श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

अयोध्या मे अब मस्जिद नही ,मंदिर ही बनेगा

अयोध्या (25 सितंबर) विश्व हिन्दू परिषदकेअन्तर्राष्ट्रीय संगठन महामंत्री दिनेश चन्द्र नेआज यहां कहा कि श्रीराम जन्म भूमि को लेकर सुलह समझौता की रट का पुरातात्विक साक्ष्य मिलने के उपरांत अब कोई औचित्य नही है।न्यायालय साक्ष्य मांगता है? जो हिन्दुओ के पक्ष मे है।फिर बात चीत कैसी और क्यो? जो लोग सुलह समझौते के नाम पर श्रीराम जन्म भूमि परिसर या अयोध्या की शास्त्रीय सीमा मे मस्जिद निर्माण की वार्ता कर रहे है,उनका सामाजिक महत्व नही। उन्हे श्रीराम भक्तो के कोप का भाजन बनना होगा। विहिप और संत धर्माचार्य लगातार धर्मसंसद और केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठको के माध्यम से कहते आये है कि अयोध्या की शास्त्रीय सीमा के अंदर मस्जिद का निर्माण संभव नही है। पेजावर मठ उडुप्पी ( कर्नाटक ) मे 24 से 26 नंवबर के दौरान पंद्रहवी “धर्मसंसद” का आयोजन किया जा रहा है।हजारो की संख्या मे संत धर्माचार्य समलित होगे और श्रीराम जन्मभूमि के साथ ही गौ,गंगा और सामाजिक समरस्ता जैसे देश के गंभीर विषयो पर मंथन करेगे।
विहिप नेता अयोध्या मे दो दिवसीय प्रवास पर आये थे इस दौरान कारसेवक पुरम् मे पत्रकारवार्ता मे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये सुझाव के उपरांत मीडिया और सुलह समझौता वादियो की सक्रियता कुछ अधिक ही बढ गयी है। कुछ ऐसे तत्व सक्रिय है, जिनका इस आंदोलन मे दूर-दूर तक कोई योगदान नही है। फिर भी एक पक्ष के साथ समझौता अभियान चला रहे है। उन्होने इसे बेवजह तूल देना बताया और कहा इतिहास गवाह है कि त्रेतायुग मे अंगद जी ने रावण को समझाने का और भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवो से समझौते का भरसक प्रयास किया परिणाम महाभारत,यही नही समझौते का ही परिणाम रहा कि देश की आजादी बड़े संघर्ष के उपरांत प्राप्त हुई उसके बाद इस राष्ट्र का विभाजन और पाकिस्तान जैसे सांप का जन्म जिसके डंस से आज भी देश की जनता मारी जा रही है। क्या समझौता अयोध्या मे एक और विभाजन को जन्म नही देगा? क्या विवाद सदैव स्थायी बना रहे? उन्होने कहा सम्पूर्ण अयोध्या श्रीराम की हैऔर जहां भगवान का प्रकटीकरण हुआ वह ही रामलला की जन्मभूमि है।77 एकड़ भूमि पर मंदिर ही बनेगा और कुछ भी नही सुविकार करेगा हिन्दू समाज।
अदालत मे संपति का मामला विचाराधीन था साक्ष्य और वर्तमान स्थिति सब रामलला के पक्ष मे फिर भी न्यायायिक विलंब? 67 वर्ष के इस काल खंड मे ना जाने कितने गवाह और ना जाने कितने पक्ष-विपक्ष के लोग कालकलवित होगये और फैसला तो दूर जहां से चले वंही आकर पुनः खड़े हो गये ? माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह देश सम्मान करता है, परन्तु न्यायालय की आंड़ मे सुझाव को हथियार बनाकर सुलह समझौता का अब कोई औचित्य नही है ?
उन्होने कहा देश मे आजादी के उपरांत और विभाजन के दो वर्ष बाद ही सरदार पटेल और अन्य नेताओ के कुशल प्रयास से गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया और वही अयोध्या मे श्रीराम जन्मभूमि का विवाद न्यायालय की परिक्रमा करता रहा? अगर उसी समय इसका समाधान कर दिया जाता तो शायद इतने असंख्य हिन्दुओ का रक्त ना बहता।विहिप नेता ने कहा इस देश मे सरकारे आयीं और गयी अनेको ने समाधान का प्रयास किया परंतु तुष्टिकरण के कारण वह सफल नही हुये। 2010 मे उच्च न्यायालय ने साक्ष्यो के आधार पर निर्णय दिया भी तो उसने संमपति के स्वामित्व की जगह विभाजन कर दिया। हिन्दुओ ने स्वामित्व की अपील की थी ना की संपति के बंटवारे की। उन्होने का आज पुनः उसी स्थान पर वापसी अब उचित नही है?
उन्हो ने कहा श्रीराम इस देश के करोड़ो हिन्दुओ की आस्था श्रद्धा और सामाजिक समरस्ता के केंद्र है।वह स्वंय इस देश के संविधान है।वह अपनी जन्मभूमि पर विराजमान भी है।जिनकी पूजा अर्चना लगातार चलती आ रही है।उन्हे दुनिया की कोई शक्ति इधर से उधर नही कर सकती है। बस उन्हे उन्के भव्य मंदिर मे विराजमान कराना ही उनके भक्तो का पवित्र लक्ष्य है।
एक प्रश्न के उत्तर मे कहा पत्थरो के आने का क्रम 1990 से जारी है,और आगे भी जारी रहेगा।सम्पूर्ण मंदिर मे 1.75 लाख घनफुट पत्थर लगने है। जिसमे 50 प्रतिशत पत्थरो की खेपअयोध्या आई और मंदिर मे प्रयुक्त पत्थरो का 67 प्रतिशत भाग निर्माण हो चुका है। हां कुछ लोगो ने तुष्टिकरण की अंधभक्ति के वशीभूत होकर मंदिर निर्माण कार्य मे बाधा डालने का प्रयास किया था,जिससे पत्थरो की खेप अयोध्या नही पहुंच सकी,परन्तु श्रीराम कार्य मे बाधा डालने वालो का हश्र सामने है। आज वह सत्ता से बाहर और मंदिर के पत्थर पूर्व की भांति ही पहुंच रहे है। आगे लगभग 500 ट्रक पत्थरो की आपूर्ति होगी जिसे एकत्रित किया जा रहा है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर मे कहा पेजावर मठ उडुप्पी ( कर्नाटक ) मे 24 से 26 नंवबर के दौरान पंद्रहवी “धर्मसंसद” का आयोजन किया जा रहा है।यह धर्म संसद देश मे धार्मिक और सांस्कृतिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करने वाला सिद्ध होगा।जिसमे देश के प्रमुख संत धर्माचार्यो की उपस्थिति रहेगी।
जारीकर्ता-शरद शर्मा
25 सितंबर 2017