श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

प्रेस विज्ञप्ति – विश्व हिन्दू परिषद – केन्द्रीय प्रबन्ध समिति बैठक, पटना-(बिहार)

प्रेस विज्ञप्ति
गाय बचाओ, देश बचाओ
गोवंश रक्षा का केन्द्रीय कानून बनाओ
गोवंश रक्षण संवर्धन मंत्रालय शीघ्र बनाओ
विश्व हिन्दू परिषद अपनी स्थापना के साथ ही गोवंश रक्षण संवर्धन के पावन कार्य में सक्रिय है। वर्तमान की समस्याओं का निदान करते हुये, चुनौतियों को स्वीकार कर कार्य को सकारात्मक स्वरूप प्रदान किया है।
श्वेत क्रांति के परिणाम से हम सब परिचित हैं, भारतीय गोवंश का नष्ट होना, भारतीय गोवंश की नस्लों पर सीधा कुठाराघात, गोवंश का घटता क्रम इसका साक्षी है। मांस निर्यात नीति के कारण कत्लखानों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, पशुधन लगातार घट रहा है। आज भारत से 22.5 लाख टन मांस निर्यात हो रहा है। परिणाम यह है कि कुल पशुधन में 4.1 प्रतिशत, देशी गायों की 9 प्रतिशत और नर भैसों की संख्या में 19 प्रतिशत की कमी आयी है।
देश में दूध की कमी हो रही है, हमें 18 करोड़ टन दूध चाहिये, किन्तु आज 13.75 करोड़ टन ही दूध होता है अर्थात 85 लाख लीटर दूध प्रतिदिन की कमी है, विदेशों से आयात दूध का पाउडर भी कमी पूरी नहीं कर पा रहा है। नकली दूध आज भारत की नई पीढ़ी को खोखला कर रहा है, डिटर्जेंट मिल्क, सेंथेटिक मिल्क, केमिकल दूध मिल रहा है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2021-22 में 20 करोड़ टन दूध चाहिये।
घटता गोवंश इस लक्ष्य पर प्रश्न चिन्ह है। भारतीय नस्ल का शुद्ध दूध प्रोटीन ए-2 जिसने दुनिया में दूध की मांग बढ़ाई है। भारतीय नस्ल सुधार से ही प्राप्त हो सकता है। नस्ल सुधार का कार्य आज परिषद के माध्यम से हो रहा है।
रासायनिक कृषि के परिणाम भी हमारे सामने हैं, जैविक कृषि अर्थात गोवंश आधारित कृषि कम लागत में स्वस्थ अन्न्ा हमें प्रदान कर सकता है, जैविक खाद, स्वदेशी बीज इस समस्या का निदान है, 6000 से अधिक किसान आज कृषि कर रहे हैं। गोवंश का रक्षण एवं संवर्धन ही किसानों को आत्महत्या से बचा सकेगा। आज भी 53 प्रतिशत आय कृषि से, 20 प्रतिशत आय पशुधन से अर्थात् 73 प्रतिशत आय प्राप्त हो रही है। घटता गोवंश और केन्द्र सरकार की जैविक कृषि की नीति पर प्रश्न चिन्ह लगा रही है।
पंचगव्य औषधि के सफल प्रयोग ने आरोग्य के क्षेत्र में समाज का आत्म विश्वास बढ़ाया है।
341 केन्द्रों पर आज औषधि निर्माण हो रही है। 5 केन्द्रों पर अनुसंधान का श्रेष्ठ कार्य संपन्न्ा हो रहा है। 1800 गोशालायें अपनी अहम भूमिका निभा रही है। गोवंश की तस्करी को रोकने हेतु 1260 मुकदमें न्यायालयों में लड़ रहे हैं। 5 पेटेंट अमेरिका, चीन से हमें प्राप्त हुये हैं। जिसने भारतीय गाय का मान विश्व में बढ़ाया है।
महात्मा गांधी जी के स्वराज्य का अर्थ है गोवंश की हत्या पूर्ण रूप से बंद हो। उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालयों की मंगल भावना है कि केन्द्रीय गोवंश रक्षा का कानून बने। मांस निर्यात बन्द करना आज की आवश्यकता है। गोवंश रक्षण संवर्धन मंत्रालय शीघ्र बनाया जाए।
हुकुम चन्द सावला, केन्द्रीय उपाध्यक्ष.विश्व हिन्दू परिषद
