आसाम के बाद मुम्बई-इस्लाम का बर्बर किन्तु असली चेहरा

पाकिस्तान का झन्डा फहराती जेहादी उन्मादियो की यह भीड ११ अगस्त को मुम्बई मे हिंसा का नन्गा नाच कर रही है। इन नर पिशाचो ने न केवल पुलिस के लोगो पर बर्बर हमला किया अपितु उस क्षेत्र से गुजर रहे हिंदुओं और उनके वाहनो पर भी हमला किया । वे यही पर नही रुके, इन लोगो के असली कारनामो को दिखाने की कोशिश कर रहे मीडिया के लोगो को इन्होने नही बक्शा । इस सबके बावजूद इस हिंसक भीड का असली चेहरा और उनके इरादो को छिपाने के लिये इन्ही मीडिया के लोगो ने इन जेहादियो को “कुछ असामाजिक तत्व” कहकर इसको मीडिया पर हमला बताया जबकि यह भारत पर हमला था । क्या अब भी मीडिया इन की दास बन कर इनके पापो पर पर्दा डालती रहेगी? वे क्यों नही उपरोक्त चित्रो को प्रकाशित कर इनका देशद्रोही चरित्र उजागर करने की हिम्मत जुडा पाते है? यह अब मीडिया ही नही, देश की सभी सेक्युलर बिरादरी के आत्मनिरीक्षण का अवसर है! वे अब कब तक इन लोगो को देश की अजादी के साथ खिलवाड करने देते रहेगे? क्या अब आज से ६५ वर्ष पहले की गई सीधी कार्यवाही को दोहरा कर भारत के एक और विभाजन की पृष्ठभूमि तैय्यार की जा रही है ?उस समय की तरह ही ये लोग मौन रहकर इनका समर्थन करके जिहादियो को बढावा देने का पाप कर रहे हैं।

मुम्बई मे ५० हजार जेहादियो की यह भीड कैसे इकट्ठी हो गई? कैसे इनको” हिन्दुस्तान मुर्दाबाद” के नारे लगाने की अनुमति दी गई? पाकिस्तानी झन्डा फहराने वालो पर अभी तक क्यो नही देशद्रोह के अपराध की कार्यवाही की गई? इनको हिन्दू समाज को चुनौती देने वाले भाषणो और नारो की अनुमति कैसे दी गई? जब इस हिंसक भीड ने पहली बस पर पत्थर मारे तभी सख्त कार्यवाही कर इन दरिंदों पर लगाम क्यो नही लगाई गई? क्या इस जमावडे की अनुमति देते समय इनके इरादो के बारे मे जानकारी नही जुटाई जा सकती थी? क्या इनके इस तरह के जमावडे का देश विरोधी और हिन्दू विरोधी हिंसक चरित्र पहली बार सामने आ रहा है? क्या इसी देशद्रोही समाज के लिये गैरकानूनी धर्माधारित आरक्षण देने का षडयन्त्र बुना जा रहा है? क्या इन्ही को पीडित घोषित कर इनके संरक्षण के लिये साम्प्रदायिक हिंसा कानून लाने तैय्यारी की जा रही है? ये कुछ यक्ष प्रश्न हैं जिनके उत्तर जाने बिना देश को सुरक्षित नही रखा जा सकता है और न ही देश मे स्थायी शान्ति रखी जा सकती है। क्या भारत मे कोई भी सरकार यह घोषित नही कर सकती कि सबको अपने धर्म के पालन की अनुमति है परन्तु देश विरोधी काम करने वालो के लिये भारत मे कोई जगह नही है?

बंग्ला देशी घुसपैठिये भारत की आन्तरिक और बाह्य सुरक्षा के लिये खतरा बन चुके हैं। ये स्थानीय लोगो की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। उन की बहु बेटियां भी सुरक्षित नही है। स्थानीय लोगो के रोजगार छीने जा रहे हैं। उनके साथ लूट्पाट और अन्य प्रकार के गैरकानूनी काम किये जा रहे है। इस तरह के काम करते हुए ये घुसपैठिये न केवल पकडे जा रहे है अपितु मा न्यायालय भी कई बार इनको देश से निकालने के लिये स्पष्ट आदेश दे चुकी है। इन सबके बावजूद केवल उनके वोटों के लिये इन लोगोको हर प्रकार का संरक्षण दिया जा रहा है। बार- बार आन्दोलनों और चेतावनियो के बाद भी जब आसाम की स्थिती बदतर होती गई तभी वहा के एक वर्ग ने अपने अधिकारो के लिये आवाज बुलन्द की जिसके जवाब मे इन घुसपैठियो ने वहा के हिंदू समाज पर हमले कर दिये। इस पागल परन्तु सुनियोजित हिंसा के परिणाम स्वरूप आज वहा पर सौ से अधिक लोग मौत के घाट उतारे जा चुके है, अन्य सैकडो लोग घायल है और ४ लाख से अधिक मासूम नागरिक शरणार्थी शिविरो मे रहने के लिये मजबूर हैं। इस हिंसा मे अभी तक आसाम का मुस्लिम समाज इन घुसपैठियो के साथ खडा था, अब देश भर का मुस्लिम समाज भी खुलकर न केवल इनके साथ खडा है अपितु उनकी जेहादी लडाई को आगे बढा रहा है।

कश्मीर के बाद अब ये लोग पूरे देश मे आग लगा रहे है। इनके इरादे अब राजनीतिक संरक्षण के कारण और भी खतरनाक बन चुके है। अब भारत जेहादियो का अभयारण्य बन चुका है जहा इनके विरुद्ध आवाज उठाने वाले दंडित किये जाते है परन्तु इनको खुलकर हिंसा करने की अनुमति है। अब हिन्दू समाज का धैर्य समाप्त होने वाला है। क्या ये सैक्युलर बिरादरी पूरे देश मे आसाम जैसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है?

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