भ्रष्टाचार से त्रस्त हिन्दुस्तान-धर्मनिरपेक्षता का “वरदान”

आज भारत के सामने भ्रष्टाचार की समस्या मूंह बाये खडी है। इस मामले में नये-नये कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। ११० भ्रष्ट देशों की सूची में भारत अब ८७वें स्थान पर आ गया है जबकि कुछ समय पूर्व यह ८५वें स्थान पर था। अब भारत की तुलना पाकिस्तान, बोस्निया तथा सोमालिया जैसे देशों से की जा रही है। इस “प्रगति” से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह समस्या अब लाईलाज होती जा रही है। ्रतन टाटा जैसे उद्योगपतियों से लेकर बाबा रामदेव जैसे संत इस पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। मा० सर्वोच्च न्यायालय इस पर बहुत गंभीर टिप्पणियां कर चुका है। वह इसे प्रदूषण की तरह व्यापक व खतरनाक बता चुका है। आज यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत गहरे समा चुका है। २जी स्पैक्ट्रम,आदर्श हाऊसिंग सोसाइटी, कॉमन वैल्थ गेम्स पर अभी पूरी तरह चर्चा भी नहीं हुई थी कि बैंक ऋणों का एक नया घोटाला आम नागरिकों का दिल दहलाने लगा है। पूरा सरकारी तंत्र घोटालेबाजों को बचाने में लगा है। इन भ्रष्टाचारियों को न तो देश की सुरक्षा की चिंता है और न कारगिल के बलिदानी सैनिकों की विधवाओं के भविष्य की। ये जानवरों के चारे से लेकर इन विधवाओं की जमीन तक सब कुछ हडप जाते हैं और डकार भी नहीं लेते हैं। ये इतना पैसा हडप चुके हैं कि अब देश के बैंक कम पडने लगे हैं और ये लोग अपने काले धन को विदेशी बैंकों मे जमा करा रहे हैं। स्विटजरलैंड धरती का स्वर्ग है कि नहीं, इस पर विवाद हो सकता है परंतु वहां के बैंक इन लोगों के निर्विवाद रूप से स्वर्ग बन चुके हैं। वहां के एक बैंक के डायरेक्टर ने जो रहस्योदघाट्न किया है वह सबको चौंकाने वाला है। उसके अनुसार वहां के बैंकों में भारतीयों का २८० लाख करोड रूपया जमा है। यदि ्भारत का यह पैसा भारत में वापस लाया जाता है तो इससे ३० साल तक भारत का कररहित बजट बन सकता है, भारत के लोगों के लिये ६० करोड नई नौकरियों का सृजन हो सकता है, हर गांव से दिल्ली तक ४ लेन की सडक बन सकती है, हर भारतीय को २००० रू० प्रतिमाह ६० साल तक दिये जा सकते हैं और ५०० सामाजिक प्रकल्पों को हमेशा के लिये निःशुल्क बिजली दी जा सकती है। इसके बाद भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से कर्ज नहीं लेना पडेगा। इसका मतलब है कि भारत में गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा आदि जो भी समस्याएं हैं वे इन घोटालेबाजों के कारण से ही है। अगर भ्रष्टाचार पर रोक लगा कर यह सारा धन भारत में वापस लाया जाता है तो भारत निश्चित ही विश्व की महाशक्ति बन सकता है।

अगर इस समस्या पर गहराई से विचार किया जाये तो ध्यान में आयेगा कि भ्र्ष्टाचार किसी बिमारी का नाम नहीं है, यह एक बडी बिमारी का लक्षण है। सब तरह के कानूनी उपचार करने के बाद अब इस देश के चिंतक कहने लगे हैं कि देश में नैतिकता का अभाव है। नैतिकता का निर्माण कानून से नहीं हो सकता। नैतिकता जीवन मूल्यों का ही दूसरा नाम है । ये जीवन मूल्य उस समाज की उन गौरवशाली परम्पराओं से निर्माण होते हैं जो उसके महापुरूषों ने अपने आदर्श जीवन के द्वारा स्थापित की हैं। इन जीवन मूल्यों का ही दूसरा नाम धर्म है। “आत्मवत सर्व भूतेषू……”,”मातृवत परदारेषू……” जैसे आदर्श केवल पुस्तकों मे ही नहीं लिखे, हमारे महापुरूषों ने अपने जीवन में चरितार्थ भी किये हैं। केवल कानून के सहारे समाज को चरित्रवान बनाना संभव नहीं है। हर समाज में इसके लिये वहां के कुछ आदर्श रहते हैं। दुर्भाग्य से भारत में धर्मनिरपेक्षता के आत्मघाती विचार के कारण समाज को धर्मविहीन बना दिया गया है। हमारे जीवन मूल्यों को साम्प्रदायिक कहकर लांछित किया गया और हमारे महापुरूषों को भी अपमानित कर जीवन से बाहर करने का षडयंत्र किया गया। विदेशी हमलावरों को सम्मानित किया गया और धरतीपुत्रों को तथा उनके महान जीवन को झुठलाने का पाप किया गया। परिणाम सामने है। हमारा नेतृत्व धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धर्मशून्य बन गया और धर्महीन बनकर सब प्रकार के अधार्मिक कृत्यों को करने में अपनी शान समझने लगा। अब उसे धर्म का कोई डर नहीं रहा और कानून उसके हाथ की कठपुतली बन गया। उसका अनुसरण करने वाला समाज भी उसके मार्ग पर चलने लगा। अब उसे पितृ धर्म,भ्रातृ धर्म, पुत्र धर्म, राजधर्म आदि की कोई परवाह नहीं रही और समाज एक के बाद एक नई बिमारियों से ग्रस्त होने लगा। अब कोई कानून इन व्याधियों से मुक्त नहीं कर सकता। यदि कानूनों से कुछ भी सम्भव होता तो क्या कारण है कि आज तक किसी भी भ्रष्ट नेता को सजा नहीं हो पायी है। जब तक बडी मछलियों पर जाल नहीं कसेगा , समाज इन व्याधियों से मुक्त नहीं हो सकेगा। वे पकडी नहीं जा सकती क्योंकि समस्त धर्मनिरपेक्ष जगत उनकी रक्षा के लिये तैय्यार हो जाता है और वे इसी में अपने “धर्म” समझते हैं।

