“जंगपुरा” की जंगः जेहादी जंग की एक झलक/The Battle of jangpuraa:A Glimpse of Jehaadi Battle

अभी दो दिन पहले डी० डी० ए० ने जंगपुरा, दिल्ली में सार्वजनिक स्थान पर अवैधानिक रूप से बनी एक मस्जिद को मा० न्यायालय के आदेश पर तुडवा दिया। उसी समय वहां पर दिल्ली के सभी मुस्लिम नेता एकत्रित हो गये तथा उनके नेतृत्व में वहां पर उपस्थित मुस्लिम समाज ने डी० डी० ए० के इस प्रयास का जबर्दस्त प्रतिरोध किया। दिल्ली पुलिस के बल प्रयोग के बाद ही न्यायालय के आदेश्न का सम्मान किया जा सका। परन्तु इसके बाद जंगपुरा युद्ध का मैदान बन गया। दिल्ली और उसके आस पास के मुस्लिम समाज ने इस घटना को इस्लाम के लिये चुनौती के रूप में लिया और इस क्षेत्र का मुस्लिम समाज जंगपुरा की और कूच करने लगा। सभी सैक्युलर पार्टियों के मुस्लिम नेता वहां पहुंचने लगे। मुलायम सिंह जैसे नेता कैसे पीछे रहते। एक विदेशी हमलावर बाबर के द्वारा श्रीराम जन्म भूमि पर मंदिर को तोड कर बनाये गये बाबरी ढांचे की रक्षा के लिये जिस मुलायम सिंह ने कानून की दुहाई देते हुए निरपराध कार सेवकों पर गोलियां चलाई थीं, अब वही मुलायम सिंह कानून की धज्जियां उधेडते हुए कहने लगे कि मस्जिद वहीं बनेगी। पूरी दिल्ली से बढते हुए जनूनी मुसलमानों को अगर कहीं रोका गया तो वहीं पर हिंसा का नंगा नांच खेला गया। सरकारी बसों से लेकर निजी वाहन तक तोडे गये, आगजनी की गई और सारी दिल्ली मानों सहम कर ठहर गई थी। सब इन्तजामों के बावजूद हजारों की संख्या में जंगपुरा में उन्मादी मुसलमानों की भीड इकट्ठी हो गई। अवैध मस्जिद को हटाकर सरकारी कर्मचारियों ने उस स्थान की घेरा बंदी के लिये जो दीवार बनायी थी, उसे तोड दिया गया और उसी की ईंटों से एक अस्थायी मस्जिद बनाकर वहां पर जुम्मे की नमाज पढी गई। उस नमाज के बाद शाही ईमाम के नेतृत्व में भारत सरकार के विरुद्ध सीधे सीधे युद्ध की घोषणा की गई। वहां पर मस्जिद बनाने के लिये पैसा भी इकट्ठा होना शुरू हो गया। २५०० से अधिक की संख्या में उपस्थित अर्धसैनिक बल मूक दर्शक बने रहे और उन्हीं की उपस्थिती में दीवार तोडकर अस्थायी मस्जिद भी बनी, भारत के विरूद्ध युद्ध की घोषणा भी गई और भारतीय संविधान को चुनौती भी दी गई।

अब तब संविधान की रक्षा का संकल्प लेने वाले सत्ताधीशों की नींद भी उड चुकी थी। केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री तक, सब नेताओं ने मुस्लिम नेताओं के सामने नाक रगडनी शुरू कर दी थी और शीला जी ने तो यहां तक कह दिया कि वे पहले कोर्ट को समझायेंगे और फिर भी बात नहीं बनी तो वे डी० डी० ए० की जमीन खरीदेंगे और वहीं पर मस्जिद बनवायेंगे। न्यायपालिका के आदेशों की धज्जी उधेडने का इससे बडा बेशर्म उदाहरण और क्या हो सकता है। इन लोगों का यही सैक्युलरिज्म है कि वे जनता की गाढी कमाई का पैसा एक सम्प्रदाय को खुश करने के लिये बेदर्दी से उडायें और न्यायपालिका का मखौल बनाते हुए चंद वोटों की खातिर एक उन्मादी और हिंसक भीड के सामने आत्मसमर्पण कर दें।

