श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

चिकित्सा सेवा कार्य
वर्ष 2004-05 में दिल्ली में द्वारका में गरीब लोगों के लिए पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों के लिए चिकित्सा व्यवस्था की गई, और उसमें अनेक रोगियों की चिकित्सा की गई। साथ-साथ आधे दिन का एक चिकित्सा शिविर भी उसी क्षेत्र में लगाया गया, 150 रोगियों को औषधियां दी गईं।
पिछड़े और कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए परीक्षापूर्व विशेष पढ़ाई की व्यवस्था भी कुछ महीनों के लिए की गई।
बद्रीनाथ जी की तीर्थयात्रा के दौरान सोढानी फाउंडेशन (यू.एस.ए.) के सौजन्य से पीपलकोटि में 13 नवम्बर 2005 तक की अवधि के लिए चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था हुई।
श्रीमाँ की 125 वीं जयन्ती: सांस्कृतिक गौरव संस्थान ने स्वयं, अपनी इकाइयों तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों – दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, बंगाल, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि में श्रीमाँ की 125 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में अनेक कार्यक्रम किए।
संत गुरु श्री रविदास चेतना यात्रा: 27 नवम्बर, 2005 से 8 दिसम्बर, 2005 तक चित्तौड़गढ़ से वाराणसी तक संत गुरु श्री रविदास चेतना यात्रा के आयोजन में सांस्कृतिक गौरव संस्थान का भी सक्रिय योगदान रहा।
विशेष व्याख्यानमालाएं एवं संगोष्ठियां: विशिष्ट विद्वानों के व्याख्यान के क्रम में                डेविड फ्राउले (श्री वामदेव शास्त्री), श्री भूरेलाल,  श्री स्वराज प्रकाश गुप्ता, श्री हर्ष कुमार अग्रवाल, श्री टी.सिंह आदि के व्याख्यान दिल्ली में आयोजित हुए और यह क्रम जारी है। कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों/गोष्ठियों का विवरण निम्नलिखित है:-
दिनांक  वक्ता     विषय
31.12.2003  श्री सत्यनारायण गोयन्का जी     ’’विपश्यना-भारत की कल्याणकारी धरोहर’’
16.8.2004   सुश्री संध्या जैन, पत्रकार    ’’आर्यों का भारत के बाहर से आगमन- एक  गप्प’’
8.11.2004  श्री जगदीश प्रसाद पाण्डेय    ’’रामराज्य जैसा लोकतंत्र और प्रशासन तंत्र’’
26 फरवरी 05   —  वीर सावरकर फीचर-फिल्म का प्रदर्शन
18-19 फरवरी,05 डॉ.केशवरघुनाथ कान्हेरे     ’’छत्रपति शिवाजी महाराज: एक विलक्षण संगठनकर्ता’’
30 अगस्त, 2004 को रक्षाबंधन पर्व आयोजन में विदेशी राजनयिकों को आमंत्रित किया गया।
श्रीरामसेतु के बारे में सच्चाई को जनता तक पहँुचाने के लिए सांस्कृतिक गौरव संस्थान की ओर से डेढ़ दिन की संगोष्ठी दिनांक 1 दिसम्बर 2007 को की गई।
सांस्कृतिक गौरव संस्थान के तत्त्वावधन में ‘उठो और रामराज्य की स्थापना करो’ विषय पर देश के अनेक नगरों में संगोष्ठियों के माध्यम से एक जागरूकता यज्ञ आरंभ किया गया। पहली संगोष्ठी 5 अप्रैल 2008 को कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में की गई।
इसके पश्चात् 35 संगोष्ठियाँ भोपाल, मुजफ्फरनगर, मुंबई, कोच्चि, हापुड़, दिल्ली, देहरादून, मेरठ, गाजि़याबाद, डासना, सोनीपत, चाँदपुर, देवबन्द, मिरगपुर, अलीगढ़, छुटमलपुर, काशीपुर, ठाकुरद्वारा, हरिद्वार, रायपुर (देहरादून), उझानी (बदायूं), ग्राम साढौली (बेहट सहारनपुर) नगरों में हुईं।
