श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

Media statement issued by VHP Patron Ma. Ashokji Singhal

People can now see through the masks of agentsworking through and for foreign powers and interests

– Ashok Singhal, Patron, Vishva Hindu Parishad

 Allahabad, Jan. 31Fri, 2014: Arvind Kejriwal, during the past 1½ – 2 years, came before the society as a leader of agitations for India Against Curruption (IAC) and Jan Lokpal Bill, and later on he floated a political party. Taking advantage of the declining popularity of the Congress Party and deluding the people, Kejriwal has come to assume power in Delhi. Today the whole country is askance as to which superpower stands behind Kejriwal’s coming to power? Increasingly it is becoming plain that behind Kejriwal there is the big hand of the Ford Foundation of USA and its supporter the American intelligence agency the CIA. Under the cover of civil society, Kejriwal and his comrades, with their demands, have been thrashing about. The so-called ‘Civil Activists’ or members of the ‘Civil Society’ are part of a vast organization namely the World Social Forum. The formation and growth of the ‘World Social Forum’ took leaps through the leftist thinkers whose world leadership had abandoned communism after the decline and disintegration of the Communist Russia in the 1990s.    Ever since the western world has set foot in Bharat, since then and even after the independence of Bharat, their firm grip on the Bharatiya market and national policies has still been continuing. Being petrified by the growing power of Narendra Modi they had a feeling that the Congress, through which they were so easily manipulating the national policies and the Bharatiya market, was sliding to the abyss, then through the Ford Foundation they pooled all those forces that can prevent Narendra Modi from becoming the leader of Bharat. Today, various institutions in Bharat, violent Naxalite organizations, violent Jihadi organizations and fast-growing foreign-funded TV channels and their directors and handlers and journalists and the activists of thousands of NGOs here receiving direct or proxy aid from the Ford Foundation, Rockfeller Foundation, Clinton Foundation, etc., have turned up as the Kejriwal’s Party (AAP) to serve the interests of America. The Anglo-American power is solely working behind its attractive slogans like ‘Corruption-free India”. The way the government running under the authority of Soniaji has brought Bharat to its economic predicament, that has made their downfall sure and under these circumstances the Aam Admi Party (AAP) has been floated as their political accessory and servo in the 2014 general elections. When the AAP prides itself of fielding over 300 candidates in the coming parliamentary elections, every Bharatiya citizen wants to know the powers standing behind them. Kejriwal has been given the Magsasay Award. The Ford Foundation tries to give this award to those people who can work for American interests.    A few days ago a lady from America Simrit Lee by name came to Bharat to assess as to who could actually sincerely work for American interests in Bharat. This lady was sent to other countries also where the big force of Ford Foundation has been working in the form of NGOs. This lady had presented a report as to how could the power of Ford Foundation be successful against Hosni Mubarak in Egypt. In other countries also she has made extensive and intensive explorations as to what could be the grounds to remove the existing governments and how could the people serving American interests come to power. Any semblance or inkling of the slogan of ‘Corruption-free India’ of Kejriwal is nowhere to be found in his personal behaviour as yet. After being sworn in to the Chief Minister’s office, sitting on Dharna, transgressing the Constitution of Bharat, is a flagrant display of the anarchist Naxalite persona and arrogance in him. It is open sedition and anti-national stand on the part of his party to say that there should be a referendum in Kashmir even if it is for disintegration of the country, the Army should be withdrawn from Kashmir in spite of the fact that full-fledged terrorist camps are running across in the Pak-Occupied Kashmir and there is perennial efforts at infiltration of terrorists from Pakistan, and what is more they are even demanding such action in the Maoist-infested areas and withdrawal of the paramilitary forces. Kejriwal, on the one hand, is fighting against the police force, and on the other, he wants to end the rule of law in the Maoist-infested areas, and surely it is a plot to spread anarchy in the whole of Bharat, so that the foreign powers can take advantage of the situation. The people of Bharat have detected it and seen through the masks of these subversive and treasonable activists. The leadership of Narendra Modi can ensure that Bharat stands as a sovereign, independent and powerful nation. This is the demand and command of the country today.      

प्रेस वक्तव्य

माननीय अशोक सिंहल, (संरक्षक, विश्व हिन्दू परिषद्)

विदेशी शक्तियों के माध्यम से काम करने वाले लोगों के चेहरे स्पष्ट हो गये हैं।

अरविन्द केजरीवाल पिछले डेढ़-दो वर्ष में इण्डिया अगेन्स्ट करप्शन तथा जन लोकपाल बिल के लिए किये हुए प्रदर्शन के नेता के रूप में समाज के सामने आये, बाद में उन्होंने राजनीतिक दल का गठन किया। कांगे्रस की घटती हुई लोप्रियता का लाभ उठाकर तथा जनता को भ्रमित कर केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में आये हैं। आज पूरे देश में यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि केजरीवाल के सत्ता में आने के पीछे कौन सी महाशक्ति खड़ी है। धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि केजरीवाल के पीछे अमेरिका का फोर्ड फाउण्डेशन और उसकी सहायक अमेरिका की गुप्तचर संस्था सी.आई.ए. का बहुत बड़ा हाथ है। सिविल सोसाइटी के नाम से केजरीवाल और उनके साथी अपनी मांगों के लेकर संघर्ष करते रहे हैं। सिविल एक्टिविस्ट या सिविल सोसाइटी के सदस्य एक व्यापक संगठन वल्र्ड सोशल फोरम के अंग हैं। वल्र्ड सोशल फोरम का गठन, कम्युनिस्ट रूस के पतन के बाद 1990 के दशक में उन वामपन्थी विचारकों के माध्यम से जोर पकड़ा जिनका विश्वव्यापी नेतृत्व कम्युनिजम को छोड़ चुका था।

