क्या भारत का हैदराबाद पाकिस्तान का हैदराबाद बनता जा रहा है?

भारत के हैदराबाद में स्थित एक विश्वविद्यालय में “गऊ मांस उत्सव” मनाया गया और वहां की पुलिस ने आयोजकों पर कार्यवाही करने की जगह इस घृणित कांड का विरोध करने वाले विद्यार्थियो पर कार्यवाही की। इस खबर को पढ कर किसी भी व्यक्ति की पहली प्रतिक्रिया यही होगी कि यह खबर पाकिस्तान के हैदराबाद की होगी जहां गैरमुस्लिमो की भावना का सम्मान नहीं होता और वहां का मुस्लिम समाज उन पर मनमाने अत्याचार करता है। वहां पर मुस्लिम समाज के द्वारा मंदिरो पर हमले होते है, दिन दहाडे गाय काटी जाती है, हिन्दुओं की लडकिया उठाई जाती हैं और हिन्दु विरोधी भाषणों की भरमार रह्ती है। किंतु अगर कोई हिन्दू अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के विरोध मे आवाज उठाने की हिम्मत करता है तो उसकी आवाज कुचल दी जाती है।या तो उसे कट्टरपंथी जान से मार देते है या” ईश-निन्दा” के आरोप मे उसे कानूनन प्राण दंड दिया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस अत्याचार के विरोध मे कोई आवाज सुनाई नहीं देती।

आज भारत के हैदराबाद में भी यही स्थिती निर्माण करने की कोशिश की जा रही है। मुस्लिम कट्टरपंथी आज वही सब काम करने की कोशिश करते है जो केवल पाकिस्तान मे ही संभव है। दुर्भाग्य से यहां के सेक्युलर राजनीतिक दल मुस्लिम वोटों के लालच में इन कट्टरपंथियों पर लगाम लगाने की जगह इनके हाथ की कठपुतली बनकर हिंदू समाज पर अमानवीय अत्याचार करते है । अगर हिंदू समाज के कुछ लोग इसका विरोध करते है तो सबसे पहले मुस्लिम कट्टरपंथी उन पर हमला करते है और उसके बाद प्रशासन उनके गुलाम की तरह हिन्दू नेताओं पर झूठे केस बनाकर उनकी आवाज को निर्ममता से कुचलने की कोशिश करता है । उस समय देश के मानवाधिकारवादियो को लकवा मार जाता है , तथाकथित बुद्धिजीवियो की जबान सुन्न हो जाती है और “राष्ट्रीय” मीडिया के सिपाही कुम्भकर्णी नींद मे सो जाते हैं। वैसे तो निजामशाही के समय से ही वहा पर हिन्दू समाज की स्थिती दूसरे दर्जे के नागरिक की थी। आजादी के बाद सोचा गया था कि अब स्वतन्त्र भारत मे सभी नागरिकों स्थिती समान होगी और एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में सभी धर्मावलम्बियो के साथ समान व्यवहार होगा। परन्तु शासको के बदलने के बावजूद हिन्दू समाज की नियति नही बदली। पहले वह मुस्लिम शासको द्वारा इस्लाम के नाम पर कुचला जाता था , अब उसका दमन धर्मनिरपेक्षता के नाम पर किया जाता है। वहा पहले भी गऊ हत्या खुले आम होती थी, अब भी उस पर रोक लगाने का काम करने वाले कानून की निगाहों में अपराधी माने जाते है। पहले भी वहां हिन्दू मन्दिरो पर हमले किये जाते थे , अब भी वे अपनी ताकत दिखाने के लिये सबसे पहले हिन्दू मंदिरो पर ही हमला करते है और कानून के रखवाले सोते रह जाते हैं। विश्व मे कही भी मुस्लिम समाज का झगडा हो , उसका सबसे पहले नजला हैदराबाद के हिन्दू समाज पर ही उतारा जाता है। मक्का मे शिया-सुन्नी विवाद हो या हजरत बल की चोरी का मामला हो,भुट्टो की फांसी का मामला हो या जनरल अयूब की विमान दुर्घटना मे मौत हो, ओसामा के विरुद्ध अफगानिस्तान मे अमेरिका द्वारा कार्यवाही हो या पाकिस्ता्न मे घुसकर ओसामा को मौत की सजा हो, संसद पर हमला करने वाले अफ्जल गुरू को फांसी की सजा हो या सिमी पर प्रतिबंध लगाया हो, सल्मान रश्दी द्वारा सैटानिक वर्सेज लिखा गया हो या तस्लीमा नसरीन द्वारा लज्जा का लेखन हो, ६ दिस.१९९२ को बाबरी ध्वंस की गौरवशाली घटना हो या गोधरा मे ५९ हिन्दूओ की निर्मम हत्या के बाद गुजरात के समाज का प्रतिकार हो, इस प्रकार की सभी घटनाओं में पहले हैदराबाद के हिन्दू मन्दिरो पर हमला होता है और उसके उनकी दुकाने जलाई जाती हैं और उनकी बहन बेटियों की अस्मत को लूटने की कोशिश की जाती है। शायद मुस्लिम समाज वहा के हिन्दू को गली का कुत्ता समझने की कोशिश करता है जिस पर गली के बिगडैल बच्चे सबसे पहले अपना गुस्सा निकालते हैं। परन्तु १९४७ के बाद भी इन सब जघन्य अपराधो को करने वाला कोई भी अपराधी पकडा नहीं गया अपितु उनको राजनीतिक संरक्षण ही मिला है।