स्वामी अखण्डानन्द जी महाराज ने रामराज्य की स्थापना हेतु वेदों के अध्ययन और स्वाध्याय पर ज़ोर दिया। हरिद्वार में पावन कुंभ के अवसर पर दिनांक 10-11 अप्रैल 2010 को दो दिवसीय संगोष्ठी तथा जोशीमठ में वेद-वेदांग महाविद्यालय में 27 मई 2010 को एवं हलद्वानी में गोष्ठी 11 जुलाई 2010 को हुई।
उठो और रामराज्य की स्थापना करो विषय पर मेरठ में विजयादशमी, 2010 के दिन कवि सम्मेलन हुआ।
संस्कृति बचाओ सम्मेलन
3-4 मार्च 2012 को कुरुक्षेत्र में ‘संस्कृति बचाओ’ सम्मेलन आयोजित किया गया।
28 अप्रैल 2012 को ब्रजघाट में ‘संस्कृति बचाओ’ सम्मेलन आयोजित किया गया।
28 मई 2012 को वीर सावरकर जयन्ती के उपलक्ष्य में मेरठ में विचार गोष्ठी का आयोजन।
31 मई तथा 1 जून को पटना के पास आरा तथा गाँव बिरसनवन (भोजपुर) नामक स्थान पर ‘संस्कृति बचाओ’ संगोष्ठियों का आयोजन।
उत्तराखण्ड में सेवा कार्य: उत्तराखण्ड में ऋषिकेश से लगभग 90 कि.मी. दूर बद्रीनाथ की ओर जाने वाले मार्ग पर लक्षमोली बाज़ार में सड़क के किनारे 0.430 हेक्टेयर भूमि दिनांक 10.12.2003 को चिकित्सालय, पुस्तकालय, मंदिर, जड़ी-बूटी प्रशिक्षण केन्द्र और धर्मशाला (आवास-व्यवस्था) कार्य हुआ।
सरकारों को पत्र: केन्द्रीय व राज्य सरकारों को लिखे गए कुछ पत्रों के विषय इस प्रकार रहे:-
1. महाप्रबंधक उत्तर रेल को ‘अंबाला’ एवं ‘कुरुक्षेत्र’ के विषय में शताब्दी रेलगाडि़यों में की जा रही घोषणा कि ‘यह स्थान थल एवं वायु सेना का मुख्य केन्द्र है’ सुरक्षा की दृष्टि से आपत्तिजनक बताकर घोषणा में यह स्थान मां ‘अम्बा’ से संबंधित है की उद्घोषणा तथा कुरुक्षेत्र में महाभारत के युद्ध संबंध स्थान की जानकारी देने के लिए पत्र लिखा, जिसे मान लिया गया।
2. सूचना एवं प्रसारण मंत्री को डी.डी.-1 पर प्रसारित हो रहे ‘‘एयरटेल क्रेजी किया रे’’ शीर्षक के  कार्यक्रम में साधु-संन्यासियों का अपमान की जानकारी देते हुए इसे तुरंत बंद किए जाने की  मांग की।
3. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कृषि मंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री को राष्ट्रमण्डल खेलों के दौरान खिलाडि़यों आदि को गौमाँस परोसने को रोकने के लिए पत्र लिखे। प्रधानमंत्री कार्यालय एवं कृषि मंत्री के कार्यालय से पत्रोत्तर भी आए तथा आश्वासन दिया गया कि ऐसा नहीं होगा।
4. उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को ‘उत्तराखण्ड राज्य का पर्यटन साहित्य हिन्दी में सुलभ न होना’  विषय पर पत्र।
5. श्रीमती ताजदार बाबर, उपाध्यक्ष, नई दिल्ली नगर-पालिका परिषद को दिल्ली की सड़कों पर  यातायात संबंधी निर्देश केवल अंग्रेज़ी में होने पर पत्र।
6. जाॅकी कंपनी के निदेशक श्री रवि उप्पल को उनकी कंपनी द्वारा दिखाए जा रहे अश्लील विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाने हेतु पत्र। प्रतिलिपि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी दी।
