वनवासी समाज की श्रद्धा पर हमला करने से बाज आएं सोरेन: मिलिंद परांडे

प्रेस वक्तव्य:

वनवासी समाज की श्रद्धा पर हमला करने से बाज आएं सोरेन: मिलिंद परांडे

नई दिल्ली। फरवरी 23, 2021। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने आज कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन वनवासी समाज को दिग्भ्रमित कर उनकी श्रद्धा को तोड़ने का महा-पाप कर रहे हैं। ‘आदिवासी कभी भी हिंदू नहीं थे, न ही अब वे हिंदू हैं’, देशभक्त व धर्मनिष्ठ वनवासी समाज की आस्था व विश्वास पर चोट पहुंचाने वाले मुख्यमंत्री के इस गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य की विश्व हिन्दू परिषद तीव्र निंदा करती है। ऐसा लगता है कि देश, धर्म व संस्कृति के लिए वनवासी समाज तथा उससे जुड़े महापुरुषों के अतुलनीय योगदान को नकारते हुए वे ईसाई मिशनरियों, कम्यूनिष्टों व नक्सली गतिविधियों के षड्यंत्रों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हम इसे कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज के राजनैतिक नेतृत्व को बहुत ज़िम्मेदारी से वक्तव्य देने चाहिए। वे सुनियोजित तरीके से वनवासी समाज को दिग्भ्रमित करने का जो कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, उसमें वे सफल नहीं होंगे। उन्हें स्मरण रखना चाहिए कि वनवासी समाज, अनंत काल से, देश, धर्म व भारतीय संस्कृति की रक्षा हेतु अग्रणी भूमिका में रहा है। रामायण काल में माता शबरी का उदाहरण हो या राजस्थान में राणा पूंजा भील का जिन्होंने, महाराणा प्रताप का समर्थन मुग़लों से लड़ने के लिए किया। झारखंड में भगवान बिरसा मुंडा ने तो ना सिर्फ रामायण-महाभारत का अभ्यास किया अपितु, अंग्रेजों व ईसाई मिशनरियों के धर्मान्तरण के षडयंत्रों का भी डटकर विरोध किया। रानी दुर्गावती ने मुगलों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया। बात चाहे अंग्रेजी शासकों से संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी टांट्या भील की हो या, नागालैंड की महारानी गाईदेन्ल्यू की, या फिर झारखंड के सिध्दू- कान्हू तथा बूधू भगत जैसे वीरों की, देश – धर्म – संस्कृति के रक्षा के लिए वनवासी समाज के ऐसे अनगिनत गौरवपूर्ण संघर्ष इतिहास में भरे पड़े हैं। श्रीराम मंदिर निधि समर्पण अभियान के प्रति झारखंड सहित समस्त वनवासी क्षेत्र में दिखा स्वयं स्फूर्त समर्पण व उत्साह इसी भक्ति-भाव का ही तो परिचायक है। भगवान श्रीराम ने भी तो इस प्रकृति-पूजक वनवासी समाज में ही चौदह वर्ष तक भ्रमण व निवास किया था। अयोध्या में गत 5 अगस्त को हुए पूजन कार्यक्रम में सम्पूर्ण देश के अनेक वनवासी आस्था-केन्द्रों से पहुंची पवित्र मिट्टी व जल भी उनकी श्रद्धा को स्पष्ट परिलक्षित करता है।

अपने छुद्र राजनैतिक लाभ के लिए ऐसे वीर-धीर वनवासी समाज को बांटने या उनकी श्रद्धा पर आघात करने से मुख्यमंत्री सोरेन बाज आएं। हम ऐसी किसी भी चाल का शिकार महान वनवासी समाज को नहीं होने देंगे।

जारी कर्ता:

विनोद बंसल,
राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद – मो- 9810949109@vinod_bansal

 

Press Statement:

Soren must desist from attacking faith of Vanvasi society: Milind Parande

New Delhi, February 23, 2021 – The Central Secretary General of Vishva Hindu Parishad, Sri Milind Parande, today said that the Chief Minister of Jharkhand, Sri Hemant Soren is committing the great sin of sabotaging the faith of the Vanvasi (forest-dwellers) society by confusing and bewildering them! The immature & thoughtless assertion of the Chief Minister that ‘The Adivasis were never ever Hindus, nor are they Hindus now!’, injures and upsets the belief and faith of our patriotic and Dharmnishth/devout forest-dweller brethren – and the Vishva Hindu Parishad (World Hindu Council) strongly condemns it! It seems that by denying the Vanvasi society its great personages – their share of the glorious historic credit of unique contributions to the causes of the country, Dharm and culture, he is sitting with and playing into the hands of the scheming and plotting Christian missionaries, communists and Naxalites. It shall never be acceptable!

Sri Parande also said that the political leadership of society ought to make statements with great sense of responsibility and accountability. The planned and systematic sickening and despicable attempts that he is making to confuse, misguide and disorient the Vanvasi society – he will never ever succeed in this offensive disgraceful agenda! He must keep it in mind that the Vanvasi society has been in a principal role in protecting, preserving and promoting the causes of the country, Dharm and Bharatiya culture since times immemorial.

The country celebrates the illustrious Mata Shabari of the Ramayana fame and also Rana Poonja Bheel of Rajasthan – who supported Maharana Pratap in fighting the Mughal invaders. In Jharkhand, Bhagwan Birsa Munda was not only adept at practising the values of the Ramayana-Mahabharata, but also strongly opposed the conversion plotting of the British and the Christian missionaries. Rani Durgavati fought valiantly the Mughals. Whether it were the freedom fighters Tantya Bhil and also Maharani Gaidinliu of Nagaland – who fought the British Raj – or the heroes like Siddhu-Kanhu and Budhu Bhagat of Jharkhand – they were all committed and dedicated to protecting the country-Dharm-culture and history is full of such countless glorious narratives, accounts, anecdotes and legends of heroes of Vanvasi society. The spontaneous devotion and dedication shown to Shri Ram Janmbhoomi fund contribution campaign in all nooks and corners of Vanvasi regions, including Jharkhand, itself is reflective of this devotion and nationalist outlook. Bhagwan Shri Ram had also sojourned and lived among these nature-loving-worshiping forest-dwelling communities for fourteen years. The sacred earth and holy water sent by our Vanvasi brethren from their holy sites and pilgrimage centres across the country for the construction-initiation programme of the Temple of Nativity held at Ayodhya on August 05, 2020, also reflected their reverence for and identification with the umbilical cord as children of Maa Bhaarati.

The Chief Minister Soren must desist from dividing the heroic-serene Vanvasi society or attacking their indigenous faith for the sake of his petty political gains and vested interests! We will not let our great Vanvasi communities fall victim to any such sadistic agenda and trap!

Released by..

Vinod Bansal

National Spokesperson, Vishva Hindu Parishad – M-9810949109 @vinod_bansal