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विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक पटना में 25 जून से 26 जून तक आयोजित की गई है। परिषद के समस्त शीर्षस्थ कार्यकर्ता पटना पहुंच चुके हैं । बैठत्क में चर्चा होने वाले विषयों पर आज इन कार्यकर्ताओं ने विचार विमर्श किया । दोपहर बाद परिषद द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में इसके सेवा कार्यों पर प्रकाश डाला गया । प्रमुख प्रवक्ता डाॅ. सुरेन्द्र जैन,
ग्राम शिक्षा मंदिर अभियान के अध्यक्ष बजरंग बागड़ा, अखिल भारतीय सेवा प्रमुख अरविंद ब्रह्मभट्ट एवं अ0भा0 सहसेवा प्रमुख आनंद प्रकाश हरबोला इसमें उपस्थित थे ।
बजरंग बागड़ा ने बताया कि भारत में लगभग 51,000 सुदूर वनवासी गांवों में निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा के अतिरिक्त स्वास्थ्य, ग्राम विकास, संस्कार और कौशल उन्नयन पर भी कार्य हो रहा है ।
भारत के 21 राज्यों के 50,947 एवं नेपाल के 1,912 गाँवों में कार्यरत है । बालकांे की प्राथमिक षिक्षा से यह अभियान प्रारंभ हुआ । जिसमें भाषा व गणित के साथ संस्कार ज्ञान पर आग्रह रहता है । स्थानीय भाषा में स्थानीय आचार्य द्वारा निःषुल्क षिक्षा देकर बिहार में 3,300 गांवों में शिक्षा मंदिर संचालित जिनमें से 1,950 मगध भाग और 1,350 मिथिला भाग में हैं । प्राथमिक षिक्षा के साथ – साथ स्वास्थ्य, जैविक कृषि, गौ आधारित खेती, और संस्कार निर्माण के अनेक आयामों का संचालन किया जा रहा है । घरेलू इलाज बावत जागरुकता और प्रषिक्षण दिया जा रहा है उन क्षेत्रों मे उपलब्ध जडी बूटियों, वनस्पतियों को आधार बनाया गया है । 800 गाँवों में महिलाओं और बालकों में रक्त अल्पता (एनीमिया) पर विषेष प्रकल्प चलाकर अनेक रोगों को जन्मदायी इस समस्या का समाधान किया । अनेक गाँवों में व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक स्वच्छता पर अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किये गये हैं ।
सांस्कृतिक चेतना जागृत करने के उददेष्य से हरि कथा योजना के अंतर्गत 700 कार्यकर्ता राम कथा व भागवत कथा के आयोजन तथा रथ योजना के तहत 23 रथ एक चल मंदिर के रुप में तथा रामायण प्रदर्षन करते हुये गाँव गाँव विचरण करते हैं । 42 हजार से अधिक गांवों में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया । धार्मिक पुर्नजागरण के अलावा अनेक सामाजिक विषयों पर सघन चर्चा होती है, जिनमें नषा मुक्ति प्रमुख है ।
कृमि गोबर खाद तथा गौमूत्र से कीटनाषकों का उत्पादन, पोषण वाटिका, वृक्षारोपण, जल भंडारण आदि सम्मिलित हैं । वनांचलों के किषोर किषोरियों को सिलाई, कंप्यूटर, आदि का प्रषिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने में मदद की जाती है ।अभी हाल ही में एक चल कंप्यूटर लेब प्रारंभ की गई ।
यह अभियान 53,859 अंषकालीन आचार्यों 6,100 पूर्णकालीन कार्यकर्ताओं और लगभग 2 लाख से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से चल रहा हैं । यथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (प्प्ड) बैंगलुरु, टाटा धान अकादमी, एस्पायरिंग माइंडस आदि जिनमें पाया गया है कि एकल की विद्यालय और अन्य गतिविधियों से उस समाज में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार हुआ है, षिक्षा व स्वास्थ्य का स्तर बढा है और नषा मुक्ति में सफलता मिली है ।
