मॉब लिंचिंग का दुष्प्रचार है दंगों की साजिस : विहिप

Cases of Muslim attacks on Hindus

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प्रेस वक्तव्य:

मॉब लिंचिंग का दुष्प्रचार है दंगों की साजिस : विहिप

नई दिल्ली जुलाई 08, 2019. विश्व हिन्दू परिषद् ने कहा है कि मॉब लिंचिंग की कुछ झूँठी घटनाओं का दुष्प्रचार कर एक कथित पत्रकार लॉबी, सैक्यूलर गेंग तथा जिहादी तत्व देश को दंगों की आग में झोंकने का षडयंत्र करते हुए दिखाई दे रहे हैं. विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि पिछले दिनों जिस प्रकार कथित “मॉब लिंचिंग” की घटनाओं को बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित किया गया उससे यह प्रतीत होता है कि खान मार्केट गैंग के पत्रकार व सेकुलर माफिया के राजनीतिज्ञ मुस्लिम समाज को भड़का कर उन्हें हिंदू समाज पर हमले के लिए प्रेरित करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि झारखंड की घटना में यह स्पष्ट हो गया कि तबरेज अंसारी की मृत्यु पिटाई से नहीं हुई थी. इसके बावजूद इस घटना को आधार बनाकर सूरत, रांची, भोपाल आदि दसियों शहरों में मुस्लिम समाज ने उग्र प्रदर्शन कर देश विरोधी व हिंदू विरोधी नारे लगाए तथा सुरक्षाबलों पर हमले किए. चावड़ी बाजार (दिल्ली), मुजफ्फरनगर, अटाली (हरियाणा) समेत दसियों स्थानों पर मंदिरों पर हमले करके मूर्तियों को अपमानित किया गया जो बेहद शर्मनाक और शांतिप्रिय हिंदू समाज को उकसाने वाली कार्यवाही है.

डॉ जैन ने कहा कि झूठी घटनाओं का प्रचार करके हिंदू समाज व हिंदू संगठनों को जिस प्रकार बदनाम किया जा रहा है उससे यह लगता है कि यह अभियान राजनीति से प्रेरित है. गुरुग्राम, बेगूसराय करीम नगर, दिल्ली, कूचबिहार, कानपुर आदि स्थानों पर यह  प्रचारित किया गया कि ‘जय श्री राम’ ना कहने पर मुस्लिम युवकों की पिटाई की गयी. ये घटनाएं असत्य सिद्ध होने पर भी, इस दुष्प्रचार का स्पष्टीकरण न देने से इन सब व्यक्तियों के इरादे साफ हो जाते हैं.

विश्व हिंदू परिषद ने पूछा है कि क्या ये लोग आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए देश को दंगों की आग में झोंकना चाहते हैं? जिस प्रकार जिहादियों का एक वर्ग तुरंत हिंदू समाज पर हमले के लिए निकल पड़ता है, वह बेहद शर्मनाक है. क्या मुसलमान वास्तव में डरा हुआ है? मुस्लिम नेताओं को पहल करके इन तत्वों पर रोक लगानी चाहिए. उन्हें विचार करना चाहिये कि इस प्रकार की नफरत भरी हिंसक मानसिकता उन्हें किस मार्ग पर ले जाएगी?

5-6 घटनाओं के अर्धसत्य को आधार बना कर जिस प्रकार हिंदू विरोधी व राष्ट्र विरोधी वातावरण बनाया गया उससे ऐसा लगता है कि यह एक राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र का हिस्सा है. संपूर्ण विश्व जानता है कि हिंदू स्वभाव से शांतिप्रिय व धैर्यवान है. अगर हिंदू समाज शांतिप्रिय न होता तो मंदिरों पर हमलों की इतनी अधिक घटनाओं के बाद जो प्रतिक्रिया हो सकती थी उसकी कल्पना की जा सकती है. विश्व हिंदू परिषद इन पत्रकारों व राजनीतिज्ञों से पूछना चाहती है कि अगर मस्जिदों पर इसी प्रकार के हमले होते तो कथित अल्पसंख्यक समाज तथा वे स्वयं कैसी प्रतिक्रिया करते?

विश्व हिंदू परिषद इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए आज एक ऐसी सूची भी जारी की है जिससे यह स्पष्ट होता है की “मॉब लिंचिंग” हिंदुओं की होती है. क्या कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार मॉब लिंचिंग नहीं था? आगरा के गौ रक्षक अरुण माहोर की निर्मम हत्या, अपनी लड़की की इज्जत बचाने का प्रयास करने वाले दिल्ली के ध्रुव त्यागी की सरेआम हत्या, राजधानी दिल्ली के ही अंकित सक्सेना की गला रेतकर चौराहे पर की गई हत्या समेत सैकड़ों उदाहरणों से इनकी करुणा क्यों नहीं जागती? दादरी को तीर्थ स्थल बनाने वाले पत्रकार इन घटनाओं पर क्यों चुप्पी साध लेते हैं?

विहिप के संयुक्त महा-मंत्री ने यह भी कहा कि संपूर्ण विश्व जानता है कि मॉब लिंचिंग हिंदुओं के स्वभाव में नहीं है. देश विदेश के इतिहास व वर्तमान की मॉब लिंचिंग तथा नरसंहार की घटनाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि गैर मतावलंबी का रक्त बहाना किस की प्रवृत्ति तथा धार्मिक कर्तव्य है?

विश्व हिंदू परिषद इस प्रकार के सभी पत्रकारों, कथित बुद्धिजीवियों व राजनीतिज्ञों से पूछा है कि वे निहित स्वार्थों के लिए हिंदू समाज व भारत की सहिष्णुता की उज्जवल परंपरा को अपमानित कर जिहादियों के हिंसक कारनामों पर पर्दा डालकर देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? मुस्लिम नेताओं को भी समझना होगा कि इस प्रकार किसी के भड़काने पर हिंसक कार्यवाही उनका कौन सा भला करेगी? उन्हें इतिहास से अवश्य सीख लेनी चाहिए.

विनोद बंसल

राष्ट्रीय प्रवक्ता

विश्व हिन्दू परिषद्

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