बूढा अमरनाथ यात्रा-देश की अखंडता का एक संकल्प

बाबा बूढा अमरनाथ की यात्रा १२ अगस्त से प्रारम्भ हो गई हॅ। यह यात्रा जम्मु से प्रारम्भ होती हॅ तथा पुन्छ जिले की मन्डी तहसील के राजपुरा ग्राम में स्थित बुढा बाबा अमरनाथ के मन्दिर तक जाती हॅ। अमरनाथ यात्रा की तरह यह यात्रा भी बहुत पुरानी तथा मह्त्वपूर्ण हॅ। यह माना जाता हॅ कि पुलत्स्य ऋषि को उनकी वृद्धावस्था में स्वयम बाबा अमरनाथ उनको दर्शन देने यहां पर आया करते थे। ऑर भी कई कथाएं इस के साथ जुडी हॅं। इसके धार्मिक महत्व के कारण ही देश के हजारों हिन्दू यहां इस यात्रा में शामिल होने आते रहे हॅं। जम्मु काश्मीर में आतन्क शुरु होने के बाद यह क्षेत्र भी आतन्कपीडित हो गया।हिन्दुओं के नरसन्हार के बाद यहां से हिन्दुओं का पलायन शुरु हो गया। इसका प्रभाव इस यात्रा पर भी पडा । यात्री कम होने लगे। अब पुन्छ में केवल ८% हिन्दु रह गया हॅ। आतन्कियों को मालूम हॅ कि अगर यह यात्रा बन्द हो गई तो पुन्छ को हिन्दुशून्य बनाया जा सकता हॅ। इसलिये इस क्षेत्र में उन्होने हिन्सा बढा दी।
बजरन्ग दल ने इस परिस्थिती को समझा। उनकॉ ध्यान मे आया कि अब वे बाबा अमरनाथ यात्रा के बाद बूढा अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाना चाहते हॅं। आतन्की अगर ये दोनो यात्रा बन्द कर देते हॅ तो कश्मीर को भारत से अलग करना आसान हो जायेगा। इसलिये १९८६ में बजरन्ग दल के ५०००० से अधिक कार्यकर्ता अमरनाथ यात्रा पर गये थे तथा इस वातावरण के कारण उस साल १ लाख अन्य यात्री भी गया था। तब से यह यात्रा निर्बाध रूप से चल रही हॅ। गत ५ वर्ष से बजरन्ग दल ने इस यात्रा को भी चुनोती के रूप में स्वीकार किया ऑर राष्ट्रिय अखण्डता की रक्षा के लिये इस यात्रा पर जाना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे समाज ने सहभागिता शुरु कर दी। वे निरन्तर हमलों के बावजूद यात्रा पर जाते रहे। अब लगभग २५००० यात्री जा रहे हॅं।इस बार यात्रा से एक दिन पहले सेना तथा रोडवेज की बस पर हमला कर २ महिलाओं को मार दिया परन्तु इससे यात्रियों का उत्साह कम नही हुआ तथा पहले हि दिन १५०० यात्री गये।
बजरन्ग दल ने इस यात्रा को शुरु किया,समाज ने सहभागिता शुरु की तथा अब सरकार ने भी इसके महत्व को स्वीकार कर इसके लिये वहां के अखबारों मे विज्ञापन देना शुरु कर दिया हॅ। यह बजरन्ग दल की एक ऑर उप्लब्धी हॅ। राष्ट्रिय अखन्डता की रक्षा की दिशा में बजरन्ग दल के इस योगदान को इतिहास स्वर्णिम शब्दों मे लिखेगा।