६ दिसम्बर – भारत के लिये शौर्य एवं गौरव का दिवस

६ दिसम्बर, १९९२ को अयोध्या में देश की बहादुर जनता नें देश के माथे पर लगा गुलामी के कलंक का टीका हमेशा के लिये हटा दिया था। उस दिन के बाद से देश के जो लोग अपने को राम का वंशज मानते हैं, भारत की संतान मानते हैं तथा भारत की विजय में अपनी विजय और भारत की पराजय में अपनी पराजय मानते हैं ६ दिस० को गौरव का दिवस मानते हैं। परन्तु वे लोग जो अपने आप को राम के साथ जोडने में शर्म महसूस करते हैं तथा अपने स्वार्थ के लिये भारत के दुश्मनों के साथ हाथ मिलाने में संकोच नहीं करते, जो वोटों की राजनीति के चलते बाबर जैसे हमलावरों को महिमामंडित करने में गौरव महसूस करते हैं, वे सभी इस दिन को शर्म का दिन कहकर पिछले १८ वर्षों से निरंतर विधवा-विलाप कर रहे हैं। ३० सितंबर को मा० इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय नें उनकी जबान पर ताला लगा दिया। इस निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया कि बाबरी ढांचा गैर इस्लामिक था तथा उसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता। यह बात भी महत्वपूर्ण रूप से सामने आयी कि बाबर को विजेता होने के कारण लगान लेने का अधिकार था परंतु उसे जमीन का मालिक नहीं कहा जा सकता। जब वह ढांचा मस्जिद नहीं था और बाबर विदेशी हमलावर था तो ६ दिस०, १९९२ को कारसेवकों ने कोई गलत व इस्लाम विरोधी काम नहीं किया था । एक विदेशी हमलावर के स्मारक को, जो मंदिर को तोड कर बनाया गया था, हटा कर उन्होनें वह काम किया जिसको करना भारत सरकार का दायित्व था। सोमनाथ मंदिर का निर्माण कर भारत सरकार नें इसी दायित्व को पूरा किया था। यदि कारगिल में पाकिस्तानियों द्वारा बनाये गये बंकर को हटाने पर देश को गौरव है तो उस दिन दासता के प्रतीक बाबरी ढांचे को हटाने पर भी सम्पूर्ण देश को गौरव होना चाहिये। ६ दिस० राष्ट्रीय शर्म का नहीं, राष्ट्रीय गर्व का दिन है। रामजन्म भूमि आन्दोलन भारत की सांस्कृतिक आजादी का आन्दोलन है और कारसेवक इस आन्दोलन के सेनानी। इसलिये उन कारसेवकों को स्वतंत्रता सेनानी का स्थान मिलना चाहिये । उन को अपराधी कहना न केवल न्यायपालिका का अपमान है अपितु देश की अस्मिता का भी असम्मान है। इसलिये देश की जनता को यह दिन दूसरी दिवाली के रूप में मनाना चाहिये। भारत के सैक्युलरिष्टों को भी दिवार पर लिखी इबारतों को पढना चाहिये और इस दिन को राष्ट्रीय गौरव का दिन घोषित करना चाहिये।

भारत की महान जनता को इस पवित्र दिन की हार्दिक शुभकामनायें ।

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