राष्ट्र की सेवा में सतत साधनारत – बजरंग दल

गत २७ वर्षों से बजरंग दल के लाखों कार्यकर्ता राष्ट्र की आराधना में निरन्तर कार्यरत हैं। अपने स्वार्थों और कैरियर की परवाह किये बिना ये सब “तेरा वैभव अमर रहे मॉ, हम दिन चार रहें न रहें” का आदर्श सामने रखकर देश के सामने आने वाली हर चुनौती का मूंह तोड जवाब देने के लिये हमेशा तत्पर रहते हैं। ये बजरंग दल के ही कार्यकर्ता थे जिनको देखकर कुनरड एल्ज ने कहा था कि जिस देश के युवा देश और धर्म की रक्षा के लिये बलिदान देने के लिये तत्पर हों, उस देश की प्रगति को दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती। इनको देखते ही अमेरिकावासी डेविड फ्राउले के मूंह से निकला था कि वो भारत के भविष्य निर्माताओं से मिल रहे हैं। १५ लाख समर्पित कार्यकर्ताओं से सुसज्जित यह संगठन निश्चित रूप से विश्व का सबसे बडा युवा संगठन है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कई क्षेत्रों में नये आयाम स्थापित कर देश के युवाओं के सामने एक नई दिशा भी रखी है।देश और धर्म विरोधियों के लिये चुनौती और सज्जनशक्तियों के लिये संरक्षण का कार्य आज बजरंग दल बखूबी कर रहा है।

बजरंग दल का यह संगठित परंतु सात्विक रूप निर्माण करने में उसके प्रशिक्षण शिविरों का बहुत योगदान है। गत २० वर्षों से ग्रीष्मकालीन अवकाशों में ये शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। कुछ वर्षों के प्रारम्भिक प्रयोगों के बाद अब देश में ३७ स्थानों पर एक निश्चित पाठ्यक्रम को आधार बनाकर इन शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष लगभग ५००० कार्यकर्ताओं नें इन शिविरों में भाग लेकर देशसेवा का व्रत लिया है। इस समय देश के सभी प्रान्तों में इन शिविरों का आयोजन किया जाता है। गत २० वर्षों में लगभग ६०,००० कार्यकर्ता इन वर्गों के माध्यम से प्रशिक्षित होकर देश और धर्म की सेवा का संकल्प ले चुके हैं। इन वर्गों के बारे में भारत के सैक्युलरिस्ट तरह -तरह की भ्रान्तियां फैलाते हैं। कोई तो कहता है कि यहां पर विधर्मियों को मारने का प्रशिक्षण दिया जाता है तो कोई लिखता है कि बाबरी ढांचे को ध्वस्त करने का प्रशिक्षण इन वर्गों में ही दिया गया था। इन अनुशासित वर्गों के आधार पर कोई इसको फासिस्ट तो कोई आतन्की कहता है। बिना बजरंग दल को समझे कुछ लोग तो इसे दिशाहीन युवकों का संगठन भी कहने का दुस्साहस भी करते हैं। बजरंग दल के ये शिविर किसी सार्वजनिक स्थल यथा विद्यालय का भवन या धर्मशाला आदि में ही आयोजित किये जाते हैं। इनके शारीरिक कार्यक्रम किसी पार्क में ही होते हैं तथा इन शिविरों के समापन कार्यक्रम में सामान्य जनता तथा मीडिया के लोगों को भी निमंत्रित किया जाता है। ७ दिवसीय इन शिविरों में जो कुछ भी सिखाया जाता है उसके लघुरूप का प्रदर्शन इन समारोप कार्यक्रमों में किया जाता है। इस दृश्य को देखकर ही कई लोग अपने बच्चों को बजरंग दल के वर्गों में भेजने का संकल्प लेते हैं और वहीं प्रतिभागी बच्चों के माता पिता अपने आपको गौरवान्वित अनुभव करते हैं। मुख्य अतिथी के रूप में आमन्त्रित समाज के मूर्धन्य लोग इनके प्रशिक्षण को देखकर अपने आपको धन्य समझते हैं और सब प्रकार के सहयोग का आश्वासन देते हैं। इस वर्ष एक शिविर के समापन कार्यक्रम में एक पूर्व सैन्य अधिकारी आये थे, उनका कहना था कि केवल एक सप्ताह में इतना अधिक सिखा पाना बजरंग दल के ही बस का है। यदि बजरंग दल के आलोचक निश्पक्ष रूप से एक बार इन शिविरों में आ जायें तो मेरी विश्वास है कि उनकी धारणाएं निश्चित रूप से बदल जायेंगी।

