छत्रपति शिवाजी महाराज, उनकी अजेय हिन्दू शक्ति और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक श्री बालासाहब ठाकरे के निधन पर शोक संदेश – अशोक सिंहल

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यों तो यह सृष्टि का अटल नियम है कि हर आने वाले को यहां से जाना ही है; पर कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनके जाने से दिल के किसी कोने में अपूरणीय क्षति हो जाती है। स्व0 श्री बालासाहब ठाकरे का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था।

यह भारत का दुर्भाग्य है कि हिन्दू बहुल होते हुए भी देश की राजनीति में सफलता के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण को एक अचूक दवा मान लिया गया है। यद्यपि कांग्रेस ने इस परम्परा को शुरू किया, पर अब तो भारत के अधिकांश दल इसी गलत मार्ग पर चलने में गौरव अनुभव करते हैं। हिन्दुओं की उपेक्षा और मुस्लिमों का चरण चुम्बन ही मानो सेक्यूलरवाद की पहचान बन गयी है।

ऐसे समय में श्री बालासाहब ठाकरे ने राजनीति के इस दूषित प्रवाह के विरुद्ध आवाज उठाई। इससे मुंबई में जड़ जमाए इस्लामी माफियाओं का वर्चस्व टूट गया और फिर इसका प्रतिफल वहां की राजनीति में भी दिखाई दिया।

छत्रपति शिवाजी महाराज, उनकी अजेय हिन्दू शक्ति और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक श्री बालासाहब ठाकरे ने प्रखरता से शिवसेना को एक हिन्दू दल के नाते पहचान दिलाई। यद्यपि इसके कारण उन्हें अन्य दलों का कोपभाजन बनना पड़ा; पर उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाये।

श्री राम मंदिर आंदोलन तथा बाबरी ढांचे के विध्वंस के समय वही एकमात्र ऐसे हिन्दू नेता थे, जिन्होंने साहसपूर्वक इसके लिए देश की हिन्दू जनता और अपने शिवसैनिकों को बधाई दी।

श्री बालासाहब ठाकरे का विश्व हिन्दू परिषद के विचार और कार्यक्रमों के प्रति सदा समर्थन और सहयोग का भाव रहता था। उनसे मिलने पर हर बार मुझमें नई ऊर्जा का संचार होता था। उनका जाना मेरे लिए बड़े भाई समान अभिभावक का जाना है। अतः उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।

बस और क्या कहूं। परम पिता परमेश्वर से विनम्र प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा उनके सभी परिजनों व समर्थकों को इस असीम कष्ट को सहने की शक्ति दें।

ॐ शांति, शांति, शांति।।

शोकाकुल – अशोक सिंहल  संरक्षक विश्व हिन्दू परिषद

It is the irreversible law of this mortal world that everyone who comes here has to go, but there are some such people whose passing on leaves a feeling of irreparable loss in a corner of the heart. Late Sri Balasaheb Thackeray was very much such a personality.

It is the misfortune of Bharat that even if it a Hindu majority country, Muslim appeasement has been accepted as a magic potion for success in the politics of the country. Though the Congress Party started and institutionalized this ‘policy of appeasement’, but now most of the parties of Bharat feel proud of walking this path. Taking no notice of Hindus and licking the feet of Muslims appear to have become synonymous with ‘secularism’.

Under such circumstances Sri Balasaheb Thackeray raised his voice against this polluted discourse and approach of politics. By this the command and control network of the Islamic mafia sitting put in Mumbai with their roots deep was broken and its domino effect was reflected in the politics of the financial capital of Bharat.

Sri Balasaheb Thackeray – a connoisseur and strong supporter of the tradition and heritage of Chhatrapati Shivaji Maharaj, his formidable Hindu power and nationalism – spined an identity for Shiv Sena as a Hindu party! Though he earned the ire of other parties for this but he did not retract his steps.

At the time of Sri Ram Temple movement and demolition of the Babri structure he was the only Hindu leader who with courage congratulated the people of the country and the Shiv Sainiks for this.

Sri Balasaheb Thackeray always held a supportive and cooperative outlook for the aims, objects and programmes of Vishva Hindu Parishad. Every time a meeting with him charged me with new energy. To me his passing on is like the passing on of an elder-brotherly guardian. His Nidhan therefore is a personal loss to me.

What more can I say! I pray to Parampita Paramatma to give the departed noble soul a pride of place at His Lotus Feet and give his bereaved family and supporters the strength to bear this irreparable loss.

Om Shantih Shantih Shantih!

In grief,

ASHOK SINGHAL

Patron,Vishva Hindu Parishad