श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

संस्कृति रक्षा-मंच
(क) भारत में पोप के आगमन के अवसर पर सितम्बर, 1999 में संस्कृति रक्षा-मंच नाम से एक मंच स्थापित किया गया। मंच ने चर्च के विस्तारवाद संबंधी कुटिल प्रयासों के बारे में सारे देश में विचार-मंथन का सृजन किया। 230 पृष्ठों की एक बड़ी पुस्तक तैयार की गई जिसमें चर्च की खतरनाक गतिविधियों का विवरण था।  उसे भारत में कार्यरत विभिन्न देशों के राजदूतों को उनसे भेंट के दौरान दिया गया। संपूर्ण भारत में अनेक पत्रकारों से संपर्क किया गया, प्रदर्शन किए गए और विभिन्न राज्यों के राज्यपालों को ज्ञापन दिए गए। एक रथ-यात्रा भी निकाली गई। पूरा अभियान सफल सिद्ध हुआ और इसके फलस्वरूप वांछित लक्ष्य की उपलब्धि हुई। कुछ बड़े अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों ने, जैसे हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स आफ इण्डिया और इण्डियन एक्सप्रैस, जो भारत की सनातन संस्कृति पर कीचड़ उछालने से नहीं चूकते थे, मतान्तरण के विरुद्ध लेख लिखवाना आरंभ कर दिया।
(ख)  वर्ष 2001 और वर्ष 2002 के दौरान राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण के लिए व्यापक अभियान छेड़ा गया है, जिसके अधीन मेजर जनरल विश्वास जोगलेकर जी, डाॅ शिवा सुब्रह्मण्यम जी ने ‘‘फैक्ट’’ नाम की एक बड़ी पुस्तक। हिन्दी और अंग्रेजी मेें ‘‘श्री राम जन्मभूमि का सच जानिए’’ पुस्तक प्रकाशित की। इन पुस्तकों को सभी राजदूतों, अनेक संसद् सदस्यों, अनेक पत्रकारों और गणमान्य व्यक्तियों को देश, विदेश में भेजा गया।
विश्व वेद सम्मेलन
दिसम्बर, 1998 में दिल्ली में भव्य विश्व वेद सम्मेलन हुआ। उसमें संस्थान के कार्यकर्ताओं और  पदाधिकारियों के एक समूह ने उसकी सफलता के लिए 05 दिसम्बर से 13 दिसम्बर, 1998 तक अहर्निश कार्य किया।
हिन्दू-बौद्ध सम्मेलन
नवम्बर, 1999 में लुम्बिनी नेपाल में एक बड़ा हिन्दू-बौद्ध सम्मेलन में संस्थान ने पूर्ण सहभागिता की।
कुंभ मेला
संस्थान के कुछ पदाधिकारियों ने अपनी सेवाएं प्रयागराज कुंभ मेला 2001 में 20 दिन तक अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
प्रशिक्षण
संस्थान की ओर से सन् 2001 में कार्यालय में एक महीने का कंप्यूटर उपकरणों पर कार्य करने का प्रशिक्षण आरंभ किया, जिसमें देश के विभिन्न नगरों से 25 युवकों ने भाग लिया।
विद्वत परिषद की बैठकें: संस्थान की विद्वत् परिषद की 20 बैठकें 27 मई 2000 के बाद हुई, जिनमें अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के पश्चात् निष्कर्ष निकाले गए। अधिकारियों व यथावश्यक केन्द्र/राज्य सरकारों को निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखे गए।

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