अरविंद ब्रह्मभट्ट ने परिषद के अन्य सेवा कार्यों पर प्रकाश डाला जिसमें विद्यालय, स्वास्थ्य, बाल कल्याण केन्द्र आदि हजारों सेवा प्रकल्प पूरे भारत में संचालित हैं । आगामी 2 दिनों में संगठन के विभिन्न्ा पहलुओं पर चर्चा होगी तथा अभियान की योजना के तहत आगामी 5 वर्षों में देष के 1 लाख गाँवों तक अपनी पहुँच का विस्तार किया जावेगा ।
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विश्व में विकसित सभ्यता यह भारत की ही देन मानी जाती है। भारत से विश्व में भ्रमण करने वाले ऋषि-मुनियों की यह देन है। जिनमे थे पुज्य कश्यप, अगस्त्य, मार्कंडेय, शुक्राचार्यआदि। विश्व में हम कुछ देने के लिए ही गये है, दक्षिणी पुर्वी देशों से लेकर ईरान, ईराक तक के सभी देशो में आज भी यह मान्यता है। विश्व में जब हमारे ऋषि गये तब देशों की सीमाएं नहीं थी। सारा विश्व Boundryless contries के रूप में था। जैसे-जैसे सीमाएं बनती गई वैसे भारत से विश्व में जाना कम हुआ। हमारी परतंत्रता यह भी एक कारण था।
18वीं शताब्दी में विश्व में हिन्दू गिरमिटियाँ मजदूर के रूप में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र से फ्रेंचों के द्वारा कुछ भारतीयों को ले जाया गया। जिसमें अफ्रिका खण्ड और कैरिबियन कंट्री का समावेश है, उसी भयानक स्थिति में भी हिन्दुओं ने धर्म की आस्था पर उन देशों पर अपना हीरों का स्वरूप प्रकट किया। आज 6-7 देशों के प्रमुख भारतीय हिन्दू ही है। 1960 से बुद्धिवादी लोगों का जाना प्रारम्भ हुआ, 1980 के ल्2ज्ञ के बढ़ने के कारण ज्यादा-ज्यादा से पढ़ा-लिखा हिन्दू भारत छोड़कर अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया में जा रहा है। सभी विदेश में रहने वाले हिन्दुओं की जनसंख्या 100 से 105 करोड़ हो सकती है। विश्व में तीन प्रकार के हिन्दू माने जायेगे। (1) हिन्दू-भारत का (2) विदेशस्थ-हिन्दू (3) हिन्दू-परम्पराओं से। भारत के बाद बड़ी जनसंख्या का देश नेपाल, बंगलादेश, इंण्डोनेशिया, अमेरिका आदि है। विश्व में रहने वाले हिन्दुओं के संस्कार कायम रखना और हिन्दुओं को संगठित रखने का उद्देश्य लेकर विश्व हिन्दू परिषद विश्व में सक्रिय है। 56 देशों में विश्व हिन्दू परिषद का नियमित कार्य चलता है। संस्कारित हिन्दू एवं संगठित हिन्दू को साध्य करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने अपनी पद्धति विकसित की है।
हमारे पद्धति के बिन्दु –
01- Positioning the Hindu Society.
02. Contribution of the Hindu Society.
03. Organising the Hindu Society.
04. Sewa
05. Human Rights.
यह साध्य करने के लिए नियमित कांफ्रेंसेस, टेªनिंग और प्रोग्राम्स के आधार पर विश्व हिन्दू परिषद का काम प्रभावी बनाने का प्रयास चल रहा है।
(अ) हम सब हिन्दू है, हिन्दू ही रहेंगे।
(ब) हम सब हिन्दू एक है।
(स) कोई हिन्दू अकेला नहीं, हम सब साथ-साथ है।
इन संस्कारों का दृढ़ीकरण करने का प्रयास विश्व हिन्दू परिषद द्वारा चल रहा है।
प्रशान्त हरतालकर, केन्द्रीय मंत्री-वि.हि.प विदेश विभाग