हिन्दूओं! विजयदशमी के पावन पर्व के सन्देश को समझो

विजयादशमी का पावन पर्व सम्पूर्ण देश में किसी न किसी रूप में मनाया जाता हॅ। इस दिन भगवान राम ने अत्याचारी रावण का वध किया था। राम सत्य,न्याय व शील के प्रतीक थे जबकि रावण असत्य,अन्याय और दुराचार का प्रतीक था। इसलिये यह पर्व सत्य की असत्य पर, न्याय की अन्याय पर तथा शील की दुराचार पर विजय का प्रतीक के रूप में मनाया जाता हॅ। इस दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध भी किया था। महिषासुर ने सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपने अत्याचारों से आतन्कित किय हुआ था।ब्रह्मा, विष्णु, महेश के मुख से प्रकटी मां दुर्गा को सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां प्रदान कीं। नौ दिन तक चले इस युद्ध के बाद माता दुर्गा ने उस दुष्ट महिषासुर का वध किया था। सदियों से हिन्दू समाज नौ दिन तक शक्ति की पूजा कर इस दिन शस्त्र पूजा करता हॅ। इसी दिन छत्रपति शिवा जी महाराज को माता भवानी ने वह तलवार दी थी जिसे वे “भवानी की तलवार” कहते थे। हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का लक्ष्य लेकर आज के ही दिन उन्होंने “सीमोलन्घन” प्रारम्भ कर अपना विजय अभियान प्रारम्भ किया था। पान्डवों ने इसी दिन अपना अज्ञातवास समाप्त कर कौरवों को परास्त कर राजा विराट की गायों को छुडाया था । आज ही के दिन डा० केशवराव बलिराम हेडगेवार ने हिन्दू समाज को परम वॅभव के शिखर पर पहुंचाने का सन्कल्प लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ् की स्थापना की थी। रा० स्व० संघ आज विश्व का सबसे बडा स्वयंसेवी संगठन बन चुका हॅ तथा प्रखर राष्ट्रभक्ति के आधार पर देशसेवा में सबसे आगे रहकर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा हॅ।

सामान्यतः सभी कहते हॅं कि इस पर्व का सन्देश हॅ कि सात्विक शक्तियों की हमेशा विजय होती हॅ। परन्तु अगर सात्विक व सभ्य शक्तियां यही मानकर खतरों की अनदेखी करती रहीं तो वे बर्बर समाजों को खुलकर खेलने का अवसर देती हॅं और अपने विनाश को निमन्त्रण देती हॅं। रोम व यूनान की संस्कृतियां सभ्य व विकसित थीं परन्तु अतिसभ्य बनने के चक्कर में अपने खतरों की अनदेखी करती रहीं और इस लापरवाही का परिणाम हुआ कि वे खत्म हो गईं। जवाहर लाल नेहरू जी ने अपनी पुस्तक Discovery of India में इनके खत्म होने के कारणों का वर्णन करते समय इसी तथ्य की ओर ध्यान दिलाया हॅ कि वे वर्तमान में ही आनंदित रहे और भविष्य के खतरों के प्रति अनजान बने रहे। क्या यही बात आज हिन्दू समाज पर लागू होती हुई नहीं दिख रही हॅ? हमें अपने खतरों को पहचानना होगा और इनका सामना करने के लिये संगठित होकर शक्ति की आराधना करनी होगी , तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित बना पायेंगे। आज के समय पर विजयदशमी का यही सन्देश हॅ।

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