क्या शिन्दे आई. एस. आई. के प्रवक्ता बन गये हैं?

आई. एस. आई. के कुख्यात एजेन्ट गुलाम नबी फाई ने कहा था कि कांग्रेस के कुछ नेता आई. एस. आई. के हितों की देखभाल करते हैं। पहले केवल दिग्विजय सिंह पर यह शक था। अब भारत के गृह मन्त्री शिन्दे ने अपना पर्दाफाश खुद कर दिया है। रा. स्व. संघ व भाजपा पर पूरी दुनिया में केवल आई. एस. आई ही आतंकवाद को प्रोत्साहन देने का आरोप लगाती थी। अब शिन्दे जैसे नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे या तो मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं या वे आई. एस. आई. के प्रवक्ता है जो उनकी मन्शा को आवाज देते हैं।

एक -दो घटनाओं में संघ से जुडे कुछ लोगो के पकडे जाने को उन्होंनें अपने अनर्गल प्रलाप का आधार बताया है। सब प्रकार के सरकारी उत्पीडन के बावजूद वे उन पर एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर पाये हैं। लेकिन अगर शिन्दे इसी आधार पर ये आरोप लगाते हैं तो आज कांग्रेस अल-कायदा से भी बडी आतंकवादी पार्टी सिद्ध हो जायेगी। १९९३ मे सूरत बम ब्लास्ट के अपराधी मौ. सूरती कांग्रेस के मन्त्री रह चुके हैं। इनके साथ जिन १५ लोगों को सजा हुई थी वे सभी कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे हैं।गोधरा कांड में मासूम हिंदुओं को जलाने वालों में कलोटा, गफ्फार,शेख अब्दुल रहमान, फार्रूख माना, हाजी बिल्लाल आदि कांग्रेस के प्रमुख नेता थे। अगर शिन्दे गोधरा कांड के बाद की प्रतिक्रिया को आतंकी घटना मानते हैं तो इसमे भी २५ से अधिक प्रमुख कांग्रेसी नेता आरोपी हैं। ३००० सिक्खों का नरसंहार किसी भी अन्य आतंकी घटना से ज्यादा भीषण है। इसमें राजीव गांधी से लेकर से लेकर कौन-कौन से कान्ग्रेसी नेता शामिल थे, आज किसी को बताने की जरूरत नहीं है ।आपातकाल की काली छाया हटने के बाद उसकी अपराधी इन्दिरा गांधी को गिरफ्तार करने पर देशभर में हुई हिंसा कांग्रेस के नेताओं ने ही की थी। वायूयान अपहरण कांड के दोषियों में से एक को बाद में कांग्रेस ने विधायक बना कर सम्मानित किया था। स्वामी लक्ष्मणानन्द की क्रूर हत्या का आरोपी राधाकान्त नायक कांग्रेस का ही सांसद है। इतिहास के पन्नों मे ऐसी घटनाएं भरी पडी हैं जो कांग्रेस का आतंकी चरित्र बताने के लिये पर्याप्त हैं। यदि शिंदे का तर्क मान लिया जाये तो शिन्दे, सोनिया, राहुल समेत सभी बडे कांग्रेसी नेता जीवन भर जेल में सडते रहेंगे।

आज भारत में आतंकवाद के जितने भी स्वरूप हैं , उनको प्रारम्भ करने मे या उनका पोषण करने में कांग्रेसी नेताओं का ही हाथ रहा है। पंजाब की अन्दरूनी राजनीति में अपने विरोधियों को परास्त करने के लिये भिंडरावाले की सहायता कर किसने पंजाब को आतंकवाद की आग में झोंका था? शेख अब्दुल्ला का साथ देकर कश्मीर को आतंकियो के हवाले किसने किया था? कोयम्बतूर बम विस्फोटों सहित अन्य आतंकी गतिविधियों में सम्मिलित मदनी को कौन जेल से बाहर लाया था? सिमी पर NDA के द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध के विरोध में संसद में और संसद के बाहर सडकों पर किसने हंगामा किया था? २००१ में उल्फा तथा २००४ में नक्सलियो के साथ मिलकर किसने सरकार बनाने का प्रयास किया था? लिट्टे को भारत में प्रशिक्षण की व्यवस्था किसने करायी थी? बन्गलादेशी घुसपैठियों को भारत में कौन सहायता कर रहा है और कौन उनके अपराधों में उनका बचाव करने के लिये तत्पर रहता है? पूर्वोत्तर में चर्च प्रेरित आतंकी संगठनों की सहायता लेने और उनको सहायता देने का जघन्य अपराध कौन करता है? ऐसे और भी कई प्रश्न हैं जिनके उत्तर देश की जनता चाहती है।

शिन्दे जी! अगर आप चाहें तो कांग्रेस के आतंकी अपराधों की इतनी बडी सूची बनाई जा सकती है जिसके आधार पर कांग्रेस भारत ही नहीं विश्व का सबसे बडा आतंकी संगठन सिद्ध हो जायेगा। मीडिया के निष्पक्ष वर्ग से अपेक्षा है कि वे इस विषय पर भी खोज करे और कांग्रेस के असली चरित्र को उजागर करे। वे देश का बडा उपकार करेंगे।

जहां तक संघ की देशभक्ति का प्रश्न है, उसके लिये शिंदे,अय्यर या दिग्विजय जैसे छुट्भइय्यों के प्रमाण पत्र की आवश्यक्ता नही है। कांग्रेस के ही बसन्त आप्टे सरीखे कई बडे नेताओं के संघ के साथ घनिष्ठ संबन्ध रहे हैं। जहां तक प्रशिक्षण शिविरों की बात है, महात्मा गांधी जैसे कई स्वनामधन्य नेता संघ के शिविरों में आकर उनकी प्रशंसा करके गये हैं। क्या शिंदे और दिग्गी उनकी देशभक्ति पर भी प्रश्न चिंह लगाना चाहते हैं? इन लोगों का नेहरू जी के बारे में क्या विचार है जिन्होंने रा. स्व. संघ को गणतन्त्र दिवस की परेड में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया था ? संघ की देशभक्ति पर संघ के कट्टरतम विरोधी भी कोई प्रश्नचिंह लगाने की कोशिश नही करते। यह काम या तो पागल कर सकता है या भारत का दुश्मन । इन दोनों ही परिस्थितियों में शिंदे जैसे व्यक्ति को भारत के गृह मन्त्रि जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद पर नहीं रहना चाहिये।सोनिया जी को उन्हें अविलम्ब इस पद से हटा देना चाहिये और उनके इस अनर्गल प्रलाप के लिये राष्ट्र से क्षमा मांगनी चाहिये अन्यथा यह माना जायेगा कि वे भी इस अक्षम्य पाप में सहभागी हैं।

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