विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार जी का प्रेस वक्तव्य

 नई दिल्ली. सितम्बर 30, 2020. अयोध्या के विवादित ढांचे से सम्बंधित आपराधिक मुक़दमे का निर्णय आ गया है । सत्य और न्याय की विजय हुई है । हालाँकि न्यायालयों को यह निर्णय देने में 28 वर्ष लग गये । हम आशा करते हैं कि इस निर्णय से उन विषयों का पटाक्षेप हो जायेगा जो गत 472 वर्षों से हिन्दू मानस को व्यथित करते रहें हैं ।
राम भक्तों ने इन झूठे मुकदमों का 28 वर्ष तक धैर्य और साहस से सामना किया । इसमें 49 एफ़आईआर थीं, अभियोजन ने 351 गवाह पेश किये और लगभग 600 दस्तावेज न्यायालय में दिए गये । मुक़दमे को सुन रहे नयायाधीश का कार्यकाल, उनके सेवानिवृत होने के बाद भी कई बार बढ़ाना पड़ा । तब जाकर यह फैसला आ पाया है ।
प्रारंभ में सरकार ने 49 लोगों को अभियुक्त बनाया था । हम कृतज्ञता से उन 17 लोगों का पुण्य स्मरण करते है जो इस मुक़दमे को चलते वैकुण्ठ सिधार गये । इनमे श्री अशोक सिंघल, पूज्य महंत अवैद्यनाथ, पूज्य परमहंस रामचन्द्र दास, श्रीमंत राजमाता विजया राजे सिंधिया, आचार्य गिरिराज किशोर, श्री बाल ठाकरे, श्री विष्णुहरी डालमिया और श्री वैकुण्ठ लाल शर्मा (प्रेम जी) जैसे महानुभाव है ।
माननीय सर्वोच्च न्यायलय के 9 नवम्बर 2019 के आदेश में यह सदा के लिए घोषित कर दिया है कि अयोध्या की सम्बंधित भूमि श्री रामलला विराजमान की ही है । आज के निर्णय ने षड़यंत्र के आरोपों को ध्वस्त कर दिया है । अब समय है कि हम राजनीति से ऊपर उठें, और बार-बार पीछे देखने की बजाये एक संगठित और प्रगत भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ें ।
भारतीय समाज को अब अपना ध्यान आगे आने वाले कार्यों की ओर लगाना है । विश्व हिन्दू परिषद् पुनः अपने आप को श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण, सामाजिक ऊँच-नीच को दूर करके समरस समाज की स्थापना, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से पिछड़े अन्य वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उन्नति के लिए समर्पित करती है । साथ ही हमें ऐसा सशक्त भारत बनाना है जो अपने अन्दर के और सीमाओं पर की चुनौतियों का सफलता से सामना कर सके । विश्व हिन्दू परिषद् मंदिर और उनकी सम्पत्तियों की रक्षा और मंदिरों की आय धर्म एवं समाज हित के कार्यों के लिए ही व्यय होने के लिए भी अपना संघर्ष सतत जारी रखेगी ।
जारीकर्ता
विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद
अणु डाक: vinodbansal01@gmail।com, चल दूरभाष : +91 9810949109 @vinod_bansal
Press Statement of Advocate Shri Alok Kumar, Working President VHP
       New Delhi. Sept 30, 2020. Today’s judgment in the criminal case relating to disputed structure in Ayodhya is a vindication of truth and justice. Sadly, it has taken 28 years for the Courts to deliver justice. This judgment, now hopefully draws the final curtains on an issue that had been agitating the Hindu psyche for some 472 years.
The Ram Bhakts have suffered their implication in false cases and the trial that stretched for 28 long years. The case was based on 49 FIRs, 351 witnesses produced by the Prosecution and some 600 documents. The tenure of the Presiding Judge had to be extended several times, beyond his retirement.
Initially the Prosecution was launched against 49 persons. We remember with gratitude, the 17 of them who unfortunately left for their heavenly abode during the trial. They include Shri Ashok Singhal, Mahant Avaidyanath, Pujya Paramhans Ramchandra Das, Rajmata Vijaya Raje Scindia, Acharya Giriraj Kishore, Shri Bal Thackery, Shri Vishnu Hari Dalmia and Shri Vaikunth Lal Sharma (Prem Ji).
The Judgment of 9th November 2019 by Hon’ble Supreme Court of India unanimously settled that the subject land in Ayodhya does in fact belong to Ram Lalla. Today’s judgment has busted the conspiracy theory. It is time to eschew politics, shed prejudices and instead to keep looking into the past now to look forward to work unitedly for the unity and progress of Bharat.
We call upon the Society to now look forward to the urgent tasks at hand, the completion of a Grand Temple at Shri Ramjanmabhoomi, the eradication of social inequalities and establishment of Samrasta, to bring about social, educational and economic upliftment of the Scheduled Castes, Tribes and other economically backward sections of the Society as also to build a strong and stable Bharat; capable of fighting the attacks and challenges from within and at the borders. Equally, the VHP shall continue its campaign for protection of temples and their properties and to ensure that their income is used only for religious and social purposes.
Released by
Vinod Bansal, National Spokesperson, Vishva Hindu Parishad

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