महायोद्धा वीर बन्दा बहादुर के ३००वें शहीदी दिवस कार्यक्रम केअवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी

घर-घर में होने चाहिए वीरों के बलिदान ग्रंथ – राज्यपाल आचार्य देवव्रत
-अंधविश्वास और आपसी फूट न बनाया समृद्ध भारत को गुलाम – देश के लिए विडंबना वर्तमान युवा फिल्मी हीरो को जानते हैं वीरों को नहीं
12 june 2016 – राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा है कि युवाओं में देशभक्ति और सांस्कृतिक विकास के लिए घर-घर में वीरों Mahayodha Veer Banda Bahadur's 300th Martyrdom Dayके बलीदान ग्रंथ होने चाहिए। देश की विडंबना है कि वर्तमान युवा पीढ़ी फिल्मी हीरो के नाम तो जानती है लेकिन देश पर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों को नहीं। आचार्य देवव्रत रविवार शाम को ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में महायोद्धा वीर बन्दा बहादुर के ३००वें शहीदी दिवस कार्यक्रम केअवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। भारत जैसे समृद्ध और वीर सपूतों के देश को दो कारणों से गुलाम बनना पड़ा एक अंधविश्वास और दूसरा आपसी फूट ने।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत का गौरवमयी इतिहास रहा है, जहां अनेक वीर सपुतों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया है। इन बहादुर योद्धाओं ने जिस मजबूती के साथ विदेशी आक्रमणकारियों का डटकर मुकाबला किया वह इतिहास में स्वर्णिम है। वीर बन्दा बहादुर भारत की गौरवमयी परम्परा के सम्वाहक थे। वह ऐसे इतिहास पुरूष थे, जिन्होंने आने वाली पीढिय़ों को राष्ट्रीयता की प्रेरणा दी। गुरू गोबिन्द सिंह और वीर बन्दा बहादुर जैसे योद्धाओं के बलिदान का उद्हारण दुनिया के इतिहास में नहीं मिलता है।
गुरू गोबिन्द सिंह जी ने देश की संस्कृति और मर्यादा को बचाने के लिए अपने बच्चों तक का बलिदान दे दिया। आज संगठन, शक्ति, भाईचारा, एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक परम्पराओं को स्वीकार कर आगे बढऩे की आवश्यकता है। राच्यपाल ने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने घरों पर महान व्यक्तित्व व शहीदों की जीवनियां रखें और उनके बारे में अपने बच्चों को बताएं तभी भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। बंदा वीर वैरागी के ३०० वें शहीदी दिवस पर उनके दिए योगदान को केंद्रीयMahayodha Veer Banda Bahadur's 300th Martyrdom Day विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने बताया।उनहोनें कहा की भारत के स्वतन्त्रता सग्रांम में 18वी शवाब्दी के शुरू में ही हुई दो लड़ाईया अपना ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। इन दोनों लड़ाईयों ने पश्चिमी उतर भारत में विदेशी मुगल वंश के कफन में कील का काम किया। यह लड़ाईया थी पंजाब में सरहिन्द ओर गुरदास नंगल की लड़ाई । इन दोनों लड़ाईयों का नेतृत्व महायोद्धा बन्दा सिंह वहादुर ने किया। बंदा सिंह बहादुर को इस सग्रांम के लिए गुरू गोविन्द सिंह ने तैयार किया था। गुरू गोविन्द सिंह जी का जन्म 1666 में हुआ था और लक्ष्मण देव जो कालान्तर में बंदा सिंह बहादुर के नाम से विख्यात हुए का जन्म 1670 में हुआ था। दोनों के जन्म में चार वर्ष का अन्तर था। गुरू गोविन्द सिंह का जन्म उस पाटली पुत्र में हुआ था जहा से शतावदीयों पहले अशोक महान की सेनायें निकली थी। और लक्ष्मण देव का जन्म उस जम्मू कश्मीर में हुआ था जहा से सम्राट ललितादित्य ने कभी सांस्कृतिक भारत का स्वपन देखा था। वीर बन्दा बहादुर सिंह प्रशासनिक व्यवस्था में इतने निपुण थे कि उनहोनें जमीदारी प्रथा को समाप्त कर भूमि का मालिकाना हक भूमि जोतने वाले किसानों का दे दिया। उनहोने अपने वीर कौशल से सरहिन्द की दिवारों में चिने दोनों वच्चों का बदला ही मुगलों से नही लिया वल्कि मुगल सल्तनत की चूलें हिला दी । उनहोने गुरू नानक सम्वत् चलाया, गुरू गोविन्द सिंह के नाम से सिक्के और मोहरें भी चलाई और खालसा राज्य की स्थापना की । यही खालसा पंथ कालान्तर में मुगल वंश का काल सिंद्ध हुआ। सुश्री रजनी ठुकराल ने हिमालय ध्वनि के रजत जयंति वर्ष पर वीर बन्दा बहादुर के विशेषांक का विमोचन राज्यपाल से करवाया व उनहोने कहा यह पत्रिका हिमालय की ध्वनि है, जिसने समय समय पर निष्पक्ष होकर राष्ट्र की आबाज वनी है। पंजाब खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने  कहा हमारी संस्कृति एक है गुरू गोविन्द सिंह और बन्दा बहादुर को अलग नही कर सकते आज षड़यत्रों के कारण हिन्दू और सिंक्खों का अलग करने का प्रयत्न चल रहा है।  गुरू तेग वहादुर सिंह व गुरू गोविन्द सिंह चार शहजादों ने बलिदान सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए दिया था फिर हम अलग कैसे है। अगर हम भारत को अखंड देखना चाहते हैं और यह मातृभूमि हमारी है तो भेद भाव को समाप्त कर एक होना होगा और हम एक है।  विश्व हिन्दू परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष अमन पुरी, विधायक सुरेश भारद्वाज, हिमाचल सरकार के पूर्व आयुक्त जे.एस राणा, हिमालय ध्वनि पत्रिका की सह-सम्पादक रजनी ठुकराल, गुरू सिंह सभा के प्रधान इन्द्र जीत सिंह, विश्व हिन्दू परिषद् के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज कुमार, प्रदेश सह मंत्री मांचली ठाकुर, प्रदेश दुर्गावाहिनी सयोंजिका सुश्री भावना ठाकुर  तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हिमालय ध्वनि पत्रिका के 25वर्ष पूर्ण होने पर उतकृष्ठ सेवाओं के लिए समृति चिन्ह राज्यपाल ने दिए।
विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले व्यक्तियों को किया सम्मानित
विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले प्रबुद्ध व्यक्तियों को सम्ममनित किया गया। राच्यपाल आचार्य देवव्रत ने निजी चैनल के संपादक डॉ. शशी भूषण शर्मा, दैनिक जागरण राच्य संपादक रचना गुप्ता जिनका सम्मान उनके पिता डीडी गुप्ता ने प्राप्त किया, हिमाचल प्रदेश कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी के उप-सभापति डॉ. प्रेम शर्मा, उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सक अधीक्षक डॉ. रमेश चंद, समाज सेवी तरसेम भारती  तथा दैनिक समाचार पत्र से जय प्रकाश का सम्मानित किया।

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