श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक -हरिव्दार (उत्तराखण्ड)

प्रेस विज्ञप्ति

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक, उदासीन कार्ष्णि नारायण आश्रम, हरिव्दार (उत्तराखण्ड)
दिनांक 31 मई, 1 व 2 जून, 2017
हरिव्दार, 01 जून, 2017 देशभर के सन्तों का मानना है कि गोहत्या रोकने का एकमात्र रास्ता गोवध पर प्रतिबन्ध लगाकर ही हो सकता है और इसके लिए केन्द्र सरकार को राष्ट्रीय कानून बनाना चाहिए। आज विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक में गोमाता को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने, गोवध बन्दी का कानून बनाने तथा गोहत्यारों को आजीवन कारावास की सजा हेतु प्रस्ताव पारित किया गया। एक अन्य प्रस्ताव में गंगा को प्रदूषण मुक्त कर अविरल, निर्मल बनाने तथा हिन्दू मठ मन्दिरों व धर्मस्थलों के सरकार द्वारा अधिग्रहण पर विरोध जताया गया। बैठक की अध्यक्षता पद्मविभूषण रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने की।
केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक के दूसरे दिन देशभर से पधारे सन्तों के बीच श्रीमहंत फूलडोल बिहारी दास जी महाराज ने गोरक्षा को लेकर प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि भारत में गोहत्या पूर्णरुप से प्रतिबंधित होनी चाहिए। इसके लिए केन्द्रीय कानून का अविलम्ब प्रावधान होना चाहिए। देश में अनेक राज्यों में गोहत्या के कानून पर्याप्त कड़े न होने के कारण गोवध करने वाले कानून से बचने का मार्ग निकाल लेते हैं। सख्त कानून न होने के कारण ही केरल, बंगला तथा पूर्वोत्तर राज्यों में गोवंश को काटा जा रहा है। सन्तों का यह मत है कि गोहत्या बन्दी के कड़े राष्ट्रीय कानून से ही गोहत्या बन्द होगी। अतः गोहत्या बन्दी के लिए केन्द्र सरकार राष्ट्रीय कानून बनाए, गोमाता को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करे तथा गोहत्यारों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करे। प्रस्ताव का अनुमोदन महामण्डलेश्वर अनुभूतानन्द जी महाराज ने किया।
एक अन्य प्रस्ताव में सन्तों ने गंगा के निरन्तर प्रदूषित होकर इसके जल के आचमन योग्य न रहने पर चिन्ता जाहिर की। सन्तों ने कहा कि गंगा के गंगत्व की हर हालत में रक्षा होनी चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा गंगा रक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों में तेजी लायी जाए। गंगा के गंगत्व के लिए जिम्मेदार अमृत तत्व लगातार पहाड़ों में बांध बनाए जाने के कारण समाप्त हो रहा है। अतः गंगा पर बांध बनाने पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए। साथ ही मैदानी क्षेत्र में किसी भी तरह का औद्योगिक कचरा व जल-मल गंगा में निस्तारित न हो, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। एक अन्य प्रस्ताव में हिन्दू मठ मन्दिरों व धर्मस्थानों का विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अधिग्रहण किए जाने पर सन्तों ने आक्रोश व्यक्त किया। सन्तों ने कहा कि भविष्य में ऐसा हरगिज न किया जाए और सरकार हिन्दू धर्मस्थानों के पुजारियों, तीर्थ पुरोहितों व अन्य सेवा कर्मियों के योगक्षेम की चिन्ता करे। इन मठ मन्दिरों में हिन्दू समाज के चढ़ावे से जो राशि प्राप्त होती है, उसका व्यय संस्कृत, वेद तथा अध्यात्मिक शिक्षा पर, गौशाला की व्यवस्था पर तथा गरीब हिन्दू बच्चों की शिक्षा व मठ मन्दिरों के विकास पर ही होना चाहिए।
बैठक में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि, महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रविन्द्रपुरी, जूना अखाड़े के महंत देवानन्द, साध्वी ऋतम्भरा, स्वामी हंसदेवाचार्य, स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी, स्वामी दिनेश भारती (जम्मू कश्मीर) महामण्डलेश्वर रामशरण दास (हिमाचल प्रदेश), सन्त दिलीप सिंह जी नामधारी (पंजाब), स्वामी अतुल कृष्ण महाराज (पंजाब), श्रीमहंत रामेश्वर दास जी (पंजाब), महंत नवलकिशोर दास जी (दिल्ली), श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज (राजस्थान), श्रीमहंत अमृतराम जी महाराज (राजस्थान), श्रीमहंत रामकृष्ण दास (राजस्थान), आचार्य अविचलदास जी महाराज (गुजरात), नरोत्तम स्वामी जी (गुजरात), स्वामी विवेकानन्द सरस्वती जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानन्द जी, स्वामी रामदेवानन्द सरस्वती जी, महंत चिन्मयदास जी, डॉ0 रामविलासदास वेदान्ती, शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती, श्रीमहंत रामजीदास, श्रीमहंत दिव्यजीवन दास, श्रीमहंत राम मनोहर दास (सभी उत्तर प्रदेश से), डॉ0 विलुपाक्ष स्वामी (महाराष्ट्र), स्वामी जितेन्द्र नाथ जी (महाराष्ट्र), स्वामी हरिभक्त पारायण माधव महाराज (महाराष्ट्र), स्वामी प्रसाद राजस्वामी (आन्ध्र प्रदेश), स्वामी जितेन्द्र नाथ प्रधानी, स्वामी निगमानन्द अधिकारी, स्वामी चरणनरजारी (सभी असम से), स्वामी श्यामानन्द ब्रह्मचारी (मेघालय), स्वामी गुरुपदानन्द जी, स्वामी बन्धु गौरव जी महाराज (बंगाल), स्वामी कृपानन्द पुरी, स्वामी जीवनमुक्तानन्द पुरी, स्वामी भास्कर तीर्थ (उड़ीसा), महंत महादेव दास, महंत विमलशरण जी, महंत बालकदास (बिहार), महंत जगन्नाथ दास, बौद्ध गुरु कर्मचार्य (नेपाल)।
सन्तों का स्वागत विहिप के कार्याध्यक्ष डॉ0 प्रवीणभाई तोगड़िया, संगठन महामंत्री दिनेशचन्द्र जी, महामंत्री चम्पतराय जी ने तथा संचालन विहिप के उपाध्यक्ष श्री जीवेश्वर मिश्र ने किया।

प्रस्ताव – गोरक्षा

प्रस्ताव – ‘सामाजिक समरसता’ यानि छुआ-छूत मुक्त भारत

प्रस्ताव – श्रीराम जन्मभूमि