श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री श्री चम्पतराय जी का प्रेस वक्तव्य

लखनऊ 14 सितम्बर, 2013

सरयू मैया की आरती के बाद अयोध्या की चैरासी कोसी पदयात्रा पूर्ण हुई। अवरोधों के बावजूद ऋषिकेश के संत डॉ. रामेश्वरदास जी वैष्णव मखौडा पहुंच गए। अयोध्याा के सभी घाटों पर कड़ी चैकसी थी, परन्तु सूर्यास्त के पश्चात् सरयू मैया की आरती, दीपदान, दुग्ध समर्पण के साथ अयोध्या के चारों ओर चैरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर संतों का 20 दिनों का पदयात्रा कार्यक्रम पूर्ण हो गया। समापन के पूर्व कारसेवकपुरम्् में यज्ञ किया गया। इस अवसर पर दिगम्बर अखाड़ा के महंत सुरेश दास जी महाराज उपस्थित रहे। एक अनुमान से अयोध्या के चारों ओर उत्तरप्रदेश के भिन्न -भिन्न स्थानों पर 1200 संतों की गिरफ्तारी हुई अथवा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उड़ीसा जैसे दूरस्थ स्थान से 90 संत एवं बंगाल से 50 संत अयोध्या पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि के लिए देश में व्यापक जन-जागरण हुआ, विशेष कर उत्तरप्रदेश में। भारत सरकार को यह समझना ही होगा कि अयोध्या में बाबर की स्मृति में कोई नया विकल्प खड़ा नहीं किया जा सकता। अयोध्या हिन्दू समाज के लिए मोक्ष नगरी है। इसके सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा भारत सरकार को करनी चाहिए। भारत सरकार को यह भी समझना होगा कि 6 दिसम्बर, 1992 को तीन गुम्बद वाला जो ढांचा गिरा था, वह इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार मस्जिद नहीं था। इसलिए भविष्य में भी जबरदस्ती का कोई प्रयास इस्लाम की मान्यताओं के विरूद्ध ही होगा। मुस्लिम नेताओं ने एक अवसर पर वचन दिया था कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात सिद्ध होती है तो मुस्लिम स्वैच्छा से यह स्थान छोड़ देंगे।

भारत सरकार ने भी यह वचन दिया था कि ऐसा हो जाने पर भारत सरकार हिन्दू भावनाओं के अनुसार कार्य करेगी। उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद दोनों को अपने वचन का पालन करना चाहिए। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति की यह लड़ाई 1528 ई0 से हिन्दू समाज लड़ रहा है। यह लड़ाई हिन्दुस्तान की सांस्कृतिक आजादी की लड़ाई है। यह संसार में हिन्दुस्तान के गौरव की बृद्धि करेगी। कोई भी समाज अपने साथ अपमान व गुलाम के धब्बे चिपका कर नहीं रखता। बाबर एक आक्रमणकारी था, वह कोई शिक्षाविद्, समाज सुधारक, धार्मिक नेता नहीं था। भारत में रहने वाले मुस्लिम समाज का बाबर से कोई रक्त संबंध नहीं था। इसलिए भारत के समझदार मुस्लिम वर्ग को यह स्थान छोड़ देने की पहल करनी चाहिए।

जारीकर्ता

विश्व हिन्दू परिषद, लखनऊ