मुजफ्फरनगर में जेहादियों से त्रस्त हिंदू अब सैक्युलरिस्टों के निशाने पर

प्रधानमन्त्री जी ने राष्ट्रीय एकता परिषद को “राष्ट्र विखन्डन परिषद ” बना दिया है। २३ सित.,२०१३ को इस परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए उन्होंने मुजफ्फरनगर के दंगों के मूल कारणों पर पर्दा डालने के लिये सोशल मीडिया पर निशाना साधा। इस भीषण दंगे के दोषियों को छिपाने का मतलब होगा उनकी हिम्मत बढाना और उनकी हिम्मत बढने का सीधा सा अर्थ होगा देश में और भी जगह दंगे होना। उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के इस हिन्दू विरोधी रुख का ही परिणाम है कि अभी-अभी गणेश विसर्जन के कई कार्यक्रमों पर हमले किये गये और हिंदू समाज को फिर आतंकित किया गया। सोशल मीडिया के जिस वीडियो की ओर प्रधानमन्त्री जी का संकेत है, उसमें दो हिंदू युवकों को उन्मादी जेहादियों के द्वारा निर्मम तरीके से पीट-पीट कर मारते हुए दिखाया गया है। क्या वे इस तथ्य को नकार सकते हैं कि जिन दो हिंदू युवकों की निर्मम हत्या के बाद ये दंगे भडके, उन्हें इसी दरिन्दगी से मारा गया था? क्या वे नहीं जानते कि इन हिंदू युवकों के हत्यारों को गिरफ्तार करने के बाद भी एक मुस्लिम नेता के आदेश पर छोडा गया? इस बेशर्मी के बाद भी २८ अगस्त को मुस्लिम समाज ने एक सभा की जिसमें खुले आम हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी भाषण दिये गये, क्या यह तथ्य वे नहीं जानते? क्या वे अनजान हैं कि इन नफरत फैलाने वाले मुस्लिम नेताओं पर उस समय कोई कार्यवाही नहीं की गई? ७ सित. की हिन्दू पंचायत के बाद जिस तरह अकेले रह गये हिंदुओं का कत्ले आम किया गया , इस तथ्य की जानकारी भी उनको दी गई होगी। मनमोहन सिंह जी! अब देश आपसे जानना चाहता है कि हिंदू लडकियों के साथ छेडखानी होती रहे,हिंदुओं के नरसंहार होते रहें, उनके हत्यारों को पकड कर छोड दिया जाये और इन अत्याचारों के विरोध में आवाज उठाने वाले हिंदू नेताओं को ही गिरफ्तार किया जाये परन्तु असली अपराधी छुट्टे घूमते रहें तथा हिंदू चुपचाप सब कुछ सहता रहे, क्या आप ऐसी ही राष्ट्रीय एकता चाहते हैं?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिन क्षेत्रों में इस बार साम्प्रदायिक हिंसा भडकी है, वहां के विषय में कुछ महत्वपूर्ण परन्तु हृदय विदारक तथ्य हैं जिनकी जानकारी एकता परिषद के माध्यम से देश के सामने रखनी चाहिये थी जिससे इन दंगों के कारणों को समझ कर उनका निदान किया जा सकेः

*इस क्षेत्र में हिंदू लडकियों के अपहरण और छेडखानी की घटनाओं में अभूतपूर्व तेजी आई है।

*इस क्षेत्र में कावडियों और अन्य हिंदू तीर्थ यात्रियों पर हमलों की संख्या में काफी तेजी आयी है जिसके कारण पुलिस को उन दिनों में सुरक्षा की असाधारण व्यवस्था करनी पडती है। इसके बावजूद कावडियो पर जानलेवा हमले होते रहते हैं।

*इन क्षेत्रों के बारे में यह पूरा देश जानता है कि यहां पर सभी प्रकार के हथियार सरलता से उपलब्ध होते हैं। कुछ समाचार पत्रों में तो यहां तक छपा है कि यहां इन हथियारों का निर्माण भी बडे धडल्ले के साथ किया जाता है।

*इस क्षेत्र में मदरसो की बढती हुई संख्या के कारण कट्टरपंथ बढता जा रहा है। इसी कारण यहां ऐसे तुगलकी फरमान जारी किया जाते हैं जिससे यह लगता है कि मानों यह क्षेत्र किसी मध्ययुगीन बर्बर सभ्यता को ढो रहा है।

*कुछ दिन पहले तक देश में होने वाली अधिकांश आतंकी घटनाओं के सूत्रधार इसी क्षेत्र के मदरसों से जुडे होते थे।

