बंगाल की स्थिति पर विहिप कार्याध्यक्ष ने भेजा राष्ट्रपति को पत्र

प्रेस विज्ञप्ति:

बंगाल की स्थिति पर विहिप कार्याध्यक्ष ने भेजा राष्ट्रपति को पत्र

हिंसा पर विराम, कानून के शासन, कठोर कार्यवाही तथा उचित मुआवजे की मांग की

नई दिल्ली। मई 11, 2021. विश्व हिन्दू परिषद ने बंगाल में चुनाव पश्चात हिंसा पर रोष व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द को एक पत्र भेजा है। पत्र में हिंसा को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने, राज्य में कानून का शासन की पुन:स्थापना, दंगाइयों की त्वरित पहचान करके उनको फ़ास्ट ट्रैक न्यायालयों के माध्यम से उचित दंड की व्यवस्था तथा पीड़ितों के पुनर्वास व उनको हुए नुकसान की शासन द्वारा भरपाई करने की मांग की गई है। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष सीनियर एडवोकेट श्री आलोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि पश्चिमी बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद से ही टीएमसी के कार्यकर्ताओं व जिहादियों के द्वारा जिस प्रकार हिंसा का तांडव चलाया जा रहा, उससे पूरा देश चिंतित है।

उन्होंने अपने पत्र में राज्यव्यापी हिंसा को अनियंत्रित व पूर्व-नियोजित बताते हुए कहा है कि ऐसा लगता है कि पुलिस व प्रशासन को इसकी अनदेखी कर राज्य के न्यायप्रिय नागरिको को मानो दंगाइयों के हाथों में सौंपने की मौन स्वीकृति दे दी गई हो। घटनाओं ने मुस्लिम लीग के डायरेक्ट एक्शन की याद ताजा कर दी है।

श्री आलोक कुमार ने कहा है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं और जिहादियों के गठजोड़ द्वारा खुलेआम हत्याएं हो रही हैं, घर जलाएं जा रहे, दुकानें लूटी जा रही हैं, महिलाओं से अभद्रता के साथ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मालदा में तो दो भाइयों की हत्या करके उनके शव पेड़ से ही लटका दिए। कूचबिहार से सुंदरवन तक, भय-बस, हिन्दूओं को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस हिंसा का एक सुनियोजित जिहादी पक्ष है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। सुश्री ममता बनर्जी ने तो चुनाव प्रचार के दौरान ही धमकियां दी थी कि केंद्रीय सुरक्षा बल तो केवल चुनाव तक है। चुनावों के बाद तो उन्होंने ही सब देखना है।

पत्र में कहा गया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाये रखने में राज्य सरकार विफल हो रही है। सुश्री ममता बनर्जी के पिछले दो शासन-कालों में भी वहां का हिंदू समाज त्रस्त ही रहा है। परंतु, इस बार का प्रारंभ जिस ढंग से हुआ है, उससे लगता है कि यदि इसी समय स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आगामी 5 वर्षों में क्या होगा? समझा जा सकता है। हो सकता है, कुछ स्थानों पर हिंदू समाज अपनी आत्मरक्षा के लिए स्वयं कुछ उपाय करने पर मजबूर हो जाए। दोनों ही स्थितियां पूरे देश के लिए चिंतनीय हैं।

श्री आलोक कुमार ने महा-माहिम, से अपने संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इस विषय में योग्य कार्यवाही करने के आदेश देने हेतु निवेदन भी किया।

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Press release:

VHP Working President wrote to the President of Bharat on the situation in Bengal

Demanded to put a stop to violence, ensure rule of law, drastic action and fair compensation to victims

New Delhi, May 11, 2021 – Expressing fury over the post-election violence in Bengal, the Vishva Hindu Parishad has written to Mahamahim Rashtrapatiji Shri Ram Nath Kovind. The letter demanded instant effective steps to stop violence in West Bengal, re-establishment of the rule of law there, fast identification of the rioters and ensuring their exemplary punishment through fast-track courts, rehabilitation of the victims and due compensation by the government to the victims for loss of their lives and property. The letter, signed by the Central Working President of VHP Sri Alok Kumar (Senior Advocate of Supreme Court), said that the whole country is worried about the violence being perpetrated by TMC activists and Jihadists ever since the declaration of the election results in West Bengal.

Describing in his letter the statewide violence as uncontrolled and pre-meditated, he said, it seems as if there is a tacit acceptance on the parts of the government, the administration and the police to let the peace-loving and law abiding citizens of the state to be prowled upon, ambushed and assassinated by the rioters including the lone and organized Jihadi wolves. The events are reminiscent of the Muslim League’s ‘Direct Action’ and ‘The Great Calcutta Killings’ in 1946.

Sri Alok Kumar said that the Trinamul activists and the Jihadists have become comrades in arms and they are committing assassinations openly, torching houses, looting shops and business establishments, committing indecency with women, targeting the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes brethren. In Malda, they killed two brothers and hanged their bodies from a tree. From Coochbehar to the Sundarbans, the Hindus are being terrorized to flee their native places and turn IDPs (Internally Displaced People). This agenda-led violence has a well-strategized, mapped and tactical Ghazwa-e-Hind Jihadi dimension to it that will have far-reaching consequences (also Siliguri Corridor/Chicken Neck dimension). Ms Mamata Banerjee had even threatened during the election campaign that the Central Security Forces would be there in the state only till the elections. After the elections, she would the one to to see everything.

The letter said that the state government is failing in its duty to maintain law and order in the state. Also during the last two regimes of Ms Mamata Banerjee, the Hindu society there had been stricken. But, the mode and manner with which her regime this time round has been initiated, it seems that if the situation is not controlled at the right time, it can be understood as to what will happen in the next 5 years! It may be that at some places, the Hindu society might be constrained to take some measures for self-defense. Both the scenarios would be worrying for the whole country.

Sri Alok Kumar also requested Mahamahim Rashtrapatiji to use his constitutionally empowered highest offices to order for appropriate action to be taken in this matter.