वेटिकन की कठपुतली सरकारें लाने को षडयंत्र रच रहा है चर्च : विहिप

प्रेस वक्तव्य:
वेटिकन की कठपुतली सरकारें लाने को षडयंत्र रच रहा है चर्च : विहिप
नई दिल्ली। जून 6, 2018। चर्च द्वारा वर्तमान सरकारों पर बार-बार हमलों पर अपनी चुप्पी तोड़ विश्व हिंदू परिषद ने प्रतिक्रिया देते हुए आज कहा है कि भारत का चर्च, एक बड़े षड्यंत्र के तहत, केंद्र व राज्यों में ऎसी सरकारें बनाने में जुट गया है जो कि वेटिकन की कठपुतली बन कर उसका स्वार्थ सिद्ध कर सकें. विहिप के संयुक्त महासचिव डा सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि दिल्ली के आर्कबिशप के बाद अब गोवा के आर्कबिशप को भी संविधान खतरे में दिखाई दे रहा है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि वैटिकन के इशारे पर भारत का चर्च वर्तमान सरकारों के विरोध में एक वातावरण बनाने का षड्यंत्र कर रहा है. केवल भाजपा सरकार के आने पर ही इनको ऎसा क्यों दिखाई देता है, यह प्रश्न देश पूछना चाहता है. मोदीजी की सरकार के आते ही चर्च पर हमलों के झूठे प्रचार किए गये. और सारे झूठ पकड़े जाने पर भी इन्होने माफी मांगने की सभ्यता तक नहीं दिखाई. अटल जी की सरकार के समय तो चर्च ने सब सीमाओं को तोड़ दिया था. इसने तत्कालीन सरकार व हिंदू संगठनों पर जिस प्रकार के घिनौने आरोप लगाए थे, वे किसी सभ्य समाज में चर्चा के लायक भी नहीं हैं. उस समय विहिप ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से इन आरोपों की जाँच के लिए निवेदन भी किया था. जिस पर आयोग ने भी माना कि ये सभी आरोप झूठे हैं.
डा जैन ने कहा कि वैटिकन सम्पूर्ण विश्व में केवल हिंदू समाज को ही नहीं अपितु, भारत को बदनाम करता है और भारत का चर्च उनकी कठपुतली बनकर अपने ही देश को बदनाम करने का अक्षम्य अपराध करता है. आपात-काल लगाने, कश्मीरी हिंदुओं के नर संहार, 1984 में सिक्खों के कत्लेआम, चकमा बौद्धों पर चर्च के क्रूर जुल्मों से इनको कभी संविधान खतरे में नहीं दिखाई दिया. यह इनका दृष्टिदोष नहीं, वेटिकन के इशारे पर नाचने वाली सरकार को लाने का एक राजनीतिक षड़यंत्र है. अवार्ड वापसी माफिया की तरह ये भी एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की सुपारी ले कर काम कर रहे हैं.
विहिप के संयुक्त महा सचिव ने आज यह भी कहा कि केवल दिल्ली और गोवा के पादरी ही नहीं, मिजोरम, कर्नाटक, झारखंड, पंजाब आदि राज्यों के चुनावों के समय भी ऎसा ही माहोल बनाकर चर्च ने एक दल विशेष को जिताने के फरमान जारी किए हैं. यह कौन सा सैक्युलर कार्य है? संविधान पूजा का अधिकार देता है परंतु अवैध धर्मांतरण का अधिकार किसी को नहीं है. अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब हिंदुओं के देवी देवताओं का अपमान करना या उनकी मूर्ति जलाना नहीं है. अवैध धर्मान्तरण को रोकने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद व शांतिकाली जी महाराज की हत्या कौन से वैधानिक अधिकार के अंतर्गत की जाती है? उन्हें स्मरण रखना चाहिए कि भारत अपने संविधान से चलता है, वैटिकन के मध्ययुगीन बर्बर संविधान से नहीं. भारत के संविधान को चर्च के राजनीतिक व धर्मांतरण के आक्रामक एजेंडे के कारण खतरा है और यह खतरा पूरे देश को भली भांति समझ में आ गया है. इसी एजेंडे के कारण गोवा के आर्केबिशप ने 1947 में भारत की आजादी का विरोध किया था. 1961 में इन्होने ही गोवा मुक्ति का विरोध करते हुए कहा था कि ईसाइयों का कल्याण पुर्तगाल की गुलामी में ही है.अब उन्हें आत्मविश्लेषण कर अपने पापों के लिए माफी मांगनी चाहिए और वेटिकन से मुक्त होकर भारत के संविधान के अनुसार चलना चाहिए.
जारी कर्ता :
विनोद बंसल (राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिन्दू परिषद), ट्विटर: @vinod_bansalM-9810949109


