अलगाववादियों का एजेंट बन कर काम कर रहा अमरनाथ श्राइन बोर्ड

२०१२ में बाबा अमरनाथ यात्रा की अवधि ६० दिन की जगह ३९ दिन करके बोर्ड, केन्द्र सरकार और जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार अलगाववादियों के अधूरे एजेंडे को पूरा करने का घिनौना षडयंत्र कर रहे है। अलगाववादियों का एजेंडा कश्मीर घाटी को हिंदू शून्य बनाने का है। अमरनाथ यात्रा के कारण कश्मीर घाटी पूर्णतः हिन्दू शून्य नहीं हो पा रही थी। इसको बंद करने के लिये पहले आतंकवादी यात्रियों पर हमला करते थे। जब हिंदू यात्री मौत के डर से भी नहीं रुके तो अब वे सरकार पर दबाव डाल कर इस यात्रा को सीमित करते-करते इसे बंद करना चाहते हैं। केन्द्र सरकार तथा जम्मू कश्मीर सरकार आतंकियों के इस आदेश को पूरी तत्परता के साथ पालन कर रही हैं। अलगाववादियों के साथ बोर्ड की मिली भगत उस समय स्पष्ट हो गई थी जब हिंदू नेताओं के द्वारा इस हिंदूविरोधी निर्णय का विरोध किया गया तो राजौरी में होली वाले दिन हिंदुओं की एक धर्मयात्रा पर हमला किया गया । वे यहीं नहीं रुके, हिंदुओं की दुकानों और घरों पर हमला कर उन्हें आतंकित करने का प्रयास किया गया। उन लोगों नें गऊ हत्या का जघन्य पाप भी किया। परन्तु प्रशासन ने अपराधियों को पकडने की जगह हिंदुओं पर ही झूठे केस बनाये। कठुआ में भी अलगाववादियों ने भारत विरोधी नारे लगाये। अब उन्होंनें यात्रा को और भी घटाकर १५ दिन करने की धमकी दी है। क्या बोर्ड अब उनकी इस मांग पर विचार कर अगले साल अवधि को और भी घटायेगा?

श्री बाबा अमरनाथ यात्रा की अवधी २००९ तक ६० दिन की ही थी। उस समय हूरियत के लोगों नें इसको घटाकर ३० दिन करने की धमकी दी थी। इस धमकी के बाद ही २०१० में इसको घटाकर ५५ दिन किया गया था। हिंदू समाज के विरोध करने पर यह आश्वासन दिया गया था कि २०११ में इसको पुनः ६० दिन की किया जायेगा। परन्तु इसको और घटा कर ४५ दिन की किया गया। हिन्दू समाज के प्रबल विरोध के बाद श्री श्री रविशंकर जी की अध्यक्षता में एक उप समिति बनाई गई परन्तु उनको कह दिया गया कि अगर अवधि बढाई गई तो हुरियत नाराज हो जायेगी और २००८ दोहराया जायेगा। इसी आधार पर तर्क गढे गये , लंगर वालों को फुसलाया गया और इस बार यह अवधि और भी कम करके केवल ३९ दिन की कर दिया गया। यात्रा के इतिहास में पहली बार कुछ लंगर वालों से यह लिखवाया गया कि अवधि ३० दिन की होनी चाहिये। अवधि कम होने बधाई देने वाले कुछ कथित सेवक क्या अब १५ दिन की मांग करने लगेंगे? क्या सेवक अब यह तय करेगा कि वह कब और कितनी सेवा करेगा?

विश्व हिन्दू परिषद का यह आरोप है कि अमरनाथ यात्रा की अवधि कम करने का आदेश पूर्ण रूप से हिंदू विरोधी, देश विरोधी और संविधान विरोधी है। भारतीय संविधान की धारा २५,२६ किसी भी धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट रूप से मना करती है। यात्रा की अवधि और मुहुर्रत तय करते समय परम्पराओं और आस्थाओं का बहुत महत्व है। उनके अनुसार यह यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर श्रावन पूर्णिमा तक चलनी चाहिये। इसी प्रकार इस विकट यात्रा में प्रतिदिन अधिकतम १०००० यात्री ही दर्शन कर सकते हैं। इस आदेश के अनुसार अब केवल ३९०००० यात्री ही दर्शन कर सकेंगे। इस वर्ष ८ लाख यात्री दर्शन करने के लिये आयेगा। शेष ४लाख से अधिक यात्री दर्शन के लाभ से वंचित रहेगा। इसका पाप किसके सर पर रहेगा? हर यात्री को दर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है और उसको दर्शन कराने का संवैधानिक दायित्व बोर्ड का है। बोर्ड अपने संवैधानिक दायित्व का पालन नहीं कर रहा है और अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है। बोर्ड श्रीनगर उच्च न्यायालय के २००४ में आये आदेश का भी उल्लंघन कर रहा है जिसमें यात्रा को ६० दिन की करने का आदेश दिया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद , बोर्ड के इस अन्यायपूर्ण ,हिंदू विरोधी व संविधानविरोधी आदेश को जारी करने के लिये उनकी घोर निंदा करता है और इस आदेश के विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन की घोषणा करता है। यह आंदोलन देशव्यापी होगा और देश भर से लाखों यात्री ज्येष्ठ पूर्णिमा को ही अमरनाथ के दर्शन करने के लिये जम्मू जाकर भारतीय संविधान, हिन्दू आस्थाओं और न्यायपालिका की मर्यादा का समान करेंगे। ४ जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा है। इसके लिये यात्री २ जून को ही जम्मू पहूंचेंगे। विहिप बोर्ड को चेतावनी देता है कि वे हिंदू आस्थाओं का सम्मान करे जिनकी रक्षा के लिये बोर्ड का निर्माण किया गया है। वे अभी भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें और किसी भी अप्रिय स्थिति को निर्माण न होने दे।

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