श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

पूज्य महंत श्री अवेद्यनाथ जी के ब्रह्मलीन होने पर शोक संदेश

 13 सितम्बर, 2014

Mahant Avaidyanath 3गोरक्षेपीठाधीश्वर पूज्य महंत अवेद्यनाथ जी महाराज श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के प्राण थे। ई0 1984 में उन्होंने इस आन्दोलन का नेतृत्व संभाला था। सबको साथ लेकर चलने की उनमें विलक्षण प्रतिभा थी। उसी के परिणामस्वरूप श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन के साथ सभी सम्प्रदायों, दार्शनिक परम्पराओं के जगद्गुरु आचार्य, आचार्य, श्रीमहंत, महंत, महामण्डलेश्वर एवं अन्य सन्त महापुरुष जुड़ते चले गए। 1989 के प्रयाग महाकुम्भ के अवसर पर जब श्रीराम शिलापूजन कार्यक्रम का निर्णय हो रहा था तो उस समय सारा कुम्भ जन्मभूमि आन्दोलन के साथ जुड़ गया था। हिन्दू समाज की एकता को बनाए रखने तथा समाज में से छुआछूत जैसी बुराई को मिटाने के कार्य को उन्होंने अपने जीवन का मिशन बना लिया था। उन्हीं के प्रयत्नों से काशी में धर्मसंसद के अवसर पर वे सन्त महापुरुषों को अपने साथ लेकर डोम राजा के घर गए थे। वहाँ प्रसाद ग्रहण किया था। उन्हीं के आग्रह पर डोम राजा धर्मसंसद में पधारे थे। महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए किया गया प्रयास सभी सन्तों के लिए अनुकरणीय है।

देश में हिन्दुत्व अभिमानी सरकार बने, इसके लिए वे राजनैतिक क्षेत्र में भी प्रयत्नशील रहे और उनके जीवन काल में ही हिन्दुत्व अभिमानी सरकार स्थापित भी हो गई, इसका सन्तोष उन्हें अवश्य ही रहा होगा। परन्तु अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर एक भव्य मन्दिर का निर्माण होता, वे नहीं देख पाए, इसकी पीड़ा उन्हें अन्तिम समय तक थी, जो उन्होंने स्वयं मुझे व्यक्त की थी। अयोध्या, मथुरा और काशी के पवित्र स्थानों की मुक्ति हेतु बनी ‘धर्मस्थान मुक्ति यज्ञ समिति’ के वे प्रथम संस्थापक अध्यक्ष थे और अन्त तक उन्होंने ही इस समिति को जीवित रखा। इन तीनों ही स्थानों पर बने मन्दिरों को कभी विदेशी आक्रमणकारियों ने तोड़ा था, इसलिए इन तीनों स्थानों को वापस प्राप्त करके उन पर पुनः भव्य मन्दिर का निर्माण करने से ही गुलामी का कलंक मिट सकेगा और हिन्दू समाज का मस्तक ऊँचा होगा, यह महाराज श्री का स्थिर विचार था। इसीलिए धर्मस्थान मुक्ति यज्ञ समिति बनी थी। निश्चित ही पूज्य महाराज श्री की तपस्या के परिणामस्वरूप अपना देश इन तीनों स्थानों पर भव्य मन्दिरों का निर्माण देख सकेगा।Mahant Avaidyanath 2

गोरक्षपीठ के माध्यम से शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलम्बन आदि क्षेत्रों में चल रहे समाजसेवा के कार्यों को वे सदैव प्रोत्साहित करते रहे। उनके ये कार्य सारे देश के लिए उदाहरण हैं। महाराज श्री ने अपना उत्तराधिकारी भी एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो राष्ट्र, हिन्दुत्व और हिन्दू जीवन मूल्यों के प्रति पूर्ण समर्पित है। महाराज श्री कहा करते थे कि गोरक्षपीठ देश, धर्म और संस्कृति के प्रति सदैव समर्पित रही है और भविष्य में भी रहेगी। विश्व हिन्दू परिषद के लिए महाराज श्री का अभाव एक अपूरणीय क्षति है। हम महाराज श्री के मार्गदर्शन से वंचित हो गए, इस कष्ट को मैं व्यक्त नहीं कर सकता। मैं अन्तिम समय में महाराज श्री के दर्शन के लिए मेदान्ता अस्पताल में भी गया। वे इतनी जल्दी चले जाएंगे, ऐसा नहीं सोचता था परन्तु विधाता ही अपना विधान जानते हैं।

विश्व हिन्दू परिषद की ओर से मैं प्रभु चरणों में प्रार्थना करता हूँ कि वे हम सबको उनके द्वारा प्रारम्भ किए गए कार्यों को चलाते रहने का सामथ्र्य प्रदान करे, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपने श्रद्धासुमन महाराज श्री के चरणों में समर्पित करता हूँ।

(अशोक सिंहल) संरक्षक-विश्व हिन्दू परिषद

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भारत ने महान ‘समरस योगी योद्धा हिन्दू संत’ को खोया है !

