श्रीराम जय राम जय जय राम, শ্ৰীৰাংজয়ৰাংজয়জয়ৰাং, শ্রীরাম জয় রাম জয় জয় রাম , શ્રીરામ જય રામ જયજય રામ, ಶ್ರೀರಾಮಜಯರಾಮಜಯಜಯರಾಮ, ശ്രിറാം ജയ് റാം ജയ്‌ ജയ് റാം, శ్రీరాంజయరాంజయజయరాం

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल उपवेशन, हरिव्दार.

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल उपवेशन
प्राचीन श्रीराम मंदिर, ऋषिकेश रोड, भूपतवाला, हरिद्वार
ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी-अष्टमी, संवत् 2072 विक्रमी, 25-26 मई, 2015

प्रेसनोट
25 मई, 2015 । हरिद्वार, प्राचीन श्रीराम मन्दिर, भोपतवाला में विश्व हिन्दू परिषद की DSC02146 1केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक के प्रथम सत्र में दो प्रस्ताव ‘‘गंगा की अविरलता ही गंगा की निर्मलता और रक्षा का एकमेव मार्ग है’’ व ‘‘श्वेतक्रान्ति और भारत के गाँव व गरीब किसान के विकास का मूलाधार गोवंश की रक्षा में सन्निहित है’’ पारित हुए, जिन पर सभी सन्तों ने एकमत होकर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ निवर्तमान शंकराचार्य पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महानिर्वाणी पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विशोकानन्द जी महाराज तथा संचालन विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री चम्पतराय जी व उपाध्यक्ष श्री जीवेश्वर मिश्र ने संयुक्त रूप से किया। पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द जी ने कहा कि मेरा विश्व हिन्दू परिषद के साथ सम्बन्ध 1964 से है और तब से अब तक विश्व हिन्दू परिषद का एक सामान्य घटक होने के नाते मैं हर
कार्यक्रम में उपस्थित रहा हूँ। मैं आज पुनः संघ के तत्कालीन सरसंघचालक परमपूज्य श्रीगुरुजी को स्मरण कर रहा हूँ। मुझे 15 वर्ष की आयु में उनकी गोद में बैठने का अवसर मिला। हम सब भगवान श्रीराम के उपासक हैं और श्रीराम भगवान शिव के उपासक हैं, दोनों ही हमें सिखाते हैं
कि हमें विष पीने और अमृत बांटने का अधिकार है। विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है। यह हम मानेंगे तो आत्म-संतुष्टि होगी और विश्व का कल्याण होगा।
जिस देश में ‘‘यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते’’ सिखाया गया उस देश में आज टी.वी. खोलो तो बलात्कार की खबरें दिखाई देती है, यह पीड़ादायक है। हर गाँव में हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ होने लगे तो परिवर्तन आएगा। आज महिलाओं को किरण बेदी बनने की जरूरत है। मैं उस साध्वी के साहस को प्रणाम करता हूँ जिसने राजनैतिक नेता की गाड़ी को बदतमीजी करने पर तोड़ दिया।
DSC02146 3पीड़ा यह है कि इस देश का 85 प्रतिशत हिन्दू आज यह महसूस कर रहा है कि उसका रक्षक कोई नहीं है। जब तक यह चुनाव की पद्धति रहेगी तब तक देश में भ्रष्टाचार नहीं रूकेगा, चाहे देश में एक की जगह मोदी सरीखे पचास नेता आ जाए। आप पार्टी फण्ड के नाम पर चन्दा क्यों लेते हैं ? अगर आपका चरित्र अच्छा है तो लोग अपने आप पैसा देंगे। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि केन्द्र सरकार की ‘‘नमामी गंगे’’ योजना स्तुत्य है और यह भविष्य के लिए सुखद संदेश है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि जितना जल गंगोत्री से निकलता है उतना ही गंगासागर तक पहुँचना चाहिए। अब तो हरिद्वार में भी गंगाजल नहीं मिल रहा है। हिमालय में विकास की जगह विनाश हो रहा है और गंगा को अप्राकृतिक ढंग से लाया गया है। गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक के तीर्थस्थानों के जो घाट हैं, वहाँ पर्याप्त मात्रा में गंगा की धारा नहीं पहुँच रही है। इसलिए गंगा की अविरलता, निर्मलता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
