१२ से १४ वर्ष के बच्चों को यौन क्रीडा के लिये प्रेरित कर यह सरकार देश को बर्बाद करना चाहती है।/This Regime wants to ruin the country by inspiring the children of 12-14 years to commit sexual acts.

महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा एक प्रस्ताव लाया गया है जिसमें १२ से १४ वर्ष के बच्चों के बीच में की गई यौवन क्रीडा को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का सुझाव है। दुर्भाग्य से यह प्रस्ताव बच्चों को यौन शोषण से मुक्त करने के नाम पर लाया जा रहा है। पहले यह आयू १६ वर्ष की थी जिसको घटाकर अब १२-१४ वर्ष किया जा रहा है। पहले यौन शिक्षा के नाम पर विद्यालयों में कंडोम बांटने का सुझाव भी इन्हीं लोगों के द्वारा लाया गया था, अब वे कच्ची उम्र के नादान बच्चों को यौन क्रीडा के लिये प्रेरित कर भारत को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? क्या वे विद्या के मंदिरों को वेश्यालय बनाना चाहते हैं? क्या १२ वर्ष का मासूम बच्चा इस कार्य में संलिप्त होने के बाद शिक्षा की ओर ध्यान दे पायेगा? जिस आयू में इन सब चीजों की ओर ध्यान नहीं जाना चाहिये और बच्चों को पूरी क्षमता से ज्ञान अर्जित करना चाहिये जिससे वे अपने उज्जवल भविष्य की आधारशिला तैय्यार कर सकें, उस आयू में यौन क्रीडा में उनको जाने के लिये प्रेरित करना न केवल उन बच्चों का अपितु देश का भविष्य बर्बाद करने का यह एक षडयन्त्र है। इस देशघाती कदम से बच्चों का यौन शोषण रुकने की जगह और बढेगा। ऐसा लगता है कि यह भारत को बर्बाद करने के किसी अन्तर्राष्ट्रीय षडयन्त्र का भाग है जिसकी न्यायिक जांच होनी चाहिये।

जिन पश्चिमी देशों की अंधी नकल के आधार पर यह प्रस्ताव लाया जा रहा है, उनके अनुभव अवश्य देखने चाहियें। अमेरिका में यह आयू १६-१८ वर्ष है परन्तु वहां पर १०-१२ वर्ष की लडकियां बिन ब्याही मां बन रहीं हैं। आज वहां प्राईमरी विद्यालयों के साथ ऐसे बच्चों की देखभाल के लिये अलग केंद्र बनाना जरूरी हो गया है। क्या ये भारत के नौनिहालों को ऐसा भविष्य देना चाहते हैं? दूध पीने की उम्र में यौन संबंधों के लिये ललचा कर उन्हें अपने अवैध बच्चों को दूध पिला कर पालन के लिये मजबूर किया जाये, इससे दुर्भाग्यजनक और क्या हो सकता है। इस षडयंत्र से उनका भविष्य बर्बाद कर दिया जायेगा। भारत के युवाओं की क्षमता से पश्चिम के युवा मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। कहीं यह भारत के प्रतिभावान युवकों को यौन क्रीडा में संलिप्त कर उनको पीछे करने का पश्चिम देशों का षडयंत्र तो नहीं है? भारत के प्रत्येक जागरूक नागरिक को इसका सशक्त विरोध हर स्तर पर करना चाहिये तभी इस विनाशकारी कदम को रोका जा सकता है।

The Child and women development ministry has brought out a draft which talks of decriminalising the sexual acts performed between children of 12-14 year-olds. Unfortunately, this is being touted as a bill that will free the children from sexual abuse. Earlier, the minimum age used to be 16 years, now they want to reduce it to 12-14. In the name of sex education, it was these very people, who had advocated the distribution of condoms in schools, now they are coaxing the children into performing sexual acts when maturity in these matters takes many more years to develop, where is this regime trying to take the country? Are they going to make brothels out of our schools? Will a 12 year old be able to concentrate on his studies if he indulges in such acts in this tender age? It is a conspiracy against the future of the country and also the children to talk of decriminalising 12-14 year-olds from indulging in such acts, as at this tender age, they should be concentrating on their studies to build their future. This anti-national bill will only end up increasing sex abuse of the children and not mitigate it. It seems to be an international conspiracy against the country and a judicial inquiry should be instituted to probe the matter.

One must look into the experiences of those western countries in this matter before blindly emulating them. In America, this age is 16-18 years, however even 10-12 year-olds are becoming unwed mothers. Today, in USA, care centers for such children are being built along with the primary schools, the situation is so acute there. Does this regime want to give our children the same future? At the tender age of 12-14, when they have just lost their milk teeth, should they be subjected to the rigours of breast-feeding their illegitimate children? This conspiracy will ruin their future. The youth of the west is finding it difficult to take on the challenges of our youth in the job markets and educational field. Could it be a ploy by the west to entice the Indian youth into the vortex of sex so that they no longer remain a threat and become debauches for life. This conspiratorial bill should not be allowed to see the light of the day, all citizens of the country should fight against the bill tooth and nail at all levels.

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