श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

विशेष सम्पर्क विभाग
वर्ष 1990 में जब अयोध्या में प्रथम कारसेवा की घोषणा हुई तो सम्पूर्ण भारत को उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना था। विचार हुआ कि प्रशासन, पुलिस, न्यायपालिका, चिकित्सा क्षेत्र के प्रमुख पदाधिकारियों से प्रत्येक जिले में मिलकर सही जानकारी दी जाए और उन्हें बताया जाए कि देश से उत्तर प्रदेश में आने वाले कारसेवक अपने-अपने क्षेत्रों के सुसभ्य नागरिक हैं, रामभक्त हैं। उनके साथ उचित व्यवहार किया जाए। इस सम्पर्क अभियान का प्रभावी परिणाम सामने आया।
29-30 अप्रैल, 2003 को पुनः निर्णय हुआ कि सन्तों और परिषद के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधि मण्डल सभी राजनीतिक दलों के सांसदों, विधायकों तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों से मिलकर श्रीराम जन्मभूमि के सम्बन्ध में सही जानकारी दे और उनसे आग्रह करे कि वे सब श्रीराम जन्मभूमि के लिए संसद में एक विधेयक लाएं और श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण का रास्ता बनाएं। वैसे देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं और सरकार के प्रमुखों से सम्पर्क बनाने के लिए इससे पूर्व में भी सन्तों की एक समिति बनाई गई थी और इस समिति ने विभिन्न राजनेताओं सहित प्रधानमंत्री श्री नरसिंहराव से भेंट भी की थी।
परिषद के कार्य की दृष्टि से सम्पर्क की आवश्यकता और महत्ता को देखते हुए इस कार्य को नियमित रूप में चलाने की दृष्टि से 2003 में विश्व हिन्दू परिषद ने अलग से ‘विशेष सम्पर्क विभाग‘ की संरचना की।
सम्पर्क के क्षेत्र को व्यापक बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि यह कार्य देश के राजनेताओं के साथ-साथ क्षेत्र, भाषा, उपासना, सांस्कृतिक परम्परा, जाति-बिरादरी आदि के कारण निर्मित समाज के विविध वर्गों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रनेताओं, व्यावसायिक नेताओं, कृषकों, कर्मचारियों, उद्योगपतियों, प्रशासनिक अधिकारियों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, अभियन्ताओं, व्यवसाइयों से भी सम्पर्क करके उन्हें हिन्दुत्व की उत्कृष्ट विशेषताओं के साथ-साथ परिषद के संगठनात्मक, जन-जागरणात्मक, आन्दोलनात्मक और रचनात्मक कार्यों से अवगत कराकर उन्हें हिन्दुत्व का पोषक बनाने का प्रयास करें। यह भी निश्चय हुआ कि यह कार्य अभियान के रूप में न होकर संगठन के कार्यकर्ता की स्वाभाविक प्रवृत्ति बननी चाहिए। सम्पर्क करने का उसका नित्य का स्वभाव बने। समाज के विशिष्टजनों की सूची बनाकर सम्पर्क किया जाए।
वर्ष में दो बार जब संसद का बजट एवं वर्षाकालीन सत्र चल रहा हो तब भिन्न-भिन्न प्रान्तों के प्रमुख दो तीन कार्यकर्ता दिल्ली आते हैं और अपने-अपने प्रान्तों के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों से समय लेकर उनके घर अथवा पार्टी कार्यालय में भेंट करते हैं, पारिवारिक वातावरण में वार्तालाप होता है। यह कार्य दिल्ली में एक सप्ताह तक चलता है। सम्पर्क काल में जो विषय देश के सामने महत्वपूर्ण होते हैं, उन विषयों पर सांसदों को आवश्यक जानकारी लिखित में दी जाती है, मौखिक वार्तालाप होता है ताकि सांसद अवसर मिलने पर अपने दल की बैठक में अथवा संसद में विषय का सही प्रस्तुतिकरण कर सके। 2008 गंगा रक्षा के विषय में दिल्ली मंस गोष्टी 23 सांसद उपस्थित। 2009 सेतु समुद्रम परियोजना के सम्बन्ध में 340 सांसदों से, 2010 अमरनाथ आन्दोलन के सम्बन्ध में 360 सांसदों से, 2011 प्रस्तावित साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011 के सम्बन्ध में 403 सांसदों से एवं जम्मू कश्मीर पर वार्ताकारों की रिपोर्ट 2012 व असम राज्य के कोकराझार क्षेत्र में बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के कारण उत्पन्न हुई समस्या पर 363 सांसदों से व्यापक सम्पर्क हुआ।