Press Statement:
Church conspiring to bring Vatican’s puppet Governments in Bharat: VHP
New Delhi June6, 2018.Reacting on the persistent attacks made by the Church on the Governments at the centre and states the Vishwa Hindu Parishad said that the church is conspiring in a big way with the Vatican to prop up puppet Governments at the centre and states to fulfil their agenda. The Joint Gen Secretary of VHP, Dr Surendra Jain, today said that after the Archbishop of Delhi, now the Arch Bishop of Goa too feels that the constitution is in danger.It is now amply clear that the church of Bharat in collusion with the Vatican is trying to create an atmosphere of distrust against the present government. Why does the church behave in this fashion only when there is a BJP Govt. in office? A malicious campaign about attacks on churches was made by these people when Modiji took over as the PM. When their falsehood was exposed, they did not show their curtsey to apologise for the same. During the reign of Atal ji, the church had breached all boundaries of decency.The kind of allegations that these people had made against the Atal regime cannot be even discussed in a civilised society.The VHP had then requested the National Commission for Minorities to conduct an enquiry into the allegations.Even the Commission agreed that the allegations were untrue.
Dr. Jain added that the Vatican not only denigrates the Hindus all over the world but also Bharat as a nation. The Indian church, by acting as a puppet in their hands, indulges in the unpardonable act of insulting the nation. The same church remains a mute spectator when Emergency was imposed on the country, Kashmiri Hindus were brutally killed in the valley, Sikhs were butchered in the 1984riots, Chakma Buddhists were brutalized. For the Church, these events don’t put the constitution in danger.
This is not the church’s viewpoint, but a conspiracy to install governments which can run on the directions of the Vatican. Like the award-wapsi gang, the church too is acting like a contract killer to destabilize the elected Governments.
The VHP Jt Gen Secyalso said in the press note today that not only were the bishops of Delhi and Goa issuing such edicts but also during the elections of Mizoram, Karnataka, Jharkhand, Punjab, etc, an atmosphere was created by the church so that a particular party could be voted in power. How can this be termed a secular work? The Constitution allows you to carry out prayers and worship but illegal religious conversions cannot be allowed here. Freedom of expression does not entail that Hindu gods and goddesses can be insulted and their idols were broken. Which constitutional right was invoked when Swami LaxmananandSaraswatiand Shanti Kali Ji Maharaj was murdered? These churches must remember that Bharat is governed by its own constitution and not by the barbaric medieval constitution of the Vatican. The constitution of Bharat is in danger because of the attacking political stand of the church and its agenda of religious conversions which the nation has understood.It is because of this dangerous agenda that the archbishop of Goa had opposed India’s independence in 1947. In 1961, during the liberation of Goa, it is this church only that had opposed the liberation, saying, the Christians are better off under Portuguese rule.
The church should introspect, ask for forgiveness, work according to the constitution of our country and liberate themselves from the Vatican, VHP added.
Issued by
Vinod Bansal (National Spokesman, Vishwa Hindu Parishad), @vinod_bansal M 9810949109

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