महर्षि वाल्मीकि ने संप्रदाय और जाति से दूर सभ्य समाज की परिकल्पना दी-डा. सुरेन्द्र जैन

महर्षि वाल्मीकि ने संप्रदाय और जाति से दूर सभ्य समाज की परिकल्पना दी-डा. सुरेन्द्र जैन
भगवान बाल्मीकि सम्पूर्ण मानव जाती के परमात्मा है-गुरूचरण
हिसार १७ अक्तूबर – भगवान महर्षि बाल्मीकि के जीवन का सन्देश अपने जीवन में उतारना और उन्हे जन-जन तक Maharishi Valmiki envisaged a civilized societyपंहुचाना आज के समय की सबसे बडी आवश्यकता है।उन्होनेसम्प्रदाय और जाति से दूर सभ्य समाज की परिकल्पना दी। यह विचार विश्व हिन्दू परिषद के अन्र्तराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री व प्रवक्ता डा. सुरेन्द्र जैन से स्थानीय भारत माता मंदिर में बाल्मीकि जयंती पर आयोजित राष्ट्ररक्षा यज्ञ मेंउपस्थित लोगो को सम्बोधित करते हुए रखे। इस अवसर पर गुरूचरण,विहिप के प्रांत मंत्री प्रद्युमन,प्रांत संगठनमंत्री विवेकानन्द,प्रांत सहमंत्री देवेन्द्र शर्मा,प्रांत मीडिया प्रभारी व विशेष सम्पर्क प्रमुख विजय शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर राष्ट्ररक्षा यज्ञ प्रारम्भ किया। विहिप के जिला मंत्री रविन्द्र गोयल व बजरंग दल के विभाग संयोजक कपिल वत्स नेसभी अतिथियों का माल्या व पटका अर्पण कर अभिन्नदन किया।
विहिप की प्रांत उपाध्यक्ष व मातृशक्ति प्रमुख सुनीता शर्मा के गीत हिन्दु -हिन्दु एक रहे के उपरान्त डा. सुरेन्द्र जैन ने महर्षि बाल्मीकि के जीवन के सन्दर्भ में जानकारी देते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि को प्राचीन वैदिक काल के महान ऋषियों कि श्रेणी में प्रमुख स्थान प्राप्त है। वह संस्कृत भाषा के आदि कवि और हिन्दुओं के आदि काव्य रामायण के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होने कहा कि दुनिया में पहली रचना बाल्मीकि द्वारा रची गई जो न केवल उनके जीवन की बल्कि साहित्य जगत की प्रेरणा बन गई। डा. जैन ने बताया कि तमसा नदी के तट पर व्याध द्वारा कोंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डालने पर वाल्मीकि के मुंह से व्याध के लिए शाप के जो उद्गार निकले, वे लौकिक छंद में एक श्लोक के रूप में थे। इसी छंद में उन्होंने नारद से सुनी राम की कथा के आधार पर रामायण की रचना की।Maharishi Valmiki envisaged a civilized society
डा. सुरेन्द्र जैन ने कहा कि भारतीय जीवन पद्दति में कोई पिछडा,अगडा,उंची,नीचा,स्वर्ण व अस्पर्श नही है यदि है तो सब के सब मां भारती के सपुत्र ,सपुत्रियां है और हम सब ऋषियों की संतान है यही संदेश भगवान बाल्मीकि ने सम्पूर्ण समाज को दिया। डा. जैन ने बताया कि भगवान बाल्मीकि वरूण के पुत्र थे,मनुस्मृति में प्रचेता को वशिष्ठ, नारद, पुलस्त्य आदि का भाई बताया गया है। बताया जाता है कि प्रचेता का एक नाम वरुण भी है। महर्षि कश्यप और अदिति के नवम पुत्र वरुण (आदित्य) से इनका जन्म हुआ। इनकी माता चर्षणी और भाई भृगु थे इन के शिष्य ऋषि भारद्वाज थे। भगवान बाल्मीकि ऋषियों के ऋषि, योगियों के योगी तथा संगीतज्ञों के संगीतज्ञ थे वाल्मीकि वेदों के ज्ञाता थे और वह चारों वेदोंकी मूल प्रेरणा भी थे।