मा० सर्वोच्च न्यायालय नें सार्वजनिक स्थानों पर बनाये गये सभी धर्मस्थल हटाने के आदेश दिये हैं । इन आदेशों की पूर्ती के लिये सभी राज्य सरकारों नें सैकडों मंदिर तोडे हैं। परन्तु इनकी रक्षा के लिये कोई सैक्युलर नेता आगे नहीं आया । उल्टे वे सब हिंदु समाज को कानून के पालन की सीख देते थे। अब सारी सैक्युलर बिरादरी एक अवैध मस्जिद को बनाने के लिये प्राणपण से जुट गई है। हिंदू आस्था का अपमान और मुस्लिम समाज की वैध-अवैध मांगों के सामने समर्पण, यही भारत का सैक्युलरिज्म बन गया है। इनको नहीं पता वे इन जेहादियों को किस अन्धेरी गली की ओर ले जा रहे हैं। वहां केवल जाने रास्ता है, वापस आने की कोई गुंजाइश नहीं है। मुस्लिम समाज अपनी मांगों को मनवाने के लिये क्या करता है और हमारे नेता उनके सामने कैसे समर्पण करते हैं , जंगपुरा की जंग इसका सबसे ताजा उदाहरण है।

The DDA demolished an illegally constructed mosque on a public place in Jungpura, Delhi under a court order two days ago. It did not take long for the muslim leaders to congregate at the place and under their leadership the muslim community left no stone unturned to protest against the demolition. It was only when the police used force against them that the court order was implemented. But, by then Jungpura had become a war-zone. The muslim community residing in and around Delhi took this incident as some sort of challenge to Islam and launched themselves towards Jungpura to meet force with force. The muslim leaders of all secular parties started reaching the spot. How could have Maulana Mulayam Singh stayed away from all this? This man, who had not hesitated in showering the kar sevaks with bullets in the name of law and order, to save a mere structure, the Babri mosque, which was built after demolishing the temple on Shree Raam Janmabhoomi by a ruthless foreigner, Babar, was again heard saying that the mosque would be built at the same place, without any consideration for the law. Wherever the police tried to stop the muslims, it met with violence. From government buses to private vehicles, everything was targeted. Delhi, the vibrant city, seemed to have come to a standstill, under the scare of the war-mongerers. Despite all the measures, a large number of muslims managed to reach the spot. The wall that was erected to seal the place after demolishing the illegal mosque was brought down and a temporary mosque was erected which was used to offer the jumma namaz . After the Namaz, under the leadership of the Shahi Imam, a call for war against the Indian establishment was given. Soon after this, collections were made for the erection of a new mosque on the spot. More than 2500 para-military forces became mute spectators to these unlawful acts of erection of a temporary, illegal mosque, a call for war against the Indian establishment and the challenge to the India constitution.

By now, the powers-that-be had woken from their slumber, afterall, they had a promise to keep and they were supposed to upkeep the constitution. From central ministers to the Chief Minister of Delhi, no one shied from boot-licking of the muslims. Sheila Dixit even went to the extent of promising to take the matter up with the judiciary and if this did not work, buying the land from DDA and erecting a mosque on the same spot. What better example can one get where the secular leaders of the country make mince-meat of the judiciary! The secularism of these leaders feeds on the appeasement of one community, in trying to placate them, they will not even think twice about wasting the hard-earned money of the tax-payer and the honour of the judiciary, for a few more votes, they will prostrate before this religious-maniacs.

The Hon Supreme Court has given orders to remove illegal places of worship from all public land. All state governments have demolished so many illegal temples on account of this. But, one has not heard of a single secular leader who came forward to save these temples. On the contrary, they end up giving lessons to the hindus to abide by the law. Now, the same secular leadership has come together heart and soul to rebuild a illegal mosque. In India secularism has taken on new meanings, here it means, insulting the Hindu faith and surrendering to all the legitimate and illegitimate demands of the muslims. They are perhaps not aware that they are taking the jehadis to a dead-end. They can never look back or even think of returning from that dead-end. The battle of Jungpura is a fresh example how our secular leaders surrender in front of the muslim community and to what extent this community can go to get their demands fulfilled.

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