श्रध्दांजली

‘हिन्दू समाज का सिंहत्व जाग्रत किया’

रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत तथा सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी

स्वर्गीय अशोक जी सिंहल के निधन से सारे विश्व के हिन्दू समाज को गहरा शोक हुआ है। उनके लम्बे संघर्षमय जीवन का अंत भी मृत्यु के साथ लम्बा संघर्ष करते हुए हुआ। श्री अशोक जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे। संघ की योजना से उन्हें विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व दिया गया था।

विश्व हिन्दू परिषद के माध्यम से हिन्दू समाज में चैतन्य निर्माण करते हुए उन्होंने हिन्दू समाज का सिंहत्व जाग्रत किया।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आन्दोलन को एक महत्व के मुकाम पर लाने में उनकी महत्व की भूमिका रही है। भारत के सभी श्रेष्ठ साधु-संतों के साथ सतत् आत्मीय संपर्क के कारण उन्होंने सभी साधु-संतों का विश्वास एवं सम्मान अर्जित किया था। हिंदुत्व के मूलभूत चिन्तन का उनका गहरा अध्ययन था जो उनके वक्तव्य एवं संवाद द्वारा हमेशा प्रकट होता था।

ऐसे एक सफल संगठक एवं सक्रिय सेनापति को हिन्दू समाज ने आज खो दिया है। गत कुछ दिनों से अपने स्वास्थ्य के कारण विश्व हिन्दू परिषद् का कार्यभार अपने सुयोग्य साथियों को सौंप कर मार्गदर्शक के रूप में वे कार्य कर रहे थे। स्वतंत्र भारत के हिन्दू जागरण के इतिहास में श्री

अशोक जी का संघर्षशील एवं जुझारू नेतृत्व सदा के लिए सभी के स्मरण में रहेगा।

उनकी दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान हो, ऐसी हम परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।


* श्री अशोक सिंहल का संपूर्ण जीवन देश की सेवा करने पर केंद्रित था। हमारा सौभाग्य है कि श्री अशोक जी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमें मिला। उनके परिवार एवं अनगिनत समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।
-नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

* वे सदैव हिन्दू समाज की सेवा में तल्लीन रहे। ऐसा कौन महापुरुष होगा जो अशोक जी का स्थान लेकर राम जन्मभूमि आन्दोलन को आगे बढ़ाएगा और भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाएगा। केन्द्रीय शासन से विशेष आग्रह है कि राम मंदिर का निर्माण ही अशोक जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
-वासुदेवानंद जी महाराज, शंकराचार्य

* अशोक सिंहल हिन्दुत्व के स्वाभिमान थे। उन्होंने संपूर्ण विश्व में हिन्दुत्व की अलख जगाई।
-डॉ.रामविलास वेदान्ती
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य

* अशोक जी एक व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं में एक संस्था थे। उनके अंदर का संकल्प बल, त्याग हमारे विचार में एक अमर प्रेरणा का
कार्य करेगा।
-गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी

* विश्व को बड़ा बनाने का संकल्प और ऐसा ही कुछ संकल्प कि सबको बड़ा बनाकर स्वयंसेवक बनकर कार्य करना। यही श्री अशोक जी की महानता थी।
-सुमित्रा महाजन, लोकसभा अध्यक्ष

*अशोक जी की कर्तव्यनिष्ठा और हिन्दू समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव याद रहेगा।
-अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा

* उनके विचार हम सभी के लिए प्रेरणा का काम करेंगे। उन्होंने समाज के लिए जो कार्य किया वह सदैव याद रहेगा।
– सुरेश प्रभु, रेलमंत्री

* विश्व को बड़ा बनाने का संकल्प और ऐसा ही कुछ संकल्प कि सबको बड़ा बनाकर स्वयंसेवक बनकर कार्य करना। यही श्री अशोक जी की महानता थी।
-सुमित्रा महाजन, लोकसभा अध्यक्ष

* श्रद्धेय अशोक सिंहल जी हिन्दुत्व के पुरोधा, हिन्दू जगत के स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आदर्श स्वयंसेवक एवं प्रचारक के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे।
-डॉ. बजरंगलाल गुप्त
उत्तर क्षेत्र संघचालक

* अशोक सिंहल जी का इस दुनिया से प्रस्थान एक युग का अन्त है। श्रीरामजन्मभूमि के लिए उनका संघर्ष समाज को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
-डॉ. निर्मल सिंह
उपमुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर

* विश्व के संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए वे मार्गदर्शक थे और अंतिम क्षण तक वे क्रियाशील थे। उनके कण-कण में धर्म भरा हुआ था। उनके चरणों में शत-शत नमन।
– श्री भागय्या, सहसरकार्यवाह, रा.स्व.संघ