7. हज के नाम पर हर राज्य की राजधानी में महंगे भू-खण्डों पर सरकारी खर्चे से हज हाउस निर्मित हो रहे हैं, जिनका प्रयोग व्यावसायिक कार्यों हेतु होता है। इसको रोकने हेतु पत्र भेजे गए।
8. पंजाब की स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. लक्ष्मीकांता चावला को पंजाब में आयुर्वेद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र खोलने का सुझाव।
9. पंजाब के मुख्यमंत्री को पंजाब में चर्च द्वारा सिख समुदाय के मतान्तरण की जानकारी देते हुए  कार्रवाई का अनुरोध।
10. प्रधनमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह को ‘वाराणसी (काशी) के भारत माता मंदिर की उपेक्षा विषय  पर पत्र।
11. रक्षा मंत्री, भारत सरकार को नई दिल्ली में प्रधनमंत्री निवास के निकट वायुेसना के ओल्ड  विलिंग्डन कैंप और न्यू विलिंग्डन कैंप के नाम बदलना।
12. वसंत विहार में डी ब्लाॅक पहाड़ी पर रक्षा मंत्रालय की 45 एकड़ भूमि पर मस्जिद और इस्लामी प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण की जानकारी कराते हुए रक्षा मंत्रालय को पत्र, स्मरण पत्र, संसद प्रश्न।
13. वायुसेना क्षेत्र सुब्रतो पार्क, नई दिल्ली के निकट पटरी पर मजार खड़ी करने की जानकारी संबंधी पत्र।
14. वसंत विहार थाने के बगल में बड़े अवैध खानकाह निर्माण की जानकारी संबंधी पत्र।
15. देहरादून के रास्ते में रेल पटरियों के मध्य मजारों व खानकाहों का अवैध निर्माण।
16. विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे अनेक फ्रेण्डशिप-क्लबों और शरीर की मालिश आदि के विज्ञापनों के  माध्यम से प्रसारित अनैतिकता और भ्रष्टाचार पर तत्काल छापों और दण्ड की व्यवस्था के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को अनेक पत्र, स्मरण पत्र।
17. राष्ट्रपति भवन के अंतर्गत दासता के प्रतीक ‘मुगल उद्यान’ का नाम बदलने हेतु महामहिम राष्ट्रपति को 11 नाम के सुझाव-युक्त पत्र।
18. गृहमंत्री को भूतपूर्व राजाओं और महाराजाओं की भांति अर्काट (तमिलनाडु) के भूतपूर्व नवाब के  प्रीविपर्स और सलामी आदि की प्रथा को समाप्त करने के लिए पत्र।
19. प्रधनमंत्री को समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी, लाहौर, मुजफ्फराबाद तक जाने तथा वहाँ से वापस आने वाली बसें तथा बंगलादेश में ढाका जाने वाली बसों से देश को होने वाले भारी नुकसान/आतंकवाद के दृष्टिगत बंद करने के संबंध में पत्र।
20. प्रधनमंत्री को देश में कृषि भूमि के कम होने की स्थिति की पृष्ठभूमि में वक्फ बोर्डों के कब्जे की भूमि के राष्ट्रीयकरण की हेतु पत्र।
21. पाकिस्तान में नष्ट हो रहे भारतीय साहित्य को भारत लाने हेतु विदेश मंत्री/संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री एवं प्रतिपक्ष के नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी को पत्र।
22. ‘लविंग जेहाद’ के नाम पर हिन्दू युवतियों के शोषण पर पर रोक हेतु उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को तथ्यों से युक्त पत्र।
23. विभिन्न राज्यों के पुलिस आयुक्तों को मुस्लिम बंगाली बाबाओं की गिरफ्तारी हेतु अनेक पत्र।
