कश्मीर के आन्दोलन का सच

जम्मु की अपनी यात्रा,जिसका उद्देश्य बाबा बूढा अमरनाथ यात्रा को प्रारम्भ करना था, के दौरान एक दुर्भाग्यजनक समाचार मिला। काश्मीर घाटी के कुछ युवकों, जो जम्मु में रहते हॅं, ने जम्मु विश्वविद्यालय के बाहर भारत विरोधी नारे लगाने का दुस्साहस किया। इस घटना से जम्मु का हिन्दु समाज बहुत गुस्से में हॅ। वहां की पुलिस ने जब कार्यवाही करने में विलम्ब किया तो वहां के समाज ने धमकी दी कि अगर पुलिस ने इन देशद्रोहियों को गिरफ्तार नही किया तो वे विवश होकर कानून अपने हाथ में लेंगे परन्तु जम्मु की धरती पर भारत विरोधी षडयन्त्र नहीं होने देंगे। इस धमकी के बाद ही वे देशद्रोही गिरफ्तार किये जा सके। घाटी के ही कुछ मुस्लिम युवकों ने ऍसी ही हरकत दिल्ली के जन्तर मन्तर पर करने की कोशिश की थी जिसे कुछ सजग देशभक्त युवकों ने असफल कर दिया। विदेशों मे रहने वाले कुछ कश्मीरी मुस्लिम युवा भी भारत विरोधी प्रदर्शन करते रहते हॅं तथा भारत की छवि बिगाड कर देशद्रोही षडयन्त्रों को अन्जाम देते रहते हॅं। इन घटनाओं से एक बात स्पष्ट हो जाती हे कि घाटी का मुसलमान चाहे घाटी मे रहता हो अथवा दिल्ली,जम्मु या कहीं ऑर;एक ही एजेन्डे के अन्तर्गत काम कर रहा हॅ। पाकिस्तान ने जेहाद के नाम पर यह एजेन्डा तय किया हॅ ऑर यह हॅ”आजादी अर्थात भारत से अलग होना”। इसी एजेन्डा के अन्तर्गत वह कभी “लव जेहाद” करता हॅ, कभी”ऍके ४७” का जेहाद” करता हॅ तो कभी “स्टोन जेहाद” कर भारत की सेना को लहू लुहान करता हॅ। मनमोहन सिन्ह या उमर अब्दुल्ला जिस स्वायत्तता की बात कर रहे हॅं वह कुछ ऑर नहीं आजादी ही हॅ। मनमोहन सिन्ह की कथित पहल तथा उमर अब्दुल्ला के १५ अगस्त के भाषण ने आतन्कवादियों की हिम्मत बढा दी हॅ ऑर अब वे आजादी से कम पर मानने को तॅय्यार नहीं हॅं। उन्होनें इसको भारत सरकार का झुकना माना हॅ। अब वे उनको आजादी के लिये ऑर झुकाने की तॅय्यारी कर रहे हॅं। इसीलिये रमजान के दिनों मे भी वे हिन्सा का तान्डव कर रहे हॅं । भारत सरकार के रवॅय्ये ने स्थिती को और बिगाड दिया हॅ। वह नहीं समझ पा रही हॅ कि घाटी का यह आन्दोलन केवल १४००० वर्ग कि.मी. क्षेत्र में चल रहा हॅ जहां राज्य की ५०% से भी कम आबादी रहती हॅ। वहां की ५०% से अधिक आबादी ८७००० कि. मी. क्षेत्र मे रहती हॅ जो इस अलगाववादी षडयन्त्र का विरोध कर रही हॅ। भारत सरकार वहां की देशभक्त जनता की भावनाओं की परवाह नहीं कर रही हॅ। यदि सरकार कश्मीर समस्या का समाधान चाहती हॅ तो उसे surrender mode से बाहर निकल कर victory mode में आना पडेगा तथा सख्त कार्यवाही कर यह दिखाना होगा कि भारत में देशद्रोहियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता हॅ। यदि सरकार कमजोरी दिखाती हॅ तो वह भारत में चल रहे अन्य अलगाववादी आन्दोलनों को एक गलत सन्केत देगी जिसके परिणाम देश की अखण्डता के लिये घातक सिद्ध होंगे।