ये सभी शिविर मई व जून के तपते मौसम में ही लगते हैं। सब प्रकार की सुविधाओं से वंचित होकर इतनी गर्मी में घर से बाहर रहना ही अपने आप में उनके संकल्प को दर्शाता है। वहां पर न्यूनतम आवश्यक्ताएं ही पूरी की जाती हैं। कूलर या ए सी का तो प्रश्न ही नहीं, कई बार सरकारी अव्यवस्थाओं के कारण पंखे की हवा से् भी वंचित रहना पडता है। सबको भरपेट परन्तु सादा भोजन ही उपलब्ध कराया जाता है। प्रातः काल ४ बजे उठकर रात को १० बजे ही सोना मिल पाता है।प्रातर्विधी से निवृत होकर १ घंटा ईश आराधना में लगता है। उसके बाद आसन-प्राणायाम, निःयुद्ध, बाधा-प्रशिक्षण आदि विषयों का कठोर प्रशिक्षण होता है। इनमें एयर गन से निशाना लगाना भी सिखाते हैं। स्मरण रहे कि इस गन से केवल गुब्बारे ही फूटते हैं, इनसे चिडिया का भी शिकार नहीं हो सकता। लगभग १५० मिनट के इस कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यकर्ताओं को आत्मरक्षण में समर्थ बनाया जाता है। उसके बाद सारे दिन में कई विचारक आकर राष्ट्रीय, सामाजिक व धार्मिक विषयों में उनका मार्गदर्शन करते हैं। सभी प्रशिक्षार्थियों को अपने विचारों को प्रस्तुत करने के लिये भी प्रोत्साहित किया जाता है जिससे उनमें अपने विचारों को प्रकट करने की कला का विकास हो सके। इस कठोर दिनचर्या के माध्यम से ही वे तप कर कुंदन बनते हैं। इन शिविरों में उनके व्यक्तिगत कोण घिसकर उन्हें सामाजिक जीवन का अभ्यस्त बनाया जाता है और ७ दिन के बाद ऐसा व्यक्तित्व निकलकर सामने आता है जो अपने विकास के साथ-साथ देश व समाज के विकास की भी चिंता करता है । वे देश व समाज के लिये प्रतिबद्ध युवक के रूप में समाज के बीच में आते है और हर चुनौती का डट कर मुकाबला करते हैं।

इसी संकल्पबद्ध टोली के सामर्थ्य के आधार पर ही सब प्रकार की आलोचनाओं के बावजूद बजरंग दल कई विषयों पर निर्णायक परिणाम ला सका है। राम जन्मभूमि आन्दोलन में बजरंग दल की भूमिका स्वर्णाक्षरों में लिखी जायेगी। आने वाली नई पीढी इस आन्दोलन को दूसरी आजादी के आन्दोलन के रूप में पहचानेगी । जब अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमलों के कारण अनिश्चितता के बादल उमड रहे थे तब १९९६ में बजरंग दल के ५१००० कार्यकर्ताओं ने इस यात्रा में भाग लेकर इस यात्रा को नया जीवन दिया था। वहां पर बजरंग दल का एक नया रूप दुनिया के सामने आया। प्राकृतिक विपदा के कारण उस यात्रा व यात्रियों पर संकट के बादल छाये थे । वहां पर उनका समाज सेवा के प्रति समर्पण देखकर यात्रा अधिकारी नें कहा था कि अगर बजरंगदल न होता तो मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती। पुंछ-राजौरी जिलों से हिन्दुओं का पलायन शुरू होचुका था। घाटी की तरह ये भी हिंदूशून्य बन रहे थे, तब बजरंगदल नें आतंकियों की चुनौती को स्वीकार कर बूढा अमरनाथ की यात्रा को पुनर्जीवित किया। विदेशी धन और स्वार्थी राजनेताओं के समर्थन के आधार पर जब धर्मान्तरण देश के सामने चुनौती बना तब बजरंगदल ने ही इस घृणित अपराध को रोकने का साहस किया। गौ हत्या को युवा शक्ति के आधार रोका जा सकता है, इसका एक ट्रेलर १९९५ में बजरंग दल दिखा चुका है जब एक ही साल में ३ लाख गौवंश हत्यारों के चंगुल से मुक्त कराया गया था। आतंकवाद के विरोध में इनके द्वारा किय गया जनजागरण अब तक सबको याद है। लव जेहाद के नाम पर हिन्दू युवतियों को भगाने के षडयंत्रों पर बजरंगदल ही लगाम लग सका है। ऐसे और भी पचासियों कार्य बजरंगदल द्वारा किये जा सके हैं। सेवा कार्यों में भी ये कार्यकर्ता किसी से पीछे नहीं हैं। कई बडे तीर्थों और मठ-मंदिरों के बडे आयोजनों की सफलता के पीछे इसके कार्यकार्ताओं का सेवा भाव ही प्रमुख रूप से रहता है। कई संस्कार केन्द्र और एकल विद्यालय इनके पुरुषार्थ के आधार पर ही चलते हैं। सेवा- सुरक्षा -संस्कार को आधार बनाकर आज बजरंग दल कई प्रकार के कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इसका श्रेय निश्चित रूप से इन शिविरों में निर्माण की गई कार्यकर्ताओं की देवतुल्य टीम को ही जाता है।

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