गरीबों की चिंता किसी को नहीं क्योंकि ये “वोट बैंक” नहीं है।

आजकल चुनावी माहोल होने के कारण सभी सैक्युलर दल मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिये तरह- तरह की बेहूदी हरकतें कर रहे है। चुनाव की पूर्व संध्या पर पहले पिछडे वर्ग के कोटे से मुसलमानों के लिये ४.५% आरक्षण की घोषणा की गई। अब इस सीमा को बढाने के लिये कोई संविधान संशोधन की बात कर रहा है तो कोई इसको ९% करने का वायदा कर रहा है। कोई सलमान रश्दी के भारत में आने का विरोध करने के बहाने देश के साम्प्रदायिक सद्भाव के माहौल में जहर घोल रहा है। ऐसे में” हंगामा” नामक संस्थान द्वारा देश में कुपोषण की स्थिती पर किये गये सर्वेक्षण को जारी किया गया परन्तु इस पर कोई हंगामा नहीं हुआ। देश के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह नें इस रिपोर्ट को जारी करते हुए बहुत ही रस्मी तौर पर कहा कि यह स्थिती शर्मनाक और अस्वीकार्य है। पिछले ७ साल से जो व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री हो, जो देश का वित्त मंत्री, वित्त सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहा हों और रिजर्व बैंक के मुखिया के पद को सुशोभित करता रहा हो , वह इस स्थिती पर किसको शर्मिंदा होने के लिये कह रहा है? पिछले सात सालों से यह व्यक्ति देश के तथाकथित विकास की छलावाभरी रिपोर्टों से देश को भ्रमित कर रहा है परन्तु जब भी किसी नें देश की वास्तविक स्थिती को सामने लाना चाहा है तो इनकी ही चांडाल चौकडी नें उसका उपहास उडाया है और उसका दमन करने में कोई कसर नहीं छोडी है। ये” सज्जन पुरुष” आस्ट्रेलियावासी किसी मुस्लिम युवक के वहां पर आतंकवाद के आरोप में पकडे जाने अपनी नींद खराब करते हैं तो कभी मुस्लिम समाज के कथित पिछडेपन की झूठी रिपोर्ट बनवाकर उनके लिये आरक्षण के देशविरोधी और संविधानविरोधी षडयंत्रों को लागू करने के की घोषणा करते हैं। इसी महापुरूष ने साम्प्रदायिक दंगों के जन्मदाता मुस्लिम समाज के ऊपर हुए अत्याचारों की झूठी कहानियां गढवा कर साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम जैसा देशविरोधी बिल लाने का दुस्साहस किया है। इन्हीं के राज में भगवा आतंकवाद का जुमला गढ कर देशभक्त हिंदू समाज की उज्जवल परम्परा को लांछित किया गया। आज इस रिपोर्ट को जारी करते समय उन्होंनें घडियाली आंसू बहाकर देश के गरीबों का मजाक उडाया है। गरीब का कोई धर्म नहीं होता और न ही कोई जाति होती है। भूखे पेट सोने वाला कभी संगठित भी नहीं हो सकता। इसलिये उसका वोट बैंक भी नहीं हो सकता। शायद यही कारण है कि उसके नाम पर वोट लेने वाले कभी उसके विकास के प्रति गम्भीर नहीं होते और न ही उसके विकास को चर्चा का मुद्दा बनाते हैं। गरीब चाहे किसी भी धर्म का हो उसके विकास की चिन्ता होनी ही चाहिये। किसी पंथ विशेष को ही पिछडा घोषित कर उनके लिये ही देश के संसाधनों को उन पर लुटा देना इन गरीबों की गरीबी के प्रति क्रूर मजाक है।

“हंगामा” द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट वास्तव में देश के लिये खतरे की घंटी है। ११२ जिलों में किये गये सर्वेक्षण के अनुसार भारत के १६ करोड बच्चे जो देश का भविष्य हैं , उनकी हालत चिंताजनक है। दुनिया में कुपोषण के शिकार बच्चों में हर तीसरा बच्चा भारतीय है। ५ वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ४२% बच्चे कमजोर हैं तो ५९% बच्चों का कद उनकी उम्र के लिहाज से बेहद कम है। भारत में नौनिहालों के कुपोषण की बिमारी गरीब सहारा अफ्रीकी देशों की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। ६६% माओं ने शिक्षा ग्रहण नहीं की है। उनके ४९% बच्चे कमजोर हैं तथा ६३% बच्चों का कद उनकी उम्र की तुलना में छोटा है। इस सर्वे में भी एक शरारत की गई है। इसमें भी मुस्लिम समाज की स्थिति को ज्यादा दयनीय बताया गया है। क्या वे इस स्थिति को ठीक करने के लिये बनाई जा रही योजनाओं में भी मुसलमानों के लिये आरक्षण करेंगे? यदि ऐसा होता है तो ये योजनाएं भी मुस्लिम तुष्टीकरण की भेंट चढ जायेंगी।

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