दर्शायी गई थी।
* कला प्रदर्शनी, 1984 – न्यूयार्क में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू कान्फ्रेन्स के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी में कला के क्षेत्र में भारतीयों के योगदान को चित्रित किया गया था। 150 कलाकारों ने इसे बनाया था।
* कोपेनहेगन प्रदर्शनी, 1985 – कोपेनहेगन, डेनमार्क में आयोजित यूरोपियन हिन्दू सम्मेलन के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी में विश्व संस्कृति के संदर्भ में हिन्दू चिन्तन को दर्शाया गया था।
* जगद्गुरु भारत प्रदर्शनी, 1986 – राँची में आयोजित हिन्दू सम्मेलन के अवसर पर यह प्रदर्शनी लगाई गई थी।
* गौतम बुद्ध प्रदर्शनी, 1986 – बर्मा के हिन्दुओं ने इस प्रदर्शनी को तैयार किया था।
* धर्म गंगा प्रदर्शनी, 1988 – जम्मू कश्मीर में रूद्र महायज्ञ के अवसर पर यह प्रदर्शनी लगाई गई।
* वेद प्रदर्शनी, 1992 एवं 1998 – फरवरी, 1992 में प्रयागराज में तथा दिसम्बर, 1998 में दिल्ली में सम्पन्न हुए विश्व वेद सम्मेलन के अवसर पर इस प्रदर्शनी में वेद मंत्रों को चित्रों के द्वारा दर्शाया गया था। 1998 में बनाई गई प्रदर्शनी विश्वभर में पहुँची।
* काशी हिन्दू बौद्ध प्रदर्शनी, 2006 – हिन्दू बौद्ध सम्मेलन (धर्म-संस्कृति संगम) के अवसर पर इस प्रदर्शनी का आयोजन काशी विद्यापीठ और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के सहयोग से किया गया था।
* श्रीराम जन्मभूमि प्रदर्शनी, 2010 – श्रीराम जन्मभूमि पर उच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावनाएं होने पर मई, 2010 में तैयार की गई इस प्रदर्शनी में साहित्यिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक, वैज्ञानिक तथ्यों को चित्रित किया गया था।
* गऊरक्षा के प्रति हिन्दू समाज की भावनाओं को प्रकट करने के लिए तथा जिस निर्दयता के साथ कत्लखानों में गोवंश की हत्या की जाती है, उससे समाज को परिचित कराने के लिए प्रदर्शनी तैयार की गई थी।

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