पूर्व गृहराज्य मंत्री पूज्य स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा कि मोदी सरकार से DSC02146 2सन्तों को बहुत आशा है। गंगा की पीड़ा को जानने वाला ही वास्तव में गंगा के लिए कुछ कर सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व राज्य के मुख्यमंत्री से हुई वार्ता में भी गंगाघाटों पर जल का न पहुँचना बड़ी चिन्ता का विषय रहा। उन्होंने कहा कि गंगा की गहराई दिन व दिन कम होती जा रही है जिस कारण गंगाघाटों पर पर्याप्त जल नहीं पहुँचता। गंगा की अविरलता के बिना निर्मलता की बात नहीं की जा सकती। गंगा के ऊपर सरकार के मंथन में जो निकला
है, वह सामने आना चाहिए। साथ ही उन्होंने गोरक्षा के लिए केन्द्र सरकार से सख्त कानून बनाए जाने की माँग करते हुए कहा कि गोवध व कत्लखानों को तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए।
साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि गंगा को बाँधों में बांधकर गंगा का गंगत्व समाप्त कर दिया है। गंगा में डूबकी लगाकर जहाँ मोक्ष की प्राप्ति होती है वहीं आज गंगा प्रदूषण विकट समस्या बन गया है। साध्वी मैत्रेयी गिरि ने कहा कि जिस देश के पूर्वजों की तपस्या से गंगा अवतरित हुईं,
आज उसी माँ गंगा का जल प्रदूषित हो गया है। माँ गंगा के साथ-साथ उनकी कई बहनें भी हैं, जिनकी रक्षा बहुत जरूरी है। पूज्य स्वामी दयानन्द दास जी ने कहा कि गंगा नदी में राफटिंग बन्द होनी चाहिए। पूज्य स्वामी परमात्मानन्द जी ने कहा कि आज विकास की जो बात हो रही है, वह पश्चिम ने लिखी
है और हमारा राष्ट्र उसी दिशा में जा रहा है। स्वर्गीय राजीव गांधी ने गंगा प्राधिकरण के लिए 11 हजार करोड़ रूपए दिए लेकिन कहाँ गए पता नहीं। गंगा से सटी हुई सब जमीनें विधर्मियों के पास जा रही हैं, जिसका पैसा विदेशों से आ रहा है। पूज्य राघवाचार्य महाराज जी ने पंचगव्य से बनने वाले उत्पादों पर जोर दिया। पूज्य म0म0 ईश्वरदास जी महाराज ने कहा कि गोमाता की जो दूर्दशा देवभूमि में हो रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष ड़ॉ0 प्रवीणभाई तोगडि़या ने कहा कि केन्द्र सरकार को गोहत्या बन्दी का कानून लाना चाहिए। प्रत्येक हिन्दू को हर दिन एक रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में देसी गाय की नस्ल समाप्त होती जा रही है, इसके संरक्षण, संवर्धन के लिए आवश्यक है कि गोमूत्र व गोबर की उपयोगिता को हम समझें।
अन्त में कार्यक्रम के अध्यक्ष पूज्य स्वामी विशोकानन्द जी महाराज ने कहा कि गोसेवा से हमें सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है। गाय की सेवा से बारह ज्योतिर्लिंगों की पूजा का फल प्राप्त होता है। गऊ हमारी जीवन्त देवोमाता है, जो हमें पैदा होने से अन्त तक तारती है।गंगा की अविरलता, निर्मलता का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम आज भी अपनी मोक्षदायिनी माँ गंगा के प्रति जागरूक नहीं हुए तो हमारी आने वाली पीढि़याँ हमें कभी
माफ नहीं करेगी। आज जहाँ देश की यमुना, सरस्वती जैसी महानदियाँ विलुप्त होने के कागार पर हैं वहीं साजिशन गंगा को भी समाप्त किया जा रहा है। बड़े-बड़े बांधों का निर्माण कर गंगा में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है, जो प्रकृति के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है।