शायद इन्हीं सबके कारण उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल,श्री राजेश्वर दयाल, ने केन्द्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि” पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई पाकिस्तान पनपते हैं।” यह स्मरण रखना चाहिये कि वे आई.बी. के निदेशक रहे हैं और आई. बी. प्रधानमन्त्री के अन्तर्गत होती है। क्या प्रधानमन्त्री जी को इस विषय पर कुछ भी बोलने से पहले इस रिपोर्ट को नहीं पढना चाहिये था? उन्हें वर्तमान राज्यपाल की रिपोर्ट भी इस परिषद के माध्यम से राष्ट्र के सामने रखनी चाहिये थी। यह देश का दुर्भाग्य है कि इन सब तथ्यों के बावजूद अभी भी इन दंगों के लिये हिंदू समाज को ही दोषी माना जा रहा है। क्या उत्तर प्रदेश का १८% मुस्लिम वोट इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि उसको रिझाने के लिये ये” सैक्युलर” नेता हिन्दू समाज को कुर्बानी का बकरा बना देंगे? शायद इसीलिये उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक इस दंगे के मुख्य सूत्रधार आजम खां व अन्य मुस्लिम नेताओं को गिरफ्तार करने का साहस नहीं कर सकी है। इसी वोट बैंक माफिया की दहशत के कारण वे न केवल हिंदू समाज को उसकी धार्मिक यात्राओं से वंचित रखना चाहते हैं अपितु उसकी बहिन बेटी की इज्जत और उसके जानोमाल को इनके लिये कुर्बान करना चाहते हैं। यदि वह अपनी आवाज उठाना चाहता है तो उस आवाज को कुचलने के लिये वह पहले तो उसको जेहादियों के हाथ लुटवायेगा और यदि कुछ बच गया तो कानून का दुरुपयोग कर उस आवाज को हमेशा के लिये बंद कर देगा।

मुजफ्फरनगर के बाद अब यह प्रयोग सोनिया जी के नेतृत्व में कांग्रेस पूरे देश में लागू करना चाहती है। पिछले दिनों का घटनाक्रम इस बात का साक्षी है कि ये लोग मुस्लिम वोटों के लिये हिंदू समाज को औरंगजेबी युग की ओर धकेलने की पूरी तैय्यारी कर चुके हैं। कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम नेताओं को इस दिशा में पूरी ताकत के साथ काम करने का आदेश दिया जा चुका है, इसके स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। आतंकियों को धन जुटाने के लिये इस्लामिक बैंक को भारत में लाने वाले रहमान खान और कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल इस दिशा में खास तौर पर मुखर हो रहे हैं। इन्होंनें प्रबल विरोध के कारण ठंडे बस्ते में डाले जा चुके “साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विरोधी अधिनियम” को लागू करने की जोरदार वकालत करनी शुरू कर दी है। मनमोहन सिंह जी मानो इन्हीं का इन्तजार कर रहे थे। उन्होंने १६ सित. को कुछ मुस्लिम नेताओं से मिलते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि” अब इस बिल पर काम होगा।” इस बिल पर काम होने का मतलब होगा कि मुजफ्फरनगर माडल पूरे देश में लागू होगा। दंगा मुसलमान करेगा, परन्तु जिम्मेदार हिंदू माना जायेगा। मरेगा हिंदू लेकिन मुआवजा मुस्लिम को मिलेगा। हिंदू की बहन बेटी की इज्जत लुटेगी तो वह इस कानून में अपराध नहीं माना जायेगा परन्तु अगर किसी मुस्लिम महिला ने यह कह दिया कि किसी हिंदू ने उसे छेडा है तो वह जिंदगी भर जेल में सडता रहेगा। अगर किसी हिंदू के व्यवहार या उसके किसी शब्द से किसी मुसलमान को यह लगा कि उसकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है तो यह आरोप ही उसको में डालने के लिये पर्याप्त रहेगा। ऐसे और भी कई खतरनाक प्रावधान इस काले कानून में हैं। इस कानून के लागू होने पर वीर हकीकत के साथ होने वाला व्यवहार पूरे हिंदू समाज पर लागू होगा जब हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना अपराध नही होगा परन्तु उसका विरोध करने पर मृत्यु दंड भी मिल सकता है। जिसके बाद वह चौरासी कोसी तो क्या कोई भी यात्रा नहीं निकाल सकेगा। हिंदू संगठन प्रतिबंधित होंगे लेकिन जेहादी खुलकर आतंक का नंगा नाच कर सकेंगे। भारत आतंकियों का अभयारण्य बनेगा जिसमें आतंकी होना अपराध नहीं होगा, परन्तु उसका विरोध करना या उसको सजा की मांग करना अक्षम्य अपराध माना जायेगा। इससे भी अधिक भयावह परिस्थिती का सामना करना पड सकता है। इस परिस्थिती का लघु रूप आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यदि हिंदू को स्वाभिमान से रहना है तो उसे इस बिल को लाने के षडयंत्र को रोकने के लिये कटिबद्ध होना पडेगा और इस जहरीले नाग को उसके बिल से बाहर आने से पहले ही कुचलना होगा।

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