यदि भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है तो उसके जीवन मूल्य उसे लौटाने होंगे । उसे धर्मनिर्पेक्षता के अधर्म से मुक्त कर, धर्म के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित करना होगा। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा० अब्दुल कलाम ने कहा था कि “अगर भारत को महाशक्ति बनना है तो उसे गीता और उपनिषद के मार्ग पर चलना होगा।” यह मार्ग धर्मनिरपेक्षता का नहीं धर्मावलम्बित होगा जिस पर चल कर ही भारत का भविष्य उज्जवल बन सकेगा।

An India Marred by Corruption: The Price of “Secularism”

Today corruption has manifested itself in its worst form in India. Old records are tumbling and new ones are being made everyday. In a List of 190 corrupt countries, India is now at the unenviable 87th Position, whereas only a few years ago, it was at the 85th. Today, India is being compared with countries like Pakistan, Bosnia and Somalia. ‘Development’ of this sort proves that the scourge of corruption has become untreatable. From an industrialist of the Stature of Ratan Tata to the saint, Baba Ramdev, all are now expressing concern on this issue. The honorable Supreme Court has also made observations on it. It has termed corruption as an epidemic and dangerous. Today, it has become well-entrenched in all walks of life. The debate on 2 G spectrum, Adarsh Housing scam and the Commonwealth Games had not even subsided when a new scam in the form Of bank loans reared its ugly head. The whole government machinery is now working full steam to save these scamsters. These scamsters don’t even think twice about national security, nor does the plight of the Kargil war widows move them. From animal fodder to a widow’s right, these scamsters make mince meat of everything without discrimination.

The amount of black money that these scamsters have accumulated is now finding its way into foreign banks, for our own banks don’t have the wherewithal to accept such large volumes. Switzerland may or may not be the heaven on earth, but for these scamsters, it is certainly a safe haven. The disclosure by a bank official of Switzerland that a mind-boggling Rs 280 lakh crore is held by Indians in Swiss banks is baffling. If all of this money were to be brought back to India, India could have a taxless budget for 30 years, a whopping 60 crore new jobs could be created, every village in the country could be connected to Delhi with a four-lane road, every Indian can be paid Rs 2000 per month for 60 years and 500 social organizations can be supplied free electricity till eternity. India will never need to approach the World Bank with a begging bowl for a loan again. This means that poverty, illiteracy, unemployment, and hunger will be things of the past. If we could somehow check this corruption and bring all the black money that is stashed in foreign banks, India could definitely become a world power. If we pontificate on this issue, we will find that corruption is not the disease, it is actually a symptom of a bigger malaise. After framing all kinds of laws, the thinkers in the country have now suggested that the country lacks principles/ethics. Principles/ethics cannot be created by law. Ethics is another name of the values that we have in life. These values, in turn, have been created by the great traditions of the society which in turn have been established by the ideal lives led by its great people. These values of life is what we also call Dharma. These ideals don’t just find mention in our great books, our great men have actually lived them. Only laws cannot make the society ethical. Every society has some or the other ideal for the same. Unfortunately, secularism has made India, dharma’s wasteland. Our values have been denigrated and termed communal and the great men of our religion have been relegated from our lives and also humiliated. Barbaric invaders have been glorified whereas India’s indigenous heroes’ chivalry and valour was never recognized. No wonder, we can see its manifestation in what constitutes the India of today. Secularism has made India’s leadership apostate, which makes them carry out all sorts of irreligious activities for the sake of false pride and name. Religion invokes no fear in today’s leadership and the law is only a pawn in its hand. In fact, even the society that used to follow the virtuous path of religion is now following the footsteps of the corrupt heretics. It was in India that the responsibilities of a father, mother, brother, son and even governance, became a ‘dharma’, i.e. religion. But, today’s leadership is not concerned about these values, and the society is getting infected with new diseases with each passing day. No law can excoriate the society from these diseases. If law was the answer to all maladies, why is it that in all these years, not one leader has been punished? As long as the big fish are not caught, the society will remain enmeshed in this web of corruption. And the big fish will never be caught because the whole secular establishment unites in a show of strength to save it because for them saving the irreligious apostate is the only religion.

If India has to be freed of corruption, then its values will have to be recognized. It will have to be freed from the web of secularism and inspired to move on the path of religion. The former President of India, Dr A.P.J Abdul Kalam had said that if India has to become a superpower, it will have to follow the path of Gita and Upanishad. This path cannot be that of the secular and the religious-shy but of the one which is wholly dependent on religion.

You May Also Like