26 मई, 2015 । हरिद्वार, प्राचीन श्रीराम मन्दिर, भोपतवाला में विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक के दूसरे दिन एक प्रस्ताव ‘‘श्रीराम जन्मभूमि’’ के सम्बन्ध में पारित हुआ। बैठक में शामिल 100 से अधिक सन्तों ने एकमत होकर राम मन्दिर निर्माण के संकल्प को दोहराया। साथ ही इसके कानूनन पहलू पर भी चर्चा की।

जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारम्भ हुई बैठक में दिगम्बर अखाड़ा के महंत पूज्य सुरेशदास जी महाराज ने श्रीराम मन्दिर का प्रस्ताव रखा। जिसका समर्थन निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास जी ने तथा अनुमोदन श्रीमहंत कन्हैयादास जी ने किया।

बैठक में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि के लिए पूरा देश संकल्पित है। जिस ढंग से समाधान निकलता हो, हमें उसी प्रकार से प्रयास करना चाहिए क्योंकि पूरे देश का हिन्दू श्रीराम मन्दिर निर्माण भव्यता के रूप में देखना चाहता है।

स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज ने कहा कि निश्चित रूप से हम सबके लिए श्रीराम मन्दिर जन्मभूमि के लिए, गोरक्षा के लिए, गंगा रक्षा के लिए संघर्ष तो करना है परन्तु धैर्य की भी आवश्यकता है। धैर्य खोने से स्थितियाँ बिगड़ सकती हैं। हनुमान जी का अशोक वाटिका का प्रसंग हमारे ध्यान में है, जब रावण माता सीता को मारने के कटार निकालता है तब भी हनुमान जी धैर्य नहीं खोते। देश के प्रधानमंत्री ने कई देशों में भागवत गीता बांटी। इसी से प्रेरित सरकार को चाहिए कि देश के पाठ्यक्रम में भागवत गीता को सम्मिलित करे। उन्होंने कहा कि भगवान राम के जन्मभूमि पर हमें मन्दिर बनाना है परन्तु संघर्ष करते हुए भी बेहद सावधानी बरतनी होगी। श्रीमहंत कन्हैयादास जी महाराज ने कहा कि हर हालत में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का निर्माण होना चाहिए। आवश्यकता पड़े तो संयुक्त अधिवेशन बुलाकर सदन में प्रस्ताव पारित हो। वृन्दावन से आए स्वामी आदित्यानन्द ने कहा कि हमें सरकार को थोड़ा समय देना चाहिए। महामण्डलेश्वर रामेश्वरानन्द सरस्वती ने कहा कि देश की परिस्थितियाँ बदल रही हैं, मन्दिर निर्माण पर दूसरे समुदायों की भी राय बदल रही है, इसलिए धैर्य रखते हुए परिस्थितियों को अपने अनुकूल होने का इन्तजार करना चाहिए। स्वामी अमृतराम जी ने कहा कि उतावलापन नहीं दिखाना चाहिए जबकि अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से निरन्तर इस कार्य को गति देते रहना होगा। महामण्डलेश्वर कैलाशानन्द ब्रह्मचारी ने कहा कि राम मन्दिर निर्माण से सन्त कहीं पीछे नहीं हैं, सब एकजुट होकर मन्दिर निर्माण के कार्य में लगे तो हर सूरत में राम मन्दिर निर्माण होकर रहेगा। महामण्डलेश्वर चित्तप्रकाशानन्द महाराज ने कहा कि जोश हमारे कार्य में बाधक न बने। हमें अपने लोगों पर अविश्वास नहीं करना चाहिए। साध्वी विभानन्द गिरि ने कहा कि हमें सरकार पर दबाव बनाकर मन्दिर निर्माण के लिए कानून बनाए जाने की मांग करनी चाहिए। स्वामी चिन्मयदास जी महाराज ने कहा कि एक विशाल सन्त सम्मेलन आयोजित किया जाए जिसमें देश के प्रधानमंत्री को बुलाया जाए। स्वामी रामदास जी महाराज ने राम मन्दिर निर्माण के लिए हिन्दू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। स्वामी पुष्करानन्द महाराज ने कहा कि श्रीराम मन्दिर हिन्दू आस्था का मुद्दा है जिस पर ज्यादा धैर्य की हमारी मानसिकता न बनी रहे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री की कार्यशैली से उन्हें अधार्मिक नहीं कहा जा सकता। उन्होंने देश के मान-सम्मान, हिन्दू मान्यताओं, संस्कृति व सभ्यता को विदेशों में मनवाया है। निर्जल नवरात्रि व्रत करना, गंगा आरती करना, शिवार्चन सहित श्रीमद्भागवत गीता का विदेशों में प्रचार करना, उनकी हिन्दू मानसिकता दर्शाता है। हमें प्रधानमंत्री को थोड़ा समय देना चाहिए। राम मन्दिर निर्माण के लिए सन्तों का एक प्रतिनिधि मण्डल प्रधानमंत्री से मिले और उनसे वार्ता कर राम मन्दिर निर्माण के लिए कोई ठोस कदम उठाने की माँग करे।

महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज ने सभी सन्तों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह सरकार हमारी है। हमें धैर्य से सरकार के साथ समन्वय बनाकर श्रीराम मन्दिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष श्री जीवेश्वर मिश्र व महामंत्री श्री चम्पतराय जी ने किया।

पारित प्रस्ताव  [PDF]
प्रस्ताव क्र0-1- गंगा की अविरलता ही गंगा की निर्मलता और रक्षा का एकमेव मार्ग है।
प्रस्ताव क्र0-2 श्वेतक्रान्ति और भारत के गाँव व गरीब किसान के विकास का मूलाधार गोवंश की रक्षा में सन्निहित है।
प्रस्ताव क्र0-3 श्रीराम जन्मभूमि।