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Press Statement – Dr Surendra Jain

Demographic Imbalance Dangerous for National Existence and Identity: Dr Surendra Jain
New Delhi, 27 Aug, 2015. Census Report is not merely a data but is the
identity of the community. The demographic imbalance of Bharat has not
only challenged its identity but also posed threat to its existence.
Addressing a press conference in New Delhi, Dr. Surendra Jain, Joint
General Secretary of Vishwa Hindu Parishd also said that the identity
of Bharat is based on Religious Congregation of all communities,
Equality of thinking and seeing whole world as one family and this
exists only due to majority Hindu society. The decreasing Hindu
Population may become serious threat to this identity. According to
the census report 2011, the Hindu population has first time lowered
than 80%. The district or state where Hindus are declining in number
show a dangerous signal for future.  The entire Kashmir valley, three
districts of Bihar & West Bengal and nine districts in Assam are
giving a red signal for Hindu existence.
VHP feels that foreign infiltration, religious conversions and
aggressive behaviour of a particular sect or community is responsible
for the same. A large group of Muslim society sees it as a mission to
enhance its numbers. In the name of Darul Islam, some hard liners of
muslim community are provoking their followers to make India a muslim
region.  VHP feels that this danger has to be faced by not only Bharat
& Hindus but Muslims cannot be escaped from it.  Their mission for
increasing population will keep them remain backward.
Therefore, we appeal to the muslim community to improve their thinking
in this regard and change themselves internally in the national
interest.  All civilized communities throughout the world recognizes
family planning. Muslim should be the followers of uncle APJ Abdul
Kalam, but not Babar or Mohd Gauri.
VHP appeals to all state & central govt. to form and adhere to common
population policy applicable for all communities of the country. The
Judiciary has  also said in this regard. The infiltration of muslims
from Bangladesh & Mynmar has also not only created the imbalance but
has become danger to the nation. It should be stopped, identified and
deported forth with.  It is the constitutional & moral duty of the
govts. Stopping conversion will not only correct the imbalance but
also became based to improve the religious harmony. VHP also calls
upon Hindu community to understand the threat imposed on it and the
country & pressurize the govt. for necessary action in this regard.
The Press Conference was also addressed by the demographic expert
Prof. Rakesh Sinha (Director, India Policy Foundation) who elaborated
the seriousness of the data.
Vinod Bansal
Spokesperson,
Vishwa Hindu Prishad,
प्रेस वक्तव्य
जनसंख्या असंतुलन देश के अस्तित्व और पहचान के लिए खतरा: डा0 सुरेन्द्र जैन
नई दिल्ली, 27 अगस्त, 2015। जनगणना केवल आंकडे़ नहीं, उस समूह की पहचान होती
है। भारत की जनसंख्या का तेजी से बढ़ता असंतुलन न केवल उसकी पहचान समाप्त कर
रहा है अपितु भारत के अस्तित्व के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। नई दिल्ली में
आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय
संयुक्त महामंत्री डाॅ0 सुरेन्द्र जैन ने यह भी कहा कि भारत की पहचान सर्वपंथ,
समभाव व वसुधैव कुटुम्बकम् आदि सद्गुणों से है जो यहां के बहुसंख्यक हिन्दू
समाज के कारण निर्माण हुई है। हिन्दुओं की घटती जनसंख्या इस पहचान के लिए खतरा
बनेगी। 2011 के जनसंख्या आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक खतरनाक संकेत मिल रहा
है। देश में हिन्दुओं की जनसंख्या पहली बार 80 प्रतिशत से कम हुई है। जिन
जिलों या राज्यों में हिन्दुओं की संख्या कम हुई है उनकी स्थिति को देखकर
भविष्य के संकेत आसानी से समझे जा सकते हैं। पूरी कश्मीर घाटी, बिहार व बंगाल
के तीन तथा असम के नौ मुस्लिम बाहुल्य जिलों में साम्प्रदायिक सद्भाव समाप्त
हो चुका है। गैरमुस्लिम वहां अपने अस्तित्व को नहीं बचा पा रहे हैं। राज्य तथा
केन्द्र सरकार भी इन स्थानों पर पंगु दिखाई देती है। शायद इसी कारण कुछ
मुस्लिम नेता भविष्य की ओर संकेत करते हुए चेतावनी देते हैं कि जब हम 20
प्रतिशत हो जायेंगे तो हिन्दुओं को उनकी शर्तों पर रहना होगा।
विश्व हिन्दू परिषद जनसंख्या के बढ़ते असंतुलन के लिए विदेशी घुसपैठ,
धर्मान्तरण तथा एक वर्ग की आक्रामक नीति को जनसंख्या वृृद्धि करने का प्रमुख
कारण मानती है। मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग जनसंख्या वृृद्धि को एक मिशन
मानता है। कुछ कट्टरपंथी दारूल इस्लाम का सपना दिखाकर इस मार्ग पर चलने के लिए
उन्हें विवश करते हैं। विहिप का मानना है कि इस खतरे के दुष्परिणाम हिन्दू
समाज व भारत को तो झेलने ही पड़ेंगे किन्तु मुस्लिम समाज भी इससे अछूता नहीं
रहेगा। आबादी बढ़ाने के इस अभियान के कारण उन्हें पिछड़ा रहने के लिए अभिशप्त
रहना ही पडे़गा। इसलिए मुस्लिम समाज से हमारी अपील है कि इस अभियान के अपने
ऊपर होने वाले दुष्परिणामों को ठीक करने हेतु आंतरिक सुधार की प्रक्रिया चालू
करे। दुनिया के सभी सभ्य समाज परिवार नियोजन को स्वीकार करते हैं तो वे क्यों
नहीं? उनके आदर्श बाबर और गौरी नहीं, चाचा अब्दुल कलाम ही हो सकते हैं। उनके
काम से देश के लिए निर्माण की गई कोई भी कठिनाई उनके स्वयं के लिए भी संकट का
कारण बनेगी।
विश्व हिन्दू परिषद की भारत की सभी सरकारों से अपील है कि वे सम्पूर्ण देश में
सभी समाजों के लिए समान जनसंख्या नीति का निर्माण करें। जिसके लिए न्यायपालिका
भी कई बार कह चुकी है। बांग्लादेश व बर्मा से हुई घुसपैठ न केवल जनसंख्या
असंतुलन बल्कि देश पर खतरे का भी कारण बन चुकी है। उनको रोकना, पहचानना व वापस
भेजना सभी सरकारों का संवैधानिक व नैतिक दायित्व है। धर्मान्तरण के विषय में
भी भारत का संविधान व न्यायपालिका बहुत स्पष्ट हैं। विहिप हिन्दू समाज का
आह्वान करती है कि वह अपने तथा देश पर मंड़राते हुए इस खतरे की भयावहता को
समझे तथा संगठित होकर सरकारों पर इस संबंध में सार्थक कदम उठाने हेतु दबाव
बनाए।
पत्रकारवार्ता में जनसांख्यिकी विशेषज्ञ प्रो0 राकेश सिन्हा (निदेशक, भारत
नीति प्रतिष्ठान) भी विशेष रूप से उपस्थित थे तथा उन्होंने पत्रकारों को इस
विषय की गंभीरता के बारे में बताया।
जारीकर्ता
विनोद बंसल – प्रवक्ता, विश्व हिन्दू परिषद