जब से पश्चिम जगत ने भारत में अपना पांव रखा है तब से तथा भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी आज तक भारत में बाजार एवं नीतियों पर उनकी सुदृढ़ पकड़ बनी हुई है। नरेन्द्र मोदी की बढ़ती हुई शक्ति से भयाक्रान्त होकर उन्हें ऐसा लगने लगा कि वह कांग्रेस जिसके द्वारा वे सरलता से भारत में नीतियों और बाजार पर अपने आधिपत्य का आधार बनाये हुए थे वह समाप्त होने वाला है तब फोर्ड फाउण्डेशन के माध्यम से उन्होंने उन सारी शक्तियों का एकीकरण किया जो नरेन्द्र मोदी को भारत का नेता बनने से रोक सकें। आज फोर्ड फाउण्डेशन, राॅकफेलर फाउण्डेशन तथा क्लिन्टन फाउण्डेशन के द्वारा सीधे और परोक्ष रूप से सहायता प्राप्त करने वाली संस्थायें, नक्सलियों के हिंसक संगठन, जेहादियों के हिंसक संगठन और बड़ी तेजी से विदेशी सहायता से चलने वाले चैनल व उनके संचालक तथा पत्रकार व हजारों एन.जी.ओ. के लोग केजरीवाल की पार्टी के रूप में अमेरिका के हित साधन करने के लिए भारत में खड़े हो गये हैं। इनके ‘‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’’, जैसे लोभनीय नारे के पीछे शुद्ध रूप से एंग्लो-अमेरिकन शक्ति कार्य कर रही है।

सोनिया जी के आधिपत्य में चलने वाली सरकार ने जिस प्रकार से भारत को आर्थिक दुर्दशा में पहुंचा दिया है उससे उनका पतन सुनिश्चित हो गया है ऐसी स्थिति में 2014 के आम चुनाव में उनके राजनीतिक सहायक के रूप में आम आदमी पार्टी का निर्माण हुआ है। जब ये डींग मारते हैं कि हम भारत में तीन सौ से ऊपर प्रत्याशी खड़े करेंगे तो उसके पीछे कौन सी शक्तियाँ खड़ी हैं इसको प्रत्येक भारतीय नागरिक जानना चाहता है। केजरीवाल को मैग्सेसे अवार्ड दिया गया है यह अवार्ड फोर्ड फाउण्डेशन के द्वारा उन लोगों को देने की कोशिश होती है जो अमेरिका के हित में कार्य कर सकें।

कुछ दिन पूर्व अमेरिका से सिमिरित ली नामक महिला भारत इस बात का आकलन करने के लिए आई थी कि भारत में अमेरिका के हित के लिए कौन वास्तविक रूप में सच्चाई के साथ काम कर सकेगा। इस महिला को अन्य देशों में भी भेजा गया था जहाँ पर एन.जी.ओ. के रूप में फोर्ड फाउण्डेशन की बहुत बड़ी शक्ति काम कर रही है। इसी महिला ने मिस्र में हुस्नी मुबारक के विरुद्ध फोर्ड फाउण्डेशन की शक्ति कैसे सफल हो सकती है इसकी एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। अन्य देशों में भी पूर्ववर्ती सरकारों को हटाने के कौन कौन से आधार बन सकते हैं और किस प्रकार से अमेरिका के हित को साधने वाले लोग सत्ता में आ सकते हैं इसकी व्यापक खोजबीन उसने की है। केजरीवाल का भ्रष्टाचार मुक्त भारत के नारे की झलक आज तक के उनके व्यक्तिगत व्यवहार में कहीं भी नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री के पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद भारत के संविधान का उल्लंघन करते हुए धरने पर बैठना उनके अन्दर के अराजक नक्सली व्यवहार का खुला प्रदर्शन है। उनकी पार्टी का यह कहना कि – कश्मीर में जनमत संग्रह कराया जाये, कश्मीर से सेना को हटा लिया जाये तथा मोओवादी क्षेत्रों में भी ऐसा ही उपक्रम कर उन क्षेत्रों से भी अर्द्धसैनिक बलों को हटा लिया जाये खुला राष्ट्रद्रोह है। केजरीवाल एक ओर पुलिस के साथ संर्घष कर रहे हैं वहीं वे माओवादी क्षेत्र में कानून का राज्य समाप्त करना चाहते हैं यह पूरे भारत में अराजकता फैलाने का षड्यंत्र है, ताकि इसका लाभ विदेशी शक्तियाँ उठा सकें। भारत की जनता ने इस बात को भांप लिया है और इनके चेहरे लोगों के समक्ष बड़े स्पष्ट हो गये हैं। भारत एक संप्रभुता सम्पन्न स्वतंत्र शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही खड़ा हो सकता है। यही आज देश की मांग है।