चौरासी कोसी परिक्रमा हमारी सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या (19 अप्रैल  ) विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष  चम्पतराय ने आज यहां कहा  पंच कोसी  ,चौदह कोसी  या फिर चौरासी कोसी परिक्रमा यह सभी भक्तो के उद्धार तथा भगवद् प्राप्ति का माध्यम है, वही सामाजिक समन्वय भी स्थापित करती है।इस परम्परागत सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखना जन-जन का कर्तव्य है।अयोध्या के चौरासी कोस मे स्थापित है अनेको धार्मिक एंव पौराणिक तीर्थ यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुये है।इनके दर्शन पूजन से भक्तो को अवलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। इस परम्परागत परिक्रमा और तीर्थ का संरक्षण संवर्धन आवश्यक है।

हनुमान मंडल के संयोजन मे( 19अप्रेल शुक्रवार से  10मई तक चलने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा को विहिप केन्द्रीय सलाहकार सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने केसरिया ध्वज दिखा कर  रवाना किया । इससे पूर्व विहिप उपाध्यक्ष चंपतराय ने  अपने विचार उपस्थित परिक्रमार्थियो के बीच प्रकट करते हुये कहा देवदर्शन बड़े ही कठिनाईयो से प्राप्त होता है।जप, तप, परिक्रमा आदि इसके माध्यम है।  यहां आयोजित होने वाला पारम्परिक मेला उत्सव तथा परिक्रमा अयोध्या के धार्मिक स्वरूप को जीवंत प्रदान करते है।
कार्तिक माह मे पंचकोसी और चौदहकोसी परिक्रमा मे लाखो भक्त अयोध्या पहुंचकर इस पवित्र भूमि की परिक्रमा करके इसके” रज ” को मस्तक पर ग्रहण करते हुये भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धानिवेदित करते है।उन्हो ने कहा लेकिन अयोध्या चौदहकोस मे ही सीमित नही है इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमा तो चौरासी कोस मे है। जिसकी जानकारी बहुत कम लोगो को है।उन्होने कहा अयोध्या की चौरासी कोस की परिक्रमा भी होती हैं ,यह जानकारी भी सीमित लोगो तक ही रही।विगत वर्ष 2013 मे विहिप और संतो ने इसका सम्पूर्ण देश मे प्रचार प्रसार किया।
उन्होने कहा हम यह कभी नही भूलेंगे कि इस धार्मिक और सांस्कृतिक परिक्रमा को पूर्ववर्ती अखिलेश यादव की सरकार ने प्रतिबंधित कर संतो और विहिप कार्यकर्ताओ को कारागार मे डालकर इसको देश भर मे प्रचारित करा दिया।
उन्हो ने प्रदेश और केन्द्र सरकार से आशान्वित होते हुये कहा वृंदावन और कामदगिरी की भांति ही अयोध्या के इस चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग मे पड़ने वाले एतिहासिक पौराणिक स्थलो का जीर्णोद्धार करके इसे तीर्थाटन केन्द्र के रूप मे विकसित करने जरूर गंभीर होगी, ताकि अयोध्या आने वाले भक्त इसका भी दर्शन कर सकें।
कारसेवक पुरम् मे आयोजित महाआरती करने के उपरान्त परिक्रमा मणिराम दास जी की छावनी पहुंच कर परिक्रमार्थियो ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का आशिर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर उन्हो ने कहा भगवद्च्चिन्तन और राष्ट्र समाज का उद्धार ही हम सभी भक्तो का संकल्प है।परिक्रमा ईश्वर प्राप्ति का साधन मात्र नही है यह लोककल्याण करने का महाअनुष्ठान है। चौरासी कोस की परिक्रमा से सामाजिक समरस्ता को व्यापक बल मिलता है।उन्होने विहिप के प्रयास को प्रशंसनीय बताते हुये कहा  हनुमान मंडल के बैनर तले निकल रही यह परिक्रमा सामाजिक तथा धार्मिक वातावरण को विस्तार प्रदान करते हुये भविष्य मे व्यापक स्वरूप ग्रहण कर लेगी।
परिक्रमा के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने बताया यह परिक्रमा आज अयोध्या से मखोड़ा (मखभूमि)प्रस्थान करेगी रात्रि विश्राम के उपरांत प्रातःकाल दर्शन पूजन करके पूज्य संत आगे रजवापुर रामगढ़खास ,छावनी रामरेखा, देवकली हनुमान मंदिर विशेषरगंज हनुमानबाग बस्ती से सरयू पारकर फैजाबाद के शेरवाघाट श्रृंगीश्रृषि आश्रम महबूब गंज गोसाईगंज टिकरी तारून रामपुर भगन सूर्यकुंड दराब गंज हेमा सराय आस्तिकन अमानी गंज रौजागांव पटरंगा से बाराबंकी जनपद के बेलखरा मे प्रवेश करेगी यंहा से गोंडा जनपद के देवीगंज दुलारेगंज जम्मूदीप ,भौरीगंज  राजा पुर पस्का (संत तुलसीदास की जन्मभूमि) बखरिया,उमरी डिक्सिर अमदही जमदग्नि आश्रम तुलसीपुर नवाब गंज से जनपद बस्ती मे पुनः वापसी रेहली ,सिकंदरपुर होते हुये 9 मई को मखोड़ा पहुंचेगी। उन्होने बताया 10 मई को सायंकाल तक अयोध्या पहुंचकर दूसरे दिन 11 मई को सरयू स्नान करने के पश्चात राजकोट की परिक्रमा वा सीता कुंड पर हवन पूजन करके परिक्रमा समाप्त होगी
परिक्रमा प्रस्थान के दौरान महंत महंत कमलनयन दास महाराज, महंत  कृष्णाचार्य, कृपालु रामदास संत जानकी दास , राम दास, राघव दास ,दयाल दास ,रामकिशन दास,गया शरण  विहिप केन्द्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ,अनिल पांडेय, पवन तिवारी बब्लू,घनश्याम ,राजा वर्मा विनोद कुमार ;आचार्य  नारद भट्टाराई,वीरेन्द्र कुमार, सैकड़ो संत धर्माचार्य समलित हुये।

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