डा. जैन ने बताया कि ब्रह्मा जी ने उन्हे यह याार्शीवाद दिया था कि जब तक धरती पर सृष्टि है भगवान बाल्मीकि का नाम रहेगा इनके द्वारा रची गई राम कथा रहेगी, और इनके द्वारा दिए गए संदेश पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करेगें।डा. जैन ने कहा कि प्राचीन  वैदिक काल के महान ऋषियों कि श्रेणी में महर्षि वाल्मीकि को प्रमुख स्थान प्राप्त है। वह संस्कृत भाषा के आदि कवि और आदि काव्य रामायण के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। डा. जैन ने कहा कि भगवान बाल्मीकि एक प्रखर योद्धा थे ।माता सीताजी ने अपने वनवास का अंतिम काल इनके आश्रम पर व्यतीत किया था, वहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ और उन बालको को राम के समकक्ष योद्धा बनया।
डा. जैन ने कहा कि छुआछ़ुत, भेदभाव  के द्वारा समाज कोबांटने का कार्य किया जा रहा है वास्तव में यह हिन्दू समाज की मूल प्रकृति नही है। जो प्रत्येक जन में भगवान श्री राम और माता सीता के दर्शन करता हो वह किसी से भेदभाव कर ही नहि सकता। डा. जैन ने कहा मुगलकाल से मैला ढोने की प्रथा शुरू हुई और यह हिन्दु समाज के वो वीर योद्वा धर्मरक्षक थे जिन्होने मुगलों के आगे सम्र्पन नही किया,धर्म नही बदला,अडिग रहे और धर्मवीर कहलाए।
बाल्मीकि अम्बेडकर जागृति मंच के संस्थापक व अध्यक्ष गुरूचरण नेइस अवसर पर बोलते हुए कहा कि भगवान बाल्मीकि सम्पूर्ण सृष्टि के परमात्मा है। उनका संदेश न केवल एक वर्ग के लिए बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए है। उन्होने कहा कि वह ऋषियों के भी ऋषि थे।भगवान बुद्व की रचनाए व संदेश उनकी द्वारा रची गई रचनाओं का ही परिणाम है।उन्होने कहा कि विहिप ने जो कार्यक्रम आयोजित किया है यह समाज को समरस करने के लिए अति आवश्यक है। उन्होने बताया कि आने वाले तीन मास के बाद बाल्मीकि चौक पर बनने वाला भवय मंदिर सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणा बनेगा।
इस अवसर पर डा. सुरेन्द्र जैन व विहिप के पदाधिकारियों ने गुरूचरण व मां भगवती दुर्ग सेवा ट्रस्ट समिति को भारत माता का चित्र, पटका,माला अर्पित कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर विहिप केसह प्रांतीय सेवा प्रमुख अनील गोयल के पूज्य माता श्रीमती दयावंती के निधन पर मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की। इस अवसर पर हिसार के डा. अनुराग बिश्रोई को स्मृतिचिंह प्रदान का अभिनन्दन किया गया।
समारोह मेंआर एसएस के सह विभाग संघचालक प्रो. के.सी अरोडा, विहिप के प्रांत गौ सेवा प्रमुख डा.रमेश यादव,धर्मप्रसार विभाग के प्रमुख राजेन्द्र सिंह फोगाट,राम निवास सीए,जगदीश तोशामियां,संजय सूरा,संतोष शास्त्री,रामकिशोर शुक्ल,श्रीमती लता सिंगल,गगन शर्मा,अजय शर्मा,दिनेश,रजत,गोल्डी कालरा,रगोलू कालरा, रजत, रविन्द्र,प्रदीप,कृष्णा,आदि उपस्थित रहे।

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