इसी का परिणाम है कि आज हैदराबाद जेहादी आतंकवादियो का अभयारण्य बन गया है। सम्पूर्ण भारत मे कही भी आतंक की घटना करने वाले यहीं पर शरण पाते हैं। यहां की पुलिस उनके संरक्षक के रूप में काम करती है और अगर किसी अन्य राज्य की पुलिस इन आतंकियो को पकडने के लिये यहा आ भी जाये तो यहां का मुस्लिम समाज उनकी ढाल बनकर सुरक्षा बलो का मुकाबला करता है। गोधरा कांड को अंजाम देने वाले हो या संसद पर हमला करने वाले हो, सूरत मे बम विस्फोट करने वाले हो या पुणे मे आतंक फैलाने वाले हो सभी यहा सम्मान और सुरक्षा के साथ रहते है जब तक कि उन राज्यो या केन्द्र के सुरक्षा बल वहा नहीं पहुंच जायें। इसीलिये कई बार लोग हैदराबाद को मिनी पाकिस्तान भी कहते हैं।

पिछले दिनो भाग्यलक्ष्मी मंदिर मे पूजा हो रही थी । तभी नमाज का समय भी हो गया। मौलवी के धमकाने पर वहा की पुलिस के कुछ सिपाहियो ने मंदिर की घंटियां पकड ली। इस घटना के विरोध मे वहा का हिन्दू आक्रोशित हो गया और अगले ही दिन हजारो युवक उस मन्दिर के बाहर एकत्रित हो गये और कई घन्टे तक वहा की घंटियां बजाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। उसके बाद वहां रामनवमी की शोभायात्रा निकालने का अवसर आया । वहा के मुस्लिम सांसद और विधायक ने इस प अपना विरोध जताया। उनके विरोध के कारण प्रशासन ने इस पावन शोभायात्रा को अनुमति नही दी। हिन्दू समाज ने इसको चुनौती के रूप मे लिया और लाखो की संख्या मे इस शोभा यात्रा मे हिन्दुओं ने भाग लिया। इसके बाद हनुमान जयन्ति के पावन दिवस पर निकलने वाली शोभा यात्रा के साथ भी जब यही व्यवहार हुआ तो हिन्दू समाज ने इसका भी उसी तरीके से जवाब दिया। ऐसा लगता है कि अब हिन्दू अपने ही देश मे अपने साथ हो रहे इन अपमानो से थक चुका है। वह अब इन देश विरोधी और हिन्दू विरोधी शक्तियो का मुंह तोड जवाब देने का मानस बना चुका है। शायद हिन्दू का यह जागरण मुस्लिम नेताओं को हजम नहीं हुआ और हनुमान जयंति के अगले ही दिन एक गाय की हत्या कर उसका कटा सिर एक मंदिर मे फेंकने का दुस्साहस किया गया। जब वहा के कुछ युवको ने इस घटना के विरोध मे प्रदर्शन किया तो उन पर हमला कर के ४ लोगो को गम्भीर रूप घायल कर दिया। इस हमले का नेतृत्व करने वाले वही लोग थे जिन्होने हरेन पण्ड्या की हत्या की थी परन्तु प्रशासन उनको अभी तक नहीं पकड पाया है। इसके बाद उस्मानिया विश्वविद्यालय मे “गऊ मांस उत्सव” मनाने का दुस्साहस किया गया। इसका भी हर प्रकार का विरोध किया गया। परन्तु इस मामले में भी अपराधी आजाद है और विरोध करने वालो को ही गिरफ्तार किया गया है।उस्मानिया विश्वविद्यालय के इन लोगो को कभी हैदराबाद की इज्जत का ध्यान नही आया क्योंकि अब यह शहर अरब के शेखो की वासना की मन्डी बन चुका है। इन पथभ्रष्टों को कभी आतंकवाद या बंग्लादेशी घुसपैठिया विरोधी दिवस मनाने का नहीं सूझा। शायद ये लोग इन राष्ट्र विरोधियो के साथ मिलकर न केवल हिन्दू समाज अपितु भारत के विरोध मे ही काम कर अपने जीवन को धन्य समझते हैं। परन्तु’ अब वहां के हिन्दू समाज ने तय कर लिया कि चाहे प्रशासन इन दुष्टो की सहायता करे परन्तु वे अब अपन अपमान बर्दाश्त नही करेंगे और प्रजातांत्रिक तरीको इन देश विरोधी गतिविधियों का सशक्त प्रतिकार करेंगे तथा पाकिस्तान के हैदराबाद का रूप लेते जा रहे अपने हैदराबाद को भाग्यनगर का प्राचीन गौरव वापस दिलाकर ही रहेंगे।

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