24. आई.एम.ए. (देहरादून) के निकट मदरसे के लिए बीस एकड़ भूमि की स्वीकृति को रद्द करने हेतु उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को पत्र।
25. ऋषिकेश से आगे गंगा के पावन तटों पर सैलानियों के लिए बनाए गए सैरगाहों में हो रहे दुष्कृत्यों के प्रति केन्द्रीय और राज्य सरकारों को अनेक पत्र।
26.  बंगाली-तांत्रिक नाम से दिल्ली और लखनऊ में विज्ञापन देने वाले अनेक छद्म तांत्रिकों के दुष्कृत्यों का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस और आयकर विभाग को अनेक पत्र भेजे गए हैं।
27. एड्स बीमारी के नाम पर देशी रक्त बैंकों के रक्त को दूषित सिद्ध करने और विदेशी औषधियों के प्रयोग को बढ़ाने के साथ-साथ हिन्दुओं को उक्त बीमारी के लगने के भय का वातावरण बनाने में लगी हुई संस्थाओं और कंपनियों के विरुद्ध पत्राचार।
28. दिल्ली नगर-निगम आयुक्त को नई दिल्ली स्थित वसंतकुंज में सड़क का नाम ‘माता अमृतानंदमयी मार्ग’ रखने हेतु अनेक पत्र।
29. टी.वी.चैनलों पर बढ़ती अश्लीलता के विरोध में सूचना-प्रसारण मंत्री (भारत सरकार) को अनेक पत्र।
30. सूचना-प्रसारण मंत्री (भारत सरकार) को – मीडिया द्वारा शब्दों से किए जा रहे संस्कृति पर प्रहार (’फैशन  का महाकुंभ’)- रोकने संबंधी पत्र।
31. प्रेस क्लब आॅफ इंडिया में पाकिस्तानियों के पद-धारण को रोकने के लिए अनेक पत्र।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से संस्थान की पुस्तक ‘विश्वव्यापी भारतीय संस्कृति’ की 175 प्रतियां ‘हमारे मूल कर्तव्य’ की 116 प्रतियां तथा ‘स्मृतियों में भारतीय जीवन पद्धति’ की 150 प्रतियां विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भेजने के लिए खरीदी गईं।
पुस्तकें जिनका हिन्दी अनुवाद किया/कराया गया
श्री अनवर शेख द्वारा लिखित पुस्तक प्ेसंउ ेमग – टपवसमदबम का हिन्दी अनुवाद ‘इस्लाम कामवासना और हिंसा’ शीर्षक से कराया गया। प्रो. जी.सी.असनानी की ।चचमंस जव भ्पदकन ैंकीने पुस्तक का हिन्दी अनुवाद कराया गया।
चार छात्रों को पीएच.डी के लिए रजिस्टर कराने का यत्न किया गया जिन्हें लगभग 1 वर्ष तक छात्रवृत्ति भी दी गई।
‘‘गौरव घोष’’ संस्थान द्वारा ‘गौरव-घोष’ नाम से एक द्वैमासिक पत्रिका सितम्बर, 1999 से आरंभ की गई। पत्रिका सब उपसंस्थानों, मुख्य पत्राकारों/संपादकों, विदेशी राजदूतों, प्रोपेफसरों, महाविद्यालयों, उच्चतम न्यायालयों के न्यायमूर्तियों, केन्द्रीय मंत्रालयों, 800 मुख्य पुस्तकालयों और संसद सदस्यों, विद्वानों आदि को निःशुल्क भेजी जाती हैं। इसकी 3000 तक प्रतियां छपती हैं।
अरुन्धती वसिष्ठ अनुसंधान पीठ: संस्थान के अंतर्गत महर्षि वसिष्ठ और उनकी धर्मपत्नी भगवती अरुन्धती के नामों से अनुसंधान पीठ की स्थापना सन् 2005 में इलाहाबाद में हुई।
अरुन्धती वसिष्ठ अनुसंधान पीठ प्रयाग के तत्त्वावधान में प्रयाग में 15-16 दिसम्बर 2007 को दो-दिवसीय ‘विश्वव्यापी आपदा के दौर में नवीन प्रतिमानों की खोज’’ विषय पर संगोष्ठी हुई।
अनुसंधान पीठ की ओर से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर वर्षभर में दो बार सेमिनार किए जाते हैं। विद्वानों के लेखों को प्रकाशित किया जाता है।

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