* श्री अशोक जी के निधन से पूरे देश ने एक ज्वलंत व्यक्तित्व को खो दिया है। हिन्दुत्व की अविचल धारा आज स्तब्ध हो गई है।
-श्रीपाद नाईक, केन्द्रीय आयुष मंत्री

* विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक एवं संपूर्ण नेपाली जनता से सुपरिचित विराट व्यक्तित्व को नेपाली जनता की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित है।
-दीप उपाध्याय, राजदूत, नेपाल

* उनके जाने से मुझे लगता है कि मेरा व्यक्तिगत नुकसान हुआ है और एक पितातुल्य जो छाया थी वह हट गई।
– रमन सिंह, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

* अशोक जी महान थे। उनके विराट व्यक्तित्व को शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता।
– पदमनाभ आचार्य
राज्यपाल, नागालैंड

* श्री अशोक सिंहल ने राम जन्मभूमि के आन्दोलन को तीव्र गति से आगे बढ़ाकर संपूर्ण हिन्दुओं में चेतना जगाने का अतुलनीय
कार्य किया।
– मनोहर लाल
मुख्यमंत्री, हरियाणा

* उनकी प्रेरणा से सैकड़ों युवाओं ने भी राष्ट्रहित के कार्य में स्वयं को समर्पित किया है।
-श्रीहरि बोरिकर
राष्ट्रीय महामंत्री, अभाविप

* अशोक जी के राष्ट्र सेविका समिति से प्रारंभ से ही आत्मीय संबंध थे।  देशभर की समिति सेविकाएं उस चिन्मय प्रकाश को, जो चिन्मय सत्ता में विलीन हो गया है, अश्रुपूरित नेत्रों से भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित करती हैं।
-शांतक्का
प्रमुख संचालिका,राष्ट्र सेविका समिति
हम परम वैभव लाएंगे

*  आलोक कुमार

श्री अशोक सिंहल ने देह छोड़ दी। आठ से भी अधिक दशकों तक यह उनका घर थी। इसी के अवलम्ब से वह हिन्दू जागरण, संगठन एवं संघर्ष का काम करते रहे।

फिर ‘एष: काया पततु’ की स्थिति आई। अशोक जी ब्रह्मलीन हो गये।

उन पर श्रद्धा रखने वाले उनकी देह को निगमबोध घाट ले गये। चिता सजाई गई। मुखाग्नि दी गई। आतुर अग्निदेव  ने  जल्दी से अपनी ऊंची ज्वालाओं में वह शरीर समेट लिया।

माइक पर आज्ञा गूंजी- ‘दक्ष’। हम सतर्क खड़े हुए। आज्ञा गूंजी- ‘ध्वज प्रणाम’ 1, 2, 3। उस समय  मेरी  आंखें  चिता  से  उठ  रही  ज्वालाओं पर थीं। अपना भगवा ध्वज,  अपना गुरु है। यह अग्नि की सदा उर्ध्वमुखी रहने वाली ज्वालाओं का प्रतीक है। यज्ञ शिखाएं भगवा ध्वज की ही प्रतीति होती हैं। आज यह ज्वालायें उस शरीर से उठ रही थीं, जो जीवन भर समर्थ, पौरुषी समाज बनाने का माध्यम बना था । पुण्यभूत हो गया था ।
वह ज्वालायें – शरीर में से भूमि का भाग भूमि को, जल का भाग जल को, वायु का भाग वायु को, अग्नि का भाग अग्नि को और आकाश का भाग आकाश को लौटा रही थीं । अशोक जी जीवन व मृत्यु – दोनों में पूर्ण रूप से उऋण हो गये ।

ध्वज प्रणाम की आज्ञा के साथ चिता की लपटों में अपने गुरु प्रवित्र भगवा ध्वज के प्रत्यक्ष दर्शन हुए। संघ की पद्धति से अपने गुरु को अपने हृदय पर हाथ रखकर, मस्तक झुका कर, प्रणाम किया। प्रार्थना के उच्चार में हम सब ने भी कहा त्वदर्थे पतत्वेष कायो हमारे भी शरीर, हे मातृभूमि! तेरे काम आयें। परिचय दिया,  हम  हिन्दूराष्ट्र  के अंगभूत हैं। उग्र वीरव्रत मांगा। और मानो प्रत्यक्ष अपने गुरु की उपस्थिति में श्री अशोक जी से वायदा किया कि आपके व श्रीभगवान के आशीर्वाद से हम अपनी संगठित कार्य शक्ति द्वारा अपने धर्म का संरक्षण करते हुए इस राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने का संकल्प अवश्य पूर्ण करेंगे ।

(लेखक रा.स्व.संघ, दिल्ली प्रांत के सह प्रांत संघचालक हैं)