पुस्तक प्रकाशन- विभाग द्वारा ‘‘बढ़ती हुई मुस्लिम जनसंख्या से हिन्दुत्व एवं देश को संकट‘‘ नाम से एक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। पुस्तक में आंकड़ों एवं रेखाचित्रों के माध्यम से जहाँ मुस्लिम आबादी का विस्फोट समाज के ध्यान में लाया गया है वहीं हिन्दू समाज को आसन्न संकट से सचेत करने का प्रयास किया गया है।
विधायकों से भेंट- प्रत्येक प्रान्त के कार्यकर्ता भी योजना बनाकर श्रीराम जन्मभूमि आदि के सम्बन्ध में विशिष्ट जानकारी देने के लिए अपने-अपने प्रान्त के विधायकों से मिलने का कार्यक्रम बनाते हैं। सांसदों की भांति ही प्रान्तों में चलने वाले विधानसभा के सत्रों में विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों से विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता मिलते रहते हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट- राजनीतिज्ञों के साथ-साथ देश का प्रशासन चलाने में प्रशासनिक अधिकारियों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है। अतः श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन तथा हिन्दुत्व के विचार को समाज में प्रभावी बनाने में देश के प्रशासनिक अधिकारी कैसे सहयोगी बन सकते हैं, इस पर विचार करके इन अधिकारियों से विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता मिलते हैं और जन्मभूमि आदि के बारे में अद्यतन जानकारी देकर उनका सहयोग प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
वर्ष प्रतिपदा (नव वर्ष) की शुभकामनाएं- सम्पर्क की दृष्टि से सांसदों, विधायकों, प्रशासनिक अधिकारियों आदि विशिष्ट व्यक्तियों को वर्ष प्रतिपदा (नव वर्ष) की शुभकामनाएं भेजना भी एक अच्छा माध्यम हो सकता है अतः उक्त सभी व्यक्तियों को हर वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर नव वर्ष की शुभकामनाएं भेजकर उनको बधाई दी जाती है और उनसे सम्पर्क रखा जाता है। प्रान्तीय स्तरों पर विशेष सम्पर्क विभाग की ओर से अपने-अपने विधायकों और विशिष्ट व्यक्तियों को भी वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर शुभकामना संदेश भेजा जाता है।
सांस्कृतिक गौरव संस्थान
सांस्कृतिक गौरव संस्थान की स्थापना, जून, 1997 में कुछ विद्वानों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में भारत के संविधन के अनुच्छेद 51 (क) में वर्णित भारत के नागरिकों के कर्तव्यों के आलोक में देश की एकता, अखण्डता और संप्रभुता के लिए कार्य करने के लिए की गई, न्यास का पंजीयन दिल्ली में 17 दिसम्बर, 1997 को हुआ। परिषद कार्य में एक नए अध्याय का आरंभ था जब एक ऐसे संस्थान की स्थापना हुई जिसका मुख्य कार्य भारत के नागरिकों के मौलिक कत्र्तव्यों के संबंध में चिन्तकों और विचारकों के मध्य जागृति पैदा करना था।
राष्ट्रीय शिविर: कार्य को गति देने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा कार्य से जुड़े विद्वानों से वार्तालाप के लिए चार चिन्तन शिविर झिंझोली, पुणे, बंगलूरु और चण्डीगढ़ में आयोजित किए गए। संगठन के प्रसार हेतु प्रवास कार्य होता रहा है। देश के कुछ नगरों में संस्थान की शाखाएं हैं।
उपसंस्थान: अमृतसर, चण्डीगढ़, पठानकोट, देहरादून, लखनऊ, इलाहबाद, पटना, मुजफ्फरपुर, कोलकाता, त्रिपुरा (अगरतला) बंगलूरु, कोच्चि, एर्णाकुलम्, मुम्बई, पुणे, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, भोपाल, अहमदाबाद, इन्दौर, रायपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, रुड़की में प्रान्तीय उपसंस्थानों की स्थापना हुई और वहाँ बैठकें, गोष्ठियाँ, प्रतियोगिताएं, सम्मेलन और चिन्तन-सत्र आदि होते रहे हैं।
भोपाल चैप्टर की ओर से समय-समय पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते रहे हैं। वहाँ अग्निमित्र और ’अग्निशिखा’ नाम से दो मंच क्रमशः युवकों और युवा महिलाओं के लिए संचालित हो रहे हैं।
प्रयाग में अक्षयवट क्षेत्र की मुक्ति के प्रयास सहित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।
चण्डीगढ़  चण्डीगढ़ चैप्टर की ओर से हर महीने राष्ट्रीय महत्त्व के किसी विषय पर गोष्ठी आयोजन की परम्परा रही है। भ्रष्टाचार की रोकथाम के संबंध में एक विशेष पुस्तक प्रकाशित की थी।

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