अब अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर एवं जहाँ सभी हिन्दू सुरक्षित हो ऐसा ‘समरस’ भारत

यही परम पूजनीय महंत योगी अवैद्यनाथ जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ! – विश्व हिन्दू परिषद

दिल्ली , १ ३ सितम्बर , २ ० १ ४

गोरक्षपूर (गोरखपूर ) धर्म पीठ के महान गुरु प्रमुख एवं राम जन्मभूमि अभियान के बड़े आधार परम पूजनीय महंत योगी अवैद्यनाथ जी अब इस विश्व से देह त्याग चले गए। पू. महंत जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए विश्व हिन्दू परिषद के आंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगडि़या जी ने कहा, ‘‘देश विदेश में हमारे जैसे अनेक लोगों के, जो कठीन धर्मपथ पर निष्ठा से चल रहे हैं, उन की असीम प्रेरणा बने रहें परम पूजनीय महंत योगी अवैद्यनाथ जी। जब सामाजिक – राजनैतिक हमलों के कारण कई लोग आगे आने से कतराते थे, तब पू. महंत जी आग आएँ ! दिल्ली में १ ९ ८ ४ की धर्म संसद में ‘धर्मस्थान मुक्ति यज्ञ समिति’ बनी – इस समिति के अध्यक्ष पू. महंत योगी अवैद्यनाथ जी थे। काशी , मथुरा एवं अयोध्या के मंदिर आक्रामकों के कब्जे से मुक्त करने हेतु यह समिति बनी थी। गोरक्षनाथ मठ जो आज बलशाली , हिन्दू श्रद्धा का स्थान बना है, उस के पीछे पू. महंत जी की हिन्दू धर्म के प्रति अटूट प्रतिबद्धता एवं क्रियाशीलता हैं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ जी जैसे समर्थ, हिन्दू योद्धा संत तैयार किये। पू. महंत जी भारत में सभी जातियों में एकता लाने में, समरसता में और छुआछूत हटाने में लगातार कार्य करते रहें। सभी हिन्दू एक होकर हिन्दुओं के लिए समर्थ एवं सुरक्षित भारत बनें यह उन का ध्येय था।

मैं पू. महंत जी से अनेकों बार मिला और अभी अभी भी मिला था। जब जब मिलें, तब तब पू. महंत जी से कोई ना कोई नया ज्ञान प्राप्त हुआ ! उन के ह्रदय में माँ का प्रेम था और उन के मन में हिन्दू योद्धा की आग थी ! पू. महंत जी के चले जाने से आज भारत ने एक ‘समरस हिन्दू योद्धा’ खोया है । अब पू. महंत जी को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि अयोध्या में भगवान श्रीराम जी का भव्य मंदिर शीघ्र बनें एवं भारत के हिन्दू जाती भूलकर एक होकर समरस हिन्दू के नाते समर्थ भारत बनाएं जहाँ हिन्दू सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान को कोई ठेंस ना पहुँचा पाएँ।’’

डॉ. प्रवीणभाई तोगडि़या कार्याध्यक्ष

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पूज्य महंत श्री अवेद्यनाथ जी के ब्रह्मलीन होने पर शोक संदेश

यों तो जो भी व्यक्ति इस धराधाम पर आया है, उसे जाना ही है; पर कुछ लोगों का जाना जीवन में स्थायी रिक्तता का निर्माण कर देता है। पूज्य महंत श्री अवेद्यनाथ जी का ब्रह्मलीन होना भी ऐसा ही है। यद्यपि वे लम्बे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, साथ ही वे जीवन के उस पड़ाव पर पहुंच गये थे, जहां यह अनपेक्षित नहीं था। फिर भी उनके निधन के समाचार से जीवन में अचानक कोई अभाव सा अनुभव होने लगा है।

यों तो गोरखनाथ धाम की महिमा स्वयं में ही अनंत है; पर पूज्य महंत अवेद्यनाथ जी के कारण उसकी गरिमा में चार चांद लग गये। मकर संक्रांति समारोह में हिन्दू समाज के हर वर्ण और वर्ग का जैसा जनसैलाब वहां उमड़ता है, वह दृश्य जिन्होंने भी देखा है, वे उसे भूल नहीं सकते। जाति, प्रान्त, भाषा आदि सभी प्रकार के भेद भुलाकर हिन्दुओं के बीच समरसता की कैसी अन्तर्धारा बहती है, गोरखधाम इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। ‘हिन्दू हम सब एक’ का भाव वहां प्रतिक्षण और प्रतिपल प्रकट होता है।

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के आंदोलन की चर्चा जब भी होगी, उसमें पूज्य महंत जी के नेतृत्व की बात भुलाई नहीं जा सकेगी। इस आंदोलन ने पूरे देश की मानसिकता को ही न केवल आन्दोलित किया बल्कि देश को एक नई दिशा देने का काम भी किया। जब-जब इतिहास और राजनीति के विद्वान इस पर शोध करेंगे, तब-तब उसमें पूज्य महंत अवेद्यनाथ जी के योगदान की बात प्रमुखता से उभर कर आएगी। वे इस आंदोलन के पुरोधा ही नहीं, प्राण थे। आज देश में हिन्दुत्व के पक्ष में जैसा वातावरण बना है, उसे लाने में महंत जी के प्रयास अविस्मरणीय रहेंगे। अब वह समय आया है कि इस दिशा में कुछ ठोस एवं निर्णायक प्रयत्न शासन की ओर से भी हो सकते हैं। ऐसे में उनके प्रेरक मार्गदर्शन की अत्यन्त आवश्यकता थी; पर प्रभु की जैसी इच्छा।

मुझे विश्वास है कि परमपिता परमेश्वर पूज्य महंत जी की आत्मा को अपने धाम में स्थान देंगे ही, साथ ही उस परमपिता से यह प्रार्थना है कि हमें भी वह शक्ति दे, जिससे उनके दिखाये मार्ग एवं आदर्शों पर चलते हुए हम अपने प्रिय सनातन हिन्दू राष्ट्र को फिर से जगद्गुरु के सिंहासन पर विराजमान कर सकें।

शान्ति, शान्ति, शान्ति।

(दिनेशचन्द्र) अन्तर्राष्ट्रीय संगठन महामंत्री

पूज्य महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज के ब्रह्मलीन हो जाने से हिन्दू समाज के सिर से एक बहुत बड़ा सबल हाथ उठ गया है। वह योग व दर्शन के मर्मज्ञ थे, साथ ही साथ हिन्दुत्व के प्रखर वक्ता भी थे। महंत जी एक तपस्वी सन्त थे, परन्तु कुशल व सहज-सुलभ राजनेता भी थे।

 हिन्दू समाज उनको अपने अभिभावक के रूप में देखता था। हिन्दू समाज में व्याप्त छुआ-छूत, ऊँच-नीच जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए जगह-जगह पर सहभोज के कार्यक्रम आयोजित कर वे हिन्दू समाज की एकता का संदेश देते थे।

‘‘राजनीतिक का हिन्दूकरण और हिन्दू का सैनिकीकरण’’ के सिद्धान्त के वह प्रबल समर्थक थे। देश में एक हिन्दुत्वनिष्ठ सरकार बने, इसके लिए वह राजनीति में भी सक्रिय रहे। मेरे ऊपर तो उनकी अपार कृपा रही, समय-समय पर अशान्त मन को लेकर जब उनके चरणों में बैठता था तो एक अवर्णनीय शान्ति की अनुभूति होती थी। वापस आते समय एक नई ऊर्जा, उमंग और आत्मविश्वास लेकर आता था और काम में लगजाता था। उनका तपस्वी जीवन, गुरु जैसा मार्गदर्शन और अभिभावक जैसा स्नेहपूर्ण व्यवहार मेरे जीवन में सदा सम्बल रहेगा।

उन्होने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जिस व्यक्तित्व का चयन किया, वे हर दृष्टि से सुयोग्य हैं। उनके हृदय में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अब पूज्य महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चरण विराजमान है। उन्हीं की कृपा से योगी आदित्य नाथ जी देश, धर्म और संस्कृति के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है। वह मनसा वाचा कर्मणा राष्ट्रनिष्ठ सफल व्यक्तित्व हैं।

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण का ब्रह्मलीन महन्त जी का सपना अभी अधूरा है, उसको पूर्ण करना हम सबका राष्ट्रीय कत्र्तव्य है, मैं प्रभुचरणों में विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि उनकी आत्मा को अपने हृदय में स्थान दे और हम सबको वह सामथ्र्य दे, जिससे हम उनके अधूरे कार्य को पूर्ण कर सके।

ओम् शान्ति! ओम् शान्ति!! ओम् शान्ति!!!

श्रीचरणानुरागी (राजेन्द्र सिंह पंकज) केन्द्रीय मंत्री, मंत्री, श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति