श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद् के बढते चरण

रामसेतु रक्षा
1. भारत के दक्षिणी छोर में रामेश्वरम् के निकट स्थित धनुषकोटि से श्रीलंका तक प्रभु श्रीराम की वानर सेना ने नल व नील के मार्गदर्शन में, समुद्र पर एक सेतु का निर्माण किया था। भारत के प्राचीन ग्रन्थों में इसी को सेतुबन्ध रामेश्वरम् लिखा गया है। अंग्रेजों द्वारा लिखी गई पुस्तकों में इसी को ‘‘रामार सेतु’’ अथवा ‘‘एडम्स ब्रिज’’ लिखा गया है।
2. अमेरिका की अन्तरिक्ष अनुसंधान संस्था ‘‘नासा’’ तथा भारत की अन्तरिक्ष अनुसंधान संस्था ‘‘इसरो’’ ने इस सेतु के चित्र प्रकाशित किए हैं।
3. रामसेतु को बीच में से 300 मीटर चैड़ा तथा 12 मीटर गहरा तोड़कर समुद्र में नहर निर्माण की ‘‘सेतु समुद्रम नहर परियोजना’’ भारत सरकार ने घोषित की।
4. 02 जुलाई, 2005 को भारत के प्रधानमंत्री महोदय ने इस परियोजना का उद्घाटन किया।
आन्दोलन का क्रमिक विकास
* सन्तों ने प्रधानमंत्री जी से निवेदन किया कि वे कोई वैकल्पिक मार्ग खोजें ताकि समुद्र में नहर भी बन जाए और रामसेतु को भी न तोड़ना पड़े। प्रधानमंत्री महोदय ने श्री टी. आर. बालू से भेंट करने की सलाह दी, उन्होंने तो रामसेतु के अस्तित्व को ही नकार दिया।
* सम्पूर्ण भारत में हस्ताक्षर अभियान हुआ। 36 लाख हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन 27 सितम्बर, 2006 को महामहिम राष्ट्रपति महोदय को सौंपा गया।
* दिसम्बर, 2006 में रामनाथपुरम की जिला अदालत में सिविल वाद दायर करके रामसेतु को पुरातात्विक स्मारक घोषित करने की मांग की गई।
* 18 मार्च, 2007 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम कस्बे में, 18 अप्रैल, 2007 को रामेश्वरम् में 5,000 लोगों की ‘‘रामसेतु रक्षा संकल्प सभा’’, 13 मई, 2007 को दिल्ली में सभा हुई जिसमें लगभग 5,000 लोग उपस्थित थे। 27 मई, 2007 को रामलीला मैदान, दिल्ली में सभा हुई जिसमें  50,000 लोगों के अतिरिक्त 500 सन्त भी उपस्थित थे।
* जुन, 2007 में डॉ0 सुब्रह्मण्यम स्वामी एवं हिन्दू मुन्नानी (तमिलनाडु) के संस्थापक रामगोपालन जी ने चेन्नई उच्च न्यायालय में रामसेतु की रक्षा के लिए याचिका दायर की।
* सुप्रीमकोर्ट ने चेन्नई हाईकोर्ट से परियोजना सम्बंधित सभी याचिकाओं को अपने यहाँ मंगवा लिया।
* 22 जुलाई, 2007 को मदुरै में एक विशाल जनसभा हुई, 40,000 से अधिक उपस्थिति।
* 25-26 जुलाई, 2007 को रामलीला मैदान, दिल्ली में धर्मसंसद हुई, 4,000 सन्त उपस्थित।
* 12 अगस्त, 2007 को सम्पूर्ण देश में 1600 स्थानों पर धरना, उपवास, यज्ञ के कार्यक्रम।
* 26 अगस्त, 2007 को ‘‘चलो रामेश्वरम्’’ का नारा दिया गया, 40,000 रामभक्त रामेश्वरम् पहुँचे।
* रक्षाबन्धन को देश के लाखों लोगों ने ‘‘रामसेतु रक्षा सूत्र’’ बांधकर सेतु रक्षा का संकल्प लिया।
* भारत सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से रामसेतु को डायनामाइट से उड़ाने की योजना का खुलासा हुआ तो सर्वोच्च न्यायालय में 31 अगस्त, 2007 को एक याचिका दायर की गई और उसी दिन माननीय न्यायालय ने 14 सितम्बर तक रामसेतु को किसी भी प्रकार से क्षतिग्रस्त किए जाने के विरुद्ध स्थगनादेश दे दिया।
* 10 सितम्बर, 2007 को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (ए.एस.आई.) ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देकर कहा कि ‘‘राम के अस्तित्व को प्रमाणित करने के कोई साक्ष्य नहीं हैं।’’ उन्होंने ‘‘रामायण एवं उसके पात्रों को कपोल-कल्पित बताया।’’ देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
* 12 सितम्बर, 2007 को प्रातः 8 से 11 बजे तक देशव्यापी चक्काजाम किया गया।
* सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपना हलफनामा वापस ले लिया।
* अक्टूबर, 2007 में केन्द्र सरकार ने सेतु समुद्रम परियोजना की समीक्षा करने के लिए एक दस सदस्यीय समीक्षा समिति के गठन की घोषणा की।
* 20 नवम्बर देवोत्थानी एकादशी से 20 दिसम्बर, 2007 गीता जयन्ती तक सम्पूर्ण देश में 1,000 रामसेतु शिला यात्राओं द्वारा ग्रामों में जन जागरण किया गया।
* 30 दिसम्बर, 2007 रविवार को स्वर्ण जयन्ती (जापानी) पार्क, रोहिणी, नई दिल्ली में ऐतिहासिक महासम्मेलन सम्पन्न हुआ। देशभर से दस लाख रामभक्त दिल्ली पहुँचे।
परिणाम भी सामने आया कि सरकार नहर परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग खोजने को तैयार हुई। रामसेतु तोड़े जाने से बच गया।
अवांछित